1.

वह हाथी दल पर टूट पड़ा,मानो उस पर पवि छूट पड़ा।कट गई वेग से भू, ऐसाशोणित का नाला फूट पड़ा।जो साहस कर बढ़ता उसको,केवल कटाक्ष से टोक दिया।जो वीर बना नभ-बीच फेंक,बरछे पर उसको रोक दिया।

Answer»

[ दल = समूह। पवि = भाला। शोणित = रक्त, लहू।]

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने महाराणा प्रताप के असीम पराक्रम का वर्णन किया है।

व्याख्या-कवि कहता है कि राणा प्रताप शत्रुसेना के हाथीदल पर इस भाँति हमला करता था कि मानों पूर्ण वेग से भाले का वार किया गया हो और उसके वेग से हाथीदल से इस भाँति लहू की धारा फूट ५ . पड़ी जैसे भूमि भाले के प्रहार से  फट पड़ी हो और उससे जल का वेगपूर्ण नद-सा फूट पड़ा हो।

कवि कहता है कि यदि कोई शत्रु राणा पर वार करने के लिए साहस करके आगे बढ़ता तो वह केवल राणा की तिरछी निगाह के मात्र से ही वहीं का वहीं रूक जाता था और यदि कोई शत्रु सैनिक हमला भी कर देता तो राणाप्रताप उसे नभ के बीचोंबीच हवा में ही अपने भाले से रोक देता था।

काव्यगत सौन्दर्य-
⦁    राणा प्रताप की वीरता का अद्भुत चित्रण हुआ है।
⦁    रस-वीर।
⦁    छन्द-मुक्त, तुकान्त।
⦁    शैली–ओजपूर्ण।
⦁    भाषा-साहित्यिक खड़ी बोली।
⦁    अलंकार-उपमा, अनुप्रास, अतिशयोक्ति।
⦁    भावसाम्य-महाकवि भूषण ने छत्रसाल की वीरता का वर्णन इन पंक्तियों में किया है–

भुज भुजगेस की वै संगिनी भुजंगिनी-सी,
खेदि-खेदि खाती दीह दारुन दलन के।



Discussion

No Comment Found