This section includes InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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कविता पढ़कर नीचे पुछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :माता की छाती का अमृतमय पय कालकूट हो जाए, आँखों का पानी सूखे, वे शोणित की पूँटे जो जाएँ, एक ओर कायरता काँपे, गतानुगति विचलित हो जाए, अंधे मूढ विचारों की वह अचल शिखा विचलित हो जाए, और दूसरी ओर कंपा देनेवाली गर्जन उठ जाए, अंतरिक्ष में एक उसी नाशक तर्जन की ध्वनि मँडराएँ ।1. कवि कालकूट किसे बना देने की बात करता है ?2. किसके विचलित होने की बात कवि करता है ?3. अंतरिक्ष में किसकी ध्वनि मंडरानी चाहिए ?4. किसकी शिखा विचलित हो जानी चाहिए ?5. इस कविता का योग्य शीर्षक लिखो । |
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Answer» 1. माता के छाती का अमृतमय दूध को कालकूट बना देने की बात करता है। 2. भूत, भविष्य विचलित होने की बात कवि करता है । 3. कंपा देनेवाली गर्जना विनाश करनेवाली ध्वनियाँ अंतरिक्ष में मंडरानी चाहिए । 4. अंधविश्वास और मूर्खताभरे विचारों की शिखा विचलित हो जानी चाहिए । 5. विप्लवगान – योग्य शीर्षक है । |
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निम्नलिखित अशुद्ध वाक्यों को शुद्ध करके फिर से लिखिए :वह बुद्धिमान बालिका है।सड़क में भारी भीड़ जमा है।में कल गया हूँ।मुझे यह कमी दूर करनी है। |
Answer»
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दीदी को दिए गए एक-एक रूपक की क्या विशेषता है? |
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Answer» कवि ने दीदी के लिए पीपल, दिबरी, नदी, चट्टान तथा घर की नींव की हैट की उपमाएं दी हैं। यदि दीदी पीपल होती, तो भाई उसकी घनी हरी टहनियों में हारिल के रूप में बसेरा लेता। दीदी ढिबरी थी, जिसके उजाले में भाई ने पहले-पहल अक्षर सीखे। यदि दीदी नदी होती, तो भाई नदी की सीप बनकर मोती उत्पन्न करता। दीदी चट्टान-सी दृढ निश्चयवाली थीं, जिसने लोगों का जीवन संवारा था। दीदी अपने दूसरे घर की नींव की ईट हुई हैं और वह अपनी नई दुनिया बसाएगी। |
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महीनों से मन उदास है क्योंकि…(क) घर में शौक का माहौल था।(ख) कुछ तबीयत ढीली, कुछ तनाव और टूटने का डर(ग) घर में हररोज झगड़े होते थे। |
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Answer» सही विकल्प है (ख) कुछ तबीयत ढीली, कुछ तनाव और टूटने का डर |
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ढिबरी की तरह दीदी क्या कार्य करती हैं ? |
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Answer» ढिबरी का काम है, बाती के माध्यम से तेल सोखकर जलना और प्रकाश फैलाना। दिबरी की तरह ही दीदी भी अध्ययन करके अपना ज्ञानरूपी प्रकाश फैलाती है। वह बच्चों को अक्षर और अनुभव से परिपूर्ण किस्से सुनाती है। |
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कवि को अपनी दीदी घर की नींव की ईंट के समान क्यों लगती हैं? |
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Answer» दीदी की नई दुनिया बस गई है। अब दीदी अपनी नई दुनिया की नए सिरे से शुरुआत करेंगी और अपने परिवार को संस्कार देंगी। इसलिए कवि को अपनी दीदी घर की नींव की ईंट के समान लगती है। |
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कविता का सरल अर्थ : (1) पीपल होती तुम …… ठंडी होती है दोपह(2) ढिबरी थीं दीदी ……. हम बड़े होते गए।(3) नदी होती तो …. किनारों पर चमकते।(4) चट्टान थीं दीदी …… उड़ते तुम्हारे भीतर।(5) वहाँ झूले पड़े ……. गुम हो गई थीं।(6) दीदी, अब …….. पतंग और खिलौने।(7) अब तो ढिबरी ….. समझता होगा।(8) हमारा क्या है ……. तुम्हारी तरह। |
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Answer» (1) पीपल होती तुम …… ठंडी होती है दोपहर। कवि कहते हैं कि दीदी! यदि तुम घर के पिछवाड़े का छायादार पीपल का वृक्ष होतीं, तो हम तुम्हारी खूब हरी-हरी घनी टहनियों के बीच हारिल पक्षी बनकर अपना घर बसाते। दीदी, हारिल भी हमारी तरह ही होते हैं, जिनका कोई घर नहीं होता अर्थात वे घोंसला बनाकर किसी एक स्थान पर स्थायी रूप से कभी नहीं रहते। वे कहीं दूर पहाड़ों से उड़कर आते हैं और दूर जंगलों में उड़ जाते हैं। दीदी, पीपल की छांह दोपहर में तुम्हारी तरह ही ठंडी होती है। (2) ढिबरी थीं दीदी ……. हम बड़े होते गए। दीदी, तुम तो उस ढिबरी की तरह थौं, जो हमारे जीवन के अभावों रूपी तेल में अपनी कपास की बाती डुबोकर जलती रही थीं। इसके प्रकाश में हमने पहले पहल सीखा था अक्षर लिखना और सुना था आपसे अनुभवों से भरे किस्से आपके मुंह से। आप अपना प्रकाश फैलाती रहीं और आपके ज्ञान के प्रकाश से घर की दीवारें और छप्पर के तिनके आलोकित हो गए। अर्थात् आपका ज्ञान सर्वत्र व्याप्त हो गया और आपके ज्ञान की रोशनी में हम बड़े होते रहे। (3) नदी होती तो …. किनारों पर चमकते। दीदी, यदि आप नदी होती, तो हम मछलियाँ बनकर किसी चमकदार लहर में उत्साह से छुपते। कभी-कभी सीपी बनकर अपने अंदर बूंदें लेते और मोती बन जाने पर हम किनारों पर चमकते। (4) चट्टान थीं दीदी …… उड़ते तुम्हारे भीतर। दीदी, तुम दृढ़ चट्टान की भाँति हुआ करती थीं। अनुशासन के कठोर नियमों में तनिक भी कहीं किसी नरमी का आभास नहीं होता था। हम लोग ही थे, जो कभी पतंग उड़ाकर हलचल, पैदा कर देते थे। दीदी, आप चट्टान की भाँति थीं और आपके भीतर किसी के लिए कोई स्थान था, तो वह छोटे-छोटे परिदों के लिए था, जो आपके अंदर उड़ते और फड़फड़ाते थे। (5) वहाँ झूले पड़े ……. गुम हो गई थीं। दीदी, (आपके कड़े अनुशासन के बीच) वहाँ हमारे लिए झूले डाले गए थे। हमारे खेलने के लिए गद्रे रखे गए थे। इतना ही नहीं मालदह आम हमारे लिए पकाया जाता था। पर हमारी गेंदें वहाँ गुम हो गई थीं। गेंद खेलने की अनुमति हमें नहीं थी। (6) दीदी, अब …….. पतंग और खिलौने। दौदी, अब तो आप अपने दूसरे घर की नीव की ईट हो चुकी हैं। दीदी, आपकी इस नई दुनिया में कहीं हमारी खोई हुई गेंदें और खोए हुए खिलौने होंगे। (7) अब तो ढिबरी ….. समझता होगा। दीदी, अब तो आप अपने नए ऑगन की ढिबरी बनकर वहाँ ज्ञान का प्रकाश फैला रही हैं। अब आपके घर का कोई और बचपन पहले-पहल अक्षर पहचानता होगा, आपके मुंह से आपके अनुभवों के चक किस्से सुनता होगा और वह इस तरह दुनिया के बारे में जानतासमझता होगा। (8) हमारा क्या है ……. तुम्हारी तरह। दीदी, हमारी चिंता मत करो। हमारा क्या है? हम तो हारिल की तरह हैं। वर्ष दो वर्ष में कभी आएंगे और मेहमान की तरह दो-चार दिन ठहरकर फिर निकल जाएंगे कहीं और! दीदी, हमने अपना कोई स्थायी ठिकाना बनाया ही नहीं। कहीं स्थायी रूप से निवास नहीं किया आज तक। दीदी, आपकी तरह हमारा जीवन भी बहुत कठिन है। |
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कविता की पहली दो पंक्तियों को पढ़ने तथा विचार करने से आपके मन मस्तिष्क में जो चित्र उभरता है, उसे लिखकर व्यक्त कीजिए । |
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Answer» कविता की पहली दो पंक्तियों को पढ़ने तथा विचार करने से बाल मजदूरी का चित्र उभरता है । मन में बच्चों के प्रति जहाँ एक तरफ करुणा का भाव उमड़ता है वहीं दूसरी तरफ व्यवस्था के प्रति आक्रोश का भाव पैदा होता है । बच्चों की उम्र जब खेलने-खाने और स्कूल जाने की होती है तो उन्हें मजबूरीवश काम पर जाना पड़ता है । उन्हें अपना और परिवार का पेट भरना पड़ता है । |
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कवि का मानना है कि बच्चों के काम पर जाने की भयानक बात को विवरण की तरह न लिखकर सवाल के रूप में पूछा जाना चाहिए कि ‘काम पर क्यों जा रहे हैं बच्चे ?’ कवि की दृष्टि में उसे प्रश्न के रूप में क्यों पूछा जाना चाहिए ? |
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Answer» आज बच्चों की इस स्थिति के लिए सामाजिक विषमता जिम्मेदार है । समाज का बहुत बड़ा वर्ग है, जिसे दो जूट का भोजन नसीब नहीं है, दूसरी तरफ चंद लोग उनका शोषण करके धनी बन गए हैं । उनके काले धनरूपी पहाड़ के नीचे इनके खिलौने दब गए हैं । जिसकी पूर्ति के लिए बच्चों को भी अमानवीय दशाओं में मजदूरी करनी पड़ती है । अतः मात्र विवरण देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि इस समस्या को प्रश्न के रूप में समाज के सामने रखना होगा, लोगों को जागरूक करना होगा । |
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आपने अपने शहर में बच्चों को कब-कब और कहाँ-कहाँ काम करते हुए देखा है ? |
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Answer» मैंने अपने शहर में बच्चों को चाय की दुकान पर, होटलों में, विभिन्न दुकानों पर, छोटे-छोटे कारखानों में और निजी कार्यालयों में काम करते हुए देखा है । कुछ बच्चे तो एकदम सुबह-सुबह रद्दी बीनने का काम भी करते हैं । |
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बच्चों का काम पर जाना धरती के एक बड़े हादसे के समान क्यों हैं ? |
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Answer» बच्चे देश का भविष्य हैं । यदि बच्चों को विकास का अवसर नहीं मिलेगा तो देश प्रगति कैसे करेगा । उन्हें उनके बचपन से वंचित रखना घोर अपराध है, इसलिए बच्चों का काम पर जाना धरती के एक बड़े हादसे के समान है । |
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दिन-प्रतिदिन के जीवन में हर कोई बच्चों को काम पर जाते देख्न रहा है, फिर भी किसी को कुछ अटपटा नहीं लगता । इस उदासीनता के क्या कारण हो सकते हैं ? |
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Answer» काम पर जाते बच्चों को देखकर हर कोई उदासीनता का भाव प्रकट नहीं कर रहा है, क्योंकि लोग आत्मकेंद्रित होने के साथ संवेदनहीन भी होते जा रहे हैं । उनका बच्चा पढ़ने जा रहा है, फिर उन्हें दूसरे के बच्चे से कोई मतलब नहीं है । कुछ लोग जागरूकता की कमी के कारण सारी जिम्मेदारी सरकार की मानते हैं । कुछ लोग अपने-अपने भाग्य से जोड़कर देखते हैं । कुछ शोषक वर्ग के लोग हैं जो बालमजदूरी कराकर अपनी जेब भर रहे हैं । |
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आपके विचार से बच्चों को काम पर क्यों नहीं भेजा जाना चाहिए ? उन्हें क्या करने के मौके मिलने चाहिए ? |
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Answer» मेरे विचार से बच्चों को काम पर इसलिए नहीं भेजा जाना चाहिए क्योंकि उनकी उम्र कम होती है । यह उम्र उनके शारीरिक और बौद्धिक विकास की है जो मजदूरी करने से नहीं हो पाता । वे जिन्दगीभर के लिए मजदूर बनकर रह जाते हैं । बच्चों को खेलने-कूदने तथा पढ़ने-लिखने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए ताकि उनका बौद्धिक विकास हो सके । |
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‘बच्चे काम पर जा रहे हैं’ कविता का केन्द्रीयभाव क्या है ? |
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Answer» ‘बच्चे काम पर जा रहे हैं’ कविता में कवि की प्रखर जनवादी चेतना प्रकट हुई है । कवि ने प्रस्तुत कविता में देश और दुनिया की एक ज्वलंत समस्या को उठाया है – बच्चों का काम पर जाना किसी भी देश के लिए एक बहुत बड़ा कलंक है, दुर्भाग्य है । आज का बालक आनेवाले कल का नागरिक है उसके सर्वांगीण विकास पर ही देश का विकास निर्भर है । किन्तु बच्चों को उनके खेलने-कूदने, हँसने-गाने की उम्र में ही रोजी-रोटी की तलाश में निकलना पड़े, इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है ? इस विराट और ज्वलंत प्रश्न को कवि ने हम सबके समक्ष रखा है । |
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हारिल बनकर कवि कहाँ बसेरा करना चाहता है?(क) वटवृक्ष पर(ख) पीपल के वृक्ष पर(ग) नीम के पेड़ पर(घ) आम के पेड़ पर |
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Answer» सही विकल्प है (ख) पीपल के वृक्ष पर |
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क्या अंतरिक्ष में गिर गई है सारी गेंदेंक्या दीमकों ने खा लिया हैसारी रंग-बिरंगी किताबों कोक्या काले पहाड़ के नीचे दब गए हैं सारे खिलौनेक्या किसी भूकंप में ढह गई हैसारे मदरसों की इमारतेंक्या सारे मैदान, सारे बगीचे और घरों के आँगनखत्म हो गए हैं एकाएकभावार्थ : कवि इस बात से अत्यंत क्षुब्ध है कि बच्चों के खेलने के लिए खिलौने हैं, पढ़ने के लिए किताबें हैं, मौज-मस्ती करने के लिए बाग-बंगीचे और मैदान हैं, किलकारियाँ भरने के लिए घर-आँगन आदि सबकुछ होने के बावजूद बच्चों को काम पर जाना पड़ रहा है ? आगे वह ऐसी संभावना व्यक्त करता है कि क्या बच्चों के खेलने की गेंदें कहीं अंतरिक्ष में खो गई है ? बच्चों के लिखने-पढ़ने और मनोरंजन की रंग-बिरंगी किताबों को दीमकों ने खा लिया है ? क्या उनके सारे खिलौने किसी काले पहाड़ (गरीबी) के नीचे दब गए हैं ? उनके पढ़ने की पाठशालाएँ भूकंप में ढह गई हैं और खेलने के मैदान, बाग-बगीचे और घर-आँगन सबकुछ अचानक खत्म हो गए हैं क्या ?1. कवि की दृष्टि में खिलौने कहाँ दब गए हैं ?2. रंग-बिरंगी किताबों को किसने खा लिया है ?3. कवि बच्चों के लिए क्या-क्या चाहता है ?4. ‘काले पहाड़’ से कवि का क्या आशय है ?5. काव्यांश की भाषा कैसी है ? |
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Answer» 1. कवि की दृष्टि में खिलौने किसी काले पहाड़ के नीचे दब गए हैं । 2. रंग-बिरंगी किताबों को दीमकों ने खा लिया है । 3. कवि बच्चों के लिए खिलौने, रंग-बिरंगी किताबें, खेलने के लिए पार्क-मैदान-आँगन तथा पढ़ने के लिए विद्यालय चाहता है । वह नहीं चाहता कि बच्चे काम पर जाएँ । 4. ‘काले पहाड़’ से कवि का आशय उस गरीबी से है जिसके कारण वे काम पर जाने के लिए मजबूर हैं । उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर उनका शोषण किया जा रहा है । 5. काव्यांश की भाषा खड़ी बोली है, जिसमें तत्सम शब्दों के साथ-साथ उर्दू शब्दों का प्रयोग किया गया है । |
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चुप खड़ा बगुला डुबाए टाँग जल में,देखते ही मीन चंचलध्यान-निद्रा त्यागता है,चट दबा कर चोंच मेंनीचे गले के डालता है !एक काले माथ वाली चतुर चिड़ियाश्वेत पंखों के झपाटे मार फौरनटूट पड़ती है भरे जल के हृदय परएक उजली चदुल मछलीचोंच पीली में दबा करदूर उड़ती है गगन में !भावार्थ : तालाब में एक किनारे पानी में बगुला ध्यान मग्न खड़ा है, परन्तु जैसे ही कोई चंचल मछली उसे दिखाई देती है यह त्याग देता है। वह चट से उसे चोंच में दबाकर गले के नीचे उतार लेता है। तभी कवि एक काले माथेवाली चालाक चिड़िया देखता है, जिसके पंख सफेद हैं। वह पानी की सतह पर झपट्टा मारती है और एक चमकदार चंचल मछली को अपनी पीली ! चोंच में दबाकर आसमान में उड़ जाती है।1. बगुला ध्यान-निद्रा कब त्यागता है ?2. काले माथेवाली चिड़िया किस तरह शिकार करती है ?3. बगुला किस तरह खड़ा है और क्यों ?4. काले माथेवाली चिड़िया और बगुला के शिकार के तरीके में क्या भिन्नता है ?5. काव्यांश में प्रयुक्त मुहावरे बताइए। |
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Answer» 1. बगुला तालाब में ध्यान-निद्रा में खड़ा रहता है। परन्तु जैसे ही उसे कोई मछली दिखाई देती है, वह ध्यान-निद्रा त्याग कर उसकी चोंच में दबा लेता है। 2. काले माथेवाली चिड़िया पानी की सतह से कुछ ऊँचाई पर मँडराती रहती है। वह जैसे ही जल में किसी मछली को देखती है कि बड़ी चतुराई से मछली पर झपट्टा मारती है और उसे अपनी चोंच में दबाकर आसमान में उड़ जाती है। 3. बगुला एक तपस्वी की तरह खड़ा है। जैसे ही कोई मछली उसके नजदीक आती है, वह उस मछली को चोंच में दबाकर गले के नीचे उतार लेता है। 4. काले माथेवाली चिड़िया पानी की सतह से कुछ ऊँचाई पर मछली की फिराक में मँडराती रहती है। मछली देखते ही पानी में ही मछली पर टूट पड़ती है और उसे चोंच में दबाकर आकाश में उड़ जाती है। बगुला तालाब में ध्यान लगाकर खड़ा रहता है। उसे मछली का इंतजार रहता है। जैसे ही कोई मछली उसके नजदीक आती है, वह अपनी ध्यान निद्रा को त्यागकर मछली को चोंच में दबा लेता है और फिर गले के नीचे उतार लेता है। 5. काव्यांश में ‘गले में डालना’ और ‘झपट्टा मारना’ – ये दो मुहावरे प्रयुक्त हुए हैं। |
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और पैरों के तले है एक पोखर,उठ रहीं इसमें लहरियाँ,नील तल में जो उगी है घास भूरीले रही वह भी लहरियाँ।एक चाँदी का बड़ा-सा गोल खंभाआँख को है चकमकाता।हैं कई पत्थर किनारेपी रहे चुपचाप पानी,प्यास जाने कब बुझेगी !भावार्थ : कवि कहता है कि वहीं खेत के पास में एक छोटा-सा तालाब है, जिसमें छोटी-छोटी लहरें उठ रही है। तालाब की नीली तली में भूरी-भूरी घास उग आई है। लहरों के साथ घास भी लहरा रही हैं। उस पानी में सूर्य की परछाई चमक रही है, जिससे आँखें चौंधिया रही हैं। वह परछाईं चाँदी के एक बड़े से खंभे की तरह दिखाई दे रही है। तालाब के किनारे पड़े छोटे-छोटे पत्थर इस तरह चुपचाप पानी पी रहे हैं जैसे उनकी प्यास कभी न बुझनेवाली हो1. भूरी घास कहाँ उगी हुई हैं ?2. कवि की आँखें क्यों चौंधिया रही हैं ?3. ‘प्यास जाने कब बुझेगी’ का आशय स्पष्ट कीजिए।4. तालाब का वर्णन कीजिए।5. ‘हैं कई पत्थर किनारेपी रहे चुपचाप पानी’ में कौन-सा अलंकार है ? |
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Answer» 1. भूरी घास तालाब की तली में उगी हुई हैं। 2. सूर्य की परछाई तालाब में पड़ रही है। पानी के चमकने से परछाई गोलखंभे-सी प्रतीत हो रही हैं, जिसकी तरफ देखने से कवि की आँखें चौंधिया रही हैं। 3. तालाब के किनारे अनेक पत्थर पड़े हुए हैं। जो तालाब में उठनेवाली छोटी-छोटी लहरों को स्पर्श करते हैं। उसे देखकर कवि को लगता है कि जैसे वे पानी पी रहे हों। वह सोचता है कि इन पत्थरों की प्यास पता नहीं कब बुझेगी, क्योंकि वे इसी तरह लंबे समय से पानी पी रहे हैं। 4. कवि जिस खेत की मेड़ पर बैठा है वहीं पास में एक छोटा-सा तालाब है। उसके स्वच्छ पानी में हवा के झोंकों के साथ छोटी छोटी लहरें उठ रही हैं। तालाब के नीले तल में भूरी-भूरी उगी हैं, वे भी लहरों के साथ लहरा रही हैं। पानी में सूर्य का प्रतिबिंब बन रहा है, जो चाँदी के खंभे जैसा दिखाई दे रहा है। 5. ‘हैं कई पत्थर किनारे |
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तालाब के किनारे पत्थर क्या कर रहे हैं ? |
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Answer» तालाब के किनारे पत्थर पड़े है। हवा से पानी में उठनेवाली छोटी-छोटी लहरें पत्थरों को स्पर्श कर रही हैं, जिसे देखकर लगता है कि पत्थर तालाब के किनारे चुपचाप पानी पी रहे हैं। |
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सारसों को देखते ही कवि के मन में क्या भाव पैदा हुआ ? |
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Answer» सारसों को देखते ही कवि का मन करता है कि वह सारस के साथ उड़कर वहाँ पहुँच जाए, जहाँ यह जुगल जोड़ी रहती हैं और परस्पर प्रेम की बातें करती है। कवि छिपकर उनकी प्रेम-कहानी सुनना चाहता है। |
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कवि को स्वयंवर-सा क्यों प्रतीत हो रहा है ? |
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Answer» कवि खेत की मेड़ पर बैठा जब चारों तरफ नज़र दौड़ाता है तो देखता है कि सरसों, चना, अलसी की फसलें सज-धजकर खड़ी है। चना अपने सिर लाल साफा बाँधे दूल्हे की तरह खड़ा है। अलसी सिर पर फूलों का शृंगार किए हुए हैं। सरसों हाथ पीले करके ब्याह-मंडप में बैठी है। फागुन फाग गा रहा है, जिसे देखकर कवि को स्वयंवर-सा प्रतीत हो रहा है। |
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चिड़िया आकाश में कब उड़ जाती है ? |
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Answer» चिड़िया मछली की फिराक में पानी की सतह से कुछ ऊँचाई पर उड़ती रहती है। मछली के दिखाई देते ही चिड़िया झपट्टा मारकर मछली को चोंच में दबा लेती है, इस तरह शिकार करने के बाद चिड़िया आकाश में उड़ जाती है। |
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सरसों को ‘सयानी’ कहकर कवि क्या कहना चाहता होगा? |
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Answer» सरसों की तुलना में चना, अलसी आदि छोटे हैं। सरसों में पीले फूल भी आ गए हैं। कवि को लगता है कि वह हाथ पीले कर ब्याह-मंडप में जाने को तैयार है, यही सब देखकर कवि सरसों को सयानी कहना चाहता है। |
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‘इस विजन में … अधिक है’ – पंक्तियों में नगरीय संस्कृति के प्रति कवि का क्या आक्रोश है और क्यों ? |
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Answer» ‘इस विजन में … अधिक है’ – इन पंक्तियों के द्वारा कवि ने शहरी स्वार्थपूर्ण संबंधों पर प्रहार किया है। कवि के अनुसार शहरी संबंध व्यापारिक होते हैं। वे आपसी प्रेमभाव के बदले पैसों को अधिक महत्त्व देते हैं। जिसके पीछे मूल कारण है, उनका प्रकृति से दूर रहना। उनके विपरीत जो लोग प्रकृति की गोद में रहते हैं वे आपसी प्रेम को महत्त्व देते है। इसीलिए कवि ने गाँव की जमीन को प्यार के मामले में अधिक उपजाऊ माना है। |
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‘और सरसों की न पूछो’ – इस उक्ति में बात को कहने का एक खास अंदाज है। हम इस प्रकार की शैली का प्रयोग कब और क्यों करते हैं ? |
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Answer» किसी बात को प्रभावपूर्ण ढंग से कहने या किसी की प्रशंसा आदि के लिए इस नकार का प्रयोग किया जाता है। जैसे, हिमालय पर ठंड की बात मत पूछो। हमारे सैनिकों की बहादुरी की न पूछो। |
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अलसी के मनोभावों का वर्णन कीजिए। |
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Answer» कवि ने अलसी को एक सुंदर नायिका के रूप में चित्रित किया है। यह बड़ी हठीली है। उसका शरीर पतला और कमर लचकदार है। वह अपने सिर पर नीले फूल लगाकर प्रेमातुर हो रही है कि उसे जो स्पर्श करेगा उसको वह अपना हृदय दे देगी अर्थात उससे प्रेम करेगी। |
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पास ही मिल कर उगी हैबीच में अलसी हठीलीदेह की पतली, कमर की है लचीली,नील फूले फूल को सिर पर चढ़ा करकह रही है, जो छुए यहहृदय का दान उसको।भावार्थ : खेत में चने के बगल में ही अलसी भी उग आई है। जिसे देखकर ऐसा लगता है कि जैसे चने की बगल में हठ करके उगी है। वह दुबली-पतली और लचकदार कमरवाली है। उसने बालों में नीले फूल लगा रख्खे हैं। वह कह रही है कि जो उस फूल को छुएगा उसे वह अपना हृदय दान देगी। यहाँ सुंदरी अलसी एक प्रेमातुर नायिका के रूप में है।1. अलसी का पौधा कैसा होता है ?2. अलसी को हठीली क्यों कहा गया है ?3. अलसी को देखकर कवि ने क्या कल्पना की ?4. अलसी कहाँ उगी है, और क्या कह रही है ?5. हृदय का दान उसको’ में कौन-सा अलंकार है ? |
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Answer» 1. अलसी (तीसी) का पौधा पतला, चने की अपेक्षा कुछ लंबा पतला, शाखा रहित तथा लचकदार होता है। . 2. अलसी को हठीली इसलिए कहा गया है कि अक्सर वह चने के साथ बोई जाती है। चने से कुछ लम्बी होने से ऐसा लगता है कि जैसे बलपूर्वक उग आई है। वह लचकदार होने से झुककर तुरंत सीधी हो जाती है। 3. अलसी को देखकर कवि को लगा कि जैसे वह एक दुबली-पतली शरीरवाली खूबसूरत नायिका हो। जिसकी कमर अत्यंत लचकदार है। जो चने को एक के रूप में अपनी ओर आकर्षित कर रही है। 4. अलसी को देखकर कवि को लगा कि जैसे वह एक दुबली-पतली शरीरवाली खूबसूरत नायिका हो। जिसकी कमर अत्यंत लचकदार है। जो चने को एक के रूप में अपनी ओर आकर्षित कर रही है। 5. ‘दूं हृदय का दान उसको’ में मानवीकरण अलंकार है। यहाँ अलसी को जीवंत मानव की तरह चित्रित किया गया है। |
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अलसी के लिए ‘हठीली’ विशेषण का प्रयोग क्यों किया गया है ? |
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Answer» कवि ने अलसी के लिए ‘हठीली’ विशेषण का प्रयोग इसलिए किया है कि पहली बात तो वह हठपूर्वक चने के पास उग आई है। दूसरी बात यह कि वह शरीर से दुबली-पतली है, हवा के हर झोके के साथ झुक जाती है। परन्तु फिर वह तुरंत खड़ी हो जाती है। तीसरी बात उसने हठ कर रखा है कि वह अपना दिल उसे ही देगी जो उसके सिर पर लगे नीले फूल को छुएगा। |
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और सरसों की न पूछो –हो गई सबसे सयानी,हाथ पीले कर लिए हैंव्याह-मंडप में पधारीफाग गाता मास फागुनआ गया है आज जैसे।देखता हूँ मैं : स्वयंवर हो रहा है,प्रकृति का अनुराग-अंचल हिल रहा हैइस विजन में,दूर व्यापारिक नगर सेप्रेम की प्रिय भूमि उपजाऊ अधिक है।भावार्थ : कवि कहता है कि सरसों की तो बात ही मत पूछो। वह सबसे सयानी हो गई है। उसने अपने हाथ पीले करवा लिए हैं और ब्याह के मंडप में बैठ गई है। ऐसा लगता है कि होली के गीत गाता हुआ फागुन भी विवाहोत्सव में शामिल हो गया है। यह सब देखकर लगता है कि जैसे किसी का स्वयंवर हो रहा है। इस स्वयंवर में प्रकृति अपने प्यार का आँचल हिला रही है। वैसे तो यह एकदम निर्जन स्थान है। लेकिन भीड़-भाड़वाले व्यापारिक नगरों से अधिक प्रेम यहाँ देखने को मिल रहा है। यहाँ मनुष्य की तो बात मत पूछो, पेड़-पौधे भी प्यार करते हैं।1. किसे सयानी कहा गया है, और क्यों ?2. काव्यांश में किस ऋतु और माह का वर्णन है ?3. ‘देखता हूँ मैं : स्वयंवर हो रहा’ कवि ऐसा किस आधार पर कहता है ?4. नगरीय संस्कृति के प्रति कवि ने क्या आक्रोश व्यक्त किया है ?।5. ‘ब्याह-मंडप में पधारी’ में कौन-सा अलंकार है ? |
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Answer» 1. सरसों को सयानी कहा गया है क्योंकि अन्य फसलों की तुलना में सरसों थोड़ा पहले तैयार हो जाती है। सरसों पर पीले फूल जल्दी आ गए हैं, जिन्हें देखकर लगता है कि वह किशोरावस्था पार कर चुकी है। विवाह योग्य हो गई है। 2. काव्यांश में वसंत ऋतु और फाल्गुन महीने का वर्णन है।। 3. कवि देखता है कि सरसों, अलसी, चना की फसलें सज-धजकर खड़ी हैं। चने ने अपने सिर पर लाल साफा बाँध लिया है। अलसी सिर पर नीले फूल लगाए हुए है। सरसों अपने हाथ पीले करके ब्याह मंडप में बैठी है। फागुन होली के गीत गा रहा है। इस तरह, इस समूचे वातावरण को देखकर कवि को लगता की स्वयंवर हो रहा है। 4. नगरीय संस्कृति के प्रति कवि आक्रोश व्यक्त करता हुआ कहता है कि शहरी संबंध व्यापारिक होते हैं। शहरों की अपेक्षा गाँव की जमीन प्यार के मामले में अधिक उपजाऊ है। 5. ‘ब्याह-मंडप में पधारी’ में मानयीकरण अलंकार है क्योंकि यहाँ ‘सरसों ब्याह के मंडप आई’ ऐसा कहकर उसे जीवंत मानव का रूप दिया गया है। |
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‘चाँदी का बड़ा-सा गोल खंभा’ में कवि की किस सूक्ष्म कल्पना का आभास मिलता है ? |
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Answer» तालाब के स्वच्छ पानी में जब सूर्य की किरणें पड़ती हैं तो वे गोल और लंबवत् चमक उत्पन्न करती हैं। जिसे देखने पर चाँदी का बड़ा-सा गोल खंभा प्रतीत होता है। इस तरह, किरणों में खंभे की कल्पना करना में कवि की सूक्ष्म कल्पनाशक्ति का आभास मिलता है। |
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काले माथे और सफेद पंखोंबाली चिड़िया आपकी दृष्टि में किस प्रकार के व्यक्तित्व का प्रतीक हो सकती है ? |
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Answer» काले माथे और सफेद पंखोंवाली चिड़िया सफेदपोश नेता के व्यक्तित्व का प्रतीक हो सकती है, जो परोपकार और समाजसेवा की तो बात करता हो परन्तु अपने शिकार पर भी नजर रखता है और अवसर मिलते ही अपना काम कर जाता है। |
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अलसी अपने हृदय का दान किसे करना चाहती है ? |
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Answer» अलसी अपने हृदय का दान उसे करना चाहती है, जो उसके सिर पर लगे फूल को स्पर्श करेगा। |
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कविता के आधार पर ‘हरे चने’ का सौन्दर्य अपने शब्दों में चित्रित कीजिए। |
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Answer» कवि ने चने के पौधों का मानयीकरण किया है। हरे चने का ठिगना-सा है। उसके सिर पर गुलाबी फूल है। जिसे देखकर लगता है कि उसने सिर पर गुलाबी पगड़ी बाँधी है और सज-धजकर दूल्हा बना खड़ा है। |
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बीते बराबर, ठिगना, मरठा, आदि सामान्य बोलचाल के शब्द हैं, लेकिन कविता में इन्हीं से सौन्दर्य उभरा है और कविता सहज बन पड़ी है। कविता में आए ऐसे ही अन्य शब्दों की सूची बनाइए। |
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Answer» लचीली, हठीली, सयानी, चकमकाता, चट, झपाटे, चटुल, लहरियाँ, अनगढ़, सुग्गा, जुगुल जोड़ी, टें 2 टें, टिरटों-टिरटों, चुप्पे चुप्पे आदि। |
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चने ने किसकी पगड़ी बाँध रखी है ? |
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Answer» चने ने गुलाबी फूलों की पगड़ी बाँध रखी है, जिससे उसकी सुंदरता बढ़ गई है। |
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कविता को पढ़ते समय कुछ मुहावरे मानस-पटल पर उभर आते हैं, उन्हें लिखिए और अपने वाक्यों में प्रयुक्त कीजिए। |
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Answer» 1. सिर चढ़ाना (बढ़ावा देना) 2. हृदय का दान देना (समर्पित होना) 3. हाथ पीले करना (ब्याह करना) 4. हृदय चीरना (दुःख पहुँचाना) 5. प्यास बुझाना (तृप्त होना) 6. झपाटे मारना (अचानक टूट पड़ना) |
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पाठ में आए सामासिक शब्दों को छाँटकर विग्रह कीजिए। |
Answer»
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निम्नलिखित प्रत्यय, उपसर्गों की सहायता से दो-दो शब्द लिखिए।उपसर्ग – अन्, अ, सत्, स्य, दुरप्रत्यय – दार, हार, वाला, अनीय |
Answer»
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महादेवी ने कवि सम्मेलनों में कविता पाठ के लिए अपना नाम बुलाए जाने से पहले होनेवाली बेचैनी का जिक्र किया है। अपने विद्यालय में होनेवाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते समय आपने जो बेचैनी अनुभव की होगी, उस पर डायरी का एक पृष्ठ लिखिए। |
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Answer» शुक्रवार मुख्य अतिथि के आते ही दीप प्रज्ज्वलित किया गया और काव्यगोष्ठी प्रारंभ की गई। दसों विद्यालय के प्रतिभागी एक कतार में बैठे थे। उद्घोषक जैसे ही किसी नाम की घोषणा करता मैं भीतर से डर जाता था। तन में सिहरन दौड़ जाती थी। पाँच प्रतिभागियों के बाद उद्घोषक ने मेरा नाम पुकारा। मैं थोड़ा डरा हुआ किन्तु शीघ्र ही मंच पर पहुँच गया। पूरे आत्मविश्वास के साथ मैंने अपनी कविता प्रस्तुत की। कविता के अन्त में सभी ने जोरदार तालियाँ बजाई। मैं बहुत खुश था। मेरी कविता को प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मैं इस दिन को कभी नहीं भूल सकता। |
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पाठ से निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द ढूँढकर लिखिए। |
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Answer» शब्द – विलोम
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महादेवी जी के इस संस्मरण को पढ़ते हुए आपके मानस-पटल पर भी अपने बचपन की कोई स्मृति उभरकर आई होगी, उसे संस्मरण शैली में लिखिए। |
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Answer» मेरे हिन्दी के अध्यापक ने मुझे पन्द्रह अगस्त के शुभ अवसर पर एक स्पीच तैयार करवाया था। मैंने उस स्पीच को अच्छी तरह से याद कर लिया था। पन्द्रह अगस्त के दिन मुझे दो कार्यक्रम के बाद अपना स्पीच देना था। जैसे ही उद्घोषक कोई घोषणा करता तो मैं भीतर से काँप जाता था। हृदय की गति तेज हो गई थी। मैंने जो स्पीच याद किया था उसे बार-बार मन में दोहरा रहा था। तभी उद्घोषक ने मेरे नाम की घोषणा की। मैं मंच पर पहुँचा। थोड़ा संकुचाया किन्तु अपनी तेज और मधुर आवाज से मैंने अपने स्पीच की शुरुआत की। धीरे-धीरे आत्मविश्वास बढ़ता गया और मेरी आवाज का जादू चल गया। स्पीच के खत्म होते ही तालियों की गड़गड़ाहट से सभी ने मेरा स्वागत किया। भारतमाता की जय बोलकर मैं मंच से नीचे उतर गई। इस दिन को मैं कभी नहीं भूल सकता। |
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ज्वारा के नवाब के साथ अपने पारिवारिक संबंधों को लेखिका ने आज के संदर्भ में स्वप्न जैसा क्यों कहा है ? |
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Answer» स्वतंत्रता से पूर्व हिन्दुओं और मुस्लिमों के बीच इतना भेदभाव नहीं था। लेखिका के साथ नवाब परिवार का संबंध इसका सबूत है। लेखिका का परिवार हिन्दू था और जवारा के नवाब मुस्लिम थे किन्तु दोनों परिवारों के बीच जबरजस्त आत्मीय संबंध था। दोनों धर्म के लोग एकदूसरे के त्यौहारों को साथ मिलकर मनाया करते थे। उनके संबंधों में भाषा और जाति की भेदक रेखा नहीं थी। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत का बँटवारा हुआ। पाकिस्तान मुस्लिम प्रधान देश बना तो भारत हिन्दुस्तान देश। तब से दोनों धर्मों के बीच आपसी तनाव बढ़ गया है। वो आत्मीयता नहीं रही। आये दिन दंगे-फसाद होते रहते हैं। अब दोनों के बीच पहले जैसे आत्मीय संबंध नहीं रहे। इसलिए लेखिका ने जवारा के नवाब के साथ अपने पारिवारिक संबंधों को आज के संदर्भ में स्वप्न जैसा कहा है। |
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जेबुन्निसा महादेवी वर्मा के लिए बहुत काम करती थीं। जेबुन्निसा के स्थान पर यदि आप होती/होते तो महादेवी से आपकी क्या अपेक्षा होती ? |
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Answer» जेबुन्निसा के स्थान पर यदि मैं होती/होता तो मैं उनके कामों में मदद कर दिया करती/करता। बदले में उनसे जहाँ मुझे कठिनाई |
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जेबुन्निसा कौन थी ? वे महादेवी की मदद कैसे करती थी ? |
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Answer» जेबुन्निसा एक मराठी लड़की थी, जो कोल्हापुर से आई थी। सुभद्रा कुमारी के स्थान पर छात्रालय में यह रहने लगी। वे महादेवी का डेस्क साफ कर देती थी, उनकी पुस्तकें ढंग से रख देती थी। इससे महादेवी को ज्यादा अवकाश मिल जाता। चे पूरा समय कविता लेखन में लगा देती थी। उन्हें कविता लिखने के लिए अधिक समय मिल जाता था। |
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लेनिका ने छात्रावास के जिस बहुभाषी परिवेश की चर्चा की है उसे अपनी मातृभाषा में लिखिए। |
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Answer» महादेवी वर्मा कास्थवेट गर्ल्स स्कूल के छात्रावास में रहकर अभ्यास करती थीं। उस छात्रावास में अलग-अलग प्रान्त की लड़कियाँ पढ़ने आती थीं। कोई अवधि बोलती थीं, तो कोई बुंदेली, कोई मराठी तो कोई ब्रज भाषा में बात करती थीं। किन्तु सभी हिन्दी की पढ़ाई करती थीं। उन्हें छात्रावास में उर्दू की भी शिक्षा दी जाती थी। इस तरह लेखिका का छात्रावास बहुभाषी था। फिर भी सभी लड़कियाँ मिल-जुल कर रहती थी। सब एक मेस में खाना खाती थीं। एक प्रार्थना में सब खड़ी होती थीं। किसी के बीच कोई भेदभाव नहीं था।। |
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लेखिका के चारपाई के नीचे छिपने का क्या कारण था ? |
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Answer» उर्दू और फारसी पढ़ना लेखिका को अच्छा नहीं लगता था। उनके बाबा ने उर्दू-फारसी पढ़ाने के लिए एक मौलवी को रखवा दिया। जब वे उसे उर्दू-फारसी पढ़ाने आये तो लेखिका डर के मारे चारपाई के नीचे छिप गई। लेनिका का मानना है कि उर्दू-फारसी सीखना उनके बस का नहीं था। |
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लेनिका का मन मिशन स्कूल में क्यों नहीं लगा ? |
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Answer» लेखिका के घर का वातावरण कुछ और था, वहाँ वे संस्कृत, ब्रजभाषा आदि सिखती थीं। मिशन स्कूल का वातावरण दूसरा था। वहाँ इसाई धर्म के अनुसार शिक्षा-दिक्षा-संस्कार दिए जाते थे, वहाँ की प्रार्थना दूसरी थी। इसलिए उनका मन वहाँ नहीं लगा। |
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महादेवी वर्मा के परिवार में कौन-कौन-सी भाषाएँ बोली जाती थी ? |
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Answer» महादेवी वर्मा का परिवार सुशिक्षित था। उनके बाबा उर्दू और फारसी के ज्ञाता थे। उनके पिता ने अंग्रेजी में शिक्षा प्राप्त की थी। उनकी माता जबलपुर से अपने साथ हिन्दी भाषा लाई थी। वे स्वयं संस्कृत और हिन्दी भाषा की जानकार थी। ब्रजभाषा में मीरा के पद गाती थीं। अतः महादेवी वर्मा के घर में उर्दू, फारसी, अंग्रेजी, हिन्दी, ब्रज, संस्कृत आदि भाषाएँ बोली जाती थी। |
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पानवाला क्यों उदास था ?(क) हालदार साहब के चले जाने पर(ख) मूर्ति पर चश्मा न होने पर(ग) केष्टन की मृत्यु होने पर(घ) पान की दुकान न चलने पर |
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Answer» (ग) केप्टन की मृत्यु होने पर |
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लेखक के अनुसार कस्बे का वर्णन कीजिए। |
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Answer» कस्बा बहुत बड़ा नहीं था। जिसे पक्का मकान कहा जा सके वैसे कुछ ही मकान वहाँ थे। जिसे बाजार कहा जा सके वैसा एक ही बाजार वहाँ था। इस कस्बे में एक लड़कों के लिए तथा एक लड़कियों के लिए स्कूल था। सीमेंट का एक कारखाना, दो ओपन एयर सिनेमाघर और एक नगरपालिका थी। |
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