|
Answer» (1) स्टेशनरी का अंतिम स्टोक → वार्षिक हिसाब पर असर (A) लाभ-हानि खाते के उधार पक्ष में स्टेशनरी खर्च में से घटाया जायेगा । (B) आर्थिक चिड्डा के संपत्ति लेना पक्ष में स्टेशनरी का अंतिम स्टोक दर्शाया जायेगा । (2) नहीं लिखी उधार बिक्री → वार्षिक हिसाब पर असर (A) व्यापार खाते के जमा पक्ष में बिक्री में जोड़ा जायेगा । (B) आर्थिक चिठ्ठा के संपत्ति लेना पक्ष में देनदार में जोड़ा जायेगा । (3) साझेदार को शुद्ध लाभ पर चुकाने योग्य कमीशन → वार्षिक हिसाब पर असर (A) लाभ-हानि वितरण खाते के उधार पक्ष में बतायेंगे । (B) साझेदार के पूँजी/चालु खाते के जमा पक्ष में बतायेंगे । (4) साझेदार ने निजी उपयोग के लिये लिया माल → वार्षिक हिसाब पर असर (A) व्यापार खाते के उधार पक्ष में खरीदी में से घटायेंगे । (B) साझेदार के पूँजी/चालु खाते के उधार पक्ष में बतायेंगे । (5) साझेदार के चालु खाते की उधार बाकी पर ब्याज → वार्षिक हिसाब पर असर (A) साझेदार के चालु खाते के उधार पक्ष में बतायेंगे । (B) लाभ-हानि वितरण खाते के जमा पक्ष में बतायेंगे । (6) पट्टे रखी संपत्ति में से अमुक रकम अपलिखित की जाये → वार्षिक हिसाब पर असर (A) लाभ-हानि खाते के उधार पक्ष में पट्टे रखी संपत्ति की अपलिखित राशि दर्शायी जायेगी। (B) आर्थिक चिठ्ठा के संपत्ति-लेना पक्ष में पट्टे रखी संपत्ति में से घटाया जायेगा । (7) मिलना बाकी आय → वार्षिक हिसाब पर असर (A) लाभ-हानि खाते के जमा पक्ष में संबंधित आय में जोड़ा जायेगा । (B) आर्थिक चिठ्ठा के संपत्ति-लेना पक्ष में बतायेंगे । (8) अग्रिम चुकाया खर्च → वार्षिक हिसाब पर असर (A) व्यापार/लाभ-हानि खाते के उधार पक्ष में खर्च में से घटाया जायेगा । (B) आर्थिक चिठ्ठा के संपत्ति-लेना पक्ष में दर्शायेंगे । (9) देनदारों पर बट्टा अनामत का प्रावधान → वार्षिक हिसाब पर असर (A) लाभ-हानि खाते के उधार पक्ष में बतायेंगे । (B) आर्थिक चिठ्ठा के संपत्ति-लेना पक्ष में देनदारों में से घटाया जायेगा ।
|