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गज़ल का सरल अर्थ (1) चीड़ वन में …….. नाजुक तने हैं।(2) इस तरह …….. ये आईन हैं।(3) आपके कालीन …….. कीचड़ में सने हैं।(4) जिस तरह ….. हम झुनझुने हैं।(5) अब तड़पती ….. अनमने हैं। |
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Answer» (1) कवि कहते हैं कि चीड़ के वृक्षों के तने बहुत नाजुक होते हैं। इतने कि तेज हवा चलने पर भी उनके टूटकर गिर जाने का अंदेशा होता है। इसलिए चीड़ के वनों में आँधियों की तो बात ही नहीं की जा सकती। (आँधियाँ चलने पर तो चीड़ के सारे वृक्ष धराशायी हो जाएँगे।) (2) कवि कहते हैं कि लोगों में हताशा है, पर वे इतने पस्त नहीं हैं, जिस तरह टूटे हुए आईने होते हैं। (टूटे हुए आईने टूटने पर टुकड़े-टुकड़े हो जाते हैं। (यहाँ लोगों में अभी भी कुछ कर गुजरने की शक्ति शेष है।) (3) कवि कहते हैं कि अभी तो कष्ट से गुजरने के दिन है। उनके पैर अभी कीचड़ में सने हुए हैं। इस कष्ट से मुक्ति मिलने पर ही वे किसी के सुखद आश्वासन अथवा उसके वैभव के दर्शन कर सकेंगे। (वरना उस वैभव पर भी दाग लग जाएगा।) (4) कवि कहते हैं कि इस सभा में हमारी स्थिति किसी असहाय व्यक्ति जैसी है। तुम जैसा भी चाहो हमारा उपयोग करो। हमारी हैसियत आदमी के रूप में नहीं रह गई है। हम आदमी न रहकर किसी झुनझुने की तरह हो गए हैं। (5) कवि कहते हैं कि हमारे साथ चलनेवाले लोग अर्धनिद्रा की हालत में हैं और उन पर उदासी छाई हुई हैं। अब उन्हें कोई फड़कती हुई गजल सुनाए (उन्हें जाग्रत करे) तो ही उनमें जोश का संचार होगा। |
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