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अट नहीं रही है’ कविता में कवि क्या संदेश दे रहा है ? |
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Answer» अट नहीं रही है’ कविता में फागुन महीने की प्रकृति की व्यापकता का चित्रण किया गया है। पेड़-पौधे अपने सौंदर्य का वैभव प्रकट कर रहे हैं। सर्वत्र प्रकृति में उन्माद है। कवि कामना करता है कि व्यक्ति प्राकृतिक सौंदर्य के दर्शन का लाभ उठाएं। थके मादे जीवन में प्रसन्नता का संचार हो, व्यक्ति इतने प्रफुल्लित तथा आनंदित हो कि फागुन के असीम सौंदर्य की भांति ही उसकी खुशियां भी अनंत हो। |
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