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पास ही मिल कर उगी हैबीच में अलसी हठीलीदेह की पतली, कमर की है लचीली,नील फूले फूल को सिर पर चढ़ा करकह रही है, जो छुए यहहृदय का दान उसको।भावार्थ : खेत में चने के बगल में ही अलसी भी उग आई है। जिसे देखकर ऐसा लगता है कि जैसे चने की बगल में हठ करके उगी है। वह दुबली-पतली और लचकदार कमरवाली है। उसने बालों में नीले फूल लगा रख्खे हैं। वह कह रही है कि जो उस फूल को छुएगा उसे वह अपना हृदय दान देगी। यहाँ सुंदरी अलसी एक प्रेमातुर नायिका के रूप में है।1. अलसी का पौधा कैसा होता है ?2. अलसी को हठीली क्यों कहा गया है ?3. अलसी को देखकर कवि ने क्या कल्पना की ?4. अलसी कहाँ उगी है, और क्या कह रही है ?5. हृदय का दान उसको’ में कौन-सा अलंकार है ?

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1. अलसी (तीसी) का पौधा पतला, चने की अपेक्षा कुछ लंबा पतला, शाखा रहित तथा लचकदार होता है। .

2. अलसी को हठीली इसलिए कहा गया है कि अक्सर वह चने के साथ बोई जाती है। चने से कुछ लम्बी होने से ऐसा लगता है कि जैसे बलपूर्वक उग आई है। वह लचकदार होने से झुककर तुरंत सीधी हो जाती है।

3. अलसी को देखकर कवि को लगा कि जैसे वह एक दुबली-पतली शरीरवाली खूबसूरत नायिका हो। जिसकी कमर अत्यंत लचकदार है। जो चने को एक के रूप में अपनी ओर आकर्षित कर रही है।

4. अलसी को देखकर कवि को लगा कि जैसे वह एक दुबली-पतली शरीरवाली खूबसूरत नायिका हो। जिसकी कमर अत्यंत लचकदार है। जो चने को एक के रूप में अपनी ओर आकर्षित कर रही है।

5. ‘दूं हृदय का दान उसको’ में मानवीकरण अलंकार है। यहाँ अलसी को जीवंत मानव की तरह चित्रित किया गया है।



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