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आशय स्पष्ट कीजिए –‘बार-बार सोचते, क्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर घर-गृहस्थी-जवानी-जिंदगी सब कुछ होम देनेवालों पर हंसती है और अपने लिए बिकने के मौके ढूँढ़ती हैं।’ |
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Answer» हालदार साहब लोगों में विलुप्त होती देशभक्ति की भावना से दु:खी है। केप्टन की मृत्यु पर लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ा है। यही हाल हमारे समूचे देश का है। देश के जवान अपनी सारी जिन्दगी देश को समर्पित कर देते हैं अपना घर-बार-गृहस्थी यहाँ तक की जिंदगी भी समर्पित कर देते हैं किन्तु लोगों को ऐसे देशभक्त सैनिकों की कोई परवाह नहीं, उल्टे वे उनका मजाक उड़ाते हैं। जैसे केप्टन का मजाक पानवाले ने उड़ाया था । लोग अपने देश के बारे में बिल्कुल नहीं सोचते । लालच में आकर स्वयं को भी बेचने को तैयार हो जाते हैं। देश में ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जो अपने स्वार्थ के लिए जीते हैं और देशभक्त वीरों को भूल चुके हैं। |
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