This section includes InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
| 28801. |
कामदेव के पुत्र को कौन, किस तरह प्रसन्न रखने का प्रयास कर रहा है? |
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Answer» कामदेव के पुत्र वसंत को खुश रखने के लिए तोता और मोर उससे बातें कर रहे हैं। कोयल उसे हिला-झुलाकर प्रसन्न करते हुए बार-बार ताली बजाकर उसका ध्यान अपनी ओर खींचने का प्रयास कर रही है। |
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| 28802. |
इस संवाद में किस गुरुऋण को चुकाने की बात कही जा रही है ? |
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Answer» परशुराम के गुरु शिव थे। परशुरामजी ने एकबार शिवजी से गुरुदक्षिणा मांगने को कहा। शिवजी ने उनसे शेषनाग का फन गुरुदक्षिणा में मांगा जो परशुरामजी उस समय नहीं दे सके । लक्ष्मण चूंकि शेष के अवतार माने जाते हैं अत: उनका सिर काट कर उसे दक्षिणा में देकर गुरुऋण से मुक्त होने की बात कही गई है। |
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| 28803. |
कवि ने गुलाब का मानवीकरण किस तरह किया है? |
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Answer» कवि देव ने गुलाब को मानवीय क्रियाएँ करते हुए दिखाया है। गुलाब प्रात:काल जब चटककर खिलता है तो चटकने की | आवाज़ सुनकर ऐसा लगता है मानो वह चुटकी बजाकर सोए हुए बालक वसंत को जगा रहा है। इस तरह कवि ने गुलाब का मानवीकरण किया है। |
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| 28804. |
‘पीपर पाथर पूजन’ में …………… अलंकार है ।(a) अनुप्रास(b) रुपक(c) उत्प्रेक्षा(d) उपमा |
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Answer» सही विकल्प है (a) अनुप्रास |
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| 28805. |
परशुराम के क्रोध की प्रतिक्रिया के आधार पर श्रीराम की चारित्रिक विशेषताएं बताइए। |
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Answer» परशुरामजी के क्रोध की प्रतिक्रिया के रूप में श्रीराम के उद्गारों से उनके चरित्र की निम्नलिखित विशेषताएं प्रकट होती है – (क) राम स्वभाव से अत्यंत विनम्र हैं। (ख) वे मृदुभाषी है। (ग) वे धीर-गंभीर हैं। (घ) राम निडर, साहसी हैं। (ड) वे आज्ञाकारी तथा आज्ञापालक है। (ङ) वे बिगड़ी बात को भी संभाल सकने में समर्थ हैं। |
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| 28806. |
सुधा मंदिर के बाहर और आँगन की क्या विशेषता है? |
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Answer» सुधा मंदिर के बाहर उज्ज्वल चाँदनी फैलने से ऐसा लग रहा है मानों चारों ओर दही का समुद्र उमड़ रहा हो। इस मंदिर का आँगन इतना सुंदर और उज्ज्व ल है जैसे पूरे आँगन में दूध का झाग भर गया हो। यह सुधा मंदिर बाहर और भीतर दोनों स्थानों पर कल्पना से भी सुंदर है। |
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| 28807. |
लक्ष्मण ने परशुराम की कटुवाणी को सहने का क्या कारण बताया ? |
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Answer» लक्ष्मण कहते हैं कि आपका जनेऊ देखकर भृगवंशी ब्राह्मण समझकर, अपने क्रोध को रोक आपकी बातों को सहन कर रहा हूं क्योंकि हमारे कुल में देवता, ब्राहाण, भगवान के भक्त और गायों पर वीरता प्रदर्शित नहीं की जाती। |
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| 28808. |
लक्ष्मण ने परशुराम की गर्वोक्ति का उपहास कैसे किया ? |
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Answer» लक्ष्मण ने परशुराम की गर्वोक्ति का उपहास करते हुए कहा कि आप अपने आपको महायोद्धा मानकर भयभीत करने हेतु मुझे बार-बार कुठार दिखा रहे हैं । ऐसे लगता है मानो आप फूंक से पहाड़ उड़ाना चाहते हैं। |
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| 28809. |
लक्ष्मण ने परशुराम के स्वभाव की प्रसिद्धि के विषय में व्यंग्य में क्या कहा ? |
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Answer» लक्ष्मण परशुराम पर व्यंग्य करते हुए कहते हैं कि संसार में ऐसा कौन-सा व्यक्ति है जो आपके शील-स्वभाव से परिचित न हो। आप गात्ऋण तथा पितृऋण से मुक्त हो चुरो हैं। अब आग गुरु ऋण से मुक्त होने के लिए चिंतित है। |
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| 28810. |
परशुराम के चरित्र के विरोधाभास को बताइए। |
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Answer» लक्ष्मण द्वारा अपना परिहास किए जाने से क्रुद्ध परशुरामजी एक तरफ तो लक्ष्मण को बालक जानकर क्षमा करते हैं, उनका वध नहीं करते। उनके मन में कहीं यह भय है कि बालक का वध करने पर उनकी वीरता कलंकित होगी, लोग उन्हें दोष देंगे किन्तु दूसरी ओर परशुराम स्वयं अपनी आत्मप्रशंसा करते समय इसे भूल जाते हैं और अपने फरसे की कठोरता को लेकर यह कह देते हैं कि यह फरसा गर्भ के बच्चों के प्रति भी दया नहीं दिखलाता, तब उन्हें वीरता कलंकित होती हुई नहीं लगती। |
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| 28811. |
कवि देव ने वसंत को राजा कामदेव का पुत्र क्यों कहा है? |
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Answer» कवि देव ने वसंत का परंपरा से अलग वर्णन करते हुए कहा है कि वसंत ऋतु अत्यंत सुंदर और मनोरम है। उसके आने से सर्वत्र खुशी का वातावरण बन जाता है। प्राणी के साथ-साथ यहाँ तक कि संपूर्ण प्रकृति हर्षित हो जाती है। वसंत की भाँति ही राजा कामदेव का पुत्र सुंदर एवं खुशियाँ बढ़ाने वाला है। अतः वसंत को राजा कामदेव का पुत्र कहा गया है। |
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| 28812. |
कवि देव ने वसंत को किस अनूठे रूप में चित्रित किया है? उनकी यह कल्पना अन्य कवियों से किस तरह अलग है? |
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Answer» कवि देव ने ऋतुराज वसंत को पारंपरिक रूप में चित्रित न करके कामदेव के पुत्र (नवजात) के रूप में चित्रित किया है। उनकी यह कल्पना अन्य कवियों से इसलिए अलग है क्योंकि अन्य कवि वसंत के रूप-सौंदर्य का वर्णन करते हैं, जबकि कवि ने वसंत और प्रकृति के कई अंगों का मानवीकरण किया है। |
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| 28813. |
कवि देव ने चाँद का वर्णन परंपरा से हटकर किया है, स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» कवि देव ने चाँदनी रात में अपना पूर्ण सौंदर्य बिखेर रहे चाँद का वर्णन परंपरा से हटकर किया है। चाँद के परंपरागत वर्णन में कवि उसे अत्यंत सुंदर बताते हुए सुंदरी के मुख को चाँद के समान बताते हैं, जबकि कवि देव ने चाँद को राधा के मुँह का प्रतिबिंब बताया है जो स्वच्छ आकाश रूपी दर्पण में बना है। यहाँ परंपरागत उपमान चंद्रमा को उपमेय से हीन दर्शाया गया है। |
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| 28814. |
कवि देव को चाँदनी रात में तारे कैसे दिख रहे हैं? |
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Answer» चाँदनी के उज्ज्वल प्रकाश में स्वच्छ आसमान के चाँद के आसपास बिखरे तारे ऐसे लग रहे हैं, जैसे धरती पर राधा के आसपास सफ़ेद वस्त्र पहने गौरवर्ण वाली सहेलियाँ खड़ी हों। इनके शरीर से मोतियों-सी चमक और मल्लिका की महक उठ रही है। |
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| 28815. |
‘प्यारी राधिका को प्रतिबिंब सो लगत चंद’ – इस पंक्ति का भाव स्पष्ट करते हुए बताएँ कि इसमें कौन-सा अलंकार है? |
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Answer» कवि ने स्वप्न में अपनी प्रेमिका को आलिंगन में लेने का सुख देखा था। उसने सपना देखा था कि उसकी प्रेमिका उसकी बाहों में है। वे मधुर चाँदनी रात में प्रेम की चुलबुली बातें कर रहे हैं। वे खिलखिला रहे हैं, हँस रहे हैं, मनोविनोद कर रहे हैं। उसकी प्रेमिका के गालों की लाली ऊषाकालीन लालिमा को भी मात देने वाली है। |
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| 28816. |
परशुराम और सहस्रबाहु की कथा संक्षेप में बतलाइए। |
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Answer» महाभारत के अनुसार पर परशुराम और सहस्त्रबाहु की कथा इस प्रकार है- परशुराम ऋषि जमदग्नि के पुत्र थे। एक बार राजा कार्तवीर्य सहस्रबाहु शिकार खेलते-खेलते ऋषि जमदग्नि के आश्रम में आ पहुंचा। जमदग्नि के पास ‘कामधेनु’ नामक एक विशिष्ट गाय थी जो मनोरथों को पूर्ण कर ‘ देती थी। सहस्रबाहु ने ऋषि जमदग्नि से कामधेनु की मांग की। ऋषि द्वारा मना कर दिए जाने पर सहस्रबाहु ने बलपूर्वक कामधेनु का अपहरण किया। इस पर क्रोधित हो परशुराम ने सहस्रबाहु का वध कर दिया । ऋषि ने परशुराम के इस कार्य की निंदा की और उनसे प्रायश्चित करने को कहा। उधर सहस्रबाहु के पुत्रों ने क्रोध में आकर ऋषि जमदग्नि की हत्या कर डाली। इस पर पुन:क्रोधित होकर परशुराम ने पृथ्वी को क्षत्रियविहीन करने की प्रतिज्ञा की । क्षत्रियों को अनेक बार हटाकर पृथ्वी को अनेक बार ब्राह्मणों को दान में दिया । |
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| 28817. |
तीसरे कवित्त के आधार पर बताइए कि कवि ने चाँदनी रात की उज्ज्वलता का वर्णन करने के लिए किन-किन उपमानों का प्रयोग किया है? |
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Answer» तीसरे कवित्त में कवि ने चाँदनी रात की उज्ज्वलता के वर्णन के लिए कवि ने निम्नलिखित उपमानों का वर्णन किया है • स्फटिक शिला • सुधा मंदिर • उदधि-दधि • दही का उमड़ता समुद्र • दूध का फेन |
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| 28818. |
कवि ने बादलों से गरजकर बरसने के लिए क्यों कहा है ? |
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Answer» कवि बादलों से गरजकर बरसने का अनुरोध इसलिए कर रहा है क्योंकि गर्जना सुनकर जन-सामान्य में उत्साह का संचार हो जाए और कवि का जो मंतव्य है- क्रांति की अपेक्षा है वह पूरी हो। बादलों की फुहार या रिमझिम वर्षा से मन में कोमल भावों का जन्म होता है, क्रांति के लिए जिस ओज की जरूरत है वह उत्साह बरसने से नहीं अपितु गरजने से ही आ सकता है। अत: कवि बादलों से गर्जना करने का अनुरोध कर रहा है। |
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| 28819. |
पठित कविताओं के आधार पर कवि देव की काव्यगत विशेषताएँ बताइए। |
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Answer» हम महान, प्रसिद्ध और कर्मठ लोगों की आत्मकथा पढ़ना चाहेंगे। क्यों—हमारी रुचि अपने-से महान लोगों में होती है। हम सफल लोगों की जीवन-गाथा पढ़कर जानना चाहते हैं कि उन्होंने सफलता कैसे प्राप्त की? वे विपत्तियों से कैसे जूझे? उनके बारे में पढ़कर हमें कुछ सीखने और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती हैं शिल्प सौंदर्य भाषा – कवि देव ने इन कविताओं में मधुर ब्रजभाषा का प्रयोग किया है। छंद – देव ने कवित्त एवं छंदों का प्रयोग किया है। गुण – देव की इन कविताओं में माधुर्य गुण है।। बिंब – श्रव्य एवं दृश्य दोनों ही बिंब साकार हो उठे हैं। अलंकार – देव ने अपनी कविताओं में अलंकारों का भरपूर प्रयोग किया है, जैसे- अनुप्रास, रूपक, उपमा मानवीकरण आदि। अनुप्रास – कटि किंकिनि की, पट पीत, हिये हुलसै, पूरति पराग, मदन महीप आदि। रूपक – मुखचंद, जग-मंदिर उपमा – तारा-सी तरुनि, उदधि दधि को सो मानवीकरण – ‘पवन झुलावै केकी-कीर बतरावै … चटकारी दै’-पूरी कविता में।। |
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| 28820. |
कविता का शीर्षक उत्साह’ क्यों रखा गया है ? |
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Answer» कवि निराला ने ‘उत्साह’ शीर्षक कविता में बादलों से गरजने का अनुरोध किया ताकि जन-सामान्य में चेतना का संचार हो और वे उत्साहित हो । कवि को विश्वास है कि बादलों की गर्जना सुनकर अनमने-उदासीन लोग भी उत्साहित हो जाएगे। ऐसी अपेक्षा के कारण ही कवि ने कविता का शीर्षक ‘उत्साह’ रखा है। |
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| 28821. |
कवि ने बादलों को बच्चों की कल्पना जैसा क्यों कहा है? |
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Answer» जिस तरह बचपन में बच्चों के मन की मधुर-मधुर कल्पनाएँ निरंतर बदलती रहती है, उसी तरह बादल का सौंदर्य भी पल-पल बदलता रहता है। जिस तरह बाल-कल्पनाएँ मनोहारी होती हैं, उसी तरह बादल की छवि भी मनमोहक प्रतीत होती है। अत: कवि ने बादल के सौंदर्य में बाल मन की कल्पना की है। |
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| 28822. |
विद्युत छबि उर में, कवि, नवजीवन वाले पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» कवि कहता है कि बादल के उर में विद्युत-आभा है, उसमें चमक है, जिसमें ओजस्विता है जो कवि की कविता में नूतन परिवर्तन लाने में सक्षम . है। समाज को परिवर्तित करने की क्षमता है।। |
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| 28823. |
फागुन महीने के सांस लेने का संसार पर क्या प्रभाव पड़ रहा है? |
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Answer» कवि ने फागुन महीने का मानवीकरण किया है। उसके साँस छोड़ने से पूरे परिवेश में सुगंध व्याप्त हो गई है। ऐसे चलनेवाली हवाओं से घर-घर आवाज आ रही है। सुगंध को मानो पर लग गए हैं और उसने सारे आकाश को सुगंध से भर दिया है। |
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| 28824. |
छायावाद की एक खास विशेषता अंतर्मन, मन के भावों का बाहर की दुनिया से सामंजस्य बिठाना। अट नहीं रही है’ कविता की किन पंक्तियों में यह धारणा पुष्ट होती है ? लिखिए। |
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Answer» मानवीकरण द्वारा प्रकृति के माध्यम से मानव-मन का चित्रण छायावाद की प्रमुख विशेषता हैं। ‘अट नहीं रही है’ कविता की निम्नलिखित पंक्तियों में प्रकृति के मानवीकरण के माध्यम से मानव-मन की अभिव्यक्ति हुई है
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| 28825. |
उत्साह कविता का मुख्य भाव स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» उत्साह कविता का मुख्य स्वर ‘ओज’ का है। कवि अपनी ओजस्विता से जन-चेतना लाकर जन-सामान्य में क्रांति लाना चाहता है। कवि बादलों से संपूर्ण आकाश को घेर लेने को कहता है। कविता के स्वर में ओज, क्रांति, विप्लव तथा परिवर्तन का आवेग है। |
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| 28826. |
फागुन के प्राकृतिक सौंदर्य की आभा का मानव जीवन पर पड़नेवाला प्रभाव हमें किन रूपों में दिखाई देता है ? |
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Answer» फागन के सौंदर्य की आभा प्राकृतिक सौंदर्य की आभा है। मनुष्य के मन पर उसका जो प्रभाव पड़ता है, वह होली के रंगो-गीतों तथा लोक गीत नृत्य में दिखलाई देता है। सभी जगह प्रसन्नता दिखलाई देती है। होली के रंग ऊँच-नीच, बच्चे-बूढ़े का भेदभाव मिटकर सबको अपने में सराबोर कर लेते हैं। ये रंग मानव मन की प्रसन्नता को प्रकट करते हैं। |
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| 28827. |
अट नहीं रही है’ कविता में कवि क्या संदेश दे रहा है ? |
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Answer» अट नहीं रही है’ कविता में फागुन महीने की प्रकृति की व्यापकता का चित्रण किया गया है। पेड़-पौधे अपने सौंदर्य का वैभव प्रकट कर रहे हैं। सर्वत्र प्रकृति में उन्माद है। कवि कामना करता है कि व्यक्ति प्राकृतिक सौंदर्य के दर्शन का लाभ उठाएं। थके मादे जीवन में प्रसन्नता का संचार हो, व्यक्ति इतने प्रफुल्लित तथा आनंदित हो कि फागुन के असीम सौंदर्य की भांति ही उसकी खुशियां भी अनंत हो। |
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| 28828. |
‘उत्साह’ कविता में नव-जीवनवाले पदबंध का प्रयोग किसके लिए और क्यों किया गया है? |
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Answer» उत्साह कविता में ‘नव जीवनवाले’ पदबंध का प्रयोग बादल के लिए किया गया है क्योंकि बादल वर्षा द्वारा तप्त धरती की प्यास बुझाकर उसे नया जीवन प्रदान करते हैं। प्रकृति की प्रफुल्लता के साथ सभी जीवों में, मानव में भी उत्साह का संचार होता है। इस संदर्भ में बादलों के लिए ‘नव जीवनवाले’ पदबंध का प्रयोग किया गया है। |
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| 28829. |
फागुन में ऐसा क्या होता है जो अन्य ऋतुओं से भिन्न होता है? |
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Answer» फागुन महीने के पहले पतझर की ऋतु होती है, जिसमें पेड़-पौधे अपनी पत्तियों को झाड़कर निपत्र हो जाते हैं। फागुन में वसंत के आगमन के साथ पेड़-पौधों की शाखाएं नवपल्लवों से भरकर हरी-लाल लगती हैं। पुष्पों की मंदगंध पूरे परिवेश में फैलकर परिवेश को मादक बना देती है। ऐसा केवल वसंत ऋतु के फागुन महीने में ही होता है, और कभी नहीं। |
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| 28830. |
दोनों कविताओं के आधार पर निराला के काव्य की विशेषताएं लिखिए। |
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Answer» निराला के काव्य-शिल्प की निम्नलिखित विशेषताएं देखने को मिलती हैं –
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अट नहीं रही है’ कविता में वर्णित प्रकृति के व्यापक रूप को समझाइए। |
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Answer» अट नहीं रही है शीर्षक निराला की कविता में प्रकृति की व्यापकता का वर्णन इस प्रकार हुआ है
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| 28832. |
कवि की आख फागुन की सुंदरता से क्यों नहीं हट रही है ? |
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Answer» फागन महीने में प्रकृति का सौंदर्य सर्वत्र व्याप्त रहता है। प्रकृति के इस सौंदर्य का मानव मन पर इतना प्रभाव पड़ता है वह प्रकृति के दर्शन से तृप्त ही नहीं हो पा रहा है। फागुन महीने में सर्वत्र व्याप्त प्रकृति की शोभा श्री से वह अघा नहीं रहा, इसलिए उसकी आँख फागुन की सुंदरता से हट नहीं रही। |
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| 28833. |
फागुन में पेड़ों की शाखाएं कैसी लग रही हैं ? क्यों ? |
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Answer» फागुन महीने में पेड़-पौधों की शाखाओं पर नवपल्लव आ गए हैं, शाखाएँ पल्लव-पुष्पों से लद गई है। नए पालवों, किसलयों से आच्छादित शाखाएँ कहीं हरी कहीं लाल दिखाई दे रही हैं। ऐसा लगता है कि फागुन के उर पर मंद-गंध पुष्पों की माला पड़ी हो।फागुन महीने में पेड़-पौधों की शाखाओं पर नवपल्लव आ गए हैं, शाखाएँ पल्लव-पुष्पों से लद गई है। नए पालवों, किसलयों से आच्छादित शाखाएँ कहीं हरी कहीं लाल दिखाई दे रही हैं। ऐसा लगता है कि फागुन के उर पर मंद-गंध पुष्पों की माला पड़ी हो। |
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| 28834. |
उड़ने को नभ में तुम पर-पर भर देते हो’ का आशय स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» फागुन महीने में वातावरण में सर्वत्र गंध व्याप्त रहती है। उसकी मादकता को मानो पंख लग गए हैं जो आकाश में उड़ने को तत्पर है। इसे देखकर मन खुशी से, प्रसन्नता से भरकर कल्पना की उड़ान भरने लगता है। |
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| 28835. |
फागुन माह का पेड़-पौधों पर क्या प्रभाव पड़ा है? |
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Answer» फागुन महीने में सभी पेड़-पौधों की डालों पर नए पत्ते आ गए हैं। उनमें से कुछ हरे हो चुके हैं तो कहीं अभी किसलय हैं जो हलके लाल रंग के हैं। वनस्पतियां रंग-बिरंगे फूलों से लद गई है, ऐसा लगता है मानो पेड़-पौधों के गले में मंद-सुगंधित पुष्पों की माला पड़ी है। ऐसा लगता है पेड़ पौधों ने नवजीवन पा लिया है। |
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| 28836. |
कवि ने बादलों के किन-किन विशेषणों का प्रयोग किया है, स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» कवि ने बादलों को ‘आज्ञात दिशा के घन’ और ‘नवजीवन वाले’ जैसे विशेषणों का प्रयोग किया है। कवि उन्हें अज्ञात दिशा के घन इसलिए कहा है क्योंकि बादल किस दिशा से आकर आकाश में छा गए, पता नहीं। इसके अलावा वे धरती और प्राणियों को नवजीवन देते हैं। |
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| 28837. |
‘उड़ने को नभ में तुम पर-पर कर देते हो’ के आलोक में बताइए कि फागुन लोगों के मन को किस तरह प्रभावित करता है? |
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Answer» ‘उड़ने को नभ में तुम पर-पर कर देते हो’ से ज्ञात होता है कि फागुन में चारों ओर इस तरह सौंदर्य फैल जाता है कि वातावरण मनोरम बन जाता है। रंग-बिरंगे फूलों के खुशबू से हवा में मादकता घुल जाती है। ऐसे में लोगों का मन कल्पनाओं में खोकर उड़ान भरने लगता है। |
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| 28838. |
कवि युवा कवियों से क्या आवान करता है? |
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Answer» कवि युवा कवियों से आह्वान करता है कि वे प्रेम और सौंदर्य की कविताओं की रचना न करके लोगों में जोश और उमंग भरने वाली कविताओं की रचना करें, जो लोगों पर बज्र-सा असर करे और लोग क्रांति के लिए तैयार हो सकें। |
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| 28839. |
कवि ने ‘नवजीवन’ का प्रयोग बादलों के लिए भी किया है। स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» कवि बादलों को कल्याणकारी मानता है। बादल विविध रूपों में जनकल्याण करते हैं। वे अपनी वर्षा से लोगों की बेचैनी दूर करते हैं और तपती धरती का ताप शीतल करके मुरझाई-सी धरती में नया जीवन फेंक देते हैं। वे धरती को फ़सल उगाने योग्य बनाकर लोगों में नवजीवन का संचार करते हैं। |
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| 28840. |
‘अट नहीं रही है’ कविता के आधार पर फागुन में उमड़े प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए। |
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Answer» फागुन का सौंदर्य अन्य ऋतुओं और महीनों से बढ़कर होता है। इस समय चारों ओर हरियाली छा जाती है। खेतों में कुछ फसलें पकने को तैयार होती हैं। सरसों के पीले फूलों की चादर बिछ जाती है। लताएँ और डालियाँ रंग-बिरंगे फूलों से सज जाती हैं। प्राणियों का मन उल्लासमय हुआ जाता है। ऐसा लगता है कि इस महीने में प्राकृतिक सौंदर्य छलक उठा है। |
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| 28841. |
शब्दों का ऐसा प्रयोग जिससे कविता के किसी खास भाव या दृश्य में ध्वन्यात्मक प्रभाव पैदा हो, नाद-सौंदर्य कहलाता है। उत्साह कविता में ऐसे कौन-से शब्द हैं जिनमें नाद-सौंदर्य मौजूद हैं, छाँटकर लिखें। |
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Answer» उत्साह’ कविता में नाद सौंदर्य वाले शब्द निम्नलिखित हैं बादल गरजो! घेर घेर घोर गगन, धाराधर ओ! |
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| 28842. |
कवि निराला बादलों में क्या-क्या संभावनाएँ देखते हैं? |
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Answer» कवि निराला बादलों में निम्नलिखित संभावनाएँ देखते हैं • बादल लोगों को क्रांति लाने योग्य बनाने में समर्थ हैं। • बादल धरती और धरती के प्राणियों दोनों को नवजीवन प्रदान करते हैं। • बादल धरती और लोगों का ताप हरकर शीतलता प्रदान करते हैं। |
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| 28843. |
‘उत्साह’ कविता में बादल किन-किन अर्थों की ओर संकेत करता है? |
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Answer» उत्साह शीर्षक कविता में ‘बादल’ निम्नलिखित अर्थों की ओर संकेत कर रहा है
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| 28844. |
कवि ने क्रांति लाने के लिए किसका आह्वान किया है और क्यों ? |
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Answer» कवि ने क्रांति लाने के लिए बादलों का आह्वान किया है। कवि का मानना है कि बादल क्रांतिदूत हैं। उनके अंदर घोर गर्जना की शक्ति है जो लोगों को जागरूक करने में सक्षम है। इसके अलावा बादलों के हृदय में बिजली छिपी है। |
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| 28845. |
‘विश्व-शलभ’ दीपक के साथ क्यों जल जाना चाहता है? |
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Answer» जिस प्रकार पतंगा दीपक पर मोहित होकर अपने आप को रोक नहीं पाता और राख हो जाता है, उसी प्रकार संपूर्ण विश्व अर्थात् मनुष्य मात्र अपने जीवन को विषय-विकारों, लोभ, मोह तथा धन संग्रह के आकर्षण और आसक्ति में हँसकर जल जाना चाहता है। |
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| 28846. |
जैसे बादल उमड़-घुमड़कर बारिश करते हैं वैसे ही कवि के अंतर्मन में भी भावों के बादल उमड़-घुमड़कर कविता के रूप में अभिव्यक्त होते हैं। ऐसे ही किसी प्राकृतिक सौंदर्य को देखकर अपने उमड़ते भावों को कविता में उतारिए। |
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Answer» ऊपर देखो आसमान में, किसने रंग बिखेरा काला। सूरज जाने कहाँ छिप गया, खो गया उसका कहीं उजाला ॥ देख गगन का काला चेहरा बिजली कुछ मुसकाई । लगा बहाने गगन बनाने, ज्यों बिजली ने आँख दिखाई ॥ कुछ वसुधा में आन समाया॥ वह लाई एक थाल में पानी, उसका मुँह धुलवाया। थोड़ा पानी आसमान में बाकी सब धरती पर आया ।। कुछ टपका फूलों पर जाकर कुछ ने चातक की प्यास बुझाया। कुछ तालों कुछ फसलों तक| |
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| 28847. |
बादल आने से पूर्व प्राणियों की मनोदशा का चित्रण कीजिए। |
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Answer» जब तक आसमान में बादलों का आगमन नहीं हुआ था, गरमी अपने चरम सीमा पर थी। इससे लोग बेचैन, परेशान और उदास थे। उन्हें कहीं भी चैन नहीं था। गरमी ने उनका जीना दूभर कर दिया था। उनका मन कहीं भी नहीं लग रहा था। |
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| 28848. |
कविता में बादल किन-किन अर्थों की ओर संकेत करता है? |
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Answer» कवि ने बच्चे की मुसकान के सौंदर्य को निम्नलिखित बिंबों के माध्यम से व्यक्त किया है 1. बच्चे की मुसकान से मृतक में भी जान आ जाती है। 2. यों लगता है मानो झोंपड़ी में कमल के फूल खिल उठे हों। 3. यों लगता है मानो चट्टानें पिघलकर जलधारा बन गई हों। 4. यों लगता है मानो बबूल से शेफालिका के फूल झरने लगे हों। |
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| 28849. |
‘कहीं साँस लेते हो’ ऐसा कवि ने किसके लिए कहा है और क्यों? |
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Answer» फागुन महीने में तेज हवाएँ चलती हैं जिनसे पत्तियों की सरसराहट के बीच साँय-साँय की आवाज़ आती है। इसे सुनकर ऐसा लगता है, मानो फागुन साँस ले रहा है। कवि इन हवाओं में फागुन के साँस लेने की कल्पना कर रहा है। इस तरह कवि ने फागुन का मानवीकरण किया है। |
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नीचे दी गई काव्य-पंक्तियों को पढ़िए और प्रश्नों का उत्तर दीजिए- जलते नभ में देख असंख्यक, स्नेहहीन नित कितने दीपक; जलमय सागर का उर जलता, विद्युत ले घिरता है बादल ! विहँस विहँस मेरे दीपक जल ! 1. ‘स्नेहहीन दीपक’ से क्या तात्पर्य है? 2. सागर को ‘जलमय’ कहने का क्या अभिप्राय है और उसका हृदय क्यों जलता है? 3. बादलों की क्या विशेषता बताई गई है? 4. कवयित्री दीपक को ‘विहँस विहँस’ जलने के लिए क्यों कह रही हैं? |
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Answer» 1. स्नेहहीन दीपक नभ के तारों को कहा है, जिसका तात्पर्य है कि आकाश में अनगिनत चमकने वाले तारे स्नेहहीन से प्रतीत होते हैं, क्योंकि ये सभी प्रकृतिवश, यंत्रवत् होकर अपना कर्तव्य निभाते हैं। इनमें कोई प्रेम नहीं है तथा परोपकार का कोई भाव नहीं है अर्थात् ये ईश्वर के प्रेम से हीन हैं। इनमें ईश्वर के लिए तड़प नहीं है। 2. सागर को ‘जलमय’ कहने का तात्पर्य है कि वह सदा जल से भरा रहता है। उसका हृदय इसलिए जलता है, क्योंकि वह प्रचंड गरमी में तपता है, जलता है और वाष्प बनकर, बादल बनकर बरसता है अर्थात् उसके हृदय में सदा हलचल होती रहती है। 3. बादलों की यह विशेषता बताई गई है कि इनमें जल के साथ अनंत मात्रा में बिजली और प्रकाश भी भरा हुआ है। 4. कवयित्री ने दीपक को विहँस-विहँसकर जलने के लिए इसलिए कहा है ताकि ईश्वर का पथ आलोकित हो और प्रत्येक प्राणी इसपर चल पड़े। |
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