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खाताबही का विभाजन अर्थात् क्या ?

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खाताबही में तैयार किये जानेवाले खातों की संख्या का आधार धंधे के आर्थिक व्यवहारों के प्रमाण पर रहा हुआ है । अगर खातों की संख्या मापसर हो तब खाताबही का चोपड़ा बहुत मोटा नहीं बनता, परंतु अगर खातों की संख्या अधिक हो तब खाताबही का चौपड़ा खूब ही मोटा बन जाता है । अगर खाताबही का चोपड़ा एक ही हो तब खतौनी का काम एक से अधिक व्यक्तियों के बीच . बाँटा नहीं जा सकता ।

इस स्तर पर सभी खातों का कोई आधार तय करके अलग-अलग विभागों में वर्गीकृत कर दिया जाता है । वाताबही के खातों को विभागवार वर्गीकृत करके एक से अधिक खाताबही रखी जाये तो उसे खाताबही का वर्गीकरण अथवा खाते का विभाजन कहा जाता है ।



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