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अभी चन्द्रमा के लिए अनेक उड़ानें होंगी। दूसरे ग्रहों के लिए मानवरहित यान छोड़े जा रहे हैं। अन्तरिक्ष में परिक्रमा करने वाला स्टेशन स्थापित करने की दिशा में तेजी से प्रयत्न किये जा रहे हैं। ऐसा स्टेशन बन जाने पर ब्रह्माण्ड के रहस्यों की पर्ते खोलने में काफी सहायता मिलेगी।यह पृथ्वी मानव के लिए पालने के समान है। वह हमेशा-हमेशा के लिए इसकी परिधि में बँधा हुआ नहीं रह सकता। अज्ञात की खोज में वह कहाँ तक पहुँचेगा, कौन कह सकता है?(अ) प्रस्तुत गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।(स)⦁ प्रस्तुत गद्यांश में लेखक क्या कहना चाहता है ?⦁ लेखक ने चन्द्र-अन्तरिक्ष अभियानों के आगामी प्रयत्नों के बारे में क्या लिखा है ? वर्तमान समय में इसकी क्या स्थिति है ? |
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Answer» (अ) प्रस्तुत गद्यावतरण हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी’ के गद्य-खण्ड में संकलित श्री जयप्रकाश भारती द्वारा लिखित ‘पानी में चंदा और चाँद पर आदमी’ नामक निबन्ध से अवतरित है। अथवा निम्नवत् लिखिए पाठ का नाम-पानी में चंदा और चाँद पर आदमी। लेखक का नाम-श्री जयप्रकाश भारती। (ब) रेखांकित अंश की व्याख्या-लेखक कहता है कि व्यक्ति पालने में केवल अपना बचपन गुजारता है। जैसे-जैसे वह बचपन से किशोरावस्था की ओर अग्रसर होता है, वैसे-वैसे उसका पालने से मोहभंग होता जाता है और एक दिन वह पालने की परिधि से बाहर हो जाता है। यह पृथ्वी भी मनुष्य के लिए एक पालने के समान ही है और वह निरन्तर उसकी परिधि से बाहर जाने का प्रयत्न करता रहता है। अन्तरिक्ष अथवा अज्ञात की अनेक खोजें उसके इन्हीं प्रयत्नों का परिणाम हैं। इस अनन्त-असीम अन्तरिक्ष अथवा अन्य स्थानों में अज्ञात रहस्यों की खोज करता हुआ वह कहाँ तक पहुँचेगा, इसकी भविष्यवाणी करना असम्भव है। (स) |
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