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This section includes InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

22501.

‘छाया’ शब्द यहाँ किस संदर्भ में प्रयुक्त हुआ है? कवि ने उसे छूने के लिए मनां क्यों किया है?

Answer»

‘छाया’ शब्द का प्रयोग कवि ने बीते समय की सुखंद यादों के लिए किया है। ये यादें हमारे मन में उमड़ती-घुमड़ती रहती हैं। कवि इन्हें छूने से इसलिए मना करता है क्योंकि इन यादों से हमारा दुख कम नहीं होता है, इसके विपरीत और भी बढ़ जाता है। हम उन्हीं सुखद यादों की कल्पना में अपना वर्तमान खराब कर लेते हैं।

22502.

‘क्या हुआ जो खिला फूल रस-बसंत जाने पर?’ कवि का मानना है कि समय बीत जाने पर भी उपलब्धि मनुष्य को आनंद देती है। क्या आप ऐसा मानते हैं? तर्क सहित लिखिए।

Answer»

कवि भले ही ऐसा मानता हो कि समय बीत जाने पर उपलब्धि मनुष्य को आनंद देती है परंतु समय पर मिलने वाली उपलब्धि का आनंद कुछ और ही होता है। यदि परिश्रम के तुरंत बाद सफलता और दिनभर के परिश्रम के बाद मजदूरी नहीं मिलती है तो मन में निराशा जन्मती है। इसके विपरीत समय पर मिलने वाली सफलता से मन उत्साहित होता है। इससे भविष्य के प्रति आशावादी दृष्टिकोण विकसित होता है।

22503.

कविता में व्यक्त दुख के कारणों को स्पष्ट कीजिए।

Answer»

छाया मत छूना’ कविता में दुख के कई कारण बताए गए हैं; जैसे 

• बीते सुखमय दिनों की यादें जिनकी याद हमें वर्तमान में दुखी बनाती है। 

• बीते समय की असफलता, जिनकी याद कर हम दुखी होते हैं। 

• धन, यश और बड़प्पन की चाहत जिसे पाने के लिए मनुष्य यहाँ-वहाँ भटकता रहता है। 

• वर्तमान के कठिन यथार्थ को न स्वीकार कर पाने और उनसे पलायन की प्रवृत्ति से भी मनुष्य दुखी होता है। 

• उचित अवसर पर सफलता न मिलने पर भी मनुष्य दुखी होता है।

22504.

दूसरे वचन की भाषा-शैली एवं कलात्मक पर प्रकाश डालिए।

Answer»

दूसरे वचन में कवयित्री ने आरंभ में ही ईश्वर के लिए ‘जूही के फूल’ का उपमान प्रयुक्त करके दोनों के बीच तुलना की है । अर्थात् उपमा अलंकार का सुंदर प्रयोग हुआ है । ‘मँगवाओ मुझसे’, ‘कोई कुत्ता’ जैसी शब्द योजना में अनुप्रास अलंकार है । विभिन्न प्रकार की स्थितियों में दृश्य-बिम्ब की सुंदर सृष्टि हुई है । जैसे कि भीख मांगना, झोली फैलाना, भीख का नीचे गिर जाना, उसे उठाने के लिए झुकना, कुत्ते के द्वारा छापटना आदि । संवाद शैली का प्रयोग हुआ है और शांत रस का परिपाक हुआ है।

22505.

निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए।तुम्हारे मानने ही से मेरा ईश्वरत्व कायम नहीं रहेगा, दया करके, मनुष्यत्व को मानो, पशु बनना छोड़ो और आदमी बनो !

Answer»

ईश्वर द्वारा कथित इस वाक्य से लेखक कहना चाहा रहा है की जिस तरह से धर्म के नाम पर अत्याचार हो रहे हैं उसे देखकर ईश्वर को यह बतलाना पड़ेगा की पूजा-पाठ छोड़कर अच्छे कर्मा की ओर ध्यान दो। तुम्हारे मानने या ना मानने से मेरा ईश्वरत्व कायम नहीं रहेगा। इंसान बनो और दूसरों की सेवा करो।

22506.

धर्म की आड़ पाठ का सार लिखे|

Answer»

प्रस्तुत पाठ ‘ धर्म की आड़ ’ में विद्याार्थी जी ने उन लोगों के इरादों और कुटिल चालों को बेनकाब किया है जो धर्म की आड़ लेकर जनसामान्य को आपस में लड़ाकर अपना स्वार्थ सिद्धद करने की फ़िराक में रहते हैं। उन्होंने बताया है की कुछ चालाक व्यक्ति साधारण आदमी को अपने स्वार्थ हेतु धर्म के नाम पर लड़ते रहते हैं। साधारण आदमी हमेशा ये सोचता है की धर्म के नाम पर जान तक दे देना वाजिब है।

पाश्चत्य देशों में धन के द्वारा लोगों को वश में किया जाता है, मनमुताबिक काम करवाया जाता है। हमारे देश में बुद्धि पर परदा डालकर कुटिल लोग ईश्वर और आत्मा का स्थान अपने लिए ले लेते हैं और फिर धर्म, ईमान के नाम पर लोगों को आपस में भिड़ाते रहते हैं और अपना व्यापार चलते रहते हैं। इस भीषण व्यापार को रोकने के लिए हमें साहस और दृढ़ता के साथ उद्योग करना चाहिए। यदि किसी धर्म के मनाने वाले जबरदस्ती किसी के धर्म में टांग अड़ाते हैं तो यह कार्य स्वाधीनता के विरुद्ध समझा जाए।

देश की स्वाधीनता आंदोलन में जिस दिन खिलाफत, मुल्ला तथा धर्माचार्यों को स्थान दिया गया वह दिन सबसे बुरा था जिसके पाप का फल हमे आज भी भोगना पड़ रहा है। लेखक के अनुसार शंख बजाना, नाक दबाना और नमाज पढ़ना धर्म नही है। शुद्धाचरण और सदाचरण धर्म के चिन्ह हैं। आप ईश्वर को रिश्वत दे देने के बाद दिन भर बेईमानी करने के लिए स्वतंत्र नही हैं। ऐसे धर्म को कभी माफ़ नही किया जा सकता। इनसे अच्छे वे लोग हैं जो नास्तिक हैं।

22507.

निम्नलिखित उपसर्गों का प्रयोग करके दो-दो शब्द बनाइए − ला, बिला, बे, बद, ना, खुश, हर, गैर

Answer»
ला लाइलाज, लापरवाह
बिलाबिला वजह
बे बेजान, बेकार
बदबददिमाग, बदमिज़ाज़
ना नाकाम, नाहक
खुश खुशनसीब, खुशगवार
हर हरएक, हरदम
गैरगैरज़िम्मेदार, गैर कानूनी

22508.

उदाहरण के अनुसार शब्दों के विपरीतार्थक लिखिए −1. सुगम - दुर्गम 2. धर्म - ............. 3. ईमान - ............. 4. साधारण - ............. 5. स्वार्थ - ............. 6. दुरूपयोग - ............. 7. नियंत्रित - ............. 8. स्वाधीनता - .............

Answer»
1. सुगमदुर्गम
2. धर्मअधर्म
3. ईमानबेईमान
4. साधारणअसाधारण
5. स्वार्थनिस्वार्थ
6. दुरूपयोगसदुपयोग
7. नियंत्रितअनियंत्रित
8. स्वाधीनतापराधीनता

22509.

आपके मत से सृष्टि में सर्वोपरि कौन है? क्यों?

Answer»

मेरे मत से सृष्टि में ईश्वर ही सर्वोपरि है, क्योंकि वह सर्वशक्तिमान है। वह जिसे बचाना चाहे, उसे कोई मार नहीं सकता और वह जिसे मारना चाहे, उसे कोई बचा नहीं सकता।

22510.

उदाहरण के अनुसार 'त्व' प्रत्यय लगाकर पाँच शब्द बनाइए − उदाहरण : देव + त्व =देवत्व

Answer»

1. उत्तरदायी  + त्व = उत्तरदायित्व 

2. महा          + त्व = महत्व 

3. पशु          + त्व = पशुत्व 

4 लघु           + त्व = लघुत्व 

5. व्यक्ति   + त्व = व्यक्तित्व 

6. मनुष्य  + त्व = मनुष्यत्व

22511.

'भी' का प्रयोग करते हुए पाँच वाक्य बनाइए −  उदाहरण − आज मुझे बाजार होते हुए अस्पताल भी जाना है।

Answer»

1. मुझे भी पुस्तक पढ़नी है। 

2. राम को खाना भी खाना है। 

3. सीता को भी नाचना है। 

4. तुम्हें भी आना है। 

5. इन लोगों को भी खाना खिलाइए।

22512.

पाश्चात्य देशों और हमारे देश में क्या अंतर है? पाठ के आधार पर लिखिए।

Answer»

पाश्चात्य देशों में धन का बोलबाला है। वहाँ धनी लोग गरीब लोगों को धन दिखाकर उनका शोषण करते हैं। हमारे देश में धन का उतना ज़ोर नहीं है। यहाँ कुछ लोग बुद्धि पर पर्दा डाल धर्म के नाम पर स्वार्थ सिद्धि के लिए लोगों को आपस में भिड़ाते हैं।

22513.

आज धर्म और ईमान के नाम पर कौन-कौन से ढोंग किये जाते हैं?

Answer»

आज धर्म और ईमान के नाम पर उत्पात, जिद और झगडे करवाये जाते हैं। अपने स्वार्थ को पूरा करने लिए धर्म को साधन बनाया जाता है और दंगे कराये जाते हैं। आम आदमी धर्म को जाने या ना जाने परन्तु धर्म के नाम पर जान देने और लेने के लिए तैयार हो जाता है।

22514.

ऐसे धार्मिक और दीनदार आदमियों से तो वे ला-मज़हब और नास्तिक आदमी कहीं अधिक अच्छे और ऊँचे हैं, जिनका आचरण अच्छा है, जो दूसरों के सुख-दुःख का ख्याल रखते हैं और जो मूर्खों को किसी स्वार्थ सिद्धि के लिए उकसाना बहुत बुरा समझते हैं। ईश्वर इन नास्तिक और ला-मज़हब लोगों को अधिक प्यार करेगा और वह अपने पवित्र नाम पर अपवित्र काम करने वालों से यही कहना पसंद करेगा, मुझे मानो या ना मानो, तुम्हारे मानने से ही मेरा ईश्वरत्व कायम नहीं रहेगा, दया करके मनुष्यत्व को मानो, पशु बनना छोडो और आदमी बनो।(क) कौन लोग किससे अधिक अच्छे हैं?                                                                                         (ख) ईश्वर किन लोगों से प्यार करेगा?                                                                                            (ग) 'दया करके मनुष्यत्व को मानो, पशु बनना छोडो और आदमी बनो।' इस पंक्ति का क्या अर्थ है?

Answer»

(क) ला-मज़हबी और नास्तिक लोग जिनका आचरण अच्छा है, धार्मिक और ईमानदार लोगों से अच्छे हैं। 

(ख) ईश्वर उनलोगो से अधिक प्यार करेगा जिनका आचरण अच्छा है, जो दूसरों लोगों के सुख-दुःख का ख्याल करते हैं और जो मूर्खों को किसी स्वार्थ सिद्धि के लिए उकसाना बहुत बुरा समझते हैं। 

(ग) इस पंक्ति का अर्थ है कि हमें ईश्वर को मानने या ना मानने से पहले मनुष्यता को मानना चाहिए। अपने स्वार्थ के लिए धर्म के नाम पर उत्पात नहीं मचाना चाहिए। हिंसा रूपी पशु को त्यागकर दूसरों की भलाई का काम करना चाहिए।

22515.

‘छाया मत छूना’ कविता के माध्यम से कवि क्या संदेश देना चाहता है?

Answer»

‘छाया मत छूना’ कविता के माध्यम से कवि यह कहना चाहता है कि जीवन में सुख और दुख दोनों आते-जाते रहते हैं। विगत समय के सुख को याद करके वर्तमान के दुख को बढ़ा लेना अनुचित है। विगत की सुखद काल्पनिकता से जुड़े रहना और वर्तमान के यथार्थ से भागने की अपेक्षा उसकी स्वीकारोक्ति श्रेयकर है। यह कविता अतीत की यादों को भूलकर वर्तमान का सामना करने एवं भविष्य के वरण का संदेश देती है।

22516.

पाँचों मँगेड़ियों वाली कथा के माध्यम से लेखक क्या संदेश देना चाहता है?

Answer»

पाँच लोग थे। वे सभी भाँग पीते और मस्त रहते थे। एक बार कमाई करने के इरादे से वे परदेश गए। रास्ते में एक मंदिर में सो गए। सवेरे गिना तो वे चार ही रह गए थे। गिनने वाला अपने को नहीं गिनता था।

इस कथा के माध्यम से लेखक बताना चाहता है कि संसार में लोग ऐसा ही करते हैं। वे अपने दोष तथा कमियाँ नहीं देखते। दूसरों की कमियाँ देखते हैं। उनकी बुराई करते हैं। वे दूसरों को सुधारना चाहते हैं। अपनी बुराइयों के बारे में वे जानते ही नहीं हैं, अत: उनमें सुधार के बारे में भी वे नहीं सोचते।

लेखक संदेश देना चाहता है कि मनुष्य स्वयं को ही बदल सकता है। वह दूसरों को नहीं बदल सकता। अपने अन्दर उसे सुधार करना चाहिए। दूसरों के दोष देखने, उनसे घृणा करने तथा अपने को दोष रहित समझने से उसमें अहंकार का भाव जागता है। इससे उसके मन में घृणा का भाव जन्म लेता है। मनुष्य को स्वयं को बदलना चाहिए। उसको ऐसे काम करने चाहिए कि दूसरे उससे प्रेरणा लें। उसका अधिकार अपने में परिवर्तन लाने का ही है। दूसरों के बदलने का उसको हक नहीं है।

22517.

निम्नलिखित उदाहरण को पढ़कर पाठ में आए संयुक्त शब्दों को छाँटकर लिखिए −  उदाहरण − चलते-पुरज़े

Answer»

समझता - बूझना छोटे     - बड़े 

पूजा  - पाठ कटे        -     फटे 

ठीक  - ठाक खट्टे        -     मीठे 

गिने  - चुने लाल    -   पीले 

जले  - भुने ईमान   -   धर्म 

स्वार्थ  - सिद्धी नित्य    -  प्रति

22518.

महाजागरण गर्जन से किसकी प्राप्ति होगी ?

Answer»

कवि कहते हैं कि हमें इस धरती पर स्वर्ग की रचना करनी है इसीलिए हमें महाजागरण का महान अभियान चलाना है। इससे हम लोगों में लगातार चेतना लाकर किसानों-मजदूरों को जागृत करेंगे। इस प्रकार महाजागरण गर्जन से देश में चेतना आएगी।

22519.

हम नवयुग के अग्रदूत कैसे बन सकते हैं ?

Answer»

हम लोगों के दिलों से असंतोष की भावना दूर करके उनमें संतोष के भाव पैदा करेंगे। पृथ्वी पर हम लोगों को स्वर्ग जैसी सुविधा प्रदान करेंगे। हम उन्नति के पथ पर आगे बढ़ते हुए लोगों का मार्गदर्शन करके नवयुग के अग्रदूत बन सकते हैं।

22520.

कवि इस गीत के माध्यम से हमें क्या संदेश देना चाहता है?

Answer»

कवि इस गीत के माध्यम से हमें प्रगतिशीलता और कर्मठता का संदेश देना चाहता है।

22521.

कवि ने मजदूर एवं किसान को क्या प्रेरणा दी है ?

Answer»

किसान और मजदूर अपनी मेहनत से खेतों में अन्न उपजाते हैं और कल-कारखानों में तरह-तरह की वस्तुओं का निर्माण करते हैं, जिससे जनता का काम चलता है। कवि ने किसान और मजदूर के श्रम की वंदना कर उन्हें जाग्रत होने की प्रेरणा दी है।

22522.

दिल के भोलेपन के साथ-साथ अक्खड़पन और जुझारूपन को भी बचाने की आवश्यकता पर क्यों बल दिया गया है ?

Answer»

दिल का भोलापन सच्चाई और ईमानदारी के लिए जरूरी है, परंतु हर समय भोलापन ठीक नहीं होता। भोलेपन का फायदा उठानेवालों के साथ अक्खड़पन दिखाना भी जरूरी है। अपनी बात को मनवाने के लिए अकड़ भी होनी चाहिए। साथ ही कर्म करने की प्रवृत्ति भी आवश्यक है। अतः कवयित्री भोलेपन, अक्खड़पन व जुझारूपन – तीनों गुणों को बचाने की आवश्यकता पर बल देती हैं।

22523.

भाषा में झारखंडीपन से क्या अभिप्राय है ?

Answer»

इसका अभिप्राय है – झारखंड की भाषा की स्वाभाविक बोली, उनका विशिष्ट उच्चारण। भाषा में झारखण्डी-पन को बचाने की बात कवयित्री इसलिए करती हैं कि भाषा संस्कृति की वाहक होती है। भाषा बचेगी तो आदिवासी अस्मिता बचेगी। भाषा आदिवासियों के गौरव, स्वाभिमान और अस्मिता का प्रतीक है।

22524.

‘माटी का रंग’ प्रयोग करते हुए किस बात की ओर संकेत किया गया है ?

Answer»

कवयित्री ने ‘माटी का रंग’ प्रयोग करके स्थानीय विशेषताओं को उजागर करना चाहा है। संथाल की परगना की माटी का रंग बचाने से आशय है यहाँ का खान-पान, वहाँ की वेश-भूषा, वहाँ की तीज-त्यौहार, यहाँ के रीति-रिवाज, लोगों में जुझारूपन, अक्खड़ता, नाच-गान, सरलता आदि विशेषताएँ जमीन से जुड़ी हैं। कवयित्री चाहती हैं कि आधुनिकता के चक्कर में हम अपनी संस्कृति को हीन न समझें। हमें अपने अस्तित्व को बनाए रखना चाहिए।

22525.

हे जनशक्ति महान’ गीत के माध्यम से कवि ने जनमानस को क्या संदेश दिया है ?

Answer»

हे जनशक्ति महान!’ गीत के माध्यम से कवि ने जनमानस को जागने और दूसरों में जागरूकता पैदा करने का संदेश दिया है। वे पृथ्वी पर ऐसी दुनिया का निर्माण करना चाहते हैं, जिसमें लोग सुख-सुविधा के साथ शांतिपूर्ण ढंग से रह सकें। वे लोगों में समानता की भावना का प्रसार करना चाहते हैं।

22526.

कवि ने जनशक्ति को संबोधित करते हुए क्या कहा है ?

Answer»

कवि ने जनशक्ति को जगाने का आहवान किया है। उन्होंने जनशक्ति को संबोधित करते हुए कहा है कि वह खुद जायत हो जाए और दूसरों को भी जागरूक करे, ताकि लोगों में चेतना पैदा की जा सके और पृथ्वी पर नए स्वर्ग की रचना हो तथा लोग उसमें सुख-शांति से रहें।

22527.

शामनाथ माँ को कौन-से रंग के शलवार-कमीज़ पहनने के लिए कहते हैं?

Answer»

शामनाथ माँ को सफेद कमीज और सफेद शलवार-कमीज़ पहनने के लिए कहते हैं।

22528.

महाजागरण गर्जन से किसकी प्राप्ति होगी?

Answer»

महाजागरण गर्जन से लोगों में निरंतर चेतना आएगी।

22529.

कवि किसान-मजदूर को क्या मानते हैं?

Answer»

कवि किसान-मजदूर को वंदनीय मानते हैं।

22530.

हम कैसे नाविक है?

Answer»

हम कालरूपी जलधि के नाविक है।

22531.

मेम साहब को क्या पसंद आये थे?

Answer»

मेम साहब को पर्दे, सोफा-कवर का डिजाइन तथा कमरे की सजावट आदि पसंद आये थे।

22532.

माँ क्या टाल नहीं सकती थी?

Answer»

माँ बेटे के हुकुम को नहीं टाल सकती थी।

22533.

माँ के सब ज़ेवर क्यों बिक गए थे?

Answer»

माँ के सब जेवर शामनाथ की पढ़ाई के लिए बिक गए थे।

22534.

सही कथन के सामने (✓) का निशान लगाइए ।(क) बाएँ पाँव का जूता ठीक है मगर दाहिने जूते में बड़ा छेद हो गया है जिसमें से अंगुली बाहर निकल आई है ।(ख) लोग तो इन चुपड़कर फोटो खिंचाते हैं जिससे फोटो में खुशबू आ जाए ।(ग) तुम्हारी यह व्यंग्य मुसकान मेरे हौसले बढ़ाती है।(घ) जिसे तुम पृणित समझते हो, उसकी तरफ अँगूठे से इशारा करते हो ?

Answer»

सही विकल्प है (ख) सही है।

22535.

शामनाथ की पत्नी ने माँ को कहाँ भेजने के लिए कहा?

Answer»

शामनाथ की पत्नी ने माँ को पिछवाड़े वाली सहेली के घर भेजने के लिए कहा।

22536.

माँ क्या गाने लगी?

Answer»

माँ एक पुराना विवाह का गीत गाने लगीं – हरिया नी मायँ, हरिया नी भैणे हरिया तें भागी भरिया ह!

22537.

सभी देसी स्त्रियों की आराधना का केन्द्र कौन बनी हुई थी?

Answer»

सभी देसी स्त्रियों की आराधना का केन्द्र चीफ़ कि पत्नी बनी हुई थी।

22538.

चीफ़ की दावत किसके घर पर थी?

Answer»

चीफ़ की दावत मिस्टर शामनाथ के घर पर थी।

22539.

पाठ में एक जगह पर लेखक सोचता है कि ‘फोटो खिंचाने की अगर यह पोशाक है तो पहनने की कैसी होगी लेकिन अगले ही पल बह विचार बदलता है कि ‘नहीं, इस आदमी की अलग-अलग पोशाकें नहीं होंगी ।’ आपके अनुसार इस संदर्भ में प्रेमचंद के बारे में लेखक के विचार बदलने की क्या वजहें हो सकती है ?

Answer»

हमारे समाज में व्यक्ति दो तरह की पोशाकें रखता है । किसी विशिष्ट अवसर के लिए वह अच्छे कपड़े पहनता है और घर पर साधारण या पुराने कपड़े । पाठ में लेखक सोचते हैं यदि फोटो खिंचाने की यह पोशाक है तो पहनने की तो इससे भी खराब होगी । बाद में लेखक ने अपनी विचारधारा बदल दी । क्योंकि लेखक अच्छी तरह से जानते हैं कि प्रेमचंद का व्यक्तित्व दिखावे की दुनिया से अलग था । वे जैसे फोटो में दिख रहे हैं वैसे ही अपने जीवन में भी हैं । प्रेमचंद का जीवन आडंबरों से दूर सादगीपूर्ण था ।

22540.

हरिशंकर परसाई ने प्रेमचंद का जो शब्दचित्र हमारे सामने प्रस्तुत किया है, उससे प्रेमचंद के व्यक्तित्व की कौन-कौन सी विशेषताएँ उभरकर आती हैं ?

Answer»

हरिशंकर परसाई ने प्रेमचंद का जो शब्दचित्र हमारे सामने प्रस्तुत किया है, 

उससे प्रेमचंद के व्यक्तित्व की निम्नलिखित विशेषताएँ
उभरकर आती हैं –

  1. प्रेमचंद का व्यक्तित्व बहुत सीधा-सादा था, उनके व्यक्तित्व में कहीं भी दिखाया नहीं था । फटे जूते पहनना इस बात का प्रमाण है।
  2. उनका जीवन संघर्षशील था । वे स्वाभिमानी व्यक्ति थे । किसी से वस्तु मांगना उनके व्यक्तित्व के खिलाफ था । वे स्वाभिमानी व्यक्ति थे ।
  3. प्रेमचंद जीवनमूल्यों में कभी समझौता नहीं करते थे । इसीलिए सामाजिक कुरीतियों का डटकर मुकाबला करते थे । वे परिस्थितियों के गुलाम नहीं थे ।
  4. वे एक महान कथाकार थे, उपन्यास-सम्राट थे । अपनी रचनाओं में उन्होंने सामाजिक समस्याओं को उठाया और निराकरण करने का प्रयास किया ।
  5. वे उच्च विचारों से युक्त आडम्बरहीन व्यक्ति थे ।
22541.

पाठ में आए मुहावरे छाँटिए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए।

Answer»

मुहावरों की सूचि निम्नवत् है :

  • न्योछावर होना – एक माँ अपने बेटे की खुशी के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर देती है ।
  • कुर्बान होना – स्वतंत्रता संग्राम में अनेक भारतवासी कुर्बान हो गये ।
  • हौसले परत करना – समय पर बरसात न होने के कारण कृषकों के हौसले पस्त हो गये ।
  • लहूलुहान होना – बस दुर्घटना में कई लोग लहूलुहान हो गये ।
  • चक्कर काटना – पके अमरूद तोड़ने के लिए लड़कों का दल कब से चक्कर काट रहा है।
  • ठोकर मारना – अमरेश ने अपने पिता की करोड़ों की दौलत को ठोकर मारकर देवयानी से शादी रचाई ।
  • पहाड़ फोड़ना – रमेश स्कूल से आते ही बिस्तरे पर ऐसे गिर पड़ा मानो पहाड़ फोड़कर आया हो ।
  • संकेत करना – ट्राफिक पुलिस के संकेत करते ही गाड़िया चल पड़ी ।
22542.

आपकी दृष्टि में वेश-भूषा के प्रति लोगों की सोच में आज क्या परिवर्तन आया है ?

Answer»

पहले तन ढकने के उद्देश्य से ही लोग कपड़े पहनते थे । किन्तु समय परिवर्तित होने के साथ-साथ लोगों की सोच में बदलाव आया । आज लोग वेशभूषा को सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक मानने लगे हैं । वास्तव में समाज में पोशाक ही व्यक्ति का दरजा निश्चित करती हैं । यदि वेशभूषा अच्छी है तो आपको मान सम्मान मिलेगा । यदि वेशभूषा ठीक नहीं है, तो उस व्यक्ति को हेय की दृष्टि से देखते हैं ।

समाज में अपनी प्रतिष्ठा अपनी हैसियत दिखाने के लिए लोग आधुनिक फैशन के कपड़े पहनने लगे हैं । वेशभूषा को लेकर महिलाओं की सोच में भी भारी बदलाव आया है । महिलाएँ एक समारोह या प्रसंग में कोई साड़ी पहनेंगी तो दूसरी बार उसे पहनने में शर्मीदगी महसूस करती हैं । परिणामस्वरुप वार्डरोब (अलमारी) में महिलाओं के कपड़े दूंसतूंस कर भरे होते हैं, फिर भी नये कपड़ों की संख्या में लगातार वृद्धि होती रहती है । आज वेशभूषा व्यक्ति की जरूरत न होकर फैशन का प्रतीक बन गया है ।

22543.

पाठ में ‘टीले’ शब्द का प्रयोग किन संदों को इंगित करने के लिए किया होगा ?

Answer»

सामान्यतया ‘टीला’ मिट्टी या रेती का ढेर है । यहाँ यह शब्द राह में आनेवाली बाधाओं, अड़चनों का प्रतीक है । प्रेमचंद इस शब्द द्वारा समाज की कुरीतियों, बुराइयों की ओर संकेत करते हैं । समाज की इन कुरीतियों, बुराइयाँ व्यक्ति व समाज के विकास में बाधक बनती हैं । जिन्हें प्रेमचंद ने अपने जूते से ठोकर मार-मारकर उसे अपने व समाज के रास्ते से दूर करने का प्रयास करते हैं ।

22544.

आपने यह व्यंग्य पढ़ा । इसे पढ़कर आपको लेखक की कौन-सी बातें आकर्षित करती हैं ?

Answer»

हरिशंकर परसाई एक प्रसिद्ध व्यंग्य लेखक हैं । कोरे हास्य से अलग उनका व्यंग्य लेखन समाज में क्रांति की भावना को जगाता है । प्रस्तुत पाठ में परसाईजी ने लेखक प्रेमचंद के फटे जूतों पर अपना व्यंग्य प्रस्तुत करते हैं । वे प्रेमचंद की पोशाक के द्वारा दिखावा करनेवाले लोगों पर कटाक्ष करते हैं

। लेखक ने प्रेमचंद के व्यक्तित्व को दर्शाने के लिए जिन उदाहरणों का प्रयोग किया है, वे व्यंग्य को और भी सटीक बनाते हैं । समाज में फैली रूढ़ियाँ, कुरीतियाँ व्यक्ति की राह में बाधा डालती हैं, इसे लेखक ने बखूबी चित्रित किया है । व्यंग्य की भाषा कसी हुई व व्यंजनापूर्ण है, जो सभी को अपनी ओर खींचती है । लेखक ने कहवी से कड़वी बातों को अत्यंत सरलता से व्यक्त किया है । लेखक अप्रत्यक्ष रूप से समाज के दोषों पर व्यंग्य करता है ।

22545.

‘सभी नदियाँ पहाड़ थोड़े ही फोड़ती हैं, कोई रास्ता बदलकर घूमकर भी तो चली जाती हैं।’

Answer»

प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से लेखक कहना चाहते हैं कि सभी नदियाँ पहाड़ को फोड़कर रास्ता बनाते हुए आगे बढ़ जाती हैं, किन्तु कुछ नदियाँ पहाड़ को न फोड़ते हुए बगल से निकल जाती हैं अर्थात् समाज में कुछ लोग रास्ते में आनेवाली बाधाओं से डटकर मुकाबला करते हैं । किन्तु कुछ लोग सरल मार्ग अर्थात् बाधाओं को छोड़ दूसरे रास्ते से आगे बढ़ जाते हैं ।

22546.

नीचे दी गई पंक्तियों में निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिएक. जूता हमेशा टोपी से कीमती रहा है । अब तो जूते की कीमत और बढ़ गई है और एक जूते पर पचीसों टोपियाँ न्योछावर होती हैं ।ख. तुम परदे का महत्त्व ही नहीं जानते, हम परदे पर कुर्बान हो रहे हैं ।ग. जिसे तुम घृणित समझते हो, उसकी तरफ हाथ की नहीं, पाँव की अंगुली से इशारा करते हो ?

Answer»

क. जूता हमेशा टोपी से कीमती रहा है । अब तो जूते की कीमत और बढ़ गई है और एक जूते पर पचीसों टोपियाँ न्योछावर होती हैं ।

यहाँ जूते का स्थान नीचे पाँव में तथा टोपी का सिर पर (सम्माननीय) है, पर है इसके विपरीत । समाज में जिनके पास रुपया पैसा है उनका महत्त्व अधिक है । ज्ञानवान और गुणी लोगों को अमीरों के सामने कई बार झुकना पड़ता है । तभी लेखक ने कहा है कि एक जूते पर पचीसों टोपिया न्योछावर होती हैं ।

ख. तुम परदे का महत्त्व ही नहीं जानते, हम परदे पर कुर्बान हो रहे हैं ।

वास्तव में परदे के भीतर लोग अपनी कमियों को छिपा सकते हैं । प्रेमचंद आडंबर एवं दिखाये से दूर रहनेवाले व्यक्ति थे । वे जैसे बाहर से थे, वैसे ही भीतर से थे अतः उन्हें परदे की कोई आवश्यकता नहीं थी । दूसरी तरफ समाज में कुछ ऐसे भी लोग हैं जो बाह्य दिखावा करने के लिए परदे पर कुर्बान होते हैं । अर्थात् अपनी कमियों को छिपाने का प्रयास करते हैं ।

ग. जिसे तुम घृणित समझते हो, उसकी तरफ हाथ की नहीं, पाँव की अंगुली से इशारा करते हो ?

प्रेमचंद जिस व्यक्ति या सामाजिक बुराई से घृणा करते हैं उसकी तरफ हाथ की अंगुली से इशारा नहीं करते । ऐसा करके वे अपने महत्त्व को कम नहीं करना चाहते । वैसे भी घृणित वस्तु का स्थान पैरों तले ही होता है । इसलिए वे उस ओर अपनी पैर की अंगुली से इशारा करते हैं ।

22547.

लेखक की दृष्टि प्रेमचंद के जूतों पर क्यों अटक गई ?

Answer»

प्रेमचंद ने जो जूते पहने हैं, उनमें से बाएँ पैर के जूते में बड़ा-सा छेद है और प्रेमचंद की अँगुली बाहर निकल आई है, इसे देखते ही लेखक की दृष्टि प्रेमचंद के जूतों पर अटक गई।

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लेखक ने प्रेमचंद के जूतों का वर्णन किस प्रकार किया है ?

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लेखक के अनुसार प्रेमचंद ने केनवास के जूते पहने हैं, जिनके बंद (फीते) बेतरतीब बँधे हैं । लापरवाही से उपयोग करने पर बंद के सिरों पर की लोहे की पतरी निकल जाती है, और छेदों में बंद डालने में परेशानी होती है, तब भी बंद को जैसे-तैसे कस लिया गया है तथा बाएँ जूते में बड़ा सा छेद हो गया है ।

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लेखक ने ऐसा क्यों कहा है कि जूता हमेशा टोपी से कीमती रहा है ?

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जूता धन समृद्धि का प्रतीक है और टोपी ज्ञान का । समाज में जो लोग धनवान हैं, रुपये पैसेवाले हैं, समाज उनका मान सम्मान करता है । ज्ञानी व्यक्तियों को धनयानों से कम आँका जाता है । कई बार धनवानों के सामने ज्ञानी व्यक्तियों को भी झुकना पड़ता है । इसलिए लेखक ने कहा है कि जूता हमेशा टोपी से कीमती रहा है ।

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लेखक ने प्रेमचंद के लिए ट्रेजडी शब्द का प्रयोग क्यों किया है ?

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प्रेमचंद हिन्दी के बहुत बड़े साहित्यकार थे । वे युग-प्रवर्तक, उपन्यास-सम्राट, महान कथाकार के रूप में प्रसिद्ध थे । इतने बड़े साहित्यकार के पास फोटो खिंचवाने के लिए एक जोड़ी अच्छे जूते भी नहीं है । इसलिए लेखक ने प्रेमचंद की दशा दिखाने के लिए ट्रेजडी शब्द का प्रयोग किया है ।