1.

परशुराम के चरित्र के विरोधाभास को बताइए।

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लक्ष्मण द्वारा अपना परिहास किए जाने से क्रुद्ध परशुरामजी एक तरफ तो लक्ष्मण को बालक जानकर क्षमा करते हैं, उनका वध नहीं करते। उनके मन में कहीं यह भय है कि बालक का वध करने पर उनकी वीरता कलंकित होगी, लोग उन्हें दोष देंगे किन्तु दूसरी ओर परशुराम स्वयं अपनी आत्मप्रशंसा करते समय इसे भूल जाते हैं और अपने फरसे की कठोरता को लेकर यह कह देते हैं कि यह फरसा गर्भ के बच्चों के प्रति भी दया नहीं दिखलाता, तब उन्हें वीरता कलंकित होती हुई नहीं लगती।



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