1.

मानव को चन्द्रमा पर उतारने का यह सर्वप्रथम प्रयास होते हुए भी असाधारण रूप से सफल रहा। यद्यपि हर क्षण, हर पग पर खतरे थे। चन्द्रतल पर मानव के पाँव के निशान उसके द्वारा वैज्ञानिक तथा तकनीकी क्षेत्र में की गयी असाधारण प्रगति के प्रतीक हैं। जिस क्षण डगमग-डगमग करते मानव के पग उस धुलि-धूसरित अनछुई सतह पर पड़े तो मानो वह हजारों-लाखों साल से पालित-पोषित सैकड़ों अन्धविश्वासों तथा  कपोल-कल्पनाओं पर पद-प्रहार ही हुआ। कवियों की कल्पना के सलोने चाँद को वैज्ञानिकों ने बदसूरत और जीवनहीन करार दे दिया-भला अब चन्द्रमुखी कहलाना किसे रुचिकर लगेगा।(अ) प्रस्तुत गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए अथवा गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।(ब) रेखांकित अंशों की व्याख्या कीजिए।. .(स)⦁    चन्द्रमुखी कहलाना क्यों रुचिकर नहीं लगेगा ?⦁    जिस समय मनुष्य के कदम चन्द्रमा पर पड़े, उस समय क्या हुआ ? या मानव के चन्द्रमा पर उतरने का क्या भाव प्रतिध्वनित हुआ ?⦁    मानव द्वारा चन्द्रमा पर उतरने का प्रयास कैसा रहा ?[डगमग-डगमग करते हुए = लड़खड़ाते हुए। धूलि-धूसरित = धूल से सने हुए। अनछुई = जो किसी के द्वारा छुई हुई न हो। पालित-पोषित = पालन-पोषण किये गये। कपोल-कल्पना = झूठी कल्पना। पद-प्रहार = पैरों का आघात, (यहाँ पर) किसी धारणा को एकदम ही नकार देना। सलोने = सुन्दर। जीवनहीन = जीवों से रहित। करार देना = नाम देना। रुचिकर = अच्छा।]

Answer»

(अ) प्रस्तुत गद्यावतरण हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी’ के गद्य-खण्ड  में संकलित श्री जयप्रकाश भारती द्वारा लिखित ‘पानी में चंदा और चाँद पर आदमी’ नामक निबन्ध से अवतरित है। अथवा निम्नवत् लिखिए पाठ का नाम-पानी में चंदा और चाँद पर आदमी। लेखक का नाम-श्री जयप्रकाश भारती।

(ब) प्रथम रेखांकित अंश की व्याख्या-लेखक श्री जयप्रकाश भारती जी कहते हैं कि चन्द्रमा पर उतरने के कई सफल प्रयास पहले भी किये जा चुके थे। लेकिन चन्द्रमा पर मनुष्य को उतारने का। यह प्रथम प्रयास था, जो कि अमेरिका के द्वारा किया गया था। यह प्रयास उम्मीद से अधिक सफल रहा। यद्यपि चन्द्रमा पर मनुष्य के रखे गये प्रत्येक कदम और बिताये गये प्रत्येक क्षण खतरे से भरे हुए थे, तथापि दोनों ही अन्तरिक्ष यात्री अपने तीसरे साथी के साथ पृथ्वी पर सकुशल वापस लौट आये।।

द्वितीय रेखांकित अंश की व्याख्या-लेखक श्री जयप्रकाश भारती जी कहते हैं कि जैसे ही अमेरिकी चन्द्रयान चन्द्रमा पर पहुंचा और मानव ने अपने लड़खड़ाते हुए कदम सफलतापूर्वक चन्द्रमा के धरातल पर रखे, वैसे ही प्राचीनकाल से आज तक के उसके बारे में चले आ रहे सारे अन्धविश्वास एवं निरर्थक अनुमान असत्य प्रमाणित हो गये। चन्द्रमा पर पहुँचने पर उसके विषय में यथार्थ सत्य सामने आ गया और सारी कल्पनाएँ झूठी सिद्ध हो गयीं। हमारे प्राचीन कवि चन्द्रमा को सुन्दर कहते थे और नारियों के सुन्दर मुख की तुलना चन्द्रमा से किया करते थे, लेकिन चन्द्रतल पर पहुँचकर वैज्ञानिकों ने कवियों  की इन भ्रान्तियों को असत्य सिद्ध कर दिया। उन्होंने बताया कि चन्द्रमा बहुत कुरूप, ऊबड़-खाबड़ और जीवनहीन है। यदि कोई व्यक्ति किसी सुन्दरी को अब चन्द्रमुखी कहेगा तो अब वह अपने को चन्द्रमुखी (कुरूप और निर्जीव मुख वाली) कहलाना कैसे पसन्द करेगी ?

(स)
⦁    अब किसी स्त्री को चन्द्रमुखी; चन्द्रमा के समान मुख वाली; कहलाना इसलिए रुचिकर नहीं लगेगा; क्योंकि चन्द्रमा पर उतरने के बाद वैज्ञानिकों ने इसे बदसूरत और जीवनहीन घोषित कर दिया।
⦁    जिस समय मनुष्य के कदम चन्द्रमा पर पड़े उस समय लाखों वर्षों से चन्द्रमा के बारे में चले आ रहे अन्धविश्वास और निरर्थक अनुमान असत्य सिद्ध हो गये।
⦁    मानव द्वारा चन्द्रतल पर उतरने का सर्वप्रथम प्रयास पूर्ण रूप से सफल रहा। यह मनुष्य की वैज्ञानिक-तकनीकी क्षेत्र में की गयी असाधारण प्रगति का प्रतीक था।



Discussion

No Comment Found