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ठाकुर साहब रुपये लेकर चुपचाप क्यों चले गए थे?

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ठाकुर सिंह को विश्वास हो गया था कि मनोहर सिंह को कहीं से भी रुपए नहीं मिलेंगे। इसलिए उसने भरी सभा में रुपए लेकर पेड़ न कटवाने की बात कह दी थी। जब तेजा के पिता ने 25 रुपए ठाकुर की ओर बढ़ा दिये तो ठाकुर के चेहरे का रंग उड़ गया। उन्होंने तो केवल सभा में उदारता का परिचय देने के लिए रुपए लेने की बात कर दी थी। लेकिन अब पेड़ कटवाने के पक्ष में उनके पास कोई तर्क नहीं था। अतः वे खामोश बने रहे। उन्होंने पच्चीसतीस आदमियों के सामने रुपए स्वीकार कर पेड़ छोड़ने की बात कह दी थी। अत: अब कही हुई बात से पीछे हटना कठिन था। अत: वे रुपए लेकर चुपचाप घर की ओर चल दिए।



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