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हमारे देश में ही नहीं, संसार की प्रत्येक जाति ने अपनी भाषा में चन्द्रमा के बारे में कहानियाँ गढ़ी हैं और कवियों ने कविताएँ रची हैं। किसी ने उसे रजनीपति माना तो किसी ने उसे रात्रि की देवी कहकर पुकारा। किसी विरहिणी ने उसे अपना दूत बनाया तो किसी ने उसके पीलेपन से क्षुब्ध होकर उसे बूढ़ा और बीमार ही समझ लिया। बालक श्रीराम चन्द्रमा को खिलौना समझकर उसके लिए मचलते हैं तो सूर के। श्रीकृष्ण भी उसके लिए हठ करते हैं।  बालक को शान्त करने के लिए एक ही उपाय था; चन्द्रमा की छवि को । पानी में दिखा देना।(अ) प्रस्तुत गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।(स)⦁    मचलते और हठ करते बालक को शान्त करने के लिए क्या उपाय था?⦁    प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने क्या कहा है ?[रजनीपति = रात्रि का स्वामी। विरहिणी = प्रिय अथवा पति से बिछड़ी हुई दुःखी स्त्री। क्षुब्ध = दु:खी।]

Answer»

(अ) प्रस्तुत गद्यावतरण हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी’ के गद्य-खण्ड  में संकलित श्री जयप्रकाश भारती द्वारा लिखित ‘पानी में चंदा और चाँद पर आदमी’ नामक निबन्ध से अवतरित है। अथवा निम्नवत् लिखिए पाठ का नाम-पानी में चंदा और चाँद पर आदमी। लेखक का नाम-श्री जयप्रकाश भारती।

(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या-लेखक का कथन है कि निर्जीव चन्द्रमा को कभी रात्रि का पति तो कभी रात की देवी कहा गया। कभी किसी विरह-विधुरा नायिका ने उसे अपना दूत बनाकर उसके माध्यम से अपने प्रियतम के लिए सन्देश भेजा तो कभी उसका पीलापन देखकर उसे बूढ़ा, बीमार और दुर्बल समझ लिया गया।

(स)
⦁    मचलते और हठ करते बालक को शान्त करने के लिए चन्द्रमा की छवि को पानी में दिखा दिया जाता था।
⦁    प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने कहा है कि चन्द्रमा से केवल भारत के ही नहीं, वरन् संसार की प्रत्येक जाति के लेखक और कवि प्रभावित रहे हैं और उसके विषय में कहानियाँ गढ़ते रहे हैं।
⦁    मानव की प्रगति का चक्र कितना घूम गया है। इस लम्बी विकास-यात्रा को  श्रीमती महादेवी वर्मा ने एक ही वाक्य में बाँध दिया है-“पहले पानी में चंदा को उतारा जाता था और आज चाँद पर मानव पहुँच गया है।”



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