This section includes InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
| 29101. |
वसंतऋतु का नाता किसके साथ है. ?(क) मोर(ख) आम(ग) पिक(घ) पपीहा |
|
Answer» वसंत ऋतु का नाता पिक के साथ है। |
|
| 29102. |
निम्नलिखित प्रत्येक वाक्य में से भाववाचक संज्ञा पहचानकर लिखिए :साधारण चीज़ों का अपना महत्त्व होता है।मुख से कड़वे वचन बोलाना अपराध है।मांगने की वृत्ति बड़ी बुरी है।बड़ों को देखकर छोटों की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए।आपत्ति थोड़े समय के लिए हो तो अच्छी है। |
|
Answer» 1. महत्व 2. अपराध 3. पत्ति 4. उपेक्षा 5. आपत्ति |
|
| 29103. |
रहीम ने किन लोगों को पशु से भी बदतर बताया है ? |
|
Answer» रहीम कहते हैं कि आवाज पर रीझकर हिरन अपना शरीर दे देता है, पर वे लोग पशु से भी बदतर है जो किसी पर रीझने के बावजूद उसे कुछ नहीं देते। |
|
| 29104. |
हमारे देश में ही नहीं, संसार की प्रत्येक जाति ने अपनी भाषा में चन्द्रमा के बारे में कहानियाँ गढ़ी हैं और कवियों ने कविताएँ रची हैं। किसी ने उसे रजनीपति माना तो किसी ने उसे रात्रि की देवी कहकर पुकारा। किसी विरहिणी ने उसे अपना दूत बनाया तो किसी ने उसके पीलेपन से क्षुब्ध होकर उसे बूढ़ा और बीमार ही समझ लिया। बालक श्रीराम चन्द्रमा को खिलौना समझकर उसके लिए मचलते हैं तो सूर के। श्रीकृष्ण भी उसके लिए हठ करते हैं। बालक को शान्त करने के लिए एक ही उपाय था; चन्द्रमा की छवि को । पानी में दिखा देना।(अ) प्रस्तुत गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।(स)⦁ मचलते और हठ करते बालक को शान्त करने के लिए क्या उपाय था?⦁ प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने क्या कहा है ?[रजनीपति = रात्रि का स्वामी। विरहिणी = प्रिय अथवा पति से बिछड़ी हुई दुःखी स्त्री। क्षुब्ध = दु:खी।] |
|
Answer» (अ) प्रस्तुत गद्यावतरण हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी’ के गद्य-खण्ड में संकलित श्री जयप्रकाश भारती द्वारा लिखित ‘पानी में चंदा और चाँद पर आदमी’ नामक निबन्ध से अवतरित है। अथवा निम्नवत् लिखिए पाठ का नाम-पानी में चंदा और चाँद पर आदमी। लेखक का नाम-श्री जयप्रकाश भारती। (ब) रेखांकित अंश की व्याख्या-लेखक का कथन है कि निर्जीव चन्द्रमा को कभी रात्रि का पति तो कभी रात की देवी कहा गया। कभी किसी विरह-विधुरा नायिका ने उसे अपना दूत बनाकर उसके माध्यम से अपने प्रियतम के लिए सन्देश भेजा तो कभी उसका पीलापन देखकर उसे बूढ़ा, बीमार और दुर्बल समझ लिया गया। (स) |
|
| 29105. |
दुनिया के सभी भागों में स्त्री-पुरुष और बच्चे रेडियो से कान सटाए बैठे थे, जिनके पास . टेलीविजन थे, वे उसके पर्दे पर आँखें गड़ाए थे। मानवता के सम्पूर्ण इतिहास की सर्वाधिक रोमांचक घटना के एक क्षण के वे भागीदार बन रहे थे – उत्सुकता और कुतूहल के कारण अपने अस्तित्व से बिल्कुल बेखबर हो गये थे।(अ) उपर्युक्त गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।(स) रोमांचक घटना के भागीदार कौन बन रहे थे?[ दुनिया = विश्व। सटाए = मिलाकर। गड़ाए = एकटक देखना। भागीदार = हिस्सेदार। बेखबर = अनजान।] |
|
Answer» (अ) प्रस्तुत गद्यावतरण हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी’ के गद्य-खण्ड में संकलित श्री जयप्रकाश भारती द्वारा लिखित ‘पानी में चंदा और चाँद पर आदमी’ नामक निबन्ध से अवतरित है। अथवा निम्नवत् लिखिए पाठ का नाम-पानी में चंदा और चाँद पर आदमी। लेखक का नाम-श्री जयप्रकाश भारती। (ब) रेखांकित अंश की व्याख्या-लेखक का कथन है कि सबसे अधिक रोमांचकारी घटना (मनुष्य का चाँद पर पहुँचना) को देखने और सुनने के लिए टी०वी० या रेडियो के पास बैठकर पूरी दुनिया के सभी व्यक्ति एक पल के लिए इसके हिस्सेदार बन रहे थे। जिज्ञासा और बेचैनी के कारण वे अपनी हस्ती से बिल्कुल अनजान हो गये थे। (स) दुनिया के सभी भागों के स्त्री-पुरुष और बच्चे रोमांचक घटना के भागीदार बन रहे थे। ” |
|
| 29106. |
जयप्रकाश भारती के जीवन-परिचय एवं साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डालिए।याजयप्रकाश भारती का जीवन-परिचय दीजिए और उनकी एक रचना का नामोल्लेख कीजिए। |
|
Answer» पत्रकार एवं हिन्दी के प्रसिद्ध लेखक श्री जयप्रकाश भारती ने साहित्यिक शैली में वैज्ञानिक लेख लिखने और साक्षरता प्रसार के कार्य में विशेष ख्याति प्राप्त की है। ये सफल निबन्धकार, कहानीकार एवं रिपोर्ताज लेखक हैं। गम्भीर विषय को भी रुचिकर और बोधगम्य बनाकर प्रस्तुत करने में आप सिद्धहस्त हैं। जीवन-परिचय—श्री जयप्रकाश भारती का जन्म मेरठ नगर के मध्यमवर्गीय प्रतिष्ठित परिवार में 2 जनवरी, सन् 1936 ई० को हुआ था। इनके पिता श्री रघुनाथ सहाय मेरठ के प्रसिद्ध वकील, पुराने कांग्रेसी और समाज-सेवी व्यक्ति थे। इन्होंने मेरठ में अध्ययन कर बी० एस-सी० की परीक्षा उत्तीर्ण की और छात्र-जीवन से ही समाज-सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि के रूप में समाज-सेवा की। मेरठ में साक्षरता-प्रसार के लिए इन्होंने कई वर्षों तक प्रौढ़ रात्रि-पाठशाला का नि:शुल्क संचालन कर उल्लेखनीय कार्य किया। इन्होंने सम्पादन कला-विशारद’ की परीक्षा उत्तीर्ण करके मेरठ से प्रकाशित होने वाले दैनिक प्रभात’ और दिल्ली से प्रकाशित होने वाले ‘नवभारत टाइम्स’ में व्यावहारिक प्रशिक्षण तथा ‘साक्षरता-निकेतन’ लखनऊ में नवसाक्षर साहित्य के लेखन का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया। इन्होंने कई वर्षों तक दिल्ली से प्रकाशित होने वाले ‘साप्ताहिक हिन्दुस्तान में सह-सम्पादक के रूप में कार्य किया। तत्पश्चात् दिल्ली में हिन्दुस्तान टाइम्स द्वारा संचालित सुप्रसिद्ध बाल पत्रिका ‘नंदन’ के सम्पादक के रूप में कार्य करते रहे। दिनांक 5 फरवरी, 2005 को श्री भारती जी का देहावसान हो गया। रचनाएँ-भारती जी की अनेक मौलिक एवं लगभग सौ सम्पादित पुस्तकें हैं। इनकी उल्लेखनीय रचनाएँ अग्रलिखित हैं ⦁ मौलिक रचनाएँ-‘हिमालय की पुकार’, ‘अनन्त आकाश : अथाह सागर’ (ये दोनों पुस्तकें यूनेस्को द्वारा पुरस्कृत हैं); ‘विज्ञान की विभूतियाँ’, ‘देश हमारा’, ‘चलो चाँद पर चलें’ (ये तीनों पुस्तकें भारत सरकार द्वारा पुरस्कृत हैं), ‘सरदार भगत सिंह’, ‘हमारे गौरव के प्रतीक’, ‘अस्त्र-शस्त्र’, ‘आदिम युग से अणु युग तक’, ‘उनका बचपन यूँ बीता’, ‘ऐसे थे हमारे बापू’ , “लोकमान्य तिलक’, ‘बर्फ की गुड़िया’, ‘संयुक्त राष्ट्र संघ’, ‘भारत को संविधान’, ‘दुनिया रंग-बिरंगी’ आदि। ⦁ सम्पादित रचनाएँ-‘भारत की प्रतिनिधि लोककथाएँ तथा किरणमाला’ (तीन भागों में) आदि। ⦁ सम्पादन-कार्य–‘साप्ताहिक हिन्दुस्तान में सह-सम्पादक एवं ‘नंदन’ (बाल-पत्रिका) के सम्पादक। |
|
| 29107. |
अभी चन्द्रमा के लिए अनेक उड़ानें होंगी। दूसरे ग्रहों के लिए मानवरहित यान छोड़े जा रहे हैं। अन्तरिक्ष में परिक्रमा करने वाला स्टेशन स्थापित करने की दिशा में तेजी से प्रयत्न किये जा रहे हैं। ऐसा स्टेशन बन जाने पर ब्रह्माण्ड के रहस्यों की पर्ते खोलने में काफी सहायता मिलेगी।यह पृथ्वी मानव के लिए पालने के समान है। वह हमेशा-हमेशा के लिए इसकी परिधि में बँधा हुआ नहीं रह सकता। अज्ञात की खोज में वह कहाँ तक पहुँचेगा, कौन कह सकता है?(अ) प्रस्तुत गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।(स)⦁ प्रस्तुत गद्यांश में लेखक क्या कहना चाहता है ?⦁ लेखक ने चन्द्र-अन्तरिक्ष अभियानों के आगामी प्रयत्नों के बारे में क्या लिखा है ? वर्तमान समय में इसकी क्या स्थिति है ? |
|
Answer» (अ) प्रस्तुत गद्यावतरण हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी’ के गद्य-खण्ड में संकलित श्री जयप्रकाश भारती द्वारा लिखित ‘पानी में चंदा और चाँद पर आदमी’ नामक निबन्ध से अवतरित है। अथवा निम्नवत् लिखिए पाठ का नाम-पानी में चंदा और चाँद पर आदमी। लेखक का नाम-श्री जयप्रकाश भारती। (ब) रेखांकित अंश की व्याख्या-लेखक कहता है कि व्यक्ति पालने में केवल अपना बचपन गुजारता है। जैसे-जैसे वह बचपन से किशोरावस्था की ओर अग्रसर होता है, वैसे-वैसे उसका पालने से मोहभंग होता जाता है और एक दिन वह पालने की परिधि से बाहर हो जाता है। यह पृथ्वी भी मनुष्य के लिए एक पालने के समान ही है और वह निरन्तर उसकी परिधि से बाहर जाने का प्रयत्न करता रहता है। अन्तरिक्ष अथवा अज्ञात की अनेक खोजें उसके इन्हीं प्रयत्नों का परिणाम हैं। इस अनन्त-असीम अन्तरिक्ष अथवा अन्य स्थानों में अज्ञात रहस्यों की खोज करता हुआ वह कहाँ तक पहुँचेगा, इसकी भविष्यवाणी करना असम्भव है। (स) |
|
| 29108. |
मानव मन सदा से ही अज्ञात के रहस्यों को खोलने और जानने-समझने को उत्सुक रहा है। जहाँ तक वह नहीं पहुंच सकता था, वहाँ वह कल्पना के पंखों पर उड़कर पहुंचा। उसकी अनगढ़ और अविश्वसनीय कथाएँ उसे सत्य के निकट पहुँचाने में प्रेरणा-शक्ति का काम करती रहीं। अन्तरिक्ष युग का सूत्रपात 4 अक्टूबर, 1956 को हुआ था, जब सोवियत रूस ने अपना पहला स्पुतनिक छोड़ा। प्रथम अन्तरिक्ष यात्री बनने का गौरव यूरी गागरिन को प्राप्त हुआ।(अ) प्रस्तुत गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।(स)⦁ मानव की विकास यात्रा को महादेवी जी ने कैसे स्पष्ट किया है ?⦁ प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने मनुष्य की किस प्रवृत्ति को स्पष्ट किया है ?⦁ अन्तरिक्ष युग का सूत्रपात कब हुआ? [अनगढ़ = बेडौल।] |
|
Answer» (अ) प्रस्तुत गद्यावतरण हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी’ के गद्य-खण्ड में संकलित श्री जयप्रकाश भारती द्वारा लिखित ‘पानी में चंदा और चाँद पर आदमी’ नामक निबन्ध से अवतरित है। अथवा निम्नवत् लिखिए पाठ का नाम-पानी में चंदा और चाँद पर आदमी। लेखक का नाम-श्री जयप्रकाश भारती। (ब) रेखांकित अंश की व्याख्या-लेखक कहता है कि मनुष्य को मन प्राचीनकाल से ही नयी-नयी बातों को जानने के लिए उत्सुक रहा है। वह सदा अनजाने रहस्यों को सुलझाकर उन्हें जानने और समझने में अपनी शक्ति का उपयोग करता रहा है। जहाँ तक सम्भव हुआ, मानव ने अपनी कल्पना द्वारा उसे जानने की चेष्टा की। उसने अज्ञात रहस्यों के विषय में अनेक कल्पनाओं का निर्माण किया। चाहे उसे वे कल्पनाएँ सत्य से परे निराधार मालूम पड़ीं, लेकिन वह उन्हीं कल्पनाओं को साकार करने का प्रयास करता रहा और उनसे ही सत्य के निकट पहुँचने की प्रेरणा प्राप्त करता रहा। (स) |
|
| 29109. |
मानव को चन्द्रमा पर उतारने का यह सर्वप्रथम प्रयास होते हुए भी असाधारण रूप से सफल रहा। यद्यपि हर क्षण, हर पग पर खतरे थे। चन्द्रतल पर मानव के पाँव के निशान उसके द्वारा वैज्ञानिक तथा तकनीकी क्षेत्र में की गयी असाधारण प्रगति के प्रतीक हैं। जिस क्षण डगमग-डगमग करते मानव के पग उस धुलि-धूसरित अनछुई सतह पर पड़े तो मानो वह हजारों-लाखों साल से पालित-पोषित सैकड़ों अन्धविश्वासों तथा कपोल-कल्पनाओं पर पद-प्रहार ही हुआ। कवियों की कल्पना के सलोने चाँद को वैज्ञानिकों ने बदसूरत और जीवनहीन करार दे दिया-भला अब चन्द्रमुखी कहलाना किसे रुचिकर लगेगा।(अ) प्रस्तुत गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए अथवा गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।(ब) रेखांकित अंशों की व्याख्या कीजिए।. .(स)⦁ चन्द्रमुखी कहलाना क्यों रुचिकर नहीं लगेगा ?⦁ जिस समय मनुष्य के कदम चन्द्रमा पर पड़े, उस समय क्या हुआ ? या मानव के चन्द्रमा पर उतरने का क्या भाव प्रतिध्वनित हुआ ?⦁ मानव द्वारा चन्द्रमा पर उतरने का प्रयास कैसा रहा ?[डगमग-डगमग करते हुए = लड़खड़ाते हुए। धूलि-धूसरित = धूल से सने हुए। अनछुई = जो किसी के द्वारा छुई हुई न हो। पालित-पोषित = पालन-पोषण किये गये। कपोल-कल्पना = झूठी कल्पना। पद-प्रहार = पैरों का आघात, (यहाँ पर) किसी धारणा को एकदम ही नकार देना। सलोने = सुन्दर। जीवनहीन = जीवों से रहित। करार देना = नाम देना। रुचिकर = अच्छा।] |
|
Answer» (अ) प्रस्तुत गद्यावतरण हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी’ के गद्य-खण्ड में संकलित श्री जयप्रकाश भारती द्वारा लिखित ‘पानी में चंदा और चाँद पर आदमी’ नामक निबन्ध से अवतरित है। अथवा निम्नवत् लिखिए पाठ का नाम-पानी में चंदा और चाँद पर आदमी। लेखक का नाम-श्री जयप्रकाश भारती। (ब) प्रथम रेखांकित अंश की व्याख्या-लेखक श्री जयप्रकाश भारती जी कहते हैं कि चन्द्रमा पर उतरने के कई सफल प्रयास पहले भी किये जा चुके थे। लेकिन चन्द्रमा पर मनुष्य को उतारने का। यह प्रथम प्रयास था, जो कि अमेरिका के द्वारा किया गया था। यह प्रयास उम्मीद से अधिक सफल रहा। यद्यपि चन्द्रमा पर मनुष्य के रखे गये प्रत्येक कदम और बिताये गये प्रत्येक क्षण खतरे से भरे हुए थे, तथापि दोनों ही अन्तरिक्ष यात्री अपने तीसरे साथी के साथ पृथ्वी पर सकुशल वापस लौट आये।। द्वितीय रेखांकित अंश की व्याख्या-लेखक श्री जयप्रकाश भारती जी कहते हैं कि जैसे ही अमेरिकी चन्द्रयान चन्द्रमा पर पहुंचा और मानव ने अपने लड़खड़ाते हुए कदम सफलतापूर्वक चन्द्रमा के धरातल पर रखे, वैसे ही प्राचीनकाल से आज तक के उसके बारे में चले आ रहे सारे अन्धविश्वास एवं निरर्थक अनुमान असत्य प्रमाणित हो गये। चन्द्रमा पर पहुँचने पर उसके विषय में यथार्थ सत्य सामने आ गया और सारी कल्पनाएँ झूठी सिद्ध हो गयीं। हमारे प्राचीन कवि चन्द्रमा को सुन्दर कहते थे और नारियों के सुन्दर मुख की तुलना चन्द्रमा से किया करते थे, लेकिन चन्द्रतल पर पहुँचकर वैज्ञानिकों ने कवियों की इन भ्रान्तियों को असत्य सिद्ध कर दिया। उन्होंने बताया कि चन्द्रमा बहुत कुरूप, ऊबड़-खाबड़ और जीवनहीन है। यदि कोई व्यक्ति किसी सुन्दरी को अब चन्द्रमुखी कहेगा तो अब वह अपने को चन्द्रमुखी (कुरूप और निर्जीव मुख वाली) कहलाना कैसे पसन्द करेगी ? (स) |
|
| 29110. |
दोहे का भावार्थ लिखें:बिना तेज के पुरुष की, अवशि अवज्ञा होय।आगि बुझे ज्यों राखको, आपु छुवै सब कोय ॥१०॥ |
|
Answer» तुलसीदास जी कहते हैं कि तेजहीन मनुष्य का संसार में निश्चय ही अपमान होता है। अतः हर एक मनुष्य को अपना तेज, स्वाभिमान को बचाए रखना चाहिए। जिस प्रकार अग्नि के बुझ जाने पर, राख को न केवल स्पर्श करना सरल हो जाता है, अपितु उसे तो लोग रौंद भी देते हैं। वही जलती हुई आग का स्पर्श करना सहज नहीं होता है। उसी प्रकार तेजहीन मनुष्य का अपमान करना सरल है, परन्तु तेजयुक्त व्यक्ति का अपमान कोई नहीं कर सकता। |
|
| 29111. |
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक शब्द में लिखिए :गरीबों पर दयादृष्टि करनेवाले किसके समान हैं?अपने-पराये की पहचान किस समय होती है?माँगने को रहीम किसके समान बताते हैं? |
|
Answer» 1. दीनबन्धु या भगवान के समान 2. विपत्ति के समय 3. मृत्यु के समान |
|
| 29112. |
थोड़े दिन की विपत्ति भली क्यों है? |
|
Answer» थोड़े दिन की विपत्ति भली है, क्योंकि यह हमारा हित और अहित चाहनेवालों की पहचान करा देती है। |
|
| 29113. |
ज्ञानी पुरुष धन-संपत्ति का संग्रह क्यों करते हैं? |
|
Answer» ज्ञानी पुरुष धन-संपत्ति का संग्रह परोपकार के लिए करते हैं। |
|
| 29114. |
निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध करके लिखिए :क्लास में प्रत्येक लड़के उत्तीर्ण होंगे।मेरी आम सड़ी हुई है।यह घर में कौन रहता है?वह आदमी को दौलत का घमंड है।मैं मेरा काम करता हूँ। |
|
Answer» 1. क्लास में प्रत्येक लड़का उत्तीर्ण होगा। 2. मेरा आम सड़ा हुआ है। 3. इस घर में कौन रहता है? 4. उस आदमी को दौलत का घमंड है। 5. मैं अपना काम करता हूँ। |
|
| 29115. |
हितकारी और अहितकारी की पहचान कब होती है? |
|
Answer» हितकारी और अहितकारी की पहचान विपत्ति के समय होती है। |
|
| 29116. |
रहीम ने सब को साधने का क्या उपाय बताया है? |
|
Answer» रहीम जी मानते हैं कि एक की साधना पूरी तरह करने से सब सध जाते हैं तथा मनुष्य को अपना लक्ष्य भी प्राप्त हो जाता है। |
|
| 29117. |
निम्नलिखित शब्दों के प्रत्यय पहचानकर लिखिए :मित्रतामहत्त्वविपत्तिमांगनेवालाहितकारीजबानवालाऊपरीबुराईउपयोगिताप्रभावितअपराधीबीमारीमुसाफिरीरिश्तेदारबुद्धिमानव्यक्तित्वसहायता |
|
Answer» 1. मित्रता – मित्र + ता 2. महत्त्व – महत् + त्व 3. विपत्ति – विपत्त + 4. मांगनेवाला – मांगना + वाला 5. हितकारी – हित + कारी 6. जबानवाला – जबान + वाला 7. ऊपरी – ऊपर + ई 8. बुराई – बुरा + ई 9. उपयोगिता – उपयोग + इता 10. प्रभावित – प्रभाव + इत 11. अपराधी – अपराध + ई 12. बीमारी – बीमार + ई 13. मुसाफिरी – मुसाफिर + ई 14. रिश्तेदार – रिश्ता + दार 15. बुद्धिमान – बुद्धि + मान 16. व्यक्तित्व – व्यक्ति + त्व 17. सहायता – सहाय + ता |
|
| 29118. |
सच्चे मित्र अपने मित्र की विपत्ति के समय क्या करते हैं? |
|
Answer» सच्चे मित्र अपने मित्र की विपत्ति के समय उसका साथ देकर उसकी सहायता भी करते हैं। |
|
| 29119. |
निम्नलिखित शब्दसमूह के लिए एक शब्द लिखिए :दूसरों पर की गई भलाईअपने परिवार के रिश्तेदारगरीबों के बन्धुजिसे किसी की सहायता नहीं है |
|
Answer» 1. परोपकार 2. सगे 3. दीनबन्धु 4. असहाय |
|
| 29120. |
सीसे क्यों नहीं चाहिए? |
|
Answer» प्रश्न का कुछ अर्थ नहीं निकलता। अत: इस प्रश्न का उत्तर नहीं दिया गया। |
|
| 29121. |
दोहे का भावार्थ लिखें:मधुर बचन तें जात मिटै, उत्तम जन अभिमान|तनक सीत जलसों मिटै, जैसे दूध उफान ॥५॥ |
|
Answer» तुलसीदास जी कहते हैं कि मधुर वचनों से या मीठी वाणी से अच्छे लोगों का अभिमान भी मिट जाता है। जैसे कि उफनते हुए गरम दूध में थोड़ा-सा ही शीतल (ठंडा) जल डाल देंगे, तो वह शांत हो जाएगा अर्थात् उफनेगा नहीं। इस प्रकार मधुर वचन का लाभ है। |
|
| 29122. |
ठंडे जल के छींटे से किसका उफान मिट जाता है? (एक शब्द में उत्तर दें) |
|
Answer» सही उत्तर है दूध का |
|
| 29123. |
मधुर वचनों से क्या लाभ हैं? |
|
Answer» मधुर वचनों से क्रोधी के क्रोध को शांत तथा अभिमानी के गर्व को शांत किया जा सकता है। |
|
| 29124. |
निम्नलिखित शब्दों की भाववाचक संज्ञा बनाएं:लघु = ———–मादक = ———–एक = ———–मधुर। = ——— |
|
Answer» शब्द – भाववाचक संज्ञा लघु – लघुता मादक – मादकता एक – एकता मधुर – मधुरता। |
|
| 29125. |
उत्तम प्रवृत्ति का क्या लक्षण हैं? |
|
Answer» उत्तम प्रकृति का यह लक्षण है कि बुराई के बीच रहकर भी वह अपनी अच्छाई नहीं छोड़ती। |
|
| 29126. |
निम्नलिखित शब्दों के विरोधी शब्द लिखिएसज्जनमित्रविपत्तिपरोपकारसंभवअंगार |
|
Answer» 1. दुर्जन 2. शत्रु 3. सुख 4. अपरोपकार 5. असंभव 6. ओला |
|
| 29127. |
निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए :तरुवरकसौटीमीतलघुदीनबन्धुप्रकृतिहितखीरासुजानउत्तमदीनभुजंग |
|
Answer» 1. वृक्ष 2. परीक्षा 3. मित्र 4. छोटा 5. भगवान 6. स्वभाव 7. भलाई 8. ककड़ी 9. सजन 10. श्रेष्ठ 11. गरीब 12. साप |
|
| 29128. |
निम्नलिखित पद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या करेंमधुर वचन ते जात मिट, उत्तम जन अभिमान।तनिक सीत जल सो मिटे, जैसे दूध उफान।। |
|
Answer» कवि कहता है कि मधुर वचनों अथवा मीठी वाणी के बोलों से किसी भी अभिमानी व्यक्ति के गर्व को उसी प्रकार से शांत किया जा सकता है जैसे थोड़े से ठंडे पानी के छींटों से उबलते हुए दूध के उफ़ान को कम कर लिया जाता है। |
|
| 29129. |
निम्नलिखित शब्दों के विशेषण शब्द बनाएं:प्रकृति = ———–विष = ———–बल = ———–मूल = ———–हित = ———–व्यापार। = ———– |
|
Answer» शब्द विशेषण प्रकृति – प्राकृतिक विष – विषैला बल – बलवान मूल – मूलभूत हित – हितैषी व्यापार– व्यापारिक |
|
| 29130. |
निम्नलिखित शब्दों के विपरीत शब्द लिखें:सम्पत्ति = —उत्तम = —हित = —आशा = ———–बैर। = ———– |
|
Answer» शब्द – विपरीत शब्द संपति – विपत्ति उत्तम – अधम हित – अहित। आशा – निराशा बैर – मिलाप। |
|
| 29131. |
मनोहर सिंह कैसा जीवन जीने वाला व्यक्ति है? |
|
Answer» मनोहर सिंह साधारण जीवन जीने वाला व्यक्ति है। |
|
| 29132. |
नीम का पेड़ किसने और कब लगाया था? |
|
Answer» नीम का पेड़ मनोहर के पिता ने बचपन में लगाया था। |
|
| 29133. |
ऋण का पाप कैसे कटता है? |
|
Answer» ऋण का पाप ऋण चुका देने से कटता है। |
|
| 29134. |
अशिक्षित का हृदय कहानी की भाषा-शैली पर प्रकाश डालिए। |
|
Answer» कौशिक जी की कहानियों की भाषा प्रायः सरल, वातावरण, परिस्थिति तथा पात्र के व्यक्तित्व के अनुकूल होती है। उनकी भाषा में कहीं भी क्लिष्टता नहीं। भाषा बोलचाल के निकट है। यथा- |
|
| 29135. |
‘अशिक्षित का हृदय’ कहानी के उद्देश्य पर प्रकाश डालिए। |
|
Answer» ‘अशिक्षित का हृदय’ कहानी एक सोद्देश्य पूर्ण कहानी है। इस कहानी में एक अशिक्षित ग्रामीण मनोहर के निश्छल तथा स्नेहपूर्ण हृदय का चित्रण है। व्यक्ति का व्यक्ति के प्रति अनन्य प्रेम तो अक्सर सुनने को मिलता है। लेकिन एक पेड़ के प्रति प्रेम देखने को कम मिलता है जो इस कहानी में व्यक्त हुआ है। लेखक ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब मनुष्य के पास धन-दौलत आती है तो वह मित्रों की सहायता तो दूर सीधे मुँह बात तक नहीं करता। मनोहर की भी सहायता गाँव भर में किसी ने नहीं की। |
|
| 29136. |
‘अशिक्षित का हृदय’ कहानी में सबसे अच्छा चरित्र-चित्रण किसका है और क्यों? |
|
Answer» कौशिक जी ने अपनी कहानियों के अंतर्गत विभिन्न मानव-मनोवृत्तियों का चित्रण करने के लिए विविध प्रकार के चरित्रों का चयन किया है। पात्रों के स्वभाव, व्यवहार प्रकृति एवं प्रवृत्तियों का चित्रण कौशिक कहानियों की उल्लेखनीय विशेषता है। प्रस्तुत कहानी में पात्रों की संख्या पर्याप्त है पर प्रमुखता केवल तीन पात्रों को प्राप्त हुई है(1) मनोहर सिंह (2) तेजा सिंह (3) ठाकुर शिवपाल सिंह। इनमें भी मनोहर सिंह का चरित्र अधिक आकर्षक है क्योंकि लेखक का लक्ष्य उसी के चरित्र को उजागर करना है। शेष पात्र भी उसी के चरित्र को उभारने में सहायक हैं। वह परिश्रमी, वचन का पक्का, ईमानदार, साहसी, रिश्ते-नातों को निभाने वाला, प्रकृति प्रेमी और स्पष्टवादी स्वभाव का व्यक्ति था। उसमें छल-कपट कदापि नहीं था। वही कहानी का मुख्य पात्र था। सारी कहानी उसी के चरित्र से जुड़ी हुई है। उसी का चरित्र कहानी का आरंभ और अंत है। |
|
| 29137. |
मनोहर सिंह के पिता का देहान्त हुए कितने वर्ष हो गए थे? |
|
Answer» मनोहर सिंह के पिता का देहान्त हुए चालीस वर्ष हो गए थे। |
|
| 29138. |
मनोहर के पिता का देहांत हुए कितने वर्ष बीत चुके थे? |
|
Answer» मनोहर के पिता का देहांत हुए चालीस वर्ष बीत चुके थे। |
|
| 29139. |
ठाकुर शिवपाल सिंह रुपये न लौटाए जाने पर किस बात की धमकी देता है? |
|
Answer» ठाकुर शिवपाल सिंह रुपये न लौटाए जाने पर नीम का पेड़ काटने की धमकी देता है। |
|
| 29140. |
नीम का वृक्ष किसके हाथ का लगाया हुआ था? |
|
Answer» नीम का वृक्ष बूढ़े मनोहर सिंह के पिता के हाथ का लगाया हुआ था। |
|
| 29141. |
तेजा के मन में मनोहर के प्रति सहानुभूति कब जागी ? |
|
Answer» तेजा ने जब मनोहर सिंह से पेड़ के महत्त्व तथा पेड़ की कहानी को सुना तो उसके हृदय में मनोहर के लिए सहानुभूति जागी। |
|
| 29142. |
दोपहर ढलने के बाद कितने आदमी क्या लेकर आते हुए दिखाई दिए? |
|
Answer» दोपहर ढलने के बाद दो-चार आदमी कुलहाड़ियाँ लेकर आते दिखाए दिए। |
|
| 29143. |
‘अशिक्षित का हृदय’ कहानी के आधार पर ठाकुर शिवपाल सिंह के चरित्र पर प्रकाश डालिए। |
|
Answer» ठाकुर शिवपाल सिंह ‘अशिक्षित का हृदय’ कहानी में एक शोषक ज़मींदार के रूप में हमारे सामने आता है। वह ऋण देकर उसे कठोरता से वसूल करता है। वह मानवीय सहानुभूति से वंचित है। मनोहर सिंह से रुपये न मिलने पर वह उसका पेड़ कटवाकर उसके स्वाभिमान को ठेस पहुँचाना चाहता है। यही नहीं वह रुपये स्वीकार करने से भी इन्कार करता है। ठाकुर शिवपाल गुस्सैल, स्वार्थी और लालची प्रवृत्ति का व्यक्त है। लेखक ने ठाकुर के माध्यम से उन ज़मींदारों की शोषण प्रवृत्ति का यथार्थ चित्रण किया है जो किसानों के प्रति कठोर व्यवहार करते हैं और उनको नीचा दिखाने के लिए अपनी शक्ति का दुरुपयोग करते हैं। |
|
| 29144. |
मनोहर सिंह ने अपनी आपबीती किसे कह सुनाई थी? |
|
Answer» मनोहर सिंह ने तेजा को अपनी आपबीती कह सुनाई थी। |
|
| 29145. |
मनोहर सिंह की किस बात से तेजा सिंह प्रभावित हुआ? |
|
Answer» मनोहर सिंह ठाकुर शिवपाल सिंह के कर्ज में दबा हुआ था। वह चाहकर भी उसका ऋण न उतार सका था। तेजा सिंह मनोहर को चाचा कह कर बुलाता था। एक दिन जब मनोहर दुःखी, निराश होकर पेड़ के नीचे बैठा था तब वृद्ध मनोहर सिंह का कष्ट तथा आप बीती सुनकर तेजा को बहुत दुःख हुआ। तेजा ने बड़ी ही विनम्रता से मनोहर को कहा-“दस-पाँच रुपये की बात होती, तो मैं ही कहीं से ला देता।” इतना सुनकर मनोहर बहुत खुश हुआ। उसने आशीर्वाद दिया। मनोहर सिंह की एक पेड़ की रक्षा के लिए मर मिटने के लिए तैयार हो जाने की बात से तेजा सिंह प्रभावित हुआ था। |
|
| 29146. |
ठाकुर साहब रुपये लेकर चुपचाप क्यों चले गए थे? |
|
Answer» ठाकुर सिंह को विश्वास हो गया था कि मनोहर सिंह को कहीं से भी रुपए नहीं मिलेंगे। इसलिए उसने भरी सभा में रुपए लेकर पेड़ न कटवाने की बात कह दी थी। जब तेजा के पिता ने 25 रुपए ठाकुर की ओर बढ़ा दिये तो ठाकुर के चेहरे का रंग उड़ गया। उन्होंने तो केवल सभा में उदारता का परिचय देने के लिए रुपए लेने की बात कर दी थी। लेकिन अब पेड़ कटवाने के पक्ष में उनके पास कोई तर्क नहीं था। अतः वे खामोश बने रहे। उन्होंने पच्चीसतीस आदमियों के सामने रुपए स्वीकार कर पेड़ छोड़ने की बात कह दी थी। अत: अब कही हुई बात से पीछे हटना कठिन था। अत: वे रुपए लेकर चुपचाप घर की ओर चल दिए। |
|
| 29147. |
मनोहर को पेड़ से लगाव क्यों था? |
|
Answer» मनोहर ने पेड़ के साथ अपना बचपन बिताया था। वह उसे अपने भाई की तरह मानता था। इसलिए उसका पेड़ के प्रति लगाव था। |
|
| 29148. |
तेजा सिंह ने मनोहर सिंह की सहायता किस प्रकार की? |
|
Answer» तेजा सिंह मनोहर सिंह की सहायता करने के लिए 25 रुपये लेकर आया था किन्तु शीघ्र ही पता चला कि उसके रुपये चुराए हुए थे। तब तेजा के पिता ने वे रुपये ले लिए। तब तेजा ने मनोहर सिंह का ऋण चुकाने के लिए अपनी सोने की अंगूठी दी और कहा कि इस पर उसके पिता का हक नहीं था। यह उसे उसकी नानी ने दी थी। तेजा सिंह की इस बात से उसका पिता बहुत प्रभावित हुआ और उसने अँगूठी न देकर 25 रुपये ठाकुर को देकर कर्ज़ चुका दिया। |
|
| 29149. |
नीम के वृक्ष के साथ मनोहर सिंह का इतना लगाव क्यों था? |
|
Answer» नीम का वृक्ष मनोहर सिंह के घर के बाहर लगा हुआ था। यह पेड़ उसके पिता के हाथ का लगाया हुआ था। इसके साथ उसका बचपन बीता था। वह पेड़ उसे उसके पिता की धरोहर था उसके लिए वह अपने पिता की यादगार मानता था। वह पेड़ की शीतल छाया में सुख का अनुभव करता था। वह रह-रह कर पेड़ के उपकारों का स्मरण करता है। वह पेड़ उसे बहुत प्रिय था। उसके कट जाने की कल्पना मात्र से उसका हृदय काँप उठता था। इस पेड़ के उसके परिवार पर अत्यधिक उपकार थे। यह पेड़ उसे तथा उसके परिवार को दातुन तथा छाया प्रदान करता था। पेड़ के इसी उपकारी रूप के कारण मनोहर सिंह को उससे इतना अधिक लगाव था। |
|
| 29150. |
मनोहर सिंह अपना नीम का पेड़ क्यों काटने नहीं दे रहा था? |
|
Answer» मनोहर सिंह के घर के द्वार पर लगा नीम का पेड़ बहुत पुराना था। यह पेड़ इसके पिता के द्वारा लगाया गया था। उसे वह अपने बड़े भाई के समान मानता था। बरसों इस पर खेला और उसकी मीठी निबौलियाँ खाई थीं। पेड़ कटने पर उसे अपना बुढ़ापा बिगड़ते लगता था। इसलिए वह किसी सूरत में भी उस पेड़ को काटने देना नहीं चाहता था। |
|