1.

पठित कविताओं के आधार पर कवि देव की काव्यगत विशेषताएँ बताइए।

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हम महान, प्रसिद्ध और कर्मठ लोगों की आत्मकथा पढ़ना चाहेंगे। 

क्यों—हमारी रुचि अपने-से महान लोगों में होती है। हम सफल लोगों की जीवन-गाथा पढ़कर जानना चाहते हैं कि उन्होंने सफलता कैसे प्राप्त की? वे विपत्तियों से कैसे जूझे? उनके बारे में पढ़कर हमें कुछ सीखने और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती हैं 

शिल्प सौंदर्य 

भाषा – कवि देव ने इन कविताओं में मधुर ब्रजभाषा का प्रयोग किया है। 

छंद – देव ने कवित्त एवं छंदों का प्रयोग किया है। 

गुण – देव की इन कविताओं में माधुर्य गुण है।। 

बिंब – श्रव्य एवं दृश्य दोनों ही बिंब साकार हो उठे हैं। 

अलंकार – देव ने अपनी कविताओं में अलंकारों का भरपूर प्रयोग किया है, जैसे- अनुप्रास, रूपक, उपमा मानवीकरण आदि। 

अनुप्रास – कटि किंकिनि की, पट पीत, हिये हुलसै, पूरति पराग, मदन महीप आदि। 

रूपक – मुखचंद, जग-मंदिर 

उपमा – तारा-सी तरुनि, उदधि दधि को सो 

मानवीकरण – ‘पवन झुलावै केकी-कीर बतरावै … चटकारी दै’-पूरी कविता में।।



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