This section includes InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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नेताजी की आखों पर चश्मा क्यों नहीं था? |
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Answer» नेताजी की आँखों पर तरह-तरह के चश्मे पहनानेवाला केप्टन मर चुका था इसलिए उनकी आँखों पर किसी प्रकार का कोई चश्मा नहीं था। |
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लेखिका के बाबा अन्य पुरुषों से किस प्रकार अलग थे ? |
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Answer» लेखिका के बाबा शिक्षित थे। वे स्त्रियों का महत्त्व जानते थे। जहाँ दूसरे पुरुष लड़की का जन्म होते ही उसे मार डालते थे वहीं वे अपने घर में लड़की का जन्म हो, इसके लिए पूजा-पाठ करते थे, लड़की का जन्म होने पर उसका स्वागत किया। उसकी शिक्षा-दिक्षा, लालन-पालन पर पूरा ध्यान दिया। वे लेखिका को विदूषी बनाना चाहते थे। |
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लेखिका उर्दू-फारसी क्यों नहीं सीख पाई ? |
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Answer» लेखिका को बचपन में उर्दू-फारसी भाषा के प्रति तनिक भी रूचि नहीं थी। उन्हें उर्दू-फारसी पढ़ाने के लिए मौलवी रखा गया था। किन्तु उसे देखते ही वे चारपाई के नीचे छिप जाती थीं। यही कारण है कि लेखिका उर्दू फारसी नहीं सीख पाई।। |
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कस्बे के मुख्य चौराहे पर किसकी प्रतिमा लगी थी ?(क) नेताजी सुभाषचंद्र बोस(ख) महात्मा गाँधी(ग) पंडित जवाहर लाल नहेरू(घ) सरदार वल्लभभाई पटेल |
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Answer» (क) नेताजी सुभाषचंद्र बोस |
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नगरपालिका क्या कार्य करती थी ? |
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Answer» इस कस्बे के लिए नगरपालिका कुछ-न-कुछ कार्य करती रहती थी। कभी कोई पक्की सड़क बनवाती थी तो कभी पेशाबघर बनवा दिया, कभी कबूतरों के लिए छतरी लगवा दी तो कभी कवि सम्मेलन करवा दिया। कभी बाजार के चौराहे पर सुभाषबाबू की प्रतिमा लगवा दी। |
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हालदार साहब की क्या आदत पड़ गई थी ? |
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Answer» हालदार साहब जब भी कस्बे के पास से गुजरते थे तो कस्बे के चौराहे पर रुकना, पानवाले की दुकान से पान लेकर खाना और मूर्ति को ध्यान से देखना उनकी आदत बन गई थी। |
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हालदार साहब क्यों चीख उठे ? |
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Answer» केप्टन के मरने के बाद नेताजी की मूर्ति पर चश्मा नहीं था। हालदार साहब ने सोचा कि वे इस बार मूर्ति की तरफ नहीं देखेंगे किन्तु आदतन उनकी नजर मूर्ति पर पड़ी। उन्होंने नेताजी की आखों पर सरकंडे का बना चश्मा लगा हुआ देखा । इस कारण वे चीख उठे और जीप रोकने को कहा। |
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| 28708. |
नेताजी की मूर्ति पर किस प्रकार के चश्मे लगे होते थे ? |
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Answer» नेताजी की मूर्ति पर तरह-तरह के चश्मे लगे होते थे। कभी गोल, कभी चौकोर, कभी लाल, कभी काला, कभी धूप का चश्मा तो कभी बड़े काँचोवाला गोगो चश्मा । यों केप्टन उन्हें तरह-तरह के चश्मे पहनाया करता था। |
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| 28709. |
‘मैं उत्पन्न हुई तो मेरी बड़ी खातिर हुई और मुझे वह सब नहीं सहना पड़ा जो अन्य लड़कियों को सहना पड़ता है।’ इस कथन के आलोक में आप यह पता लगाएँ किक. उस समय लड़कियों की दशा कैसी थी ?ख. लड़कियों के जन्म के संबंध में आज कैसी परिस्थितियाँ हैं ? |
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Answer» क. उस समय समाज में लड़कियों की दशा अत्यंत दयनीय थी। लड़कियों को बोझ समझा जाता था। तभी तो उसके पैदा होते ही उसे मार दिया जाता था। स्त्रियों को शिक्षा पाने का भी अधिकार नहीं था। कुछ सम्पन्न परिवार की गिनी चुनी स्त्रियाँ ही शिक्षा पाती थीं। अतः समाज में स्त्रियों की दशा ठीक नहीं थी। ख. पहले की तुलना में लड़कियों के जन्म के संबंध में काफी बदलाव आया है। लड़का-लड़की का अन्तर धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। किन्तु यह भेदभाव आज भी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। पहले के लोग लड़की को जन्म देने के बाद मार डालते थे। आज विज्ञान और तकनीक का प्रयोग करके लोग कोन में ही लड़कियों की हत्या कर देते हैं। कन्या भ्रूण हत्या के विरुद्ध कानून बन जाने के कारण स्थिति में थोड़ा सुधार अवश्य हुआ है। |
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मूर्ति कितने फूट ऊँची थी?(क) नेताजी की मूर्ति 1 फूट ऊंची थी।(ख) नेताजी की मूर्ति 2 फूट ऊंची थी।(ग) नेताजी की मूर्ति 3 फूट ऊँची थी।(घ) नेताजी की मूर्ति 4 फूट ऊँची थी। |
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Answer» (ख) नेताजी की मूर्ति 2 फूट ऊँची थी। |
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हालदार साहब केप्टन के प्रति सहानुभूति क्यों रखते थे? |
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Answer» जब हालदार साहब को पता चला कि नेताजी का चश्मा केप्टन बदलता है तो उन्होंने कल्पना की कि केप्टन शायद कोई फौजी व्यक्ति होगा। किन्तु जब हालदार ने केप्टन को देखा तो अवाक रह गए। वह एक मरियल-सा लंगड़ा व्यक्ति है और आजीविका के लिए फेरी लगाता है। एक हाथ में संदूकची और दूसरे हाथ में चश्मे से टगे बॉस को लेकर फेरी लगाता है। उसके पास कोई स्थाई दुकान भी नहीं है। यह देखकर हालदार साहब को केप्टन के प्रति सहानुभूति हो गई । वे उसका सम्मान करने लगे। उसकी देशभक्ति पर वे फिदा हो गए जो नेताजी की मूर्ति पर तरह-तरह के चश्मे बदलकर अपनी देशभक्ति का परिचय दे रहा था। |
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केप्टन क्या कार्य करता था? |
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Answer» केप्टन चश्मा बेचने का व्यवसाय करता था। उसके पास चश्मा बेचने के लिए कोई स्थायी दुकान या जगह नहीं । इसलिए वह घूम-घूमकर चश्मा बेचा करता था। |
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ससंदर्भ भाव स्पष्ट कीजिए :अधर-धरत हरि कैं परत, ओठ-डीठि-पट-जोति।हरित बाँस की बाँसुरी, इंद्र धनुष-रंग होति॥ |
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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ के ‘बिहारी के दोहे’ से लिया गया है, जिसके रचयिता बिहारी लाल जी हैं। भाव स्पष्टीकरण : कृष्ण का सौंदर्य-वर्णन करते हुए बिहारी कहते हैं कि कृष्ण जब हरे रंग की बाँसुरी अपने लाल होठों पर रखते हैं तो उस मुरली पर कृष्ण के नीले शरीर के ऊपर के पीले रंग के वस्त्र (पितांबरी) की छवि पड़ती है तो यह सब मिलकर आसमान के नीले रंग में दिखाई देनेवाले इंद्रधनुष का आभास दे रही है। |
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सम्पत्ति रुपी सलिल के बढ़ने का क्या परिणाम होता है? |
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Answer» सम्पत्ति रूपी सलिल (पानी) के बढ़ने से मन रूपी सरोज (कमल) बढ़ता जाता है। |
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सम्पत्ति रूपी सलिल के घटने का क्या परिणाम होता है? |
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Answer» सम्पत्ति रूपी सलिल के घटने से मन रूपी सरोज बढ़ जाता है। |
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बिहारी ने दोनों कनक के संबंध में क्या कहा है? |
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Answer» कनक शब्द के दो अर्थ हैं। एक – सोना और दूसरा – धतूरा। बिहारी लाल कहते हैं कि धतूरे को खाने से मादकता छा जाती है और पागलपन हो जाता है लेकिन ‘सोने’ को पाने मात्र से ही मादकता छा जाती है, पागलपन बढ़ जाता है। सोने में धतूरे की तुलना में सौ गुना ज्यादा नशा होता है। |
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सेनानी न होते हुए भी चश्मेवाले को लोग केप्टन क्यों कहते थे ? |
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Answer» चश्मेवाला एक सच्चा देशभक्त था। न तो वह कोई सेनानी था न नेताजी का साथी था न आज़ाद हिन्द फौज का सिपाही। फिर भी लोग उसकी देशभक्ति की भावना को देख उसे केप्टन नाम से संबोधित करते थे। केप्टन को नेताजी की मूर्ति बिना चश्मेवाली देखकर आहत करती थी। वह बार-बार अनेक तरह के चश्मे पहनाकर उनके प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करता था। उसकी देशभक्ति की भावना को देखकर लोग उसे केप्टन कहकर बुलाते थे। |
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आशय स्पष्ट कीजिए –‘बार-बार सोचते, क्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर घर-गृहस्थी-जवानी-जिंदगी सब कुछ होम देनेवालों पर हंसती है और अपने लिए बिकने के मौके ढूँढ़ती हैं।’ |
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Answer» हालदार साहब लोगों में विलुप्त होती देशभक्ति की भावना से दु:खी है। केप्टन की मृत्यु पर लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ा है। यही हाल हमारे समूचे देश का है। देश के जवान अपनी सारी जिन्दगी देश को समर्पित कर देते हैं अपना घर-बार-गृहस्थी यहाँ तक की जिंदगी भी समर्पित कर देते हैं किन्तु लोगों को ऐसे देशभक्त सैनिकों की कोई परवाह नहीं, उल्टे वे उनका मजाक उड़ाते हैं। जैसे केप्टन का मजाक पानवाले ने उड़ाया था । लोग अपने देश के बारे में बिल्कुल नहीं सोचते । लालच में आकर स्वयं को भी बेचने को तैयार हो जाते हैं। देश में ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जो अपने स्वार्थ के लिए जीते हैं और देशभक्त वीरों को भूल चुके हैं। |
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तुर्कों की क्या पहचान है ?(क) दया(ख) धर्म(ग) मेहर(घ) नफरत |
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Answer» सही विकल्प है (ग) मेहर |
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इनमें से किन लोगों का ज्ञान व्यर्थ हैं ?(क) जो आत्मज्ञान को छोड़ पत्थर की पूजा करते हैं।(ख) जो नियमित भगवान की पूजा करते हैं।(ग) जो ईश्वर को नहीं मानते हैं।(घ) जो प्रात:काल स्नान नहीं करते हैं। |
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Answer» सही विकल्प है (क) जो आत्मज्ञान को छोड़ पत्थर की पूजा करते हैं। |
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| 28721. |
‘वो लंगड़ा क्या जाएगा फौज में। पागल है पागल।’केप्टन के प्रति पानवाले की इस टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया लिखिए। |
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Answer» उपरोक्त उक्ति पानवाले ने केप्टन के लिए कहा है। केप्टन एक बूढा मरियल-सा लंगड़ा व्यक्ति था जिसमें देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी थी। वह शरीर से तो देश की सेवा नहीं कर सकता था क्योंकि लंगड़ा था। किन्तु नेताजी की आखों पर चश्मे का न होना उसे आहत करता था। अत: अपने बेचे जानेवाले चश्मे में से एक मूर्ति को पहना देता था। यह छोटा सा कार्य भी देशप्रेम की भावना को दर्शाती है। अत: पानवाले का यह वाक्य उचित नहीं है। केप्टन ने एक तरफ मूर्ति के अधूरेपन को ढका तो दूसरी ओर कस्बे की कमी की ओर परदा डाला। यों केप्टन का यह कार्य सच्चे देशभक्त से कम नहीं। |
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मूर्ति को देखते ही किसकी कमी खटकती थी ? |
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Answer» मूर्ति को देखते ही एक चीज की कमी खटकती थी, वह थी नेताजी की मूर्ति की आँखों पर चश्मा नहीं था। चश्मा था लेकिन संगमरमर का नहीं था। एक चश्मे का चौड़ा काला फ्रेम मूर्ति को पहना दिया गया था। |
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| 28723. |
पातक, राजा और रोग किसे दबाते हैं? |
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Answer» पातक (पापी), राजा और रोग – ये तीनों दुर्बल लोगों को दबाते हैं। |
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किसकी गति को समझना मुश्किल है? |
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Answer» प्रेमी हृदय की गति को समझना मुश्किल है। |
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| 28725. |
सम्पत्ति रूपी पानी और मन रूपी कमल के संबंध में बिहारी के क्या विचार हैं? |
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Answer» ज्यों-ज्यों सम्पत्ति रूपी पानी बढ़ता जाता है, त्यों-त्यों मन रूपी कमल की बेल बढ़ती जाती है। बिहारी कहते हैं कि पानी के घटने पर भी कमल की नाल घटती नहीं या सूखती नहीं; भले ही उसकी जड़ें ही क्यों न मुरझा जाए। अर्थात् वर्षा ऋतु में पानी के बढ़ने से नाल फिर पानी पर तैरने लगती है। |
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| 28726. |
वस्तुएँ कब सन्दर प्रतीत होती हैं? |
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Answer» वस्तुएँ समय-समय पर सुन्दर प्रतीत होती हैं। |
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| 28727. |
प्रेमी चित्त कब उजला होता है? |
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Answer» प्रेमी चित्त ज्यों-ज्यों श्याम के रंग में रंग जाता है, त्यों-त्यों उज्ज्वल होता है। |
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बाँसुरी किस रंग की है? |
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Answer» बाँसुरी हरे रंग की है। |
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| 28729. |
सीमा पर तैनात फौजी ही देशप्रेम का परिचय नहीं देते । हम सभी अपने दैनिक कार्यों में किसी न किसी रूप में देशप्रेम प्रकट करते हैं, जैसे सार्वजनिक सम्पत्ति को नुकसान न पहुंचाना, पर्यावरण संरक्षण आदि । अपने जीवन जगत से जुड़े ऐसे और कार्यों का उल्लेख कीजिए और उस पर अमल भी कीजिए। |
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Answer» सीमा पर तैनात फौजी लोग ही देशप्रेमी है, यह जरूरी नहीं । भारत देश में रहनेवाले नागरिक अपने देश के भीतर या देश के बाहर रहकर अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए देश के प्रति अपनी निष्ठा, अपनी ईमानदारी प्रकट कर देश प्रेम का परिचय दे सकता है। देश को स्वच्छ रखना, गंदगी न फैलाना, साम्प्रदायिक सद्भावना बनाए रखना, नियमों, कर्तव्यों का पालन करना, सार्वजनिक सम्पत्ति का नुकसान न करना देश की एकता व अखण्डता बनाए रखना ये सभी देशप्रेम का परिचायक है। |
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| 28730. |
हिन्दू व मुस्लिम धर्म की क्या स्थिति है ? पद के आधार पर बताइए। |
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Answer» कबीर न हिन्दुओं से प्रसन्न हैं, न मुसलमानों से। वे कहते हैं कि हिन्दू राम को अपना मानकर उन्हें भगवान मानते हैं। मुसलमान रहमान को अपना सर्वस्व मानते हैं। इस बात को लेकर वे आपस में झगड़ते हैं। यहाँ तक कि मरने-कटने को तैयार हो जाते हैं। वे यह नहीं समझते कि राम और रहमान दोनों एक ही हैं। परन्तु सच्चाई जानने की कोई कोशिश नहीं करता। इस प्रकार हिन्दू और मुस्लिम दोनों धर्मों में अज्ञान की स्थिति है। |
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हिन्दू लोगों की क्या पहचान है ? |
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Answer» मूर्तिपूजा, माला, छापा और तिलक ये हिन्दू लोगों की पहचान है। |
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हालदार साहब ने ड्राइवर को पहले चौराहे पर गाड़ी रोकने के लिए मना किया था लेकिन बाद में तुरंत रोकने को कहा (क) हालदार साहब पहले मायूस क्यों हो गए थे? (ख) मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा क्या उम्मीद जगाता है? (ग) हालदार साहब इतनी-सी बात पर भावुक क्यों हो उठे? |
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Answer» (क) हालदार साहब इसलिए मायूस हो गए थे. क्योंकि वे सोचते थे कि कस्बे के चौराहे पर मूर्ति तो होगी पर उसकी आँखों पर चश्मा न होगा। अब कैप्टन तो जिंदा है नहीं, जो मूर्ति पर चश्मा लगाए। देशभक्त हालदार साहब को नेताजी की चश्माविहीन मूर्ति उदास कर देती थी। (ख) मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा यह उम्मीद जगाता है कि देश में देशप्रेम एवं देशभक्ति समाप्त नहीं हुई है। बच्चों द्वारा किया गया कार्य स्वस्थ भविष्य का संकेत है। उनमें राष्ट्र प्रेम के बीज अंकुरित हो रहे हैं। (ग) हालदार साहब सोच रहे थे कि कैप्टन के न रहने से नेताजी की मूर्ति चश्माविहीन होगी परंतु जब यह देखा कि मूर्ति की आँखों पर सरकंडे का चश्मा लगा हुआ है तो उनकी निराशा आशा में बदल गई। उन्होंने समझ लिया कि युवा पीढ़ी में देशप्रेम और देशभक्ति की भावना है जो देश के लिए शुभ संकेत है। यह बात सोचकर वे भावुक हो गए। |
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भगवान कब प्रसन्न होते हैं? |
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Answer» भगवान सच्चे मन से स्मरण करने वाले भक्त से प्रसन्न होते हैं। |
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जब तक हालदार साहब ने कैप्टन को साक्षात देखा नहीं था तब तक उनके मानस पटल पर उसका कौन-सा चित्र रहा होगा, अपनी कल्पना से लिखिए। |
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Answer» जब तक हालदार साहब ने कैप्टन को साक्षात रूप से नहीं देखा था तब तक उनके मानस पटल पर कैप्टन का व्यक्तित्व एक फ़ौजी व्यक्ति ‘ जैसा रहा होगा जो लंबे कदवाला मजबूत कद-काठी वाला हट्टा-कट्टा दिखता होगा। उसका चेहरा रोबीला तथा घनी मूंछों वाला रहा होगा। वह अवश्य ही नेताजी की फ़ौज का सिपाही रहा होगा। वह हर कोण से फ़ौजियों जैसा दिखता होगा। |
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बिहारी के अनुसार मन कैसा होता है? |
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Answer» बिहारी के अनुसार मन कच्चा होता है। |
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पानवाले का एक रेखाचित्र प्रस्तुत कीजिए। |
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Answer» पानवाला अपनी पान की दुकान पर बैठा ग्राहकों को पान देने के अलावा उनसे कुछ न कुछ बातें करता रहता है। वह स्वभाव से खुशमिज़ाज, काला मोटा व्यक्ति है। उसकी तोंद निकली हुई है। वह पान खाता रहता है जिससे उसकी बत्तीसी लाल-काली हो रही है। वह जब हँसता है तो उसकी तोंद थिरकने लगती है। वह वाकपटु है जो व्यंग्यात्मक बातें कहने से भी नहीं चूकता है। |
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| 28737. |
कस्बों, शहरों, महानगरों के चौराहों पर किसी न किसी क्षेत्र के प्रसिद्ध व्यक्ति की मूर्ति लगाने का प्रचलन-सा हो गया है (क) इस तरह की मूर्ति लगाने के क्या उद्देश्य हो सकते हैं? (ख) आप अपने इलाके के चौराहे पर किस व्यक्ति की मूर्ति स्थापित करवाना चाहेंगे और क्यों ? (ग) उस मूर्ति के प्रति आपके एवं दूसरे लोगों के क्या उत्तरदायित्व होने चाहिए? |
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Answer» (क) समाज सेवा, देश सेवा या ऐसे ही अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रसिद्ध व्यक्तियों की मूर्ति प्रायः कस्बों, चौराहों, महानगरों या शहरों में लगाई जाती हैं। ऐसी मूर्तियाँ लगाने का उद्देश्य सजावटी न होकर उद्देश्यपूर्ण होता • लोग ऐसे लोगों के कार्यों को जाने तथा उनसे प्रेरित हों। • लोगों में अच्छे कार्य करने की रुचि उत्पन्न हो और वे उसके लिए प्रेरित हों। • लोग ऐसे लोगों को भूलें न तथा उनकी चर्चा करते हुए युवा पीढ़ी को भी उनसे परिचित कराएँ। (ख) मैं अपने इलाके के चौराहे पर चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा लगवाना चाहूँगा ताकि लोगों विशेषकर युवावर्ग को अपने देश के लिए कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिले। वे अपनी मातृभूमि पर आंच न आने दें और अपने जीते जी देश को गुलाम होने से बचाने के लिए अपने प्राणों की बाजी लगाने से भी न हिचकिचाएँ। इसके अलावा युवाओं में देश-प्रेम और देशभक्ति की भावना बलवती रहे। (ग) चौराहे या कस्बे में लगी समाज सेवी या अन्य उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्ति की प्रतिमा के प्रति हमारा तथा अन्य लोगों का यह उत्तरदायित्व होना चाहिए कि • हम उसकी साफ़-सफ़ाई करवाएँ। • साल में कम से कम एक बार वहाँ ऐसा आयोजन करें कि लोग वहाँ एकत्र हों और उस व्यक्ति के कार्यों की चर्चा की जाए। • उस व्यक्ति के कार्यों की वर्तमान में प्रासंगिकता बताते हुए उनसे प्रेरित होने के लिए लोगों से कहें। • मूर्ति के प्रति सम्मान भाव बनाए रखें। |
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| 28738. |
दोनों धर्मों में से कौन दिवाना है ? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए। |
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Answer» कबीर कहते हैं कि पीर और औलिया कुरान तथा धर्म की दूसरी किताबें पढ़ते हैं। वे दूसरों को अपने अनुयायी बनाते हैं पर वे खुदा के बारे में कुछ नहीं जानते। हिन्दू भी ढोंग और पाखंड को ही धर्म समझते हैं, पर आत्मज्ञान के बारे में अज्ञानी हैं। सच तो यह है कि हिन्दू और मुसलमान दोनों अपनी नैतिकता भूल गए हैं। हिन्दुओं की दया, मानवता, मुसलमानों की कृपादृष्टि दोनों के हृदय से गायब हो गई है। सचमुच ये अपने-अपने अज्ञान में दीवाने हो गए हैं। |
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| 28739. |
सीमा पर तैनात फ़ौजी ही देश-प्रेम का परिचय नहीं देते। हम सभी अपने दैनिक कार्यों में किसी न किसी रूप में। देश-प्रेम प्रकट करते हैं; जैसे-सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुँचाना, पर्यावरण संरक्षण आदि। अपने जीवन जगत से जुड़े ऐसे और कार्यों का उल्लेख कीजिए और उन पर अमल भी कीजिए। |
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Answer» सीमा पर तैनात फ़ौजी विशिष्ट रूप में देशप्रेम का परिचय देते हैं। उनका देशप्रेम अत्यंत उच्चकोटि का और अनुकरणीय होता है, परंतु हम लोग भी विभिन्न कार्यों के माध्यम से देश प्रेम को प्रकट कर सकते हैं। ये काम हैं-सरकारी संपत्ति को क्षति न पहुँचाना, बढ़ते प्रदूषण को रोकने में मदद करना, अधिकाधिक वृक्ष लगाना, पर्यावरण तथा अपने आसपास की सफ़ाई रखना, पानी के स्रोतों को दूषित होने से बचाना, वर्षा जल का संरक्षण करना, बिजली की बचत करना, कूड़ा इधरउधर न फेंकना, नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाए रखने का प्रयास करना, तोड़-फोड़ न करना, शहीदों एवं देशभक्तों के प्रति सम्मान रखना, लोगों के साथ मिल-जुलकर रहना आदि। |
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| 28740. |
हिन्दू और मुस्लिम आपस में क्यों लड़ते हैं ? |
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Answer» हिन्दू और मुस्लिम आपस में लड़ते हैं, क्योंकि वे ईश्वर के बारे में सच्चाई जानने की कोशिश नहीं करते। |
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| 28741. |
समानार्थी शब्द लिखिए :बौरानाथोथाअभिमानअनुमान |
Answer»
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कौन-से लोग ईश्वर से दूर हैं ? |
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Answer» हिन्दू और मुस्लिम दोनों धर्मों के ठेकेदार धर्म के नाम पर बाह्याडंबरों में लिप्त हैं। वे लोग इसी को ही ईश्वरप्राप्ति का मार्ग मान बैठे हैं। ऐसे लोग ईश्वर से दूर हैं। |
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| 28743. |
बाह्याडंबर, मूर्तिपूजा के बारे में कबीर क्या कहते हैं ? |
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Answer» कबीर कहते हैं कि बाह्य दिखावों में विश्वास करनेवाले लोग पीपल के वृक्ष और पत्थर (मूर्ति) की पूजा करते हैं। वे तीर्थ, व्रत में अपना समय बरबाद करते हैं। पर आत्मज्ञान के बारे में इन्हें कोई जानकारी नहीं है। |
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‘नेताजी का चश्मा’ पाठ के माध्यम से लेखक ने क्या संदेश देने का प्रयास किया है? |
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Answer» ‘नेताजी का चश्मा’ नामक पाठ के माध्यम से लेखक ने देशवासियों विशेषकर युवा पीढ़ी को राष्ट्र प्रेम एवं देशभक्ति की भावना मजबूत बनाए रखने के साथ-साथ शहीदों का सम्मान करने का भी संदेश दिया है। देशभक्ति का प्रदर्शन देश के सभी नागरिक अपने-अपने ढंग से कार्य-व्यवहार से कर सकते हैं। |
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कैप्टन कौन था? उसका व्यक्तित्व नाम के विपरीत कैसे था? |
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Answer» कैप्टन फेरी लगाकर चश्मे बेचने वाला एक मरियल और लँगड़ा-सा व्यक्ति था, जो हाथ में संदूकची और एक बाँस में चश्मे के फ्रेम टाँगे घूमा करता था। कैप्टन नाम से लगता था कि वह फ़ौजी या किसी सिपाही जैसा शारीरिक रूप से मजबूत रोबीले चेहरे वाला बलिष्ठ व्यक्ति होगा, पर ऐसा कुछ भी न था।। |
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निम्नलिखित पंक्तियों में स्थानीय बोली का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है, आप इन पंक्तियों को मानक हिंदी में लिखिए- कोई गिराक आ गया समझो। उसको चौड़े चौखट चाहिए। तो कैप्टन किदर से लाएगा? तो उसको मूर्तिवाला दे दिया। उदर दूसरा बिठा दिया। |
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Answer» मान लो कोई ग्राहक आ गया। उसे चौड़ा फ्रेम चाहिए। तो कैप्टन कहाँ से लाएगा? तो उसे मूर्तिवाला फ्रेम दे देता है और मूर्ति पर दूसरा फ्रेम लगा देता है। |
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हालदार साहब के लिए कैप्टन सहानुभूति का पात्र था? इसे आप कितना उचित समझते हैं? |
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Answer» हालदार साहब जब कैप्टन को फेरी लगाते हुए देखते हैं तो उनके मुँह से अनायास निकल जाता है, तो बेचारे की अपनी दुकान भी नहीं है। वे चश्मेवाले की देशभक्ति के कारण उससे सहानुभूति रखते हैं। उनके इस विचार से मैं पूर्णतया सहमत हूँ क्योंकि कैप्टन जैसा व्यक्ति सहानुभूति का पात्र है। |
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कैप्टन मूर्ति के चश्मे को बार-बार क्यों बदल दिया करता था? |
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Answer» कैप्टन देशभक्त तथा शहीदों के प्रति आदरभाव रखने वाला व्यक्ति था। वह नेताजी की चश्माविहीन मूर्ति देखकर दुखी होता था। वह मूर्ति पर चश्मा लगा देता था पर किसी ग्राहक द्वारा वैसा ही चश्मा माँगे जाने पर उतारकर उसे दे देता था और मूर्ति पर दूसरा चश्मा लगा दिया करता था। |
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नगरपालिका द्वारा किसकी मूर्ति को कहाँ लगवाने का निर्णय लिया गया? |
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Answer» नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मूर्ति को नगरपालिका द्वारा लगवाने का निर्णय लिया गया। इस मूर्ति को कस्बे के बीचोबीच चौराहे पर लगवाने का फैसला किया गया। ताकि हर आने-जाने वाले की दृष्टि उस पर पड़ सके। |
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‘नाम बड़ा होने से ही कोई बड़ा नहीं हो सकता’ इस कथन की पुष्टि के लिए कवि ने कौन-सा उदाहरण दिया है? |
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Answer» धतूरे को कनक (सोना) कहने से वह बड़ा नहीं हो जाता क्योंकि उससे गहने नहीं बनाए जा सकते। (उसमें बड़ा होने का गुण नहीं है।) |
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