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क्या अंतरिक्ष में गिर गई है सारी गेंदेंक्या दीमकों ने खा लिया हैसारी रंग-बिरंगी किताबों कोक्या काले पहाड़ के नीचे दब गए हैं सारे खिलौनेक्या किसी भूकंप में ढह गई हैसारे मदरसों की इमारतेंक्या सारे मैदान, सारे बगीचे और घरों के आँगनखत्म हो गए हैं एकाएकभावार्थ : कवि इस बात से अत्यंत क्षुब्ध है कि बच्चों के खेलने के लिए खिलौने हैं, पढ़ने के लिए किताबें हैं, मौज-मस्ती करने के लिए बाग-बंगीचे और मैदान हैं, किलकारियाँ भरने के लिए घर-आँगन आदि सबकुछ होने के बावजूद बच्चों को काम पर जाना पड़ रहा है ? आगे वह ऐसी संभावना व्यक्त करता है कि क्या बच्चों के खेलने की गेंदें कहीं अंतरिक्ष में खो गई है ? बच्चों के लिखने-पढ़ने और मनोरंजन की रंग-बिरंगी किताबों को दीमकों ने खा लिया है ? क्या उनके सारे खिलौने किसी काले पहाड़ (गरीबी) के नीचे दब गए हैं ? उनके पढ़ने की पाठशालाएँ भूकंप में ढह गई हैं और खेलने के मैदान, बाग-बगीचे और घर-आँगन सबकुछ अचानक खत्म हो गए हैं क्या ?1. कवि की दृष्टि में खिलौने कहाँ दब गए हैं ?2. रंग-बिरंगी किताबों को किसने खा लिया है ?3. कवि बच्चों के लिए क्या-क्या चाहता है ?4. ‘काले पहाड़’ से कवि का क्या आशय है ?5. काव्यांश की भाषा कैसी है ? |
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Answer» 1. कवि की दृष्टि में खिलौने किसी काले पहाड़ के नीचे दब गए हैं । 2. रंग-बिरंगी किताबों को दीमकों ने खा लिया है । 3. कवि बच्चों के लिए खिलौने, रंग-बिरंगी किताबें, खेलने के लिए पार्क-मैदान-आँगन तथा पढ़ने के लिए विद्यालय चाहता है । वह नहीं चाहता कि बच्चे काम पर जाएँ । 4. ‘काले पहाड़’ से कवि का आशय उस गरीबी से है जिसके कारण वे काम पर जाने के लिए मजबूर हैं । उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर उनका शोषण किया जा रहा है । 5. काव्यांश की भाषा खड़ी बोली है, जिसमें तत्सम शब्दों के साथ-साथ उर्दू शब्दों का प्रयोग किया गया है । |
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