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ऐसा रण, राणा करता था,पर उसको था सन्तोष नहीं।क्षण-क्षण आगे बढ़ता था वह,पर कम होता था रोष नहीं।।कहता था लड़ता मान कहाँ,मैं कर लें रक्त-स्नान कहाँ?जिस पर तय विजय हमारी है,वह मुगलों का अभिमान कहाँ? |
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Answer» [ रण = युद्ध। रोष = गुस्सा, क्रोध। अभिमान = घमण्ड।] प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से कवि ने राणा प्रताप द्वारा मुगल सेना के छक्के छुड़ाने का वर्णन किया है। व्याख्या-कवि राणा प्रताप के रण कौशल के बारे में कहता है कि राणा इस तरह भयानक युद्ध करता था कि वह कहीं रुकने का नाम ही नहीं लेता था। वह युद्धभूमि में जैसे-जैसे आगे बढ़ता था, वैसे-वैसे उसका और भी युद्ध का उत्साह बढ़ता जाता था। काव्यगत सौन्दर्य- |
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