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This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

निम्नलिखित तद्भव शब्दों के तत्सम रूप लिखिए :कपूत नींद जीभ कालिख 

Answer»
  • कपूत – कुपुत्र
  • नींद – निद्रा
  • जीभ – जिहवा
  • कालिख – कालिमा
2.

एकाकी परिवार की दो विशेषताएँ लिखिए।

Answer»

एकाको परिवार की दो विशेषताएँ निम्नलिखित हैं।

⦁    परिवार का छोटा आकार
⦁    निजी सम्पत्ति की अवधारणा

3.

संयुक्त परिवार के अस्तित्व को बचाने के लिए सुझाव दीजिए।

Answer»

वर्तमान परिवतियों में संयुक्त परिवार के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए व्यावहारिक सुझाव निम्नलिखित है।

⦁    संयुक्त पीवार में सभी स्त्रियों को विशेष रूप से पुत्र-वधुओं को समुचित सम्मान प्रदान किया जाना चाहिए।

⦁    परिवार के मुखिया को अधिक उदार तथा न्यायप्रिय होना चाहिए।

⦁    संयुक्त परिवार में मारपती एवं योग्य व्यक्तियों को अधिक सम्मान एवं सुविधा प्रदान की जानी चाहिए।

⦁    संयुक्त परिवार में सभी सदस्यों के लिए आवास की आवश्यक सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए।

⦁    संयुक्त परिवार में प्रत्येक सदस्य को अपने कर्तव्यों तथा अन्य सदस्यों के अपकारों के प्रति आगरूक होना चाहिए।

4.

संयुक्त परिवार के विघटन के दो मुख्य कार्य लिखिए। 

Answer»

संयुक्त परिवार के विघटन के दो कार्य निम्न प्रकार हैं

1. स्त्रियों में आन्तरिक कलह संयुक्त परिवार की स्त्रियों में आपस में कलह परिवार के लिए हानिकारक होता है। संयुक्त परिवार में झगड़े तथा मानसिक इह एवं संघर्ष छोटी-छोटी बातों पर चलते राहते हैं, जो आगे चलकर एक समस्या का रूप धारण कर लेते हैं। जिससे पूरे परिवार तथा बच्चों पर बुरा प्रभव पता है, इससे बचने के लिए अनेक दम्पति अपना एक अलग एकाकी परिवार बस्सा लेते हैं।

2. व्यावसायिक विजातीयता 20वीं शताब्दी में भारतीय समाज को परिवर्तित करने वाले अनेक सामाजिक आर्थिक क्रियाओं के फलस्वरूप नए-नए व्यवसाय व रोजगारों के वक्त आने से लोग इन गामाया अशा अवसरों को ओर आकर्षित हुए हैं। संयुक्त परिवार के सदस्य भी परम्परागत व्यवसाय को इछोड़कर नए साय अपनाने लगे हैं। इसके परिणामस्वरुप संयुका परिवारों के विघटन को प्रक्रिया तेज हुई हैं।
 

5.

एकाकी परिवार में कौन-कौन सी व्यावहारिक कठिनाइयाँ उपस्थित होती हैं?

Answer»

एकाकी परिवार की कुछ नयाँ व कठिनाइयों निम्नलिखित हैं

⦁    नन्हें शिशुओं की समस्या ज्यादातर एकाकी परिवार में पति-पत्नी दोनों नौकरी करते हैं, ऐसे में नन्हें शिशुओं को कहाँ छोड़ा जाए, यह एक बहुत बड़ी समस्या होती है।

⦁    कार्यक्षमता में कमी एकाको परिवार में सदस्यों की सागा कम होती है। यदि पत्नी नौकरी करती है, जो थर का सारा कार्य भी जो करना पड़ता है। अतः उसकी कार्यक्षमता में कमी आ जाती है।

⦁    नौकरों पर निर्भरता पति-पत्नी दोनों को नौकरी करने के कारण प्रायः उन्हें | नौकरों पर निर्भर रहना पड़ता हैं। नौकर पर विश्वास करना कभी-कभी पाकि भी हो जाता है। अत: पति-पत्नी दोनों मानसिक परेशानी में रहते है।

⦁    बच्चों में अनुशासनहीनता पति फनी दोनों के नौकरी पर चले जाने के कारण बच्चों के क्रियाकलापों की देखभाल करने के लिए घर पर कोई नहीं होता, इसलिए कभी-कभी उनमें बुरी आदतें भी जम ले लेती हैं। अतः बच्चे अनुशासनहीन हो जाते हैं। बच्चे एकता की भावना से ग्रसित हो जाते हैं।

⦁    स्वार्थ की भावना का विकास एकाकी परिवार में पति पत्नी केवल अपने बारे में सोचते हैं। अत: उनमें स्वार्थ की भावना बढ़ती जाती है। वृद्ध माता-पिता तथा भाई बहन के लिए कार्य करने का उन्हें अक्सर ही नहीं मिल पाता। अतः ये स्वार्थी व निष्ठुर हो जाते हैं।

⦁    उचित निर्देशन एवं परामर्श का अभाव एकाकी परिवार के सदस्यों को दादा-दादी एवं अन्य बुजुर्ग सदस्यों का उचित निर्देशन एवं परामर्श उपलब्ध नहीं हो पाता है। इस प्रकार वे बुजुर्ग सदस्यों के जीवन के अनुभवों का लाभ नहीं उठा पाते हैं।

⦁    व्यय साध्य एकाकी परिवार के आय के स्रोत सीमित होते हैं, जबकि उन्हें समस्त संसाधनों को व्यय प्रबन्धन बिना किसी सहायता के स्वयं करना

6.

परिवार की चार विशेषताएँ लिखिए

Answer»

मैकाइवर एवं पेश ने परिवार की निम्नलिखित विशेषताओं का उल्लेख लिया है।

⦁    सार्वभौमिकता परिवार की उपस्थिति सार्वभौमिक होती है, अत् शहर हों, म ग हो; यह सभी जगह उपस्थित होता है और प्रत्येक व्यक्ति किसी-न-किसी परिवार का सदस्य होता है।

⦁    सीमित और बड़ा आकार परिवार सीमित आकार या बड़े आकार का भी हो सकता है अर्थात परिवार में दो पी मों के सदस्य भी हो सकते है और तौन-या-तीन से अधिक पीढ़ियों के सदस्य भी हो सकते हैं।

⦁    भावात्मक आधार परिवार के सदस्य परस्पर भावात्मक बन्धनों से बँधे होते हैं। परिवार में प्रेम, त्याग, सहयोग, दया तथा बलिदान आदि की भावनाएँ विद्यमान रहती हैं।

⦁    सदस्यों का उत्तरदायित्व प्रत्येक परिवार अपने-अपने सदस्यों से कुछ उत्तरदायित्व निभाने की अपेक्षा रखता है। संकट के समय प्रत्येक सदस्य परिवार के लिए बड़े से बड़ा त्याग करने को तत्पर रहता है।

7.

एकाकी परिवार के क्या लाभ हैं?

Answer»

सामान्य रूप से एकाको परिवार में केवल दो पीढ़ियों के सदस्य पाए जाते है अर्थात् पति-पत्नी एवं उनके अविवाहित बच्चे ही एकाकी परिवार का निर्माण करते हैं। एकाकी परिवार के लाभ एकाकी परिवार के साथ या विशेषताएँ निम्नलिखित हैं।

⦁    पति-पत्नी संयुक्त रूप से परिवार का संचालन करते हैं। इसमें पति-पत्नी को अपनी गृङ्गस्थी को संचालित करने की पूर्ण स्वतन्त्रता रहती हैं।

⦁    सभी प्रकार के रिश्तेदारों व सम्बन्धियों में एकाको परिवार के प्रति सहानुभूति का व्यवहार रहता है। सम्बन्धियों के साथ प्रेमपूर्ण सम्बन्ध होता है।

⦁    एकाको परिवार में पति-पत्नी अपनी सन्तान को समुचित शिक्षा का प्रबन्ध करते हैं तथा उनके उज्ज्वल भविष्य हेतु सदैव प्रयासरत् रहते हैं। अतः बच्चों के व्यक्तित्व का सम्पूर्ण विकास होता है।

⦁    एकाको परिवार में स्त्रियों की स्थिति मजबूत होती है। एक ही स्त्री होने के | कारण कोई भी एकाही परिवार में इसकी अवहेलना नहीं कर सकता। पत्नी द्वारा पिक सहायता करना भी सम्भव होता है।

⦁    एकाको परिवार में पारिवारिक गोपनीयता बनी रहती है।

⦁    एकाकी परिसर में प्रत्येक व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास सही प्रकार से होता है। परिवार का आकार छोटा होने के कारण शोषण व फतह का पूर्णतः अभाव होता है।

⦁    एकाकी परिवार का प्रत्येक सदस्य अपने-अपने कार्य को पूर्ण उत्तरदायित्व के अनुसार का है, जिससे भालस्य और कामचोरी की भावना विकसित नहीं हो पाती।

8.

एकल (एकाकी) परिवार में (a) केवल ए मत होता है।(b) पति-नी के रिश्तेदार भी होते हैं।(c) केवल प-िपत्नी होते हैं।(d) पति-नी और उनके अविवाति मध्ये होते हैं।

Answer»

(d) पति-पत्नी और उनके अविवाहित बने होते हैं।

9.

गोरा मुखिया बाहर निकल कर क्या करना चाहता था?(क) पानी पीना चाहता था।(ख) कोफी पीना चाहता।(ग) गांधीजी से झगड़ना चाहता था।(घ) सिगरेट पीना चाहता था।

Answer»

सही विकल्प है (घ) सिगरेट पीना चाहता था।

10.

संयुक्त परिवार में(a) यह एक व्यक्ति होता है।(b) पति-पत्नी और उनके बचे होते हैं।(c) कई पीढ़ियों के लोग एक साथ रहते हैं(d) परोक्त सभी

Answer»

सही विकल्प है (c) कई पीढ़ियों के लोग एक साथ रहते हैं।

11.

दूसरे दिन गांधीजी को सिकरम में कहाँ जगह मिली?(क) गाड़ीवान के पास(ख) यात्रियों के पास(ग) गोरे मुखिया के पास(घ) एजेण्ट के पास

Answer»

सही विकल्प है (ख) यात्रियों के पास

12.

गाँधीजी भगवान से क्या प्रार्थना करते रहे ?(क) रक्षा के लिए(ख) देशवासियों के हक के लिए(ग) जोहनिसबर्ग पहुँचने के लिए(घ) स्वतंत्रता के लिए

Answer»

सही विकल्प है (क) रक्षा के लिए

13.

गोरा मुखिया कहाँ बैठता था?

Answer»

सिकरम से यात्रा करनेवाले लोग सिकरम में अंदर बैठते थे। सिकरम के बाहर कोचवान की बगल में दाएं-बाएं दो बैठकें थीं। गोरा मुखिया इन बैठकों में से एक बैठक पर बैठता था।

14.

निम्नलिखित अशुद्ध वाक्यों को शुद्ध करके फिर से लिखिए :आपकी टिकट रद्द हो चुकी है।मैंने यह अपमान को पी लिया।मेरा जगह अंदर था।मेरे ऊपर तमाचों की वर्षा होने लगी।मैं उन लोग को अपने पर बीती सुनाई।मैं बहोत खुश हुआ।मेरा घर तुमसे बड़ा है।मुंबई की सड़के नागपुर से अच्छी हैं।

Answer»
  1. आपका टिकट रद्द हो चुका है।
  2. मैंने इस अपमान को पी लिया।
  3. मेरी जगह अंदर थी।
  4. मुझ पर तमाचों की वर्षा होने लगी।
  5. मैंने उन लोगों को आपबीती सुनाई।
  6. मैं बहुत खुश हुआ।
  7. मेरा घर तुम्हारे घर से बड़ा है।
  8. मुंबई की सड़कें नागपुर की सड़कों से अच्छी हैं।
15.

निम्नलिखित शब्दसमूहों के लिए एक-एक शब्द लिखिए :जो उपयोग के लायक न हो जिससे जान-पहचान न होगाड़ी हाँकनेवाला जो उचित न हो समझना’ क्रिया की संज्ञा जो समर्थ न हो हथेली और पहुँचे के बीच का भाग जिसके पास कोई चारा न हो अपने पर बीती हुई जिसे आश्वासन दिया गया है जिसे कोई फिक़ न हो 

Answer»
  • जो उपयोग के लायक न हो – रही
  • जिससे जान-पहचान न हो – अजनबी
  • गाड़ी हाँकनेवाला – कोचवान
  • जो उचित न हो – अनुचित
  • समझना’ क्रिया की संज्ञा – समझदारी
  • जो समर्थ न हो – असमर्थ
  • हथेली और पहुँचे के बीच का भाग – कलाई
  • जिसके पास कोई चारा न हो – बेचारा
  • अपने पर बीती हुई – आपबीती
  • जिसे आश्वासन दिया गया है – आश्वस्त
    जिसे कोई फिक़ न हो – बेफिक्र
16.

कौन-सी संभावनाएँ सामने हैं?(क) आँधी की(ख) बाढ़ की(ग) कीचड़ की(घ) पानी की

Answer»

सही विकल्प है (ख) बाढ़ की

17.

कवि कुसुम के प्रतीक द्वारा क्या संदेश देना चाहता है ?

Answer»

कवि कहते हैं कि माना कि तुम्हारे जीवन में कोई ऐसा था, जो तुम्हे फूल की तरह प्रिय लगता था और तुम उस पर न्योछावर होते थे। उसकी प्रसन्नता में ही तुम अपनी प्रसन्नता मानते थे। तुम्हारे जीवन का वह फूल सूख गया, तो सूख जाने दो। अब तो वह कभी खिलनेवाला है नहीं। इसलिए उस पर शोक करना व्यर्थ है। कुसुम के इस प्रतीक द्वारा कवि यह संदेश देना चाहता है कि कोई व्यक्ति कितना भी प्यारा हो, यदि वह सदा के लिए बिछुड़ गया तो उसके पुन:मिलन होने की कोई आशा नहीं। इसलिए उसे भूल जाने में ही बुद्धिमानी है।

18.

मधुघट किसका प्रतीक है?

Answer»

मधुघट जीवन का प्रतीक है।

19.

निम्नलिखित शब्दसमूहों के लिए एक-एक शब्द लिखिए :जिसकी हद न होरात में जो आकाश में चमकते हैं जहाँ लोग मदिरा पीने जाते हैं अनचित कार्य करने पर होनेवाला दःख 

Answer»
  • जिसकी हद न हो – बेहद
  • रात में जो आकाश में चमकते हैं – तारे
  • जहाँ लोग मदिरा पीने जाते हैं – मदिरालय
  • अनचित कार्य करने पर होनेवाला दःख – पछतावा
20.

निम्नलिखित मुहावरों के अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग कीजिए:निछावर होनामिट्टी में मिल जाना 

Answer»

निछावर होना- समर्पित किया जाना
वाक्य : स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों का सर्वस्व स्वतंत्रता की बलिवेदी पर निछावर हो गया।

मिट्टी में मिल जाना – नष्ट हो जाना
वाक्य : भाइयों की आपसी कलह से जगन सेठ का बना-बनाया व्यापार मिट्टी में मिल गया।

21.

कवि सोये हुए साथियों को तड़पती हुई गज़ल क्यों सुनाना चाहता है?

Answer»

कवि के साथ चलनेवाले लोग अर्धनिद्रा की स्थिति में हैं। उनमें उदासी छाई हुई है। उनमें जीने का उत्साह नहीं रह गया है। वे अपने खिलाफ हो रही किसी चीज का विरोध नहीं कर सकते। कवि उनमें नवीन चेतना और जागृति लाना चाहता है। वह उन्हें जीवंत बनाना चाहता है। इसलिए वह उन्हें तड़पती हुई गजल सुनाना चाहता है। उनमें चेतना उत्पन्न करना चाहता है।

22.

कवि कालीन क्यों नहीं देखना चाहता?

Answer»

कवि के पाँव इस समय कीचड़ में सने हैं। इसलिए वे कालीन नहीं देखना चाहते।

23.

चेहरों को आईनों के समान टूटा हुआ क्यों नहीं बताया गया है?

Answer»

आईने टूट जाते हैं, तो फिर उनका कोई मूल्य नहीं रहता। वे बेकार हो जाते हैं। कवि कहता है कि लोगों के चेहरे भी आईने की तरह टूटे हुए हैं। वे उदास और मायूस हैं। उन्हें अपना जीवन भी व्यर्थ लगता है। परंतु के आईने नहीं, मनुष्य हैं। परिस्थितियों ने उन्हें भले मिले तो उनके मन की टूटन दूर हो सकती है और उनके अरमानों की फसल लहलहा सकती है।

24.

कवि ने झुनझुना किसे कहा है?

Answer»

कवि ने सभा में आए उन लोगों को झुनझुने कहा है जिनको अपनी बात कहने का मौका नहीं दिया जाता और उन पर अपना निर्णय थोपकर उनका मनचाहा उपयोग किया जाता है।

25.

दरख्तों के तने कैसे हैं?

Answer»

दरख्तों के तने बहुत नाजुक हैं।

26.

निम्नलिखित अशुद्ध वाक्यों को शुद्ध करके फिर से लिखिए :घर नदी का किनारा नहीं बनने चाहिए।आंधी में कितना पेड़ गिर गया।लोग अपने चहेरा आईने में देखती है।यह दुष्यंतकुमार का गज़ल है।हम भारत में स्वतंत्र रहते हैं।उसने नाम अपना रोशन किया।

Answer»
  1. घर नदी के किनारे नहीं बनने चाहिए।
  2. आंधी में कितने पेड़ गिर गए।
  3. लोग अपने चेहरे आईने में देखते हैं।
  4. यह दुष्यंतकुमार की गज़ल है।
  5. हम स्वतंत्र भारत में रहते हैं।
  6. उसने अपना नाम रोशन किया।
27.

इस गज़ल का केन्द्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।

Answer»

इस गज़ल के माध्यम से कवि ने बताया है कि देश की जनता में उदासी का माहौल है। जरूरतमंदों को सरकारी सहायता नहीं मिल पाती। लोगों में जन-विरोधी नीतियों और योजनाओं का विरोध करने का साहस नहीं है। जिनमें कुछ कर गुजरने की इच्छा है, उन्हें उसका मौका नहीं दिया जाता। लोगों को वैभव के सपने दिखाकर बहलाया जाता है। गरीबों को खिलौना समझकर उनका मनमाना उपयोग किया जाता है। इस प्रकार गजल में सामाजिक और राजनीतिक यथार्थ का सच मुखरित हुआ है।

28.

निम्नलिखित अशुद्ध वाक्यों को शुद्ध करके फिर से लिखिए :बिती बात को भूल जानी चाहिए।तारों को कोई गौन नहीं सकता।जिंदगी हमारी अब नहीं बचेगी।ममता में सद्गुण एक बहुत बड़ा है।इस पत्र को कावेरी ने लिखा हैं।इस शोक मानने की वक्त नहीं है।

Answer»
  1. बीती बातों को भूल जाना चाहिए।
  2. तारों को कोई गिन नहीं सकता।
  3. अब हमारी जिंदगी नहीं बचेगी।
  4. ममता में एक बहुत बड़ा सदगुण है।
  5. यह पत्र कावेरी ने लिखा है।
  6. यह शोक मनाने का वक्त नहीं है।
29.

‘जो बीत गई सो बात गई’ कविता के कवि कौन है?

Answer»

‘जो बीत गई सो बात गई’ कविता के कवि हरिवंशराय बच्चन है।

30.

निम्नलिखित शब्दों में से प्रत्यय अलग कीजिए :मादकता खामोशी

Answer»
  1. मादकता = मादक + ता (प्रत्यय)
  2. खामोशी = खामोश + ई (प्रत्यय)
31.

मधुघट और मनुष्य जीवन में क्या समानता पायी जाती है? स्पष्ट करें।

Answer»

मधुघट मिट्टी का बना होता है। वह बहुत नाजुक होता है, इसलिए अकसर फूट जाता है। मनुष्य का शरीर भी मिट्टी से निर्मित घट के समान है। यह भी मधुघट के समान क्षणभंगुर है। यह कब फूट जाए कहा नही जा सकता। फूटे हुए मधुघट की तरह मृत व्यक्ति फिर से जीवित नहीं हो सकता। इस प्रकार मधुघट और मनुष्य जीवन में गहरी समानता है।

32.

निम्नलिखित वाक्यों में से विशेषण पहचानिए :दरख्तों के बहुत नाजुक तने हैं।हमसफर अनमने हैं।

Answer»
  1. नाजुक – गुणवाचक विशेषण
  2. अनमने – गुणवाचक विशेषण
33.

कवि ने किस वन का जिक्र किया है ?(क) सुन्दरवन का(ख) मधुवन का(ग) तपोवन का(घ) चीड़ वन का

Answer»

सही विकल्प है (घ) चीड़ वन का

34.

मदिरालय किन पर नहीं पछताता?

Answer»

मदिरालय टूटे प्यालों पर नहीं पछताता।

35.

‘जो बीत गई सो बात गई’ कविता द्वारा हमें क्या सीख मिलती है?

Answer»

जो बीत गई सो बात गई’ कविता में कवि ने आकाश, मधुवन, मदिरालय, मधुघट के उदाहरण दिए हैं। कवि कहता है कि आकाश कभी अपने टूटे हुए तारों पर शोक नहीं मनाता। मधुवन अपने सूखे हुए फूलों और मुरझाई लताओं पर दुःखी नहीं होता। मधुघटों के टूट जाने पर मदिरालय शोकग्रस्त नहीं होता। उसी तरह मनुष्य को भी यह समझ लेना चाहिए कि जिसका साथ छूट गया, उसे भूल जाने में ही भलाई है, जो बीत गई सो बात गई। बीते हुए को भूलकर आगे की बात सोचनी चाहिए।

36.

गज़ल का सरल अर्थ :बाढ़ की …….. घर बने हैं।

Answer»

कवि कहते हैं कि नदियों में बाढ़ आने की संभावना हमेशा बनी रहती है। उससे भारी विनाश हो सकता है। पर नदियों के किनारे ही लोगों के घर बने हैं। (फिर भी लोग वहाँ अपने घरों में निश्चिंत होकर रहते हैं। वे कहना चाहते हैं कि बाढ़ एक प्राकृतिक आपदा है। प्राकृतिक आपदा से डरकर कोई अपना घर-बार छोड़कर क्यों चला जाए!)

37.

जो बीत गई ।A. वह बेहद प्यारा था।B. छाती को देखो।C. सो बात गई।D. आनन को देखो।

Answer»

सही विकल्प है C. सो बात गई।

38.

गज़ल का सरल अर्थ (1) चीड़ वन में …….. नाजुक तने हैं।(2) इस तरह …….. ये आईन हैं।(3) आपके कालीन …….. कीचड़ में सने हैं।(4) जिस तरह ….. हम झुनझुने हैं।(5) अब तड़पती ….. अनमने हैं।

Answer»

(1) कवि कहते हैं कि चीड़ के वृक्षों के तने बहुत नाजुक होते हैं। इतने कि तेज हवा चलने पर भी उनके टूटकर गिर जाने का अंदेशा होता है। इसलिए चीड़ के वनों में आँधियों की तो बात ही नहीं की जा सकती। (आँधियाँ चलने पर तो चीड़ के सारे वृक्ष धराशायी हो जाएँगे।)

(2) कवि कहते हैं कि लोगों में हताशा है, पर वे इतने पस्त नहीं हैं, जिस तरह टूटे हुए आईने होते हैं। (टूटे हुए आईने टूटने पर टुकड़े-टुकड़े हो जाते हैं। (यहाँ लोगों में अभी भी कुछ कर गुजरने की शक्ति शेष है।)

(3) कवि कहते हैं कि अभी तो कष्ट से गुजरने के दिन है। उनके पैर अभी कीचड़ में सने हुए हैं। इस कष्ट से मुक्ति मिलने पर ही वे किसी के सुखद आश्वासन अथवा उसके वैभव के दर्शन कर सकेंगे। (वरना उस वैभव पर भी दाग लग जाएगा।)

(4) कवि कहते हैं कि इस सभा में हमारी स्थिति किसी असहाय व्यक्ति जैसी है। तुम जैसा भी चाहो हमारा उपयोग करो। हमारी हैसियत आदमी के रूप में नहीं रह गई है। हम आदमी न रहकर किसी झुनझुने की तरह हो गए हैं।

(5) कवि कहते हैं कि हमारे साथ चलनेवाले लोग अर्धनिद्रा की हालत में हैं और उन पर उदासी छाई हुई हैं। अब उन्हें कोई फड़कती हुई गजल सुनाए (उन्हें जाग्रत करे) तो ही उनमें जोश का संचार होगा।

39.

जीवन में मधु का प्याला था, ……(क) तुमने तन-मन दे डाला था(ख) कितने प्याले हिल जाते हैं(ग) जो गिरते हैं कब उठते हैं(घ) कब मदिरालय पछताता है

Answer»

सही विकल्प है (क) तुमने तन-मन दे डाला था

40.

जीवन में एक सितारा था, …………..।(क) वह डूब गया तो डूब गया(ख) अम्बर के आनन को देखो(ग) माना वह बेहद प्यारा था(घ) कितने इसके प्यारे छूटे।

Answer»

सही विकल्प है (ग) माना वह बेहद प्यारा था

41.

ऐसा रण, राणा करता था,पर उसको था सन्तोष नहीं।क्षण-क्षण आगे बढ़ता था वह,पर कम होता था रोष नहीं।।कहता था लड़ता मान कहाँ,मैं कर लें रक्त-स्नान कहाँ?जिस पर तय विजय हमारी है,वह मुगलों का अभिमान कहाँ?

Answer»

[ रण = युद्ध। रोष = गुस्सा, क्रोध। अभिमान = घमण्ड।]

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से कवि ने राणा प्रताप द्वारा मुगल सेना के छक्के छुड़ाने का वर्णन किया है।

व्याख्या-कवि राणा प्रताप के रण कौशल के बारे में कहता है कि राणा इस तरह भयानक युद्ध करता था कि वह कहीं रुकने का नाम ही नहीं लेता था। वह युद्धभूमि में जैसे-जैसे आगे बढ़ता था, वैसे-वैसे उसका और भी युद्ध का उत्साह बढ़ता जाता था।
 
राणा प्रताप कहता था कि युद्धभूमि में मानसिंह (मुगल सेना का नेतृत्व करने वाला).उसका मुकाबला नहीं कर सकते हैं। अर्थात् युद्धभूमि में राणा का मुकाबला करना मानसिंह के बस की बात नहीं है और उसके हाथों राणा का  शरीर रक्त रंजित हो, यह कदापि नहीं हो सकता। राणा यह पूर्ण विश्वास के साथ कहता है कि युद्ध में विजय उसकी ही होगी, यह पूर्ण निश्चित है। उसके जीते जी मुगल सेना अभिमान प्रकट करे, यह कदापि नहीं हो सकता है।

काव्यगत सौन्दर्य-
⦁    कवि के द्वारा राणा प्रताप के अप्रतिम शौर्य का बखान किया गया है।
⦁    भाषा-खड़ी बोली।
⦁    रस–वीर।
⦁    अलंकार-अनुप्रास, पुनरुक्तिप्रकाश, श्लेष।
⦁    शैली-ओजपूर्ण।
⦁    भावसाम्य-स्वदेश के प्रति कवि माखनलाल चतुर्वेदी ने ऐसी ही पंक्तियों का उद्गार किया है-
बलि होने की परवाह नहीं, मैं हूँ, कष्टों का राज्य रहे,
मैं जीता, जीता, जीता हूँ माता के हाथ स्वराज्य रहे।

42.

‘हल्दी घाटी’ कविता का सौन्दर्य कवि की ओजपूर्ण शैली में प्रस्फुटित हुआ है। कविता से उदाहरण देते हुए कथन की पुष्टि कीजिए।

Answer»

ओजपूर्ण शैली के निम्नलिखित उदाहरण हैं-

(क) मेवाड़-केसरी देख रहा,
केवल रण का न तमाशा था।
वह दौड़-दौड़ करता था रण,
वह मान-रक्त का प्यासा था।।

(ख) कहता था लड़ता मान कहाँ,
मैं कर लें रक्त-स्नान कहाँ?
जिस पर तय विजय हमारी है,
वह मुगलों का अभिमान कहाँ?

43.

क्षण उछल गया अरि घोड़े पर,क्षण लड़ा सो गया घोड़े पर।बैरी दल से लड़ते-लड़ते,क्षण खड़ा हो गया घोड़े पर।क्षण में गिरते रुण्डों से,मदमस्त गजों के शुण्डों से।घोड़ों के विकल वितुण्डों से,पट गई भूमि नरमुण्डों से।।

Answer»

[ अरि = शत्रु। रुण्ड = सिरविहीन शरीर। वितुण्ड = हाथी।] ।

प्रसंग—प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने राणा प्रताप के शौर्य से युद्धभूमि में फैले हाहाकार का वर्णन किया है।

व्याख्या-कवि कहता है कि यदि कोई शत्रु राणा प्रताप पर हमला करने के लिए उठा भी तो वह वहीं धाराशायी हो गया अर्थात् राणा प्रताप द्वारा उसे घोड़े पर ही ढेर कर दिया गया। राणा प्रताप के पराक्रम का बयान करते हुए  कवि कहता है कि वह शत्रु सेना से लड़ते-लड़ते कभी-कभी अपने घोड़े पर खड़ा भी हो जाता, इस प्रकार प्रचंड शत्रुओं के विशाल दलों को वह खदेड़-खदेड़ उन पर हमला करता था। राणाप्रताप के हमले से शत्रुओं के धड़ हाथियों की सँड़ों के समान गिर रहे थे। हाथियों और घोड़ों की भयंकर विकलता के कारण युद्धभूमि नरमुण्डों से पटी हुई दिखाई पड़ रही थी।

काव्यगत सौन्दर्य-
⦁    कवि के माध्यम से राणा प्रताप के पराक्रम का बड़ा ही ओजस्वी वर्णन किया गया है।
⦁    भाषा-खड़ी बोली।
⦁    रस-वीर।
⦁    अलंकार-पुनरुक्तिप्रकाश, अतिशयोक्ति।
⦁    शैली-ओजपूर्ण।
⦁    भावसाम्य-महाकवि भूषण द्वारा वीर रस का ऐसा ही वर्णन किया गया है-
निकसत म्यान ते मयूखें अलैभानु कैसी,
फारें तमतोम से गयंदन के जाल को।
लागति लपटि कंठ बैरिन के नागिनी सी,
रुद्रहिं रिझावै दै दै मुंडन के माल को।

44.

वह हाथी दल पर टूट पड़ा,मानो उस पर पवि छूट पड़ा।कट गई वेग से भू, ऐसाशोणित का नाला फूट पड़ा।जो साहस कर बढ़ता उसको,केवल कटाक्ष से टोक दिया।जो वीर बना नभ-बीच फेंक,बरछे पर उसको रोक दिया।

Answer»

[ दल = समूह। पवि = भाला। शोणित = रक्त, लहू।]

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने महाराणा प्रताप के असीम पराक्रम का वर्णन किया है।

व्याख्या-कवि कहता है कि राणा प्रताप शत्रुसेना के हाथीदल पर इस भाँति हमला करता था कि मानों पूर्ण वेग से भाले का वार किया गया हो और उसके वेग से हाथीदल से इस भाँति लहू की धारा फूट ५ . पड़ी जैसे भूमि भाले के प्रहार से  फट पड़ी हो और उससे जल का वेगपूर्ण नद-सा फूट पड़ा हो।

कवि कहता है कि यदि कोई शत्रु राणा पर वार करने के लिए साहस करके आगे बढ़ता तो वह केवल राणा की तिरछी निगाह के मात्र से ही वहीं का वहीं रूक जाता था और यदि कोई शत्रु सैनिक हमला भी कर देता तो राणाप्रताप उसे नभ के बीचोंबीच हवा में ही अपने भाले से रोक देता था।

काव्यगत सौन्दर्य-
⦁    राणा प्रताप की वीरता का अद्भुत चित्रण हुआ है।
⦁    रस-वीर।
⦁    छन्द-मुक्त, तुकान्त।
⦁    शैली–ओजपूर्ण।
⦁    भाषा-साहित्यिक खड़ी बोली।
⦁    अलंकार-उपमा, अनुप्रास, अतिशयोक्ति।
⦁    भावसाम्य-महाकवि भूषण ने छत्रसाल की वीरता का वर्णन इन पंक्तियों में किया है–

भुज भुजगेस की वै संगिनी भुजंगिनी-सी,
खेदि-खेदि खाती दीह दारुन दलन के।

45.

श्री श्यामनारायण पाण्डेय का जीवन-परिचय दीजिए तथा उनकी रचनाओं के नाम लिखिए।

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जीवन-परिचय-श्यामनारायण पाण्डेय का जन्म श्रावण कृष्ण पंचमी को संवत् 1964 ( ईसवी सन् 1907 ई० ) में डुमराँव गाँव, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश में हुआ था। आरम्भिक शिक्षा के बाद श्यामनारायण पाण्डेय संस्कृत अध्ययन के लिए काशी (वर्तमान बनारस) आये। कोशी से वे साहित्याचार्य की परीक्षा में उत्तीर्ण हुए। वे स्वभाव से सात्विक, हृदय से विनोदी और आत्मा से परम निर्भीक व्यक्ति थे। पाण्डेय जी के स्वस्थ-पुष्ट व्यक्तित्व में  शौर्य, सत्त्व और सरलता का अनूठा मिश्रण था। उनके संस्कार द्विवेदीयुगीन, दृष्टिकोण उपयोगितावादी और भाव-विस्तार मर्यादावादी थे। लगभग दो दशकों से ऊपर वे हिन्दी कवि-सम्मेलनों के मंच पर अत्यन्त लोकप्रिय एवं समादृत रहे। उन्होंने आधुनिक युग में वीर काव्य की परम्परा को खड़ी बोली में प्रतिष्ठित किया। यह महान कवि रूपी सूर्य सन् 1991 में अस्त हो गया।

रचनाएँ-श्यामनारायण पाण्डेय द्वारा रचित प्रमुख रचनाएँ निम्न प्रकार हैं-
⦁    हल्दी घाटी’ (1937-39 ई०)।
⦁    जौहर’ (1939-44 ई०)
⦁    ‘तुमुल’ (1948 ई०)। यह पुस्तक ‘त्रेता के दो वीर’ नामक खण्डकाव्य का ही परिवर्धित संस्करण है।
⦁    रूपांतर’ (1948 ई०)
⦁    ‘आरती’ (1945-46 ई०)
⦁    ‘जय हनुमान’ (1956 ई०) उनकी प्रमुख प्रकाशित काव्य पुस्तकें हैं।
⦁    ‘माधव’, ‘रिमझिम’, ‘आँसू के कण’ और ‘गोरा वध’ उनकी प्रारम्भिक लघु कृतियाँ हैं।
⦁    ‘परशुराम’ अप्रकाशित काव्य है तथा वीर सुभाष’ रचनाधीन ग्रंथ है। श्यामनारायण पाण्डेय के संस्कृत में लिखे कुछ काव्य-ग्रंथ भी अप्रकाशित ही हैं।

साहित्य में स्थान–श्यामनारायण पाण्डेय वीर रस के अद्भुत कवियों में से एक थे। वे काशी के प्रसिद्ध साहित्याचार्य थे। उन्होंने चार महाकाव्य रचे, जिनमें हल्दीघाटी’ और ‘जौहर’ विशेष चर्चित हुए। ‘हल्दीघाटी में महाराणा प्रताप के जीवन और जौहर’ में रानी  पद्मिनी के आख्यान हैं। हल्दीघाटी पर श्यामनारायण पाण्डेय को ‘देव पुरस्कार’ प्राप्त हुआ था। अपनी ओजस्वी वाणी के कारण श्यामनारायण पाण्डेय कवि सम्मेलनों में बड़े लोकप्रिय थे।

46.

निम्नलिखित मुहावरों को अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए-तमाशा देखना, रक्त का प्यासा होना, हलचल मचाना।

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मुहावरे वाक्य-प्रयोग

तमाशा देखना-हल्दी घाटी के युद्ध में मुगल सेना राणाप्रताप के रण-कौशल का तमाशा देखती रह गयी।

रक्त का प्यासा होना-राणा प्रताप शत्रु सेना पर इस भाँति टूट पड़ता था मानो वह रक्त का प्यासी हो।

हलचल मचाना–हल्दीघाटी के युद्ध में राणा प्रताप  अपने घोड़े चेतक पर सवार होकर जिस ओर मुड़ जाता था उसी ओर मुगल सेना में हलचल मच जाती थी।

47.

निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार का नाम सहित स्पष्टीकरण कीजिए-(क) कट गई वेग से भू, ऐसा ।शोणित का नाला फूट पड़ा।(ख) घोड़ों के विकल वितुण्डों से,पट गई भूमि नरमुण्डों से।

Answer»

(क) अतिशयोक्ति, उपमा अलंकार

(ख) अतिशयोक्ति,  अनुप्रास अलंकार

48.

मेवाड़-केसरी देख रहा,केवल रण का न तमाशा था।वह दौड़-दौड़ करता था रण,वह मान-रक्त का प्यासा था।चढ़कर चेतक पर घूम-घूम,करता सेना रखवाली था।ले महामृत्यु को साथ-साथमानो प्रत्यक्ष कपाली था।

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[ मेवाड़-केसरी = मेवाड़ का राजा राणा प्रताप। तमाशा = दृश्य। कपाली = काल का स्वामी] ।

सन्दर्भ-प्रस्तुत काव्य-पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी’ के ‘काव्य-खण्ड में संकलित तथा ओजस्वी वाणी के कवि श्यामनारायण पाण्डेय द्वारा रचित ‘हल्दीघाटी’ शीर्षक से उद्धृत हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत काव्य पंक्तियों के माध्यम से कवि श्यामनारायण पाण्डेय जी ने हल्दीघाटी की युद्धभूमि में महाराणा प्रताप द्वारा दिखाए गए रण-कौशल का दृष्टांत वर्णन किया है।
व्याख्या-उक्त पंक्तियों के माध्यम से कवि ने बताया है कि हल्दीघाटी के युद्ध में मेवाड़ केसरी अर्थात् राणा प्रताप केवल युद्ध का तमाशा ही नहीं देख रहे थे, यद्यपि वह दौड़-दौड़कर इस प्रकार युद्ध कर रहे थे मानो वह मानसिंह (हल्दीघाटी के युद्ध  में मानसिंह शत्रु सेना का नेतृत्व कर रहा था) के रक्त के प्यासे हों अर्थात् राणा प्रताप का रण-कौशल इतना भयानक था कि वह अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए मानसिंह की सेना परे रक्तपिपासु बनकर टूट पड़े थे।

राणा प्रताप अपने घोड़े चेतक पर सवार होकर अपनी सेना की रखवाली करते हुए इस प्रकार युद्ध कर रहे थे जैसे मानो अपने साथ मृत्यु का प्रलयकारी भीषण रूप लिए साक्षात् महाकाल युद्धभूमि में आ धमका हो।
तात्पर्य यह है कि हल्दीघाटी के युद्ध में जब शत्रुसेना का नेतृत्व करता हुआ मानसिंह युद्धभूमि में राणा प्रताप के सामने आया तो राणा प्रताप ने मानसिंह के नेतृत्व में भेजी गयी मुगल सेना में उथल-पुथल मचा दी।

काव्यगत सौन्दर्य–
⦁    हल्दीघाटी की युद्धभूमि का दृष्टांत वर्णन हुआ है।
⦁    रस–वीर रस।
⦁    शैली-ओजपूर्ण।
⦁    छन्द-मुक्त, तुकान्त।
⦁    अलंकार–श्लेष, अतिशयोक्ति, पुनरुक्तिप्रकाश, उत्प्रेक्षा, अनुप्रास।
⦁    भावसाम्य-देशभक्त माखनलाल चतुर्वेदी ने अपनी इन पंक्तियों में ऐसा ही भाव व्यक्त किया है-
बलि होने की परवाह नहीं, मैं हूँ कष्टों का राज रहे,
मैं जीता, जीता, जीता हूँ, माता के हाथ स्वराज रहे।

49.

श्री श्यामनारायण पाण्डेय की पुस्तक में दी गई कविता वीर रस से परिपूर्ण है। वीर रस की परिभाषा देते हुए पाठ से दो उदाहरण दीजिए।

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(क) वीर रस की परिभाषा–शत्रु की उन्नति, दीनों पर अत्याचार या धर्म की दुर्गति को मिटाने जैसे किसी विकट या दुष्कर कार्य को करने का जो उत्साह मन में उमड़ता है, वही वीर रस का स्थायी भाव है, जिसकी पुष्टि होने पर वीर रस की सिद्धि होती है।

(ख) वीर रस के अव्यय-स्थायी भाव–उत्साह।

आलम्बन (विभाव)-अत्याचारी शत्रु।

उद्दीपन (विभाव)--शत्रु का अहंकार रणवाद्य, यश की इच्छा आदि।

अनुभाव–गर्वपूर्ण उक्ति, प्रहार करना, रोमांच आदि।

संचार भाव-आवेग, उग्रता, गर्व, औत्सुक्य, चपलता आदि।

उदाहरण-

वह हाथी दले पर टूट पड़ा,
मानो उस पर पवि छूट पड़ा।
कट गई वेग से भू, ऐसा ।
शोणित का नाला फूट पड़ा।

50.

क्षण मार दिया कर कोड़े से,रण किया उतर कर घोड़े से।राणा रण कौशल दिखा-दिखा,चढ़ गया उतर कर घोड़े से॥क्षण भीषण हलचल मचा मचा,राणा-कर की तलवार बढ़ी।था शोर रक्त पीने का यहरण चण्डी जीभ पसार बढी॥

Answer»

[ कर = हाथ। रण कौशल = युद्धभूमि की कुशलता। भीषण = भयानक। चण्डी = दुर्गा, काली। )

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में राणा प्रताप के रणकौशल का वर्णन किया गया है।

व्याख्या-हल्दी घाटी की युद्धभूमि में कवि राणा प्रताप के रण-कौशल को देखकर चकित है। वह उसके कौशल को देखकर कहता है कि राणा प्रताप इस तरह युद्ध कर रहा था कि कहीं वह शत्रु सेना में हाथ के कोड़े से हमला कर देता तो कहीं, घोड़े से उतरकर युद्ध करने लगता था। उसका घोड़े से कहीं उतरकर और कहीं चढ़कर युद्ध करनी देखते बनता था।

राणा प्रताप युद्ध स्थल में अपनी तलवार से शत्रुसेना पर जिस ओर हमला कर देता वहीं हाहाकार मच जाता था। शत्रु सेना में इस तरह शोर मच रहा था मानो वहाँ राणा प्रताप नहीं, बल्कि स्वयं महाकाली खड्ग लेकर रक्त पीने के लिए अपनी जीभ पसारकर  बढ़ रही हो।

काव्यगत सौन्दर्य-
⦁    राणा प्रताप की वीरता का अद्भुत वर्णन हुआ है।
⦁    रस–वीर।
⦁    छन्द-मुक्त, तुकान्त।
⦁    शैली-ओजपूर्ण।
⦁    अलंकार-अतिशयोक्ति, उत्प्रेक्षा।
⦁    भावसाम्य-कवि सोहनलाल द्विवेदी जी ने भी स्वतन्त्रता की खातिर ऐसे ही भावों को व्यक्त किया है—

अशेष रक्त तोल दो
स्वतन्त्रता का मोल दो
कड़ी युगों की खोल दो
डरो नहीं, मरो नहीं, बढ़े चलो, बढ़े चलो।