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This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

विशिष्ट अनामत अर्थात् क्या ? उसके प्रकार बताइए ।

Answer»

जब किसी निश्चित उद्देश्य के लिये जो अनामत बनायी जाती है तब उसे विशिष्ट अनामत कहते हैं । यह अनामत जिस उद्देश्य के लिये बनायी जाती है उसी उद्देश्य के लिये इसका उपयोग हो सकता है । इस अनामत के द्वारा शेयरहोल्डरों को डिविडेंड वितरण करना, डिबेंचर की राशि पकने की तारीख पर वापस करना, विनियोग की किंमत में अगर कमी हुई हो तब उस नुकसान को पूरा करने के लिये एवं किसी कर्मचारी को अकस्मात हुआ हो तब उसे मुआवजा देने के लिये इस अनामत का उपयोग किया जाता है । विशिष्ट . अनामत को लाभ-हानि वितरण खाते से तैयार किया जाता है ।

विशिष्ट अनामत के उदाहरण निम्न है :

  • डिविडेन्ड समतुला फंड़ : इस फंड़ के द्वारा जिस वर्ष में हानि हुई हो या लाभ कम हुआ हो परंतु पिछले वर्षों की तुलना में डिविडेंड का बँटवारा इसी अनामत का उपयोग करके किया जाता है, जिससे बाजार में प्रतिष्ठा बनी रहती है ।
  • डिबेंचर वापसी निधि : डिबेंचर यह कंपनी का दीर्घकालीन दायित्व है । डिबेंचर पकने की अवधि पर इसकी राशि चुकाने के लिये कंपनी पहले से लाभ में से कुछ रकम अलग रखती जाती है और नियत समय पर डिबेंचर की राशि वापस करने में आसानी रहती है ।
  • विनियोग वधघट फंड़ : जब विनियोग की बाजार किंमत में कमी आई हो या आने की संभावना हो तब इस फंड़ के द्वारा
    होनेवाले नुकसान की कमी को दूर किया जा सकता है ।
  • कर्मचारी अकस्मात मुआवजा फंड़ : जब किसी कर्मचारी को कोई आकस्मिक अकस्मात हो जाये तब उसे मुआवजा देने के
    लिये इस अनामत का उपयोग किया जाता है ।
  • सिंकिंग फंड़ : दीर्घकालीन जिम्मेदारी चुकाने के लिये या ब्याज का नियमित रूप से भुगतान करने के लिये या स्थिर संपत्ति
    खरीदने के लिये जो अलग से फंड रखा जाता है वह सिंकिंग फंड कहलाता है ।
2.

वार्षिक हिसाब अर्थात् क्या ? वार्षिक हिसाब तैयार करने के उद्देश्य बताइए । 

Answer»

वार्षिक हिसाब अर्थात् वर्ष के अंत में व्यवसाय का परिणाम और व्यवसाय की आर्थिक परिस्थिति जानने के लिये तैयार किये जानेवाला खाता और पत्रक को वार्षिक हिसाब के रूप में जाना जाता है ।

वार्षिक हिसाब में पूरे वर्ष का हिसाब तैयार किया जाता है । उसके लिए व्यापार खाता, लाभ-हानि खाता और आर्थिक चिट्ठा तैयार किया जाता है । जिसके आधार पर संपूर्ण वर्ष के परिणाम और धंधे की आर्थिक स्थिति को जाना जा सकता है ।

वार्षिक हिसाब तैयार करने के मुख्य दो उद्देश्य है :

(i) व्यवसाय का परिणाम जानना
(ii) व्यवसाय की आर्थिक स्थिति जानना

(i) व्यवसाय का परिणाम जानना – प्रत्येक व्यावसायिक इकाई वर्ष के अंत में लाभ-हानि जानने के लिये व्यापार खाता और लाभ-हानि खाता तैयार करती है । व्यापार खाते के द्वारा धंधे का सकल लाभ या सकल हानि जानी जा सकती है और लाभ-हानि खाते के द्वारा धंधे का शुद्ध लाभ या शुद्ध हानि जाना जा सकता है ।

(ii) व्यवसाय की आर्थिक स्थिति जानना – प्रत्येक व्यावसायिक इकाई वर्ष के अंत में व्यवसाय की परिस्थिति कैसी है, अर्थात् वर्ष के अंत में पूँजी, दायित्व, संपत्ति और लेना कितने प्रमाण में है, इसे जानने के लिये आर्थिक चिट्ठा तैयार करती है, जिससे धंधे की आर्थिक स्थिति का ख्याल आता है ।

3.

पूँजी अनामत अर्थात् क्या ? उसके उपयोग बताइए ।

Answer»

जो अनामत, पूँजी लाभ में से उत्पन्न हो और जिसका उपयोग सामान्यतः डिविडेंड का वितरण करने के लिये न हो उसे पूँजी अनामत कहते हैं ।

पूँजी अनामत के प्राप्तिस्थान निम्न है :

  1. स्थिर संपत्ति के पुनः मूल्यांकन से प्राप्त लाभ
  2. स्थिर संपत्ति और विनियोग बेचने पर प्राप्त लाभ
  3. कंपनी के पंजीकरण से पहले का लाभ
  4. शेयर या डिबेंचर बाहर प्रकाशित करने पर प्राप्त प्रीमियम
  5. डिबेंचर बट्टे से वापस करने पर प्राप्त लाभ
  6. कंपनी द्वारा जप्त किये गये शेयर पुनः प्रकाशित करने पर शेष राशि

पूँजी अनामत का उपयोग :पूँजी अनामत का उपयोग निम्न दर्शाये गये उद्देश्य के लिये हो सकता है :

  1. कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसियेशन में प्रावधान हो तब बोनस शेयर देने के लिये पूँजी अनामत उपयोगी है ।
  2. स्थिर संपत्ति के विक्रय की हानि अपलिखित करने के लिये पूँजी अनामत उपयोगी है ।
  3. ख्याति, प्राथमिक खर्च, शेयर या डिबेंचर बाहर प्रकाशित करते समय बट्टा जैसी अदृश्य या अवास्तविक संपत्ति अपलिखित करने के लिये पूँजी अनामत उपयोगी है ।
4.

सामान्य अनामत ………………………… खाता उधार कर तैयार किया जाता है ।(अ) लाभ-हानि खाता(ब) लाभ-हानि वितरण खाता(क) व्यापार खाता(ड) पूँजी खाता

Answer»

सही विकल्प है (ब) लाभ-हानि वितरण खाता

5.

………………………. खड़ा करना व्यवसाय के लिए योग्य नहीं है ।(अ) सामान्य अनामत(ब) प्रावधान(क) गुप्त अनामत(ड) पूँजी अनामत

Answer»

सही विकल्प है (क) गुप्त अनामत

6.

गुप्त अनामत किस प्रकार बनाया जाता है ?

Answer»

गुप्त अनामत तैयार करने के लिये निम्नानुसार कार्य किये जाते है :

  1. अंतिम स्टोक का मूल्य कम दर्शाकर गुप्त अनामत बनाया जा सकता है ।
  2. पूँजी खर्च को लाभ-हानि के रूप में लिखकर गुप्त अनामत तैयार किया जा सकता है ।
  3. वास्तव में हुए खर्च से अधिक खर्च बताकर गुप्त अनामत तैयार किया जा सकता है ।
  4. घिसाई का प्रावधान अधिक दर्शाकर गुप्त अनामत एकत्रित किया जा सकता है ।
  5. संभवित दायित्व को वास्तविक दायित्व के रूप में दर्शाकर गुप्त अनामत एकत्रित की जा सकती है ।
7.

खाताबही के कौन-से स्वरूप प्रचलित है ?

Answer»

खाताबही के निम्न अनुसार तीन स्वरूप प्रचलित है :

  1. बाँधी हुयी बही (Bound Book Ledger)
  2. मुक्त (खुले) पन्ने स्वरूप में (Loose Leaf Ledger)
  3. कार्ड स्वरूप में (Card Ledger)
8.

खाता अर्थात् क्या ? विस्तृत जानकारी दीजिए ।

Answer»

किसी निश्चित हिसाबी समयावधि के दरम्यान व्यक्ति, माल, संपत्ति, उपज या खर्च में से कोई एक विवरण के साथ जुड़े हुए प्रत्येक व्यवहारों का निश्चित नमूने में नामा के नियमों के अनुसार उधार और जमा असरें दर्शाता हुआ सारांश अर्थात् खाता ।

किसी निश्चित समयावधि में व्यवसाय में होनेवाले आर्थिक व्यवहारों की असर दर्शानेवाले खातों का सारांश ज्ञात करने के लिए प्रत्येक खातों को अलग से खाताबही में लिखा जाता है । खाताबही में वर्ष दरम्यान प्रत्येक खाता पर जो हिसाबी असर हुई हो उसे दर्शाया जाता है । खाता किसी भी व्यक्ति से सम्बन्धित, खर्च या आय से सम्बन्धित हो सकता है । उदा. माल से सम्बन्धित खरीद खाते से वर्ष दरम्यान कितनी खरीदी हुई यह ज्ञात किया जाता है । विजय के खाते पर से विजय को कितनी रकम देनी बाकी है या कितनी रकम लेनी बाकी है वह ज्ञात किया जा सकता है । खाता को दो भागों में बाँटा जाता है उधार पक्ष और जमा पक्ष । रोजनामचा में जिस खाते को उधार किया गया हो उस खाते को खाताबही में खतौनी करते समय भी उधार पक्ष में ही लिखा जायेगा और जिस । खाते को रोजनामचा में जमा किया गया हो उसकी खाताबही में खतौनी करते समय भी उस खाते के जमा तरफ लिखा जायेगा ।

9.

सामान्य रूप से सामान्य खाताबही में किस प्रकार के खाते तैयार किये जाते है ?

Answer»

धंधा के कुल खातों में से माल संबंधी लेनदार और देनदार के खाताओं के सिवाय के अन्य व्यक्तियों के खाते और बाकी के सभी खातों के लिये जो अलग खाताबही रखी जाती है, उन सभी का सामान्य खाताबही में समावेश होता है ।

10.

खाताबही की अनुक्रमणिका अर्थात् क्या ?

Answer»

खाताबही में धंधाकीय व्यवहारों में से उत्पन्न होनेवाले सभी खाते बनाये या रखे जाते है । ऐसे खातों की संख्या अनेक होती है । खतौनी की प्रक्रिया करते समय खाताबही में कौन-सा खाता किस पन्ना नंबर पर है, इसे ज्ञात करने में समय लगता है । इसलिये सरलता या सुविधा के अनुसार खाताबही के प्रारंभ में सभी खातों की यादी तैयार की जाती है । जिसे खाताबही की अनुक्रमणिका अथवा पानोत्री कहा जाता है । ऐसी यादी मूलाक्षर के अनुसार बनाई जाती है । प्रत्येक खाते के सामने वह खाता खाताबही में किस पन्ना नंबर पर बनाया गया है वह दर्शाया जाता है ।

11.

व्यक्तियों की खाताबही किस प्रकार के विभागों में दर्शायी जाती है ?

Answer»

व्यक्तियों की खाताबही लेनदारों की खाताबही (खरीद खाताबही) तथा देनदारों की खाताबही (बिक्री खाताबही) के विभागों में दर्शायी जाती है ।

12.

खतौनी या खताना अर्थात् क्या ?

Answer»

रोजनामचा या सहायक बहीयों पर से नामा पद्धति के नियम के अनुसार संबंधित व्यवहार को खाताबही में असर होती है । उस खाते में उधार पक्ष या जमा पक्ष में लेखा करने की प्रक्रिया को खतौनी या खताना कहते हैं ।

13.

खाते में किन खानों को बनाया जाता है ?

Answer»

किसी भी खाते के उधार या जमा पक्ष में चार-चार खाने बनाये जाते है । जिसमें तारीख, विवरण, रजिस्टर, पन्ना नंबर (रो.पृ.)और रकम इस प्रकार के खाने बनाये जाते है ।

14.

खाते के कितने पक्ष होते है ? कौन-कौन से ?

Answer»

द्विलेखा नामापद्धति के अनुसार प्रत्येक खाते के दो पक्ष होते हैं । प्रत्येक खाते के बाँये पक्ष को उधार पक्ष के रूप में और दाहिने पक्ष को जमा पक्ष के रूप में जाना जाता है ।

15.

खाते में अंतिम शेष को विवरण के खाने में किस प्रकार दर्शाया जाता है ?(अ) शेष आगे ले गये आग ल गय(ब) शेष आगे लाये(ब) शेष आगे लाये।(क) शेष का अंतर(ड) रकमों का अंतर

Answer»

सही विकल्प है (अ) शेष आगे ले गये आग ल गय

16.

सामान्यतः संपत्ति का शेष कैसा होता है ?(अ) जमा शेष(ब) उधार शेष(क) उधार अथवा जमा हो सकता है ।(ड) खाता सरभर होगा ।

Answer»

सही विकल्प है (ब) उधार शेष

17.

खाताबही के किस प्रकार के चौपड़े में आवश्यकता उपस्थित होने पर अतिरिक्त पन्ने शामिल नहीं किये जा सकते ?(अ) कार्ड स्वरूप में(ब) कम्प्यूटर के हिसाबों में(क) मुक्त पन्ने के स्वरूप में(ड) बँदी हुई बही

Answer»

सही विकल्प है (ड) बँदी हुई बही

18.

खाताबही अर्थात क्या ?

Answer»

नामा यह व्यवसाय के आर्थिक व्यवहारों को लिखने की प्रक्रिया है । प्रत्येक व्यापारी का उद्देश्य इस लिखे हुए हिसाबी लेखा पर से धंधे के लिये उपयोगी जानकारी प्राप्त करना है । जैसे : हिसाबी वर्ष के दरम्यान कुल खरीदी या बिक्री कितनी की गई ? किस प्रकार के खर्च और आय हई ? कितनी संपत्ति और लेना है तथा कितने देना और जिम्मेदारीयाँ है ? धंधे में कितना लाभ या हानि हुई ? ऐसी विविध प्रकार की जानकारी सिर्फ रोजनामचा या सहायक बहीयों द्वारा जानी नहीं जा सकती ।

उपरोक्त दर्शायी गयी जानकारियों को ध्यान में रखकर हिसाबी लेखा पर से अलग-अलग सारांश को ज्ञात कर अलग-अलग खाते बनाये जाते हैं । ऐसे अलग-अलग खातों को जिस बही में बनाया जाता है उसे खाताबही (Ledger) कहते हैं ।

19.

ख्याति यह कैसी संपत्ति है और उसका शेष कैसा होता है ?(अ) दृश्य संपत्ति, उधार शेष(ब) अवास्तविक संपत्ति, जमा शेष(क) दृश्य संपत्ति, जमा शेष ।(ड) अदृश्य संपत्ति, उधार शेष

Answer»

सही विकल्प है (ड) अदृश्य संपत्ति, उधार शेष

20.

किस प्रकार के खाते को सरभर का खाता कहा जाता है ?(अ) खाते के उधार पक्ष की रकम का योग अधिक हो तब(ब) खाते के दोनों पक्ष की रकम का योग समान हो तब(क) खाते के जमा पक्ष की रकम का योग अधिक हो तब(ड) खाते में कोई व्यवहार ही न हो तब

Answer»

सही विकल्प है (ब) खाते के दोनों पक्ष की रकम का योग समान हो तब

21.

किस चौपड़े को मूलबही कहा जाता है ?(अ) रोजनामचा के(ब) खाताबही के(क) मुख्य रोजनामचा के(ड) रोकडबही के

Answer»

सही विकल्प है (अ) रोजनामचा के

22.

खाताबही का विभाजन अर्थात् क्या ?

Answer»

खाताबही में तैयार किये जानेवाले खातों की संख्या का आधार धंधे के आर्थिक व्यवहारों के प्रमाण पर रहा हुआ है । अगर खातों की संख्या मापसर हो तब खाताबही का चोपड़ा बहुत मोटा नहीं बनता, परंतु अगर खातों की संख्या अधिक हो तब खाताबही का चौपड़ा खूब ही मोटा बन जाता है । अगर खाताबही का चोपड़ा एक ही हो तब खतौनी का काम एक से अधिक व्यक्तियों के बीच . बाँटा नहीं जा सकता ।

इस स्तर पर सभी खातों का कोई आधार तय करके अलग-अलग विभागों में वर्गीकृत कर दिया जाता है । वाताबही के खातों को विभागवार वर्गीकृत करके एक से अधिक खाताबही रखी जाये तो उसे खाताबही का वर्गीकरण अथवा खाते का विभाजन कहा जाता है ।

23.

किसे चौपड़ों (बहीयों) का राजा गिना जाता है ?(अ) रोजनामचा के चौपड़े को(ब) मुख्य रोजनामचा के चौपड़े को(क) खाताबही के चौपड़े को(ड) व्यवहारों के लेखा के चौपडे को

Answer»

सही विकल्प है (क) खाताबही के चौपड़े को

24.

लाभ-हानि वितरण खाता अर्थात् क्या ? उसमें दर्शाये जानेवाले विवरण दर्शाइए।

Answer»

साझेदारी पेढी में वार्षिक हिसाब की गणना करते समय लाभ-हानि खाते के ही एक भाग के रूप में लाभ-हानि वितरण खाता (Profit Loss Appropriation Account) तैयार किया जाता है । इस खाते को अलग से बनाना अनिवार्य नहीं है, परंतु लाभ-हानि में समाविष्ट विवरणों की संख्या अत्यधिक प्रमाण में बढ न जाये एवं लाभ-हानि खाता तैयार करने में आसानी रहे इस उद्देश्य से इसे तैयार किया जाता है।

साझेदारों के प्रति किये जानेवाले खर्च एवं साझेदारों से प्राप्त होनेवाली आय दर्शाने के लिये एवं साझेदारों को प्राप्त होनेवाले वितरणपात्र लाभ अथवा वितरणपात्र हानि दर्शाने के लिये इसे तैयार किया जाता है ।
साझेदारी पेढी के वार्षिक हिसाबों में लाभ-हानि खाता तैयार करने के बाद इसे तैयार किया जाता है ।

लाभ-हानि वितरण खाते में दर्शाये जानेवाले विवरण :

लाभ-हानि वितरण खाते का उधार पक्ष :

  • लाभ-हानि खाते से लायी गई शुद्ध हानि ।
  • साझेदारों को पूँजी पर ब्याज ।
  • साझेदारों के चालु खाते की जमा बाकी पर ब्याज ।
  • साझेदारों को प्राप्त होनेवाला बोनस, कमीशन या पारिश्रमिक (महेनताना) ।
  • सामान्य अनामत या फंड खाते ले जायी जानेवाली राशि ।
  • साझेदारों का वितरण प्राप्त लाभ ।

लाभ-हानि वितरण खाते का जमा पक्ष :

  • लाभ-हानि खाते से लाया गया शुद्ध लाभ ।
  • साझेदार के द्वारा पेढी में से किये गये आहरण पर ब्याज ।
  • साझेदारों के चालु खाते को उधार बाकी पर ब्याज ।
  • साझेदारों को वितरण पात्र हानि ।
25.

खाते की उधार शेष या जमा शेष कब होती है ?

Answer»

खाते की उधार शेष या जमा शेष तय करने के लिये सभी व्यवहारों की असर देने के बाद जिस पक्ष का योग अधिक हो उसे दोनों तरफ योग के खाने में दर्शाकर अंतर की राशि ज्ञात की जाती है । अगर उधार पक्ष का योग अधिक हो तब अंतर की राशि जमा पक्ष में आयेगी, वह उधार शेष कहलायेगी । और अंतर की राशि अगर उधार पक्ष में आये तब वह जमा शेष कहलायेगी ।

26.

खाताबही अर्थात् क्या ? उसकी आवश्यकताओं की जानकारी दीजिए ।

Answer»

रोजनामचा या सहायकबही के आधार पर उपस्थित होनेवाले विविध व्यक्तियों के खाते, माल-संपत्ति के खाते और उपज-खर्च के खातों को अलग से जहाँ रखा जाता है उस चोपड़े को खाताबही कहते है । खाताबही यह सभी खातों का सारांश दानवाली बही है । व्यापारी को जरूरी और उपयोगी जानकारी तथा अलग-अलग सारांश खाताबही पर से शीघ्र और सरलता से मिल सकते हैं । इस प्रकार नामा के मुख्य उद्देश्यों की पूर्ती खाताबही के द्वारा ही संभव है । इसलिए खाताबही को चोपड़े का राजा (King of Books) माना जाता है । रोजनामचा पर से व्यापारी को व्यवसाय के मूल व्यवहारों को आधारभूत जानकारी मिलती है इसलिए रोजनामचा का नामा की मूलबही अथवा आधारभूत बही कही जाती है और खाताबही पर से व्यवसाय की आर्थिक स्थिति और लाभ या हानि की जानकारी मिलती होने से उपयोगिता की दृष्टि से खाताबही नामा की मुख्यबही अथवा प्रधान लेखाबही के रूप में जानी जाती है । खाताबही की आवश्यकता निम्नानुसार दर्शायी जा सकती है ।

  • पूंजी का प्रमाण : वर्ष के अंत में व्यवसाय में लगाई गई पूँजी कितनी है, उस संबंध में जानकारी प्राप्त होती है ।
  • संपत्ति के संबंध में : धंधे में विविध प्रकार की संपत्ति खरीदी जाती है । प्रत्येक प्रकार की संपत्ति वर्ष के अंत में कितनी राशि की है, उस संबंध में जानकारी प्राप्त होती है ।
  • लेना और देना : वर्ष के अंत में धंधे में लेना और देना कितना है, उसकी जानकारी प्राप्त होती है ।
  • खर्च और उपज संबंधी : हिसाबी वर्ष के दरम्यान विविध खर्च और विविध उपज (आवक) की जानकारी तथा उनकी कुल राशि की जानकारी प्राप्त होती है ।
  • खरीदी और बिक्री संबंधी जानकारी : हिसाबी वर्ष के दरम्यान कुल खरीदी, कुल बिक्री, कुल खरीद वापसी, कुल बिक्री वापसी तथा बिक्री सिवाय के अन्य रूप से गये माल के विवरण की जानकारी प्राप्त होती है ।
  • सकल तलपट तैयार करने के लिये : सकल तलपट तैयार करने के लिये सभी खातों के शेष की जानकारी खाताबही द्वारा प्राप्त होती है ।
  • वार्षिक हिसाब तैयार करने संबंधी : हिसाबी वर्ष के अंत में धंधे के वार्षिक हिसाब तैयार करने के लिये विविध खाते की जानकारी खाताबही द्वारा प्राप्त होती है ।
  • नीतिविषयक निर्णय संबंधी : व्यापारियों को नीतिविषयक निर्णय लेने के लिये आवश्यक और उपयोगी जानकारी खाताबही द्वारा प्राप्त होती है ।
  • सांख्यिक जानकारी प्राप्त करने के लिये : हिसाबों में आवश्यक सांख्यिक जानकारी प्राप्त करने के लिये तथा अगर कोई गाणितिक या कोई सैद्धांतिक भूल हुई हो वह ज्ञात करने के लिये खाताबही मददरुप सिद्ध होती है ।
27.

‘खाताबही यह नामा की मुख्य बही है ।’अथवा‘खाताबही यह बहीयों का राजा है’ – विस्तारपूर्वक समझाइए ।

Answer»

व्यवसाय के आर्थिक व्यवहारों को सर्वप्रथम रोजनामचा में लिखा जाता है इसलिए रोजनामचा को व्यवसाय का प्राथमिक चोपड़ा कहते है, जबकि रोजनामचा में दर्शाये गए सभी खातों को अलग-अलग करके व्यक्तिगत रूप से जिस बही में लिखा जाता है उसे खाताबही कहते है । खाताबही में व्यवसाय के सभी खातों का सारांश एकसाथ एक ही बही में दर्शाया जाता है परिणामस्वरुप खाताबही को नामा की मुख्य बही के रूप में जाना जाता है । व्यापारी को आवश्यक जानकारी शीघ्र ही खाताबही से मिल जाती है, इसलिए खाताबही को चोपड़ों का राजा (King of Books) कहा जाता है ।

खाताबही यह वर्ष दरम्यान व्यवसाय में होनेवाले व्यवहारों की विस्तृत जानकारी देता है तथा व्यवसाय के व्यक्तियों के खाते, मालसंपत्ति के खाते तथा उपज-खर्च के खातों का सारांश खाताबही में प्राप्त किया जा सकता है । व्यवसाय का लाभ या हानि ज्ञात करने के लिए तथा व्यवसाय की आर्थिक स्थिति ज्ञात करने के लिए विविध खातों का सारांश खाताबही से प्राप्त किया जा सकता है । इस प्रकार की खाताबही यह नामा का महत्त्वपूर्ण चोपड़ा हैं ।

28.

 खाताबही की उपयोगिता (महत्त्व) समझाइए ।

Answer»

खाताबही का महत्त्व निम्नानुसार है :

(1) माहिती : व्यवसाय के आर्थिक व्यवहारों से सम्बन्धित माहिती खाताबही से प्राप्त की जा सकती है ।

(2) खातों का सारांश : व्यवसाय के आर्थिक व्यवहारों से उपस्थित होनेवाले विविध खातों का सारांश खाताबही से प्राप्त किया जा सकता है । उदा निश्चित अवधि की कुल खरीदी, कुल बिक्री या कुल माल वापसी की जानकारी प्राप्त की जा सकती है । व्यवसाय के देनदारों और लेनदारों के खातों की बाकी से कितनी रकम लेनी बाकी है और कितनी रकम चुकानी बाकी है उसकी जानकारी मिल सकती है । व्यवसाय में उपयोग में ली जानेवाली विविध सम्पत्तियों की बाकियाँ भी ज्ञात की जा सकती है ।

(3) नीतिविषयक निर्णय : व्यवसाय में लिए जानेवाले नीतिविषयक निर्णयों के लिए आवश्यक जानकारी खाताबही से प्राप्त की जा सकती है ।

(4) आर्थिक स्थिति : व्यवसाय की आर्थिक स्थिति की जानकारी खाताबही से प्राप्त की जा सकती है ।

29.

खाताबही के अलग-अलग स्वरूप (प्रकारों) के बारे में विस्तृत जानकारी दीजिए ।

Answer»

खाताबही किस स्वरूप रखनी यह व्यापारी की आवश्यकता खर्च करने की शक्ति और व्यवसाय की सुविधाओं पर आधार रखता है। व्यवहार में खाताबही के निम्नानुसार तीन स्वरूप प्रचलित हैं ।

(i) बँधी हुई बही (Bound Book Ledger)
(ii) खुले पन्ने के स्वरूप में (Loose Leaf Ledger)
(iii) कार्ड स्वरूप में (Card Ledger)

(i) बँधी हुई बही : सामान्यतः अधिकांश व्यापारी और खास करके छोटे व्यापारी इस प्रकार की खाताबही पसंद करते हैं । ऐसी खाताबही कुल मिलाकर कम खर्चीली और सँभालने की दृष्टि से सरल है । यह खाताबही एक बँधी हुई बही के स्वरूप में होती है । जिसमें प्रारंभ में अनुक्रमणिका दी जाती है और उसके बाद प्रत्येक पन्नों पर अनुक्रम नंबर होता है । ऐसी खाताबही में आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त पन्ने जोड़े नहीं जा सकते क्योंकि बही बँधी हुई होती है।

(ii) खुले पन्नों की पद्धति : इस प्रकार की खाताबही मोटे-पुढेवाली अथवा धातु के ढाँचेवाली फाईल के रूप में होती है । यह ढाँचा खास प्रकार की कड़ी के साथ जुड़ा होता है । यहाँ व्यापारी अपने व्यवसाय की आवश्यकता के अनुसार पन्नों में वृद्धि या कमी कर सकता है । ऐसी खाताबही में ताले की सुविधा (Lock System) होने से यह पद्धति सुविधा के साथ सुरक्षित है । इसके प्रत्येक पन्नों पर पृष्ठ नंबर होता है ।

(iii) कार्ड स्वरूप में : खाताबही का यह रूप सुविधा के साथ सुरक्षित है । जबकि कुल मिलाकर यह खर्चीला है । यहाँ प्रत्येक खाते के लिए पन्नों के बदले कार्ड का उपयोग किया जाता है । ये सभी कार्ड धातु की छड़ के साथ जमा कर रखे जाते हैं । यहाँ सभी कार्ड धातु या लकड़ी की खास केगैरेट में रखते हैं । इस केगैरेट को ताला लगा सकते है । इसके अलावा आवश्यकतानुसार कार्ड में वृद्धि या कमी कर सकते हैं । बैंक, बड़ी कंपनियों में इस स्वरूप की खाताबही देखने को मिलती है । इस स्वरूप में खाते की अनुक्रमणिका के लिए अलग कार्ड की व्यवस्था रखनी पड़ती हैं ।

30.

लाभ-हानि खाते की जमा शेष अर्थात् ………………………… ।(अ) सकल लाभ(ब) सकल हानि(क) शुद्ध लाभ(ड) शुद्ध हानि

Answer»

सही विकल्प है (क) शुद्ध लाभ

31.

व्यवस्थित खरीदी अर्थात् ………………………(अ) खरीदी + खरीदी के खर्च(ब) खरीदी – खरीद वापसी(क) प्रारंभिक स्टोक + खरीदी – अंतिम स्टोक(ड) प्रारंभिक स्टोक + खरीदी – खरीद वापसी – अंतिम स्टोक

Answer»

सही विकल्प है (ड) प्रारंभिक स्टोक + खरीदी – खरीद वापसी – अंतिम स्टोक

32.

निम्न दिये खातों का शेष उधार है या जमा यह दर्शाइए :(1) खरीद खाता(2) बिक्री खाता(3) बिक्री माल वापसी खाता(4) देनदार (ग्राहक) का खाता(5) पूँजी खाता(6) वेतन का खाता(7) प्राप्त किराया का खाता(8) मकान का खाता(9) आहरण खाता(10) डूबत ऋण खाता(11) आग से जल गया माल का खाता(12) चोरी से हुआ नुकसान का खाता(13) विज्ञापन खर्च का खाता(14) प्रोविडन्ट फंड में योगदान का खाता

Answer»

उधार शेष:

खरीद खाता
बिक्री माल वापसी खाता
देनदार का खाता
वेतन का खाता
मकान का खाता
आहरण का खाता
डूबत ऋण खाता
चोरी से हुआ नुकसान खाता
विज्ञापन खर्च खाता
प्रोविडन्ट फंड में योगदान खाता

जमा शेष:

बिक्री खाता
पूँजी खाता
प्राप्त किराया खाता
आग से जल गयाः माल का खाता

33.

व्यवस्थित खरीदी अर्थात् क्या ?

Answer»

व्यवस्थित खरीदी अर्थात् जिसमें प्रारंभिक स्टोक में खरीदी (खरीद – खरीद वापसी) को जोड़कर अंतिम स्टोक को घटाया जाये वह व्यवस्थित खरीदी कहलायेगा । सूत्र स्वरूप में – व्यवस्थित खरीदी = प्रारंभिक स्टोक + खरीदी – खरीद वापसी – अंतिम स्टोक

34.

सकल तलपट में दर्शाये गये स्टेशनरी का अंतिम स्टोक कहाँ दर्शाया जायेगा ?(अ) व्यापार खाते के उधार पक्ष में(ब) लाभ-हानि खाते के जमा पक्ष में(क) लाभ-हानि खाते में स्टेशनरी खर्च में से घटाकर(ड) आर्थिक चिट्ठा के संपत्ति-लेना पक्ष में

Answer»

सही विकल्प है (ड) आर्थिक चिट्ठा के संपत्ति-लेना पक्ष में

35.

सकल तलपट में दर्शाया गया प्रोविडन्ट फंड़ के विनियोग का ब्याज कहाँ दर्शाया जाता है ?(अ) लाभ-हानि खाते के जमा पक्ष में(ब) लाभ-हानि खाते के उधार पक्ष में(क) आर्थिक चिट्ठा के संपत्ति-लेना पक्ष में प्रोविडन्ट फंड़ के विनियोग में जोड़ा जायेगा ।(ड) आर्थिक चिट्ठा के पूँजी-दायित्व पक्ष में प्रोविडन्ट फंड़ में जोड़ा जायेगा ।

Answer»

सही विकल्प है (ड) आर्थिक चिट्ठा के पूँजी-दायित्व पक्ष में प्रोविडन्ट फंड़ में जोड़ा जायेगा ।

36.

सिर्फ सकल तलपट में डूबत ऋण अनामत दी गई हो, तो उसकी वार्षिक हिसाबों में कहाँ असर होगी ?(अ) लाभ-हानि खाते के उधार पक्ष में(ब) लाभ-हानि खाते के जमा पक्ष में(क) आर्थिक चिट्ठा के संपत्ति-लेना पक्ष में देनदारों में से घटाकर(ड) आर्थिक चिट्ठा के संपत्ति-लेना पक्ष में देनदारों में जोड़कर

Answer»

सही विकल्प है (क) आर्थिक चिट्ठा के संपत्ति-लेना पक्ष में देनदारों में से घटाकर

37.

आर्थिक चिट्टा के उद्देश्य बताइए ।

Answer»

प्रत्येक इकाई वर्ष के अंत में अपनी आर्थिक स्थिति जानने की कोशिश करती है । वर्ष के अंत में धंधे की पूँजी कितनी है, दायित्व कितना है, संपत्ति कितनी है और लेना कितना है । इन सभी बातों की जानकारी के लिये आर्थिक चिट्ठा तैयार करना अनिवार्य है । आर्थिक चिट्टे के द्वारा व्यवसाय की आर्थिक स्थिति ज्ञात करने का उद्देश्य रहा हुआ है ।

38.

वित्तीय पत्रकों का उद्देश्य बताइए ।

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वित्तीय पत्रक के उद्देश्य (Objectives of Financial Statements) : प्रत्येक वित्तीय पत्रक अपने-अपने उद्देश्यों के लिये तैयार की जाती है । इन उद्देश्यों को पूरा करने के लिये व्यापार खाता, लाभ-हानि खाता और आर्थिक चिट्ठा ऐसे तीन वित्तीय पत्रक तैयार किये जाते है ।

इन वित्तीय पत्रकों के मुख्य उद्देश्य निम्न है :

  • सकल लाभ या सकल हानि जानना : प्रत्येक व्यावसायिक इकाई यह जानना चाहता है कि नियत समय में उसके व्यवसाय में सकल लाभ या सकल हानि कितनी हुई है । इसके लिए वह व्यापार खाता तैयार करता है ।
  • शुद्ध लाभ या शुद्ध हानि जानना : प्रत्येक व्यावसायिक इकाई में शुद्ध लाभ या शुद्ध हानि को जानने के लिये लाभ-हानि खाता तैयार । किया जाता है । इस लाभ-हानि खाते में व्यापार खाते से प्राप्त सकल लाभ या सकल हानि को लिखकर वर्ष के दरम्यान की धंधे की आय तथा खर्च को लिखकर धंधे का शुद्ध लाभ या शुद्ध हानि को जाना जा सकता है ।
  • आर्थिक स्थिति जानना : प्रत्येक व्यवसाय वर्ष के अंत में उसकी आर्थिक स्थिति जानना चाहता है, अर्थात् धंधे की संपत्ति, लेना, पूँजी और दायित्व की स्थिति कैसी है उसे जानने के लिये आर्थिक चिट्ठा तैयार करता है ।
  • कानूनी आवश्यकताओं के लिये : अलग-अलग कानूनी बातों का पालन करने के लिये भी वित्तीय पत्रक बनाना आवश्यक है ।
39.

सकल लाभ, संचालन लाभ और शुद्ध लाभ का अर्थ समझाइए ।

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सकल लाभ (Gross Profit) : यदि व्यापार खाते के जमा पक्ष का योग उधार पक्ष के योग की अपेक्षा अधिक हो तब व्यापार खाते की जमा शेष सकल लाभ दर्शाती है । सकल लाभ यह बिक्री का बेचे गये माल की लागत पर की वृद्धि है ।

संचालन लाभ (Operating Profit) : सकल लाभ और संचालन के ख़र्च जैसे : वेतन, किराया, बीमा प्रीमियम, कर, डाकतार, स्टेशनरी, छपाई वगैरह के बीच के अंतर को संचालन लाभ कहते हैं ।

संचालन खर्च = प्रबंधकीय खर्च + बिक्री-वितरण खर्च + घिसाई
संचालन लाभ = सकल लाभ – संचालन खर्च

शुद्ध लाभ (Net Profit): यदि लाभ-हानि खाते के जमा पक्ष का योग उधार पक्ष के योग की अपेक्षा अधिक होता है तो अंतर की राशि शुद्ध लाभ कहलाती है । शुद्ध लाभ यह लाभ-हानि खाते की जमा शेष है । संचालकीय लाभ में बिन-संचालकीय आय/खर्च, खर्च/नुकसान, ब्याज और कर की असर देने के बाद का शेष शुद्ध लाभ कहलायेगा ।

40.

वित्तीय पत्रकों का महत्त्व बताइए ।

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वित्तीय पत्रकों का महत्त्व (Importance of Financial Statements) :

वित्तीय पत्रकों में दर्शायी गयी जानकारी व्यवसाय से जुड़े हुए तथा भविष्य में जुड़नेवाले तमाम पक्षकार जैसे : संचालक, ऋण देने वाला वर्ग, वर्तमान और भविष्य के विनियोग कर्ता, अल्पकालीन लेनदार, कर्मचारी, ग्राहक, सरकार और अलग-अलग एजेन्सीयों खुद की आवश्यकता को पूरा करने के लिये विविध तरीके से वित्तीय पत्रकों का उपयोग करती है । अलग-अलग पक्षकारों की दृष्टि से वित्तीय पत्रकों की उपयोगिता निम्न अनुसार दर्शायी जा सकती है |

(i) दीर्घकालीन लेनदार : दीर्घकालीन लोन देनेवाले लेनदारों को उनके द्वारा दी गई पूँजी तथा ब्याज की राशि नियत समय पर प्राप्त होगी या नहीं तथा भविष्य में शान के समय में वृद्धि करना, पहले की स्थिति बनाये रखना या मर्यादित करना इसके लिये आवश्यक जानकारी वित्तीय पत्रकों के आधार पर प्राप्त किया जा सकता है । इसके लिये दीर्घकालीन लेनदार प्रवाहितता और समृद्धता के गुणोत्तर ‘ का उपयोग कर सकते है ।

(ii) अल्पकालीन लेनदार : व्यवसाय में कच्चा माल सामान देनेवाला वर्ग, अल्पकालीन लोन । कर्ज देनेवाले तमाम वर्ग के लिये उनकी लेनी राशि कब प्राप्त होगी, पेढ़ी समय पर चुकायेगी या नहीं, भविष्य में शान में वृद्धि करना या नहीं ऐसी सभी बातों का योग्य निर्णय लेने के लिये जानकारी की आवश्यकता होती है । जो वित्तीय पत्रकों के आधार पर प्राप्त होती है । इसके लिये लेनदार चालू गुणोत्तर और प्रवाही गुणोचर का उपयोग कर सकता है ।

(iii) वर्तमान विनियोग कर्ता : व्यवसाय में रकम लगानेवाला वर्ग जैसे : इक्विटी अंशधारी यह जानना चाहते है कि उनके द्वारा लगाये गये विनियोग का भविष्य कैसा है ? उन्हें शेयर खरीदने चाहिए, बेचने चाहिए या अभी की परिस्थिति में रहना चाहिए इन सभी की जानकारी वित्तीय पत्रकों से प्राप्त होती है । अंशधारियों को अंश से प्राप्त होनेवाले लाभ कितने रहेंगे यह जानकारी वित्तीय पत्रकों से प्राप्त होती है । इसके लिये समृद्धता के गुणोत्तरों का उपयोग किया जा सकता है ।

(iv) भविष्य के विनियोग कर्ता : व्यवसाय में भविष्य में रकम लगानेवाला वर्ग रकम लगाये या नहीं इसके लिये उसे जानकारी की आवश्यकता पड़ती है जो उसे वित्तीय पत्रकों से प्राप्त होती है । वित्तीय पत्रकों के आधार पर जानकारियों का विश्लेषण करके निर्णय लिया जा सकता है ।

(v) कर्मचारी वर्ग : व्यवसाय का प्रत्येक कर्मचारी यह चाहता है कि निश्चित समय पर उसे वेतन मिले, नियत समय पर वेतन वृद्धि हो तथा निवृत्ति के लाभ प्राप्त हो उसके लिये प्रत्येक कर्मचारी को इकाई की स्थिरता और लाभदायकता जानने में रस रहता है । यह जानकारी उसे वित्तीय पत्रकों से प्राप्त होती है ।

(vi) संचालक वर्ग : व्यवसाय का मालिक, साझेदार या बोर्ड ओफ डिरेक्टर्स प्रत्येक को अल्पकालीन समृद्धता, दीर्घकालीन समृद्धता, प्रवृत्ति की असरकारकता और लाभदायकता जानने के लिये आवश्यक जानकारी वित्तीय पत्रकों द्वारा प्राप्त होती है ।

(vii) कर भरने के लिये : व्यावसायिक इकाई को कितना करभार रहेगा यह तय करना राज्य सरकार या केन्द्र सरकार के लिये आवश्यक है । राजस्व खर्च और पूँजीगत खर्च योग्य रूप से किया है या नहीं इसकी जानकारी भी वित्तीय पत्रकों से प्राप्त होती है ।

(viii) ग्राहक वर्ग : ग्राहकों को व्यावसायिक इकाई चालू रहेगा या नहीं तथा लंबे समय के लिये व्यवसाय में जुड़नेवाले प्रत्येक के लिये वित्तीय पत्रकों की जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है ।

(ix) सरकार : प्रत्येक व्यवसाय को सरकार को इकाई की जानकारी, कर संबंधी नीतियाँ की जानकारी देने के लिये वित्तीय पत्रक आवश्यक है ।

(x) संशोधक : अलग-अलग व्यवसाय के वित्तीय पत्रकों की तुलना करना, धंधे की समृद्धता तथा लाभदायकता की प्रवाही स्थिति जानने के लिये संशोधकों को वित्तीय पत्रक की जानकारी आवश्यक होती है ।

(xi) सामान्य जनता : सामान्य जनता वित्तीय पत्रकों पर से अलग-अलग जानकारियाँ प्राप्त कर सकती है । रोजगारी की तक का सर्जन अर्थतंत्र में योगदान, सामाजिक योगदान इन सभी को जानने के लिये वित्तीय पत्रकों का अभ्यास आवश्यक है ।

41.

वोरफेज अर्थात् क्या ?

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वोरफेज अर्थात् माल भेजनेवाले स्थल से भाड़ा (नूर) कम गिना गया हो तब दी जानेवाली अंतर की राशि बोरफेज कहलाती है ।

42.

भारत में साझेदारी कानून किस वर्ष से अस्तित्व में आया है ?(अ) 1923(ब) 1932(क) 1947(ड) 1956

Answer»

सही विकल्प है (ब) 1932

43.

डेमरेज अर्थात् क्या ?

Answer»

डेमरेज अर्थात् रेलवे या बंदरगाह पर से माल की डिलीवरी देरी से लेने के बदले भुगतान किये जानेवाली दंड की राशि को डेमरेज कहते हैं ।

44.

समायोजन प्रविष्टियाँ अर्थात् क्या ?

Answer»

प्रत्येक हिसाबी वर्ष के अंत में सही और योग्य लाभ-हानि जानने के लिये तथा व्यवसाय की सही आर्थिक परिस्थिति जानने के लिये तथा बहीयों में लिखे गये व्यवहारों में आवश्यक परिवर्तन करने तथा लिखना बाकी रह गया हो ऐसा विवरण बहीयों में लिखने के लिये वार्षिक हिसाब तैयार करते समय जो प्रविष्टी लिखी जाती है वह समायोजन प्रविष्टी कहलाती है ।

45.

साझेदारी करार में प्रावधान न हो, जब साझेदारों के बीच लाभ या हानि किस प्रमाण में बाँटी जाती है ?(अ) पूँजी के प्रमाण में(ब) लाभ के प्रमाण में(क) त्याग के प्रमाण में(ड) समान प्रमाण में

Answer»

सही विकल्प है (ड) समान प्रमाण में

46.

साझेदारी पेढी के वार्षिक हिसाब तैयार करने के हेतु या उद्देश्य बताइए।

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साझेदारी पेढी के वार्षिक हिसाब तैयार करने का उद्देश्य (Objectives of Final Accounts of Partnership) :

  1. वार्षिक हिसाब में व्यापार खाता तैयार करके पेढ़ी का सकल लाभ या सकल हानि ज्ञात कर सकते हैं ।
  2. लाभ हानि खाता तैयार करके वर्ष के अन्त में पेढ़ी का शुद्ध लाभ या शुद्ध हानि ज्ञात कर सकते हैं जिससे पेढ़ी की लाभकारकता का ख्याल आता है।
  3. लाभ हानि वितरण खाते द्वारा साझेदारों के बीच लाभ या हानि का वितरण, साझेदारों के पेढ़ी के साथ के व्यवहार आदि ज्ञात किए जा सकते हैं।
  4. साझेदारों को पेढ़ी में से शुद्ध कितना लाभ वितरित किया गया यह भी लाभ हानि वितरण खाता द्वारा ज्ञात किया जा सकता है ।
  5. साझेदारी पेढ़ी की आर्थिक स्थिति ज्ञात करने के हेतु से पक्की तलपट (आर्थिक चिठ्ठा) तैयार की जाती है, जिसके द्वारा साझेदारी पेढ़ी की मिलकत, दायित्व व पूँजी की परिस्थिति मालूम की जा सकती है।
  6. वर्ष के अंत में कर योग्य आय की गणना करने के हेतु से भी वार्षिक हिसाब तैयार किया जाता है।
47.

माल वापसी जमा अर्थात् क्या ?(अ) खरीद वापसी(ब) बिक्री वापसी(क) खरीदी(ड) बिक्री

Answer»

सही विकल्प है (ब) बिक्री वापसी

48.

सामान्य रूप से चालु खाते की कौन सी बाकी होती है ?(अ) उधार(ब) जमा(क) उधार या जमा(ड) दिये गये में से एक भी नहीं

Answer»

सही विकल्प है (क) उधार या जमा

49.

दृश्य और अदृश्य संपत्तियों की यादी तैयार कीजिए ।

Answer»

दृश्य और अदृश्य संपत्तियों को यादी निम्न है :

दृश्य संपत्तियाँ

  1. जमीन
  2. मकान
  3. पट्टे रखी संपत्ति
  4. वाहन
  5. यंत्र
  6. फर्नीचर और फिटिंग्स

अदृश्य संपत्तियाँ

  1. पेटन्ट्स
  2. ट्रेडमार्क
  3. कोपीराइट
  4. ख्याति
50.

साझेदारी पेढी के वार्षिक हिसाब तैयार करते समय निम्न समायोजन की असर कहाँ दर्शाई जायेगी ?

Answer»

(1) स्टेशनरी का अंतिम स्टोक → वार्षिक हिसाब पर असर
(A) लाभ-हानि खाते के उधार पक्ष में स्टेशनरी खर्च में से घटाया जायेगा ।
(B) आर्थिक चिड्डा के संपत्ति लेना पक्ष में स्टेशनरी का अंतिम स्टोक दर्शाया जायेगा ।

(2) नहीं लिखी उधार बिक्री → वार्षिक हिसाब पर असर
(A) व्यापार खाते के जमा पक्ष में बिक्री में जोड़ा जायेगा ।
(B) आर्थिक चिठ्ठा के संपत्ति लेना पक्ष में देनदार में जोड़ा जायेगा ।

(3) साझेदार को शुद्ध लाभ पर चुकाने योग्य कमीशन → वार्षिक हिसाब पर असर
(A) लाभ-हानि वितरण खाते के उधार पक्ष में बतायेंगे ।
(B) साझेदार के पूँजी/चालु खाते के जमा पक्ष में बतायेंगे ।

(4) साझेदार ने निजी उपयोग के लिये लिया माल → वार्षिक हिसाब पर असर
(A) व्यापार खाते के उधार पक्ष में खरीदी में से घटायेंगे ।
(B) साझेदार के पूँजी/चालु खाते के उधार पक्ष में बतायेंगे ।

(5) साझेदार के चालु खाते की उधार बाकी पर ब्याज → वार्षिक हिसाब पर असर
(A) साझेदार के चालु खाते के उधार पक्ष में बतायेंगे ।
(B) लाभ-हानि वितरण खाते के जमा पक्ष में बतायेंगे ।

(6) पट्टे रखी संपत्ति में से अमुक रकम अपलिखित की जाये → वार्षिक हिसाब पर असर
(A) लाभ-हानि खाते के उधार पक्ष में पट्टे रखी संपत्ति की अपलिखित राशि दर्शायी जायेगी।
(B) आर्थिक चिठ्ठा के संपत्ति-लेना पक्ष में पट्टे रखी संपत्ति में से घटाया जायेगा ।

(7) मिलना बाकी आय → वार्षिक हिसाब पर असर
(A) लाभ-हानि खाते के जमा पक्ष में संबंधित आय में जोड़ा जायेगा ।
(B) आर्थिक चिठ्ठा के संपत्ति-लेना पक्ष में बतायेंगे ।

(8) अग्रिम चुकाया खर्च → वार्षिक हिसाब पर असर
(A) व्यापार/लाभ-हानि खाते के उधार पक्ष में खर्च में से घटाया जायेगा ।
(B) आर्थिक चिठ्ठा के संपत्ति-लेना पक्ष में दर्शायेंगे ।

(9) देनदारों पर बट्टा अनामत का प्रावधान → वार्षिक हिसाब पर असर
(A) लाभ-हानि खाते के उधार पक्ष में बतायेंगे ।
(B) आर्थिक चिठ्ठा के संपत्ति-लेना पक्ष में देनदारों में से घटाया जायेगा ।