| 1. |
मेवाड़-केसरी देख रहा,केवल रण का न तमाशा था।वह दौड़-दौड़ करता था रण,वह मान-रक्त का प्यासा था।चढ़कर चेतक पर घूम-घूम,करता सेना रखवाली था।ले महामृत्यु को साथ-साथमानो प्रत्यक्ष कपाली था। |
|
Answer» [ मेवाड़-केसरी = मेवाड़ का राजा राणा प्रताप। तमाशा = दृश्य। कपाली = काल का स्वामी] । सन्दर्भ-प्रस्तुत काव्य-पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी’ के ‘काव्य-खण्ड में संकलित तथा ओजस्वी वाणी के कवि श्यामनारायण पाण्डेय द्वारा रचित ‘हल्दीघाटी’ शीर्षक से उद्धृत हैं। प्रसंग-प्रस्तुत काव्य पंक्तियों के माध्यम से कवि श्यामनारायण पाण्डेय जी ने हल्दीघाटी की युद्धभूमि में महाराणा प्रताप द्वारा दिखाए गए रण-कौशल का दृष्टांत वर्णन किया है। राणा प्रताप अपने घोड़े चेतक पर सवार होकर अपनी सेना की रखवाली करते हुए इस प्रकार युद्ध कर रहे थे जैसे मानो अपने साथ मृत्यु का प्रलयकारी भीषण रूप लिए साक्षात् महाकाल युद्धभूमि में आ धमका हो। काव्यगत सौन्दर्य– |
|