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हालदार साहब केप्टन के प्रति सहानुभूति क्यों रखते थे?

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जब हालदार साहब को पता चला कि नेताजी का चश्मा केप्टन बदलता है तो उन्होंने कल्पना की कि केप्टन शायद कोई फौजी व्यक्ति होगा। किन्तु जब हालदार ने केप्टन को देखा तो अवाक रह गए। वह एक मरियल-सा लंगड़ा व्यक्ति है और आजीविका के लिए फेरी लगाता है। एक हाथ में संदूकची और दूसरे हाथ में चश्मे से टगे बॉस को लेकर फेरी लगाता है।

उसके पास कोई स्थाई दुकान भी नहीं है। यह देखकर हालदार साहब को केप्टन के प्रति सहानुभूति हो गई । वे उसका सम्मान करने लगे। उसकी देशभक्ति पर वे फिदा हो गए जो नेताजी की मूर्ति पर तरह-तरह के चश्मे बदलकर अपनी देशभक्ति का परिचय दे रहा था।



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