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अट नहीं रही है’ कविता में वर्णित प्रकृति के व्यापक रूप को समझाइए।

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अट नहीं रही है शीर्षक निराला की कविता में प्रकृति की व्यापकता का वर्णन इस प्रकार हुआ है

  1. फागुन महीने में पेड़-पौधों पर सर्वत्र नवपल्लव आ जाते हैं, पुष्प खिल जाते हैं।
  2. प्रकृति का प्रभाव मानव मन पर भी पड़ता है। वह प्रकृति के सौंदर्य से इतना अभिभूत है कि उसकी आँखों में वह पूरी तरह समा नहीं पा रहा है।
  3. मनुष्य का मन प्रकृति के सौंदर्य दर्शन से तृप्त नहीं हो रहा है, वह उसे देखते रहना ही चाहता है।
  4. प्रकृति की प्रफुल्लता से मानव मन भी उत्साहित-उल्लसित रहता है।
  5. फागुन महीने का अतिशय प्राकृतिक सौंदर्य कहीं अट नहीं रहा है, समा नहीं पा रहा है।


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