1.

प्राथमिक चिकित्सक में होने वाले आवश्यक गुणों का वर्णन कीजिए।याप्राथमिक चिकित्सक के वांछित गुणों का वर्णन कीजिए।याप्राथमिक चिकित्सक में किन गुणों का होना आवश्यक है?

Answer»

प्राथमिक चिकित्सा एक महत्त्वपूर्ण मानवीय-सामाजिक कार्य है। एक प्राथमिक चिकित्सक यदि योग्य, दूरदर्शी एवं मानवीय गुणों से युक्त है तो वह जीवन-रक्षा जैसे अमूल्य एवं अतिप्रशंसनीय कार्य को सम्पादित कर सकता है।

प्राथमिक चिकित्सक के गुण

एक सरल प्राथमिक चिकित्सक में निम्नलिखित गुणों का होना आवश्यक है

(1) दुरदर्शी एवं फुर्तीला:
प्राथमिक चिकित्सक दूरदर्शी एवं फुर्तीला होना चाहिए, ताकि दुर्घटना स्थल पर पहुँचते ही पीड़ित व्यक्तियों की आवश्यकतानुसार तुरन्त सहायता कर सकें। दूरदर्शी व्यक्ति घटित होने वाली दुर्घटना के दूरगामी परिणामों का भी अनुमान लगा लेता है तथा दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की स्थिति के अनुकूल ही निर्णय लेता है।

(2) स्वस्थ एवं हृष्ट-पुष्ट:
प्राथमिक चिकित्सक अच्छे स्वास्थ्य का व्यक्ति होना चाहिए। उसका मानसिक एवं शारीरिक रूप से हृष्ट-पुष्ट होना भी आवश्यक है, क्योंकि उसे शीघ्र ही पीड़ित व्यक्तियों (UPBoardSolutions.com) की देखभाल तथा उनका अस्पताल तक स्थानान्तरण करना होता है। दुर्घटना स्थल का दृश्य अनेक बार बहुत ही हृदयविदारक होता है। ऐसी स्थिति में केवल मजबूत हृदय वाला व्यक्ति ही दुर्घटनाग्रस्त व्यक्तियों को सहायता प्रदान करता है।

(3) चतुर एवं विवेकशील:
एक चतुर एवं विवेकशील प्राथमिक चिकित्सक सही समय पर सही निर्णय ले सकता है तथा दुर्घटनाग्रस्त व्यक्तियों की आवश्यकता को समझकर उन्हें सांत्वना दे सकता है।

(4) धैर्यवान एवं सहनशील:
रोगी एवं दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति प्रायः चिड़चिड़े हो जाते हैं; अतः प्राथमिक चिकित्सक को धैर्यवान व सहनशील होना चाहिए।

(5) मृदुभाषी एवं सेवाभाव रखने वाला:
रोगी एवं दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति सहानुभूति एवं मृद व्यवहार के पात्र होते हैं। अत: प्राथमिक चिकित्सक अपना दायित्व सफलतापूर्वक तब ही निभा सकता है। जबकि वह मृदुभाषी हो तथा सेवाभाव रखता हो।

(6) आत्मविश्वासी:
प्राथमिक चिकित्सक को पूर्णरूप से आत्मविश्वासी होना चाहिए, क्योंकि दुर्बल आत्मविश्वास रखने वाला प्राथमिक चिकित्सक किसी बड़ी दुर्घटना को देखकर घबरा सकता है। अथवा बौखला सकता है।

(7) साधन सम्पन्नता:
प्राथमिक चिकित्सा के लिए रोगी अथवा घायल व्यक्ति को कुछ औषधियाँ अथवा अन्य सहायता दी जाती है। अतः यह आवश्यक है कि प्राथमिक चिकित्सक के पास उपचार एवं सहायता के लिए अनिवार्य साधन उपलब्ध हों। सामान्य रूप से प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स’ में इस प्रकार की आवश्यक सामग्री रखी जाती है।

(8) शारीरिक विज्ञान का पर्याप्त ज्ञान:
प्राथमिक चिकित्सक को मानव शरीर की बाह्य एवं आन्तरिक रचना का पर्याप्त ज्ञान होना आवश्यक है। गम्भीर रोगों एवं गम्भीर रूप से घायल व्यक्तियों का प्राथमिक उपचार करते समय उपर्युक्त ज्ञान उसे अतिरिक्त सहायता प्रदान करेगा।

(9) प्राथमिक चिकित्सा का अधिकाधिक ज्ञान:
प्राथमिक चिकित्सा करने वाले व्यक्ति को भली प्रकारे सम्बन्धित विषय में प्रशिक्षित होना चाहिए। उदाहरण के लिए उसे तीव्र ज्वर के रोगी के प्रारम्भिक उपचार की जानकारी होनी चाहिए। इसी प्रकार डूबने, विद्युत करन्ट लगने तथा जलने वाले व्यक्तियों का प्राथमिक उपचार किस प्रकार किया जाता है आदि का उसे अपेक्षित ज्ञान होना चाहिए।

(10) पर्याप्त दक्षता:
प्राथमिक चिकित्सक पर्याप्त दक्ष होना चाहिए ताकि वह सोचने में समय व्यर्थ न करके घायलों की तुरन्त सहायता कर सके तथा विधिपूर्वक उनका स्थानान्तरण अस्पताल तक करा सके।

(11) सीमाओं का ज्ञान:
प्राथमिक चिकित्सक को अपने कर्तव्य की सीमाओं का ज्ञान होना चाहिए। उसे यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि वह प्राथमिक चिकित्सक है, कोई डिग्री प्राप्त चिकित्सक नहीं। अतः उसे पीड़ित व्यक्तियों को शीघ्रातिशीघ्र अस्पताल पहुँचाने अथवा पहुँचवाने का प्रयास करना चाहिए।



Discussion

No Comment Found