Saved Bookmarks
| 1. |
कवि को स्वयंवर-सा क्यों प्रतीत हो रहा है ? |
|
Answer» कवि खेत की मेड़ पर बैठा जब चारों तरफ नज़र दौड़ाता है तो देखता है कि सरसों, चना, अलसी की फसलें सज-धजकर खड़ी है। चना अपने सिर लाल साफा बाँधे दूल्हे की तरह खड़ा है। अलसी सिर पर फूलों का शृंगार किए हुए हैं। सरसों हाथ पीले करके ब्याह-मंडप में बैठी है। फागुन फाग गा रहा है, जिसे देखकर कवि को स्वयंवर-सा प्रतीत हो रहा है। |
|