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महादेवी ने कवि सम्मेलनों में कविता पाठ के लिए अपना नाम बुलाए जाने से पहले होनेवाली बेचैनी का जिक्र किया है। अपने विद्यालय में होनेवाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते समय आपने जो बेचैनी अनुभव की होगी, उस पर डायरी का एक पृष्ठ लिखिए।

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शुक्रवार
26 जनवरी, 2018
आज हमारे विद्यालय में एक काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया गया था। इस काव्य-गोष्ठी में 10 विद्यालय के छात्रों ने भाग लिया। काव्य-गोष्ठी का विषय पहले से निर्धारित था। प्रतिभागियों को ‘देशप्रेम’ से संबंधित रचनाएँ प्रस्तुत करनी थी। 10 बजे के करीब काव्य-गोष्ठी का प्रारंभ होना था। निर्णायक गण अपनी-अपनी कुर्सियों पर विराजमान थे।

मुख्य अतिथि के आते ही दीप प्रज्ज्वलित किया गया और काव्यगोष्ठी प्रारंभ की गई। दसों विद्यालय के प्रतिभागी एक कतार में बैठे थे। उद्घोषक जैसे ही किसी नाम की घोषणा करता मैं भीतर से डर जाता था। तन में सिहरन दौड़ जाती थी। पाँच प्रतिभागियों के बाद उद्घोषक ने मेरा नाम पुकारा। मैं थोड़ा डरा हुआ किन्तु शीघ्र ही मंच पर पहुँच गया। पूरे आत्मविश्वास के साथ मैंने अपनी कविता प्रस्तुत की। कविता के अन्त में सभी ने जोरदार तालियाँ बजाई। मैं बहुत खुश था। मेरी कविता को प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मैं इस दिन को कभी नहीं भूल सकता।



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