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चुप खड़ा बगुला डुबाए टाँग जल में,देखते ही मीन चंचलध्यान-निद्रा त्यागता है,चट दबा कर चोंच मेंनीचे गले के डालता है !एक काले माथ वाली चतुर चिड़ियाश्वेत पंखों के झपाटे मार फौरनटूट पड़ती है भरे जल के हृदय परएक उजली चदुल मछलीचोंच पीली में दबा करदूर उड़ती है गगन में !भावार्थ : तालाब में एक किनारे पानी में बगुला ध्यान मग्न खड़ा है, परन्तु जैसे ही कोई चंचल मछली उसे दिखाई देती है यह त्याग देता है। वह चट से उसे चोंच में दबाकर गले के नीचे उतार लेता है। तभी कवि एक काले माथेवाली चालाक चिड़िया देखता है, जिसके पंख सफेद हैं। वह पानी की सतह पर झपट्टा मारती है और एक चमकदार चंचल मछली को अपनी पीली ! चोंच में दबाकर आसमान में उड़ जाती है।1. बगुला ध्यान-निद्रा कब त्यागता है ?2. काले माथेवाली चिड़िया किस तरह शिकार करती है ?3. बगुला किस तरह खड़ा है और क्यों ?4. काले माथेवाली चिड़िया और बगुला के शिकार के तरीके में क्या भिन्नता है ?5. काव्यांश में प्रयुक्त मुहावरे बताइए।

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1. बगुला तालाब में ध्यान-निद्रा में खड़ा रहता है। परन्तु जैसे ही उसे कोई मछली दिखाई देती है, वह ध्यान-निद्रा त्याग कर उसकी चोंच में दबा लेता है।

2. काले माथेवाली चिड़िया पानी की सतह से कुछ ऊँचाई पर मँडराती रहती है। वह जैसे ही जल में किसी मछली को देखती है कि बड़ी चतुराई से मछली पर झपट्टा मारती है और उसे अपनी चोंच में दबाकर आसमान में उड़ जाती है।

3. बगुला एक तपस्वी की तरह खड़ा है। जैसे ही कोई मछली उसके नजदीक आती है, वह उस मछली को चोंच में दबाकर गले के नीचे उतार लेता है।

4. काले माथेवाली चिड़िया पानी की सतह से कुछ ऊँचाई पर मछली की फिराक में मँडराती रहती है। मछली देखते ही पानी में ही मछली पर टूट पड़ती है और उसे चोंच में दबाकर आकाश में उड़ जाती है। बगुला तालाब में ध्यान लगाकर खड़ा रहता है। उसे मछली का इंतजार रहता है। जैसे ही कोई मछली उसके नजदीक आती है, वह अपनी ध्यान निद्रा को त्यागकर मछली को चोंच में दबा लेता है और फिर गले के नीचे उतार लेता है।

5. काव्यांश में ‘गले में डालना’ और ‘झपट्टा मारना’ – ये दो मुहावरे प्रयुक्त हुए हैं।



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