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खाताबही के अलग-अलग स्वरूप (प्रकारों) के बारे में विस्तृत जानकारी दीजिए ।

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खाताबही किस स्वरूप रखनी यह व्यापारी की आवश्यकता खर्च करने की शक्ति और व्यवसाय की सुविधाओं पर आधार रखता है। व्यवहार में खाताबही के निम्नानुसार तीन स्वरूप प्रचलित हैं ।

(i) बँधी हुई बही (Bound Book Ledger)
(ii) खुले पन्ने के स्वरूप में (Loose Leaf Ledger)
(iii) कार्ड स्वरूप में (Card Ledger)

(i) बँधी हुई बही : सामान्यतः अधिकांश व्यापारी और खास करके छोटे व्यापारी इस प्रकार की खाताबही पसंद करते हैं । ऐसी खाताबही कुल मिलाकर कम खर्चीली और सँभालने की दृष्टि से सरल है । यह खाताबही एक बँधी हुई बही के स्वरूप में होती है । जिसमें प्रारंभ में अनुक्रमणिका दी जाती है और उसके बाद प्रत्येक पन्नों पर अनुक्रम नंबर होता है । ऐसी खाताबही में आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त पन्ने जोड़े नहीं जा सकते क्योंकि बही बँधी हुई होती है।

(ii) खुले पन्नों की पद्धति : इस प्रकार की खाताबही मोटे-पुढेवाली अथवा धातु के ढाँचेवाली फाईल के रूप में होती है । यह ढाँचा खास प्रकार की कड़ी के साथ जुड़ा होता है । यहाँ व्यापारी अपने व्यवसाय की आवश्यकता के अनुसार पन्नों में वृद्धि या कमी कर सकता है । ऐसी खाताबही में ताले की सुविधा (Lock System) होने से यह पद्धति सुविधा के साथ सुरक्षित है । इसके प्रत्येक पन्नों पर पृष्ठ नंबर होता है ।

(iii) कार्ड स्वरूप में : खाताबही का यह रूप सुविधा के साथ सुरक्षित है । जबकि कुल मिलाकर यह खर्चीला है । यहाँ प्रत्येक खाते के लिए पन्नों के बदले कार्ड का उपयोग किया जाता है । ये सभी कार्ड धातु की छड़ के साथ जमा कर रखे जाते हैं । यहाँ सभी कार्ड धातु या लकड़ी की खास केगैरेट में रखते हैं । इस केगैरेट को ताला लगा सकते है । इसके अलावा आवश्यकतानुसार कार्ड में वृद्धि या कमी कर सकते हैं । बैंक, बड़ी कंपनियों में इस स्वरूप की खाताबही देखने को मिलती है । इस स्वरूप में खाते की अनुक्रमणिका के लिए अलग कार्ड की व्यवस्था रखनी पड़ती हैं ।



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