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कवि ने बादलों को बच्चों की कल्पना जैसा क्यों कहा है?

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जिस तरह बचपन में बच्चों के मन की मधुर-मधुर कल्पनाएँ निरंतर बदलती रहती है, उसी तरह बादल का सौंदर्य भी पल-पल बदलता रहता है। जिस तरह बाल-कल्पनाएँ मनोहारी होती हैं, उसी तरह बादल की छवि भी मनमोहक प्रतीत होती है। अत: कवि ने बादल के सौंदर्य में बाल मन की कल्पना की है।



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