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This section includes InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

29151.

शिवपाल सिंह ने मनोहर सिंह को कितने दिन बाद बुलवाया?

Answer»

शिवपाल सिंह ने मनोहर सिंह को आठवें दिन दोपहर के समय बुलवाया था।

29152.

डेढ़ साल का ब्याज मिलाकर कुल कितने रुपए मनोहर सिंह ने ठाकुर को देने थे?(क) बीस(ख) बाईस(ग) पच्चीस(घ) तीस।

Answer»

सही विकल्प है (ख) बाईस

29153.

बूढ़े मनोहर सिंह का नीम का पेड़ किसके पास गिरवी था?

Answer»

बूढ़े मनोहर सिंह का नीम का पेड़ ठाकुर शिवपाल सिंह के पास गिरवी था।

29154.

मनोहर सिंह तेजा सिंह को पेड़ को प्रति अपने लगाव के बारे में क्या बताता है?

Answer»

मनोहर सिंह तेजा को लक्ष्य कर कहता है, बेटा ! यह बात स्वीकार करो कि इस पेड़ के कट जाने का मुझे बड़ा दुःख होगा। मेरा बुढ़ापा जायेगा अर्थात् मेरे जीवन में दुःख और निराशा छा जायेगी। बुढ़ापा वैसे ही कष्टपूर्ण होता है पर पेड़ का अभाव इसे असहनीय बना देगा। अभी तक मेरा जीवन सुखमय व्यतीत हो रहा था। निश्चित होकर जीवन व्यतीत कर रहा था। जो कुछ भी मिलता, उसे खाकर संतोष का अनुभव करता। किसी प्रकार का सांसारिक मोह मुझे नहीं था। ईश्वर का भजन-पूजन कर अपना समय व्यतीत कर रहा था पर अब अगर पेड़ कट गया तो मुझे बहुत दु:ख होगा।

29155.

मनोहर सिंह ने रुपये लौटाने की मोहलत कब तक की माँगी थी?

Answer»

मनोहर सिंह ने रुपये लौटाने के लिए एक सप्ताह की मोहलत मांगी थी।

29156.

मनोहर सिंह की आयु लगभग कितने वर्ष की है(क) 50(ख) 55(ग) 60(घ) 65।

Answer»

सही विकल्प है (ख) 55

29157.

प्राथमिक चिकित्सक में होने वाले आवश्यक गुणों का वर्णन कीजिए।याप्राथमिक चिकित्सक के वांछित गुणों का वर्णन कीजिए।याप्राथमिक चिकित्सक में किन गुणों का होना आवश्यक है?

Answer»

प्राथमिक चिकित्सा एक महत्त्वपूर्ण मानवीय-सामाजिक कार्य है। एक प्राथमिक चिकित्सक यदि योग्य, दूरदर्शी एवं मानवीय गुणों से युक्त है तो वह जीवन-रक्षा जैसे अमूल्य एवं अतिप्रशंसनीय कार्य को सम्पादित कर सकता है।

प्राथमिक चिकित्सक के गुण

एक सरल प्राथमिक चिकित्सक में निम्नलिखित गुणों का होना आवश्यक है

(1) दुरदर्शी एवं फुर्तीला:
प्राथमिक चिकित्सक दूरदर्शी एवं फुर्तीला होना चाहिए, ताकि दुर्घटना स्थल पर पहुँचते ही पीड़ित व्यक्तियों की आवश्यकतानुसार तुरन्त सहायता कर सकें। दूरदर्शी व्यक्ति घटित होने वाली दुर्घटना के दूरगामी परिणामों का भी अनुमान लगा लेता है तथा दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की स्थिति के अनुकूल ही निर्णय लेता है।

(2) स्वस्थ एवं हृष्ट-पुष्ट:
प्राथमिक चिकित्सक अच्छे स्वास्थ्य का व्यक्ति होना चाहिए। उसका मानसिक एवं शारीरिक रूप से हृष्ट-पुष्ट होना भी आवश्यक है, क्योंकि उसे शीघ्र ही पीड़ित व्यक्तियों (UPBoardSolutions.com) की देखभाल तथा उनका अस्पताल तक स्थानान्तरण करना होता है। दुर्घटना स्थल का दृश्य अनेक बार बहुत ही हृदयविदारक होता है। ऐसी स्थिति में केवल मजबूत हृदय वाला व्यक्ति ही दुर्घटनाग्रस्त व्यक्तियों को सहायता प्रदान करता है।

(3) चतुर एवं विवेकशील:
एक चतुर एवं विवेकशील प्राथमिक चिकित्सक सही समय पर सही निर्णय ले सकता है तथा दुर्घटनाग्रस्त व्यक्तियों की आवश्यकता को समझकर उन्हें सांत्वना दे सकता है।

(4) धैर्यवान एवं सहनशील:
रोगी एवं दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति प्रायः चिड़चिड़े हो जाते हैं; अतः प्राथमिक चिकित्सक को धैर्यवान व सहनशील होना चाहिए।

(5) मृदुभाषी एवं सेवाभाव रखने वाला:
रोगी एवं दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति सहानुभूति एवं मृद व्यवहार के पात्र होते हैं। अत: प्राथमिक चिकित्सक अपना दायित्व सफलतापूर्वक तब ही निभा सकता है। जबकि वह मृदुभाषी हो तथा सेवाभाव रखता हो।

(6) आत्मविश्वासी:
प्राथमिक चिकित्सक को पूर्णरूप से आत्मविश्वासी होना चाहिए, क्योंकि दुर्बल आत्मविश्वास रखने वाला प्राथमिक चिकित्सक किसी बड़ी दुर्घटना को देखकर घबरा सकता है। अथवा बौखला सकता है।

(7) साधन सम्पन्नता:
प्राथमिक चिकित्सा के लिए रोगी अथवा घायल व्यक्ति को कुछ औषधियाँ अथवा अन्य सहायता दी जाती है। अतः यह आवश्यक है कि प्राथमिक चिकित्सक के पास उपचार एवं सहायता के लिए अनिवार्य साधन उपलब्ध हों। सामान्य रूप से प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स’ में इस प्रकार की आवश्यक सामग्री रखी जाती है।

(8) शारीरिक विज्ञान का पर्याप्त ज्ञान:
प्राथमिक चिकित्सक को मानव शरीर की बाह्य एवं आन्तरिक रचना का पर्याप्त ज्ञान होना आवश्यक है। गम्भीर रोगों एवं गम्भीर रूप से घायल व्यक्तियों का प्राथमिक उपचार करते समय उपर्युक्त ज्ञान उसे अतिरिक्त सहायता प्रदान करेगा।

(9) प्राथमिक चिकित्सा का अधिकाधिक ज्ञान:
प्राथमिक चिकित्सा करने वाले व्यक्ति को भली प्रकारे सम्बन्धित विषय में प्रशिक्षित होना चाहिए। उदाहरण के लिए उसे तीव्र ज्वर के रोगी के प्रारम्भिक उपचार की जानकारी होनी चाहिए। इसी प्रकार डूबने, विद्युत करन्ट लगने तथा जलने वाले व्यक्तियों का प्राथमिक उपचार किस प्रकार किया जाता है आदि का उसे अपेक्षित ज्ञान होना चाहिए।

(10) पर्याप्त दक्षता:
प्राथमिक चिकित्सक पर्याप्त दक्ष होना चाहिए ताकि वह सोचने में समय व्यर्थ न करके घायलों की तुरन्त सहायता कर सके तथा विधिपूर्वक उनका स्थानान्तरण अस्पताल तक करा सके।

(11) सीमाओं का ज्ञान:
प्राथमिक चिकित्सक को अपने कर्तव्य की सीमाओं का ज्ञान होना चाहिए। उसे यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि वह प्राथमिक चिकित्सक है, कोई डिग्री प्राप्त चिकित्सक नहीं। अतः उसे पीड़ित व्यक्तियों को शीघ्रातिशीघ्र अस्पताल पहुँचाने अथवा पहुँचवाने का प्रयास करना चाहिए।

29158.

‘प्राथमिक चिकित्सा बक्से में आप कौन-कौन से आवश्यक उपकरण एवं औषधियाँ रखेंगी?याप्राथमिक चिकित्सा हेतु आवश्यक वस्तुओं की सूची बनाइए।याघर में प्राथमिक सहायता पेटिका रखना क्यों आवश्यक है? इसमें आप क्या-क्या रखेंगी?

Answer»

‘प्राथमिक चिकित्सा बक्से’ (फर्स्ट एड बॉक्स) से अभिप्राय सरलतापूर्वक इधर-उधर ले। जाए जा सकने वाले बक्से से है, जिसमें कि प्राथमिक चिकित्सा हेतु आवश्यक उपकरण एवं औषधियाँ रखी होती हैं। प्रत्येक घर, सार्वजनिक एवं राजकीय प्रतिष्ठान तथा स्कूल-कॉलेज में प्राथमिक चिकित्सा बक्से के रखने से, अनेक लाभ हैं, जिनका संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है

  1. घर में होने वाली आकस्मिक दुर्घटनाओं; जैसे-जलना, चोट लगना आदि के समय प्राथमिक उपचार के लिए आवश्यक सामग्री सुविधापूर्वक एवं तुरन्त उपलब्ध हो जाती है।
  2. स्कूल व कॉलेज आदि के खेल के मैदान में अथवा अन्य अवसरों पर विद्यार्थियों को लगने वाली चोटों की प्राथमिक चिकित्सा तुरन्त सम्भव हो जाती है।
  3. बस व ट्रेन में यात्रा करते समय अथवा पिकनिक के समय होने वाली आकस्मिक दुर्घटनाओं से पीड़ित व्यक्तियों की प्राथमिक चिकित्सा के लिए प्राथमिक चिकित्सा बक्से में व्यवस्थित रूप से रखी सामग्री अत्यन्त उपयोगी सिद्ध होती है।

प्राथमिक चिकित्सा बक्से का निर्माण

इसे बनाने के लिए आवश्यक सामग्री को दो वर्गों में विभाजित किया जा सकता है

(क) आवश्यक उपकरण तथा
(ख) अत्यावश्यक औषधियाँ।

() आवश्यक उपकरण:
प्राथमिक चिकित्सा के लिए उपयोगी उपकरणों की सूची निम्नलिखित ह

  1. कैंची
  2. चाकू
  3. चिमटी
  4. सेफ्टी पिन
  5. सुई-धागा
  6. गिलास व चम्मच
  7. स्वच्छ रुई
  8. नि:संक्रमित गॉज
  9. छोटी-बड़ी पट्टियाँ
  10. गर्म पानी की बोतल
  11. बर्फ की टोपी
  12. स्वच्छ कपड़ा
  13. छोटा तौलिया
  14. साबुन
  15. खपच्चियाँ
  16. तीली तथा तैयार फुरेरी
  17. मोमबत्ती व दियासलाई
  18. टार्च।

() उपयोगी औषधियाँ:
प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स में प्रायः निम्नलिखित औषधियाँ रखी जाती हैं

  1. अमृतधारा
  2. पुदीनहरा
  3. कोरामिन
  4. बरनौल
  5. फ्यूरासिन
  6. पचनोल
  7. नावलजिन
  8. आयोडेक्स
  9. ग्लिसरीन
  10. ऐक्रीफ्लेविन
  11. सुंघाने वाले लवण
  12. ग्लूकोस
  13. पोटैशियम परमैंगनेट
  14. डिटॉल
  15. स्प्रिट
  16. विक्स
  17. बाम
  18. सामान्य नमक
29159.

प्राथमिक चिकित्सा की आवश्यकता की मुख्य दशाओं का उल्लेख कीजिए।

Answer»

वैसे तो किसी दुर्घटना के घटित होने अथवा व्यक्ति के रोगग्रस्त हो जाने पर तुरन्त प्राथमिक चिकित्सा की आवश्यकता होती है। यहाँ कुछ ऐसी सामान्य दशाओं का उल्लेख किया जा रहा है, जिनमें प्राथमिक चिकित्सा की अनिवार्य रूप से आवश्यकता होती है

  1. चोट लगने से अथवा गिर जाने से हड्डी टूट गई हो।
  2. विद्युल का झटका लग गया हो।
  3. किसी भी नशे का अधिक मात्रा में सेवन कर लिया गया हो।
  4. किसी विषैले जानवर अथवा कीड़े ने काट लिया हो।
  5. कोई व्यक्ति पानी में डूब जाए तथा उसके पेट में पानी भर जाने पर उसे बाहर निकाल कर तुरन्त उपचार देना।
  6. आग से जल जाने या झुलस जाने पर।
  7. कोई व्यक्ति जान-बूझकर अथवा अनजाने में किसी विष को अथवा जलाने वाली वस्तु को खा या पी ले।
  8. व्यक्ति के किसी भी अंग से रक्त बह निकले।
  9. व्यक्ति को श्वास लेने में कठिनाई हो रही हो।

उपर्युक्त आकस्मिक दुर्घटनाओं के अतिरिक्त किसी भी प्रकार की दुर्घटना के होते ही प्राथमिक चिकित्सा की आवश्यकता पड़ सकती है।

29160.

ब्लैन्डाँगडिएन्स्टेन व्यवस्था क्या थी?

Answer»

डच लोगों ने जावा में कुछ गाँवों को इस शर्त पर मुक्त कर दिया कि वे सामूहिक रूप से पेड़ काटने तथा लकड़ी ढोने के लिए भैंसे उपलब्ध कराने का काम निःशुल्क में किया करेंगे। इसी व्यवस्था को ब्लैन्डाँगडिएन्स्टेन व्यवस्था कहते थे।

29161.

युद्धों से जंगल क्यों प्रभावित होते हैं?

Answer»

युद्ध से वनों पर निम्न प्रभाव पड़ता है-
⦁    जावा में जापानियों के कब्जा करने से पहले, डचों ने ‘भस्म कर भागो नीति अपनाई जिसके तहत आरा-मशीनों और सागौन के विशाल लट्ठों के ढेर जला दिए गए जिससे वे जापानियों के हाथ न लगें। इसके बाद जापानियों ने वन्य-ग्रामवासियों को जंगल काटने के लिए बाध्य करके वनों का अपने युद्ध कारखानों के लिए निर्ममता से दोहन किया। बहुत से गाँव वालों ने इस अवसर का लाभ  उठाकर जंगल में अपनी खेती का विस्तार किया। युद्ध के बाद इंडोनेशियाई वन सेवा के लिए इन जमीनों को वापस हासिल कर पाना कठिन था।
⦁    भारत में वन विभाग ने ब्रिटेन की लड़ाई की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अंधा-धुंध वन काटे। इस अंधा धुंध विनाश एवं राष्ट्रीय लड़ाई की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वनों की कटाई वनों को प्रभावित करती है क्योंकि वे बहुत तेजी से खत्म होते हैं जबकि ये दोबारा पैदा होने में बहुत समय लेते हैं।
⦁    स्थल सेना को अनेक आवश्यकताओं के लिए बड़े पैमाने पर लकड़ियों की आवश्यकता होती है।
⦁    नौसेना की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बनने वाले जहाजों के लिए बड़े पैमाने पर लकड़ी की आवश्यकता होती है जिसे जंगलों को काट कर पूरा किया जाता है।

29162.

सन् 1880 से 1920 ई0 के बीच भारतीय उपमहाद्वीप के वनाच्छादित क्षेत्र में 97 लाख हेक्टेयर की गिरावट आयी। पहले के 10.86 करोड़ हेक्टेयर से घटकर यह क्षेत्र 9.89 करोड़ हेक्टेयर रह गया था। इस गिरावट में निम्नलिखित कारकों की भूमिका बताएँ-⦁    रेलवे⦁    जहाज निर्माण⦁    कृषि-विस्तार⦁    व्यावसायिक खेती⦁    चाय-कॉफी के बागान⦁    आदिवासी और किसान

Answer»

(1) रेलवे – 1850 ई0 के दशक में रेल लाइनों के प्रसार ने लकड़ी के लिए एक नयी माँग को जन्म दिया। शाही सेना के आवागमन तथा औपनिवेशिक व्यापार हेतु रेलवे लाइनों की अनिवार्यता अनुभव की गयी। रेल इंजनों को चलाने के लिए ईंधन के तौर पर और रेल की पटरियों को जोड़े रखने के लिए स्लीपरों के रूप में लकड़ी की बड़े पैमाने पर आवश्यकता थी। एक मील लम्बी रेल की पटरी के लिए 1760 से 2000 स्लीपरों की आवश्यकता पड़ती थी। भारत में 1860 ई0 के दशक में रेल लाइनों का जाल तेजी से  फैला। जैसे-जैसे रेलवे पटरियों का भारत में विस्तार हुआ, अधिकाधिक मात्रा में पेड़ काटे गए। 1850 ई0 के दशक में अकेले मद्रास प्रेसीडेंसी में स्लीपरों के लिए 35,000 पेड़ सालाना काटे जाते थे। आवश्यक संख्या में आपूर्ति के लिए सरकार ने निजी ठेके दिए। इन ठेकेदारों ने बिना सोचे-समझे पेड़ काटना शुरू कर दिया और रेल लाइनों के इर्द-गिर्द जंगल तेजी से गायब होने लगे।
(2) जहाज निर्माण – 19वीं सदी के प्रारंभ तक इग्लैण्ड में बलूत के जंगल समाप्त होने लगे थे। इससे इग्लैण्ड की शाही जलसेना के लिए लकड़ी की आपूर्ति की समस्या उत्पन्न हो गयी क्योंकि समुद्री जहाजों के अभाव में शाही सत्ता को बनाए रखना संभव नहीं था। इसलिए, 1820 ई0 तक अंग्रेजी खोजी दस्ते भारत की वन-संपदा का अन्वेषण करने के लिए भेजे गए। एक दशक के अंदर बड़ी संख्या में पेड़ों को काट डाला गया और बहुत अधिक मात्रा में लकड़ी का भारत से निर्यात किया गया।
(3) कृषि विस्तार – 19वीं सदी की शुरुआत में औपनिवेशिक सरकार ने वनों को अनुत्पादक समझा। उनकी दृष्टि में इस व्यर्थ के वियावान पर कृषि करके उससे राजस्व और कृषि उत्पाद प्राप्त किया जा सकता है और इस तरह राज्य की अन्य की वृद्धि की जा सकती है। इसी सोच का परिणाम था कि 1880 से 1920 ई0 के बीच कृषि योग्य जमीन के क्षेत्रफल में 67 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई। उन्नीसवीं सदी में बढ़ती  शहरी जनसंख्या के लिए वाणिज्यिक फसलों जैसे-जूट, चीनी, गेहूं एवं कपास की माँग बढ़ गई और औद्योगिक उत्पादन के लिए कच्चे माल की जरूरत पड़ी। इसलिए अंग्रेजों ने सीधे तौर पर वाणिज्यिक फसलों को बढ़ावा दिया। इस प्रकार भूमि को जुताई के अंतर्गत लाने के लिए वनों को काट दिया गया।
(4) व्यावसायिक कृषि – 19वीं शताब्दी में यूरोप की जनसंख्या में तेजी से वृद्धि हुई। इसलिए यूरोपीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए औपनिवेशिक सरकार ने भारतीय किसानों को व्यावसायिक कृषि फसलों यथा-गन्ना, पटसन, कपास आदि का उत्पादन करने हेतु प्रोत्साहित किया। इस कार्य हेतु अतिरिक्त भूमि प्राप्त करने के लिए वनों को बड़े पैमाने पर साफ किया गया।
(5) चाय-कॉफी के बागान – औपनिवेशिक सरकार ने यूरोपीय बाजार में चाय-कॉफी की आवश्यकता को पूरा करने के लिए भारत में इनकी कृषि को प्रश्रय दिया। उत्तर-पूर्वी  और दक्षिणी भारत के ढलानों पर वनों को काटकर चाय और कॉफी के बागानों के लिए भूमि प्राप्त की गयी।
(6) आदिवासी और किसान – आदिवासी सामान्यतः घुमंतू खेती करते थे जिसमें वनों के हिस्सों को बारी-बारी से काटा एवं जलाया जाता है। मानसून की पहली बरसात के बाद रखि में बीज बो दिए जाते हैं। यह प्रक्रिया वनों के लिए हानिकारक थी। इसमें हमेशा जंगल की आग का खतरा बना रहता था।

29163.

ठाकुर शिवपाल सिंह ने मनोहर सिंह को ऋण लौटाने के लिए कितने दिनों का समय दिया था?(क) एक सप्ताह(ख) एक माह(ग) एक पखवाड़ा(घ) दस दिन।

Answer»

(क) एक सप्ताह

29164.

मनोहर सिंह ने तेजा सिंह को नीम का पेड़ क्यों दे दिया था?

Answer»

तेजा सिंह ने अपनी सोने की अंगूठी देकर मनोहर सिंह का ऋण चुकाने की कोशिश की थी। यह देखकर मनोहर सिंह को विश्वास हो गया कि उसके पीछे वह उस पेड़ की पूरी रक्षा कर सकेगा। इसी कारण मनोहर सिंह ने वह नीम का पेड़ तेजा सिंह को दे दिया।

29165.

प्राथमिक चिकित्सा बक्सा क्यों बनाया जाता है?

Answer»

जिससे कि समय पड़ने पर प्राथमिक चिकित्सा सम्बन्धी आवश्यक सामग्री एक ही स्थान पर तुरन्त उपलब्ध हो सके।

29166.

भारतीय वन अधिनियम कब लागू हुआ?

Answer»

भारतीय वन अधिनियम 1865 ई० में लागू हुआ

29167.

प्राथमिक चिकित्सा क्या है?

Answer»

रोगी अथवा दुर्घटनाग्रस्त व्यक्तियों को विशिष्ट चिकित्सा सहायता उपलब्ध होने से पूर्व दुर्घटनास्थल पर ही प्रदान की जाने वाली सामान्य परन्तु आवश्यक चिकित्सा सहायता को प्राथमिक चिकित्सा कहते हैं।

29168.

क्या प्राथमिक चिकित्सा के लिए मान्यता प्राप्त चिकित्सक होना आवश्यक है?

Answer»

नहीं, कोई भी सेवाभाव रखने वाला व्यक्ति आवश्यक प्रशिक्षण ग्रहण करने पर प्राथमिक चिकित्सा करने योग्य बन सकता है।

29169.

प्राथमिक चिकित्सा का मुख्यतम सिद्धान्त क्या है?

Answer»

प्राथमिक चिकित्सा का मुख्यतम सिद्धान्त है- दुर्घटना की वास्तविकता तथा गम्भीरता को । जानना तथा प्राथमिकता के आधार पर आवश्यक कार्यवाही तुरन्त प्रारम्भ करना।

29170.

क्या आवश्यकता पड़ने पर लड़कियाँ भी प्राथमिक चिकित्सा प्रदान कर सकती हैं?

Answer»

नि:सन्देह, आवश्यकता पड़ने पर लड़कियाँ भी प्राथमिक चिकित्सा प्रदान कर सकती हैं।

29171.

कृत्रिम श्वसन की कब आवश्यकता होती है? या कृत्रिम श्वसन कब दिया जाता है?

Answer»

प्राय: डूबने व विद्युत करन्ट लगने वाले व्यक्ति की सामान्य श्वास गति अवरुद्ध हो जाती है, अत: उसे तुरन्त कृत्रिम श्वसन की आवश्यकता होती है।

29172.

प्राथमिक चिकित्सा का मुख्यतम उद्देश्य क्या है?

Answer»

प्राथमिक चिकित्सा का मुख्यतम उद्देश्य है- दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की जान बचाना।

29173.

प्राथमिक चिकित्सा कौन प्रदान कर सकता है?

Answer»

दुर्घटना स्थल पर उपस्थित कोई भी व्यक्ति दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को प्राथमिक चिकित्सा प्रदान कर सकता है।

29174.

आकस्मिक घटना के समय प्राथमिक चिकित्सा दी जाती है(क) अल्पकालीन(ख) दीर्घकालीन(ग) तत्काल(घ) निरुद्देश्य

Answer»

सही विकल्प है (ग) तत्काल

29175.

टूर्नीकेट का प्रयोग किया जाता है(क) टूटी हुई हड्डी जोड़ने में(ख) घाव पर पट्टी को रोकने में(ग) रक्तस्राव को रोकने में अथवा विष को अधिक दूर तक न फैलने देने के लिए(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं।

Answer»

सही विकल्प है (ग) रक्तस्राव को रोकने में अथवा विष को अधिक दूर तक न फैलने देने के लिए

29176.

दुर्घटना में पीड़ित जटिल फ्रेक्चर वाले व्यक्ति का सर्वप्रथम(क) हड्डी टूटने का उपचार करना चाहिए(ख) रक्तस्राव रोकना चाहिए(ग) हाथ पकड़कर अस्पताल ले जायें(घ) खपच्चियाँ लगाए

Answer»

सही विकल्प है (ख) रक्तस्राव रोकना चाहिए

29177.

ठाकुर शिवपाल सिंह का कर्ज़ अदा हो जाने के बाद मनोहर सिंह ने अपने नीम के पेड़ के विषय में क्या निर्णय लिया?

Answer»

मनोहर सिंह ने अपने नीम के पेड़ के विषय में निर्णय लिया कि वह अपना नीम का पेड़ नहीं कटने देगा और वह पेड़ अब तेजा सिंह का होगा।

29178.

वन ग्राम किसे कहते थे?

Answer»

औपनिवेशिक सरकार ने 1905 ई० में जंगल के दो-तिहाई हिस्से को आरक्षित कर दिया लेकिन कुछ गाँवों को आरक्षित वनों में इस शर्त पर रहने दिया गया कि वे वन  विभाग के लिए पेड़ों की कटाई और ढुलाई का काम मुफ्त करेंगे और जंगल को आग से बचाए रखेंगे। बाद में इन्हीं गाँवों को वन ग्राम कहा जाने लगा।

29179.

सुरोन्तिको सामिन ने कौन-सा आंदोलन चलाया?

Answer»

जावा द्वीप के निवासी सुरोन्तिको सामिन ने जैलों के राजकीय मालिकाने का विरोध किया। उसका तर्क था कि चूंकि हवा, पानी, जमीन और लकड़ी राज्य की बनायी हुई नहीं है इसलिए उन पर राज्य का अधिकार अनुचित है। शीघ्र ही यह विचार एक व्यापक आंदोलन में परिणत हो गया।

29180.

देवसारी या दांड किसे कहते हैं?

Answer»

यह बस्तर के सीमावर्ती गाँव के लोगों द्वारा दिया जाने वाला एक शुल्क था। यदि एक गाँव के लोग दूसरे गाँव के जंगल से लकड़ी लेना चाहते थे तो उन्हें एक छोटा-सा शुल्क अदा करना पड़ता था। इसे ही देवसारी या दांड कहते थे।

29181.

गुंडा धूर कौन था?

Answer»

गुंडा धूर नेथानगर गाँव का एक आंदोलनकारी था जिसने अंग्रेजों के विरुद्ध बगावत में सक्रिय भाग लिया। इस आंदोलन को दबाने में अंग्रेजों को तीन माह का समय लगा किन्तु गुंडा धूर अंग्रेजों की पकड़ में कभी नहीं आया।

29182.

वन अधिनियम के प्रभावस्वरूप गाँव वालों को क्या दिक्कतें हुईं?

Answer»

वन अधिनियम के बाद घर के लिए लकड़ी काटनी, पशुओं को चराना, कंद-मूल, फल इकट्ठा करना आदि रोजमर्रा की गतिविधियाँ गैरकानूनी बन गई। जलावनी लकड़ी एकत्र करने वाली औरतें विशेष तौर से परेशान रहने लगीं।

29183.

1.   सौर-मंडल का सबसे बड़ा गृह कौन-सा है?2.   सौर-मंडल में शनि गृह का स्थान क्या है?3.   पृथ्वी और सूर्य में कितना फासला है?4.   शनि किसका पुत्र है?5.   ‘शनि:चर’ का अर्थ क्या है?6.   सूर्य का एक चक्कर लगाने में शनि को कितना समय लगता है?7.   शनि एक राशी में कितने सालों तक रहता है?8.   बहुत कम सूर्य ताप किस गृह पर होता है?9.   शनि का निर्माण किस प्रकार हुआ है ?10.  सौर-मंडल का सबसे बड़ा उपग्रह कौन-सा है?

Answer»

1.   बृहस्पति

2.   दूसरा

3.   करीब 15 करोड किलोमीटर

4.   सूर्य

5.   धीमी गति से चलनेवाला

6.   करीब तीस वर्ष

7.   करीब ढाई साल

8.   शनि

9.   वायुमंडल हाइड्रोजन, हीलियम, मीथेन तथा एमोनिया गैसों से बना

10. बृहस्पति का गैनीमीड उपग्रह

29184.

मीना मैडम ने छात्रों से अंत में क्या कहा ?

Answer»

मीना मैडम ने छत्रों से कहा कि देश की म रक्षा और उत्कर्ष के लिए सतत प्रयत्नशील रहें। अपने कर्तव्यों का पालन करें तभी देश का कल्याण होगा।

29185.

अन्वर ने मीना मैडम से क्या कहा ?

Answer»

अन्वर ने मीना मैडम से कहा कि देशवासियों के प्रति भाईचारे का भाव रखना जरूरी है। जाति, धर्म, भाषा, प्रदेश, वर्ग पर आधारित सभी भेदभावों से दूर रहना चाहिए।

29186.

प्लासी के युद्ध में अंग्रेजी सेना का नेतृत्व किया था-(क) क्लाइव ने(ख) कार्टिभर ने(ग) कैप्टन लाली ने(घ) हेक्टर मुनरो ने

Answer»

सही विकल्प है (क) क्लाइव ने

29187.

अकुल ने मीना मैडम से क्या कहा ?

Answer»

अकुल ने मीना मैडम से कहा, एक नागरिक की है सियत से हमें अपने देश के राष्ट् गान र तथा। राष्टी त्योहारों का आदर करना चाहिए। करना चाहिए।

29188.

कृत्रिम विधि से श्वास कब दिलाई जाती है ।(क) दम घुटने पर(ख) जल में डूबने पर(ग) फाँसी लगाने पर(घ) तीनों अवस्थाओं में

Answer»

सही विकल्प है (घ) तीनों अवस्थाओं में

29189.

दम घुटने के कारण तथा उपचार बताइए।

Answer»

दम घुटने के कारण श्वसन-क्रिया में व्यवधान उत्पन्न होने पर दम घुटने लगता है। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं
⦁     पानी में डूबने पर श्वसन मार्ग में जल घुस जाने के कारण दम घुट सकता है।
⦁     किसी विषैली गैस के श्वसन मार्ग तथा फेफड़ों में भर जाना भी दम घुटने का कारण बन सकता है।
⦁    किसी वस्तु के नासा मार्ग में अटक जाने पर भी दम घुटने की स्थिति बन जाती है।
⦁     गले में सूजन या अन्य किसी रोग के कारण भी दम घुटने की स्थिति बन जाती है।
⦁    श्वास नली पर अधिक दबाव पड़ने पर जैसे कि फाँसी लगने पर दम घुट जाता है।
⦁    श्वास नियन्त्रण केन्द्र पर किसी विषैले या हानिकारक प्रभाव पड़ने पर भी दम घुटने लगता है। उदाहरण-विष खाना, बिजली का झटका लगना आदि।

दम घुटने के उपचार:
दम घुटने के उपचार निम्ननिखित हैं।

⦁    दुर्घटना के कारण को दूर करना।
⦁    यदि डूबने के कारण पेट में पानी भर गया हो तो उसे निकाल देना चाहिए।
⦁    यदि कोई वस्तु श्वसन मार्ग में रुकावट उत्पन्न कर रही है तो उसे निकाल देना चाहिए।
⦁    किसी उपयुक्त विधि द्वारा पीड़ित व्यक्ति को कृत्रिम श्वसने देना चाहिए।

29190.

हर स्थिति में सत्य बोलने का अभ्यास क्यों करना चाहिए?

Answer»

सत्य की महिमा अपार है। सत्य महान और बडी शक्तिशाली है। सत्य की ही विजय होती है, असत्य की नहीं। सत्य की नाद से ही भवसागर का संतरण कर सकते है। सत्य वह चिनगारी है। जिससे असत्य पलभर में भस्म हो जाता है। इसलिए हर स्थिति में सत्य बोलने का अभ्यास करना चाहिए।

29191.

स्वच्छ जल हर एक का अधिकार है। जल को सुरक्षित रखने के लिए हमें क्या करना चाहिए?

Answer»

प्रकृति पर हम सबका समान अधिकार है। अपने स्वार्थ के लिए इसकी संपदा को नष्ट करना ठीक नहीं है। अगर ऐसे ही जल नष्ट होता रहा तो आने वाली पीढ़ियों को पीने के लिए भी जल नहीं होगा। इसके लिए हमें जल संरक्षण पर विशेष बल देने की ज़रूरत है। इसलिए हमें जल आवश्यकता से अधिक उपयोग नहीं करना चाहिए। हमें जल व्यर्थ होने से बचाना चाहिए। पेड़-पौधे अधिक से अधिक लगाने चाहिए, जिससे वर्षा अधिक हो। जल स्रोतों की रक्षा करनी चाहिए। व्यर्थ हो रहे पानी को पुनः उपयोग में लाने की व्यवस्था होनी चाहिए। हमें जल संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक करना चाहिए। नदियों में कूड़ा-कचरा नहीं बहाना चाहिए। कहीं भी जल व्यर्थ हो रहा हो तो उसे रोकने का प्रयास करना चाहिए।

29192.

वन-विनाश और औपनिवेशिक वन कानूनों का भारतीयों के जन-जीवन पर प्रभाव बताइए।

Answer»

वनों की तेजी से कटाई तथा औपनिवेशिक सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों ने वनों में रहने वाली जनजातियों एवं वनों के सीमान्त क्षेत्रों में बसे ग्रामीण लोगों के जीवन को निम्न रूप से प्रभावित किया-
(i) व्यवसाय परिवर्तन-भारत में प्राचीन काल से वन उत्पादों का व्यापार बड़े पैमाने पर होता रहा है। घुमंतू समुदायों द्वारा वन उत्पादों जैसे बाँस, मसाले, गोंद, राल, खाल, सींग, हाथी दांत और रेशम के कोर्म आदि की बिक्री एक सामान्य प्रक्रिया थी परंतु औपनिवेशिक शासन में यह व्यवसाय पूरी तरह अंग्रेजों के नियंत्रण में चला गया। इस कारण अधिकांश घुमंतू कबीले अपने परंपरागत व्यवसाय को छोड़ने  के लिए बाध्य हुए। अब ये लोग नवीन व्यवसायों जैसे फैक्ट्रियों, खदानों अथवा बागानों में कार्य करने लगे। इन क्षेत्रों में काम करने से उनका जीवन और अधिक कठिन हो गया। उनकी जिंदगी की तुलना पिंजरे में बंद पक्षी से की जा सकती थी।
(ii) शिकार पर प्रतिबन्ध–ब्रिटिश सरकार ने वनों और सीमांत क्षेत्रों में शिकार पर पूर्ण पाबंदी लगा दी थी और विभिन्न वन कानूनों के द्वारा इसे गैर कानूनी घोषित किया गया। प्राचीन काल से ही वनवासी अपने भोजन के लिए छोटे-मोटे वन्य जीवों पर आश्रित थे परंतु वन कानूनों ने उनकी पारंपरिक प्रथा को गैर कानूनी बना दिया। शिकार करने का हक केवल राजाओं और अंग्रेजों तक ही सीमित रहा। उन्होंने बड़े पैमाने पर वन्य जीवों का शिकार किया। केवल 1875 से 1925 ई0 के बीच के 50 सालों में ही लगभग 80,000 बाघ, 1,50,000 तेंदुए और 2,00,000 भेड़ियों का शिकार किया गया। जॉर्ज मूल नामक एक अंग्रेज अफसर ने इस काल में 400 बाघों का शिकार किया था।
(iii) वनों का आरक्षण-नए वन कानूनों ने ग्रामवासियों की समस्याओं को बढ़ा दिया क्योंकि ग्रामवासी अपनी अधिकांश दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वनों पर आश्रित थे जबकि नए कानून के अनुसार आरक्षित वनों में लकड़ी काटना, कंदमूल, फल इकट्ठा करना तथा पशुचारण आदि गैर कानूनी घोषित किया गया।
(iv) स्थानान्तरित कृषि पर प्रतिबन्ध–स्थानान्तरित कृषि (घुमंतू कृषि) कृषि के सबसे पुराने स्वरूपों में से एक है। इस कृषि प्रणाली में जंगल के कुछ भागों को बारी-बारी से काटा जाता है। यूरोपीय वन रक्षक स्थानान्तरित कृषि के विरुद्ध थे क्योंकि निरंतर खेतों को बदलने के कारण उस क्षेत्र में कीमती इमारती लकड़ी के पेड़ों (जो 20 से 30 वर्षों में कटने लायक होते हैं) को लगाना कठिन था क्योंकि वन साफ करने की प्रक्रिया में लगाई जाने वाली आग से वृक्षों के जलने का खतरा बना रहता था। खेतों के निरंतर  परिवर्तन से भू-राजस्व का निर्धारण एक दुष्कर कार्य था।
उपर्युक्त कारणों से सरकार ने लोगों को वनों से बाहर निकलने के लिए बाध्य किया जिसके कारण इन जनजातियों ने विद्रोह किए और उनमें असफल होने पर अपने मूल निवास से विस्थापित कर दिए गए अथवा व्यवसाय को छोड़ने के लिए बाध्य होना पड़ा।

29193.

प्लासी का युद्ध किसके बीच हुआ था?

Answer»

प्लासी का युद्ध क्लाइव और सिराजुद्दौला के बीच हुआ था।

29194.

क्या तुम भी नन्दू की ही तरह छींकते हो? छींकते समय क्या करना चाहिए?

Answer»

हाँ, हम भी नन्दू की ही तरह छींकते हैं। छींकते समय मुँह पर रूमाल या हाथ रख लेना चाहिए।

29195.

भेड़िया गड्ढे में कैसे गिरा होगा?

Answer»

भेड़िया शिकार करते हुए गड्ढे में गिर गया होगा।

29196.

अंग्रेजों की वन नीतियों के प्रति बस्तर वासियों की प्रतिक्रिया और उसका परिणाम बताइए।

Answer»

1905 ई0 में औपनिवेशिक सरकार ने भारत के दो तिहाई वनों को आरक्षित करने और घुमंतू खेती, शिकार और वन्य उत्पादों के संग्रहण पर रोक लगा दी। मूलतः वनों पर जीवन-यापन करने वाले बस्तर-वासी सरकार के इस निर्णय से चिंतित हो उठे। काँगेर वन के धुरवा सम्प्रदाय के लोगों ने सबसे पहले सरकार की वन नीतियों का विरोध कर क्रान्ति की शुरुआत की।
1910 ई० में आम की टहनियाँ, मिट्टी का एक ढेला, लाल मिर्च और तीर गाँव-गाँव भेजे जाने लगे। प्रत्येक ग्रामीण ने क्रांति के खर्च में कुछ-न-कुछ योगदान दिया। बाजारों को लूटा गया, अधिकारियों व व्यापारियों के घरों, स्कूलों व पुलिस थानों को लूटा वे जलाया गया और अनाज का  पुनर्वितरण किया गया। जिन पर हमले हुए उनमें से अधिकतर लोग औपनिवेशिक राज्य और इसके दमनकारी कानूनों से किसी-न-किसी तरह जुड़े हुए थे। अंग्रेजों ने इसका कड़ा
प्रत्युत्तर दिया और विद्रोह को दबाने के लिए सैनिक टुकड़ियाँ भेजीं। अंग्रेज फौज ने आदिवासियों के तंबुओं को घेरकर उन पर गोलियाँ चला दीं। जिन लोगों ने बगावत में भाग लिया था उन्हें पीटा गया और सजा दी गई। अधिकांश गाँव खाली हो गए क्योंकि लोग भाग कर जंगलों में चले गए थे। यद्यपि वे विद्रोह के मुखिया गुंडा धूर को कभी नहीं पकड़ सके। विद्रोहियों की सबसे बड़ी जीत यह रही कि आरक्षण का काम कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया और आरक्षित क्षेत्र को भी 1910 ई० से पहले की योजना से लगभग आधा कर दिया गया।

29197.

प्लासी का युद्ध कब हुआ था?

Answer»

प्लासी का युद्ध 23 जून 1757 ई. में हुआ था।

29198.

स्पष्ट कीजिए कि घुमंतू समुदायों को बार-बार एक जगह से दूसरी जगह क्यों जाना पड़ता है? इस निरंतर आवागमन से पर्यावरण को क्या लाभ है?

Answer»

ऐसे लोगों को घुमंतू या खानाबदोश कहते हैं जो एक स्थान पर टिक कर नहीं रहते बल्कि अपनी जीविका के निमित्त एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमते रहते हैं। इन घुमंतू लोगों का जीवन इनके पशुओं पर निर्भर होता है। वर्ष भर किसी एक स्थान पर पशुओं के लिए पेयजल और चारे की  व्यवस्था सुलभ नहीं हो पाती ऐसे में ये एक स्थान से दूसरे स्थान पर भ्रमणशील रहते हैं। जब तक एक स्थान पर चरागाह उपलब्ध रहता है तब तक ये वहाँ रहते हैं, परन्तु चरागाह समाप्त होने पर पुनः दूसरे नए स्थान की ओर चले जाते हैं।
घुमंतू लोगों के निरंतर आवागमन से पर्यावरण को निम्न लाभ होते हैं-
⦁    यह खानाबदोश कबीलों को बहुत से काम जैसे कि खेती, व्यापार एवं पशुपालन करने का अवसर प्रदान करता है।
⦁    उनके पशु मृदा को खाद उपलब्ध कराने में सहायता करते हैं।
⦁    यह चरागाहों को पुनः हरा-भरा होने और उसके अति-चारण से बचाने में सहायता करता है क्योंकि चरागाहें अतिचारण एवं लम्बे प्रयोग के कारण बंजर नहीं बनतीं।
⦁    यह विभिन्न क्षेत्रों की चरागाहों के प्रभावशाली प्रयोग में सहायता करता है।
⦁    निरंतर स्थान परिवर्तन के कारण किसी एक स्थान की वनस्पति का अत्यधिक दोहन नहीं होता है।
⦁    चरागाहों की गुणवत्ता बनी रहती है।
⦁    लगातार स्थान परिवर्तन से भूमि की उर्वरता बनी रहती है।

29199.

बंजारा समुदाय के लोग देश के किन राज्यों में पाए जाते हैं?

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बंजारा समुदाय के लोग भारत के उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब और महाराष्ट्र राज्यों में पाए जाते हैं।

29200.

अपराधी जनजाति अधिनियम 1871 के बारे में आप क्या जानते हैं?

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औपनिवेशिक सरकार खानाबदोश कबीलों को अपराधी की नजर से देखती थी। भारत की औपनिवेशिक सरकार द्वारा सन् 1871 में अपराधी जनजाति अधिनियम पारित किया गया। इस अधिनियम ने दस्तकारों, व्यापारियों और चरवाहों के बहुत सारे समुदायों को अपराधी समुदायों की  सूची में रख दिया। बिना किसी वैध परिमट के इन समुदायों को उनकी विशिष्ट ग्रामीण बस्तियों से बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी।