This section includes InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
| 22451. |
फसल कविता में कवि का क्या संदेश है ? |
|
Answer» फसल कविता में कवि ने यह बताया है कि फसल प्राकृतिक संसाधनों तथा कृषक के श्रम के सुविचारित संयुक्त प्रयास की ही देन है। इनमें से किसी भी एक के अभाव में उत्पादन संभव नहीं है। सभी की अपनी-अपनी उपादेयता है। हमें उनमें से किसी की भी अनदेखी न करके उनके संरक्षण का प्रयास करना चाहिए। |
|
| 22452. |
लोग किन-किन चीज़ो का वर्णन करते हैं? |
| Answer» लोग आकाश, पृथ्वी, जलाशयों का वर्णन करते हैं। | |
| 22453. |
रंग की शोभा ने क्या कर दिया है? |
| Answer» रंग की शोभा ने उतर दिशा में जमकर कमाल ही कर दिया है। | |
| 22454. |
डाक बंगले के खानसामे ने लेखक और उनके साथियों को क्या बताया? |
|
Answer» डाक बंगले के खानसामे ने बताया कि वे बहुत खुशकिस्मत हैं क्योंकि उन्हें पहले दिन ही बर्फ के दर्शन हो गए अन्यथा पिछले यात्री हफ्ते भर पड़े रहे पर उन्हें दर्शन नहीं हुए। |
|
| 22455. |
डाक बंगले में किसने उन्हें खुशकिस्मत बताया?(क) मैनेजर(ख) मैडम(ग) खानसामे(घ) चौकीदार। |
|
Answer» सही विकल्प है (ग) खानसामे |
|
| 22456. |
लेखक मित्रों के साथ कौसानी क्या देखने के लिए गया था?(क) मंदिर(ख) प्राकृतिक सौंदर्य(ग) बरफ(घ) जन-जीवन। |
|
Answer» सही विकल्प है (ग) बरफ |
|
| 22457. |
लेखक और उसके मित्रों की कौसानी तक की यात्रा का वर्णन संक्षेप में कीजिए? |
|
Answer» लेखक और उसके मित्र कौसानी बर्फ देखने गए थे। नैनीताल, रानीखेत और मझकाली के भयानक मोड़ों को पार करके वे बस द्वारा कोसी पहुँचे। रास्ता कष्टप्रद, भयानक तथा सूखा था। कहीं हरियाली नहीं थी। ऊबड़-खाबड़ सड़क पर नौसिखिया ड्राइवर लापरवाही से बस चला रहा था। कोसी पहुँचने तक सबके चेहरे पीले पड़ गए थे। बस अल्मोड़ा जा रही थी। कौसानी के लिए कोसी से दूसरी बस मिलती थी। लेखक अपने एक साथी के साथ कोसी में ही बस से उतर गयो। दो घण्टे बाद आई दूसरी बस से शुक्ल जी तथा चित्रकार सेन उतरे। शुक्ल जी का चेहरा प्रफुल्लित था। उनको देखकर लेखक की भी सारी थकान दूर हो गई । सेन का स्वभाव अत्यन्त मधुर था। वह शीघ्र ही सबके साथ घुल-मिल गया। कोसी से चारों लोग कौसानी के लिए बस में सवार हुए। अब रास्ते का दृश्य बदला हुआ था। कल-कल करके बहती कोसी नदी, उसके किनारे स्थिर हरे-भरे खेत और सुन्दर गाँव आकर्षक लग रहे थे। रास्ते में अनेक बस-स्टेशन, डाकघर तथा चाय की दुकानें थीं। कोसी तथा उसमें मिलने वाले नदी-नालों के पुल थे तथा चीड़ के निर्जन वन भी थे। टेढ़ी-मेढ़ी कंकरीली सड़क पर बस धीरे-धीरे चल रही थी। वहाँ तक बर्फ के दर्शन नहीं हुए थे। अत: लेखक कुछ निराश और खिन्न था। सोमेश्वर की घाटी के उत्तर में ऊँची पर्वतमाला के शिखर पर कौसानी बसा था। वह एक छोटा-सा गाँव-था। बस अड्डे पर उतरते ही अकस्मात् लेखक की निगाह कल्यूर की रंग-बिरंगी घाटी पर पड़ी। पचासों मील चौड़ी यह घाटी हरे-भरे खेतों, लाल-लाल रास्तों, नदियों आदि के कारण बहुत खूबसूरत लग रही थी। दूर घाटी के पार बादलों में हिमालय की बर्फीली चोटियाँ छिपी थीं। अचानक लेखक ने बादल छटने पर एक छोटे बर्फीले शिखर को देखा। वह प्रसन्नता से चिल्लाया -‘वह देखो बर्फ’। फिर सभी डाकबंगले में अपना सामान रखकर बिना चाय पिये ही बैठ गए और बादलों के हटने का इंतजार करने लगे। धीरे-धीरे बादल छैटे तो उनको हिम से ढंके हिमालय के दर्शन हुए। |
|
| 22458. |
कवि ने कठिन यथार्थ के पूजन की बात क्यों कही है? |
|
Answer» प्राय: व्यक्ति अतीत की सुखद स्मृतियों में डूबा हुआ कल्पनालोक में विचरण करता रहता है, वर्तमान यथार्थ से पलायन करता है। इससे उसका जीवन अधिक भयावह हो जाता है इसलिए कवि वर्तमान के कठिन यथार्थ का पूजन करने को कहता है ताकि वह वर्तमान स्थिति से संघर्ष करके उसे अनुकूल बना सके। |
|
| 22459. |
सूरज के डूबने पर सब गुमसुम क्यों हो गए थे? |
|
Answer» सूरज के डूबने पर सब गुमसुम इसलिए हो गए थे क्योंकि सूरज डूबने के साथ ही उनके हिम दर्शन की सारी इच्छाएं और आशाएं धूमिल हो गई थीं। जिस हिमदर्शन की आशा में लेखक अपने मित्रों के साथ बहुत समय से टकटकी लगा कर देख रहे थे। वे उससे वंचित रह गए थे। |
|
| 22460. |
‘शब्दों से तो प्रार्थना हुआ नहीं करती’ फिर प्रार्थना किस प्रकार होती है? लेखक के मत से सहमति अथवा असहमति व्यक्त करके उत्तर दीजिए। |
|
Answer» लेखक को मानना है कि सच्ची प्रार्थना हृदय से निकलती है। उसके लिए शब्दों की जरूरत नहीं होती। वह मूक होती है। श्रमिक के सुख-दु:ख, उसका प्रेम, उसकी पवित्रता आदि समस्त बातें उसके श्रम से जुड़ जाती हैं। सच्ची प्रार्थना ऐसा ही श्रम करने से होती है। वह मूक होती है। ईश्वर ऐसी प्रार्थना को अवश्य सुनता है तथा तत्काल सुनता है। लेखक का कथन सही है। सभी के प्रति प्रेम-भाव रखते हुए परिश्रम करके उनकी सेवा करने से ही सच्ची प्रार्थना होती है। |
|
| 22461. |
‘बीती ताहि विसार दे आगे की सुधि ले’- यह भाव कविता की किस पंक्ति में झलकता है? |
|
Answer» कविता की निम्न पंक्ति में ‘बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि ले’ भाव झलकता है – “जो न मिला भूल उसे कर तू भविष्य वरण।” |
|
| 22462. |
कविता में विशेषण के प्रयोग से शब्दों के अर्थ में विशेष प्रभाव पड़ता है, जैसे- कठिन यथार्थ । कविता में आए ऐसे अन्य उदाहरण छांटकर लिखिए और यह भी बताइए कि इससे शब्दों के अर्थ में क्या विशिष्ट पैदा हुई है ? |
|
Answer» कविता में प्रयुक्त विशेषण तथा उनके अर्थ में उत्पन्न विशिष्ट इस प्रकार है
|
|
| 22463. |
‘छाया’ से कवि का क्या आशय है ? कवि इन्हें छूने से क्यों मना कर रहा है ? |
|
Answer» छाया शब्द का आशय है अतीत की सुखद स्मृतियाँ, जो मानव-मन के कोने में कहीं दबी-छिपी बैठी है। कवि इन स्मृतियों को छूने से इसलिए मना कर रहा है, कि इनको याद करने से वर्तमान का दुःख कम होने के बजाय बढ़ ही जाएगा। |
|
| 22464. |
‘क्या हुआ जो खिला फूल रस वसंत आने पर’ का क्या भाव है ? |
|
Answer» ‘क्या हुआ जो खिला फूल रस वसंत आने पर’ का भाव यह है कि उपलब्धि यदि देर से भी प्राप्त होती है तो भी हमें उसका आनंद उठाना चाहिए । समय पर न मिलने को कोसते हुए दुःखी नहीं होना चाहिए और न तो उसे निम्न गिनकर दुःखी होना चाहिए। |
|
| 22465. |
‘जो न मिला भूल उसे कर तू भविष्य वरण’ – में कवि की वेदना के साथ ही उसकी चेतना भी व्यक्त हुई है, इस कथन को समझाइए। |
|
Answer» कवि कहता है व्यक्ति जिस अभीष्ट को पाने की कामना करता है, वह उसे न भी मिले, जिसके कारण उसका जीवन त्रासद बन गया हो । समय बीतने पर उसकी समझ में आता है कि अतीत की सुखद स्मृतियों में डूबे रहना, अधूरी कामनाओं से दुःखी होना उचित नहीं है। अत: अपूर्ण कामना के बारे में न सोचकर, वर्तमान कठोर यथार्थ को स्वीकार कर भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए जो कुछ किया जा सकता है, उसे करना ही उचित है। कवि का यह परामर्श उसको चेतना को व्यक्त करता है। |
|
| 22466. |
सूखे हुए कीचड़ का सौंदर्य किन स्थानों पर दिखाई देता है? |
|
Answer» सूखे हुए कीचड़ का सौंदर्य नदियों के किनारे दिखाई देता है। कीचड़ जब थोड़ा सूख जाता है तो उस पर छोटे-छोटे पक्षी बगुले आदि घूमने लगते हैं। कुछ अधिक सूखने पर गाय, भैंस पांडे, भेड़, बकरियाँ के पदचिन्ह अंकित हो जाते हैं। जब दो मदमस्त पाड़े अपने सींगो से कीचड़ को रौंदते हैं तो चिन्हों से ज्ञात होता है महिषकुल के युद्ध के वर्णन हो। |
|
| 22467. |
कीचड़ सूखकर किस प्रकार के दृश्य उपस्थित करता है? |
|
Answer» कीचड़ सूखकर टुकड़ो में बंट जाता है, उसमे दरारें पर जाती हैं और वे टेढ़े हो जाते हैं तब वे सुखाये हुए खोपरे जैसे दिखते हैं। नदी के किनारे कीचड़ सूखकर जब ठोस हो जाता है तब उसपर गाय, बैल, भैंस, पाड़े के निशाँ अंकित हो जाते हैं जिसकी शोभा अलग प्रकार की होती है। |
|
| 22468. |
कवियों की धारणा को लेखक ने युक्तिशून्य क्यों कहा है? |
|
Answer» कवियों की धारणा केवल बाहरी सौंदर्य पर ध्यान देते हैं आंतरिक सौंदर्य की ओर उनका ध्यान नहीं जाता। पंकज शब्द बहुत अच्छा लगता है और पंक कहते ही बुरा सा लगता है। वे कमल को अपनी रचना में रखते हैं परन्तु पंक को अपनी रचना में नहीं लाते हैं। वे इसका तिरस्कार करते हैं। वे प्रत्यक्ष सौंदर्य की प्रशंसा करते हैं परन्तु उसको उत्पन्न करने वाले कारकों का सम्मान नहीं करते। कवियों का इस धारणा को लेखक ने युक्तिशून्य कहा है। |
|
| 22469. |
रंग की सारी शोभा कहाँ जमी थी? |
| Answer» रंग की सारी शोभा उत्तर में जमी थी। | |
| 22470. |
निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिये -"आप वासुदेव की पूजा करते हैं इसलिए वसुदेव को तो नहीं पूजते, हीरे का भारी मूल्य देते हैं किन्तु कोयले या पत्थर का नहीं देते और मोती को कठ में बाँधकर फिरते हैं किंतु उसकी मातुश्री को गले में नहीं बाँधते।" कस-से-कम इस विषय पर कवियों के साथ चर्चा न करना ही उत्तम ! |
|
Answer» कवियों का कहना है कि एक अच्छी और सुंदर वस्तु को स्वीकार करते हैं तो उससे जुड़ी चीज़ों को भी स्वीकार करना चाहिए। हीरा कीमती होता है परन्तु उसके उत्पादक कार्बन को ज़्यादा नहीं पूछा जाता। श्री कृष्ण को वासुदेव कहते हैं लोग उन्हें पूजते भी हैं परन्तु उनके पिता वसुदेव को भी पूजे यह ज़रूरी नहीं है। इसी तरह मोती इतना कीमती होता है लोग इसे गले में पहनते हैं पर सीप जिसमें मोती होता है इसे गले में बाँधे यह ज़रूरी नहीं है। अत: कवियों के अपने तर्क होते हैं। उनसे इस विषय पर बहस करना बेकार है। |
|
| 22471. |
निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिये -नदी किनारे अंकित पदचिह्न और सींगों के चिह्नों से मानो महिषकुल के भारतीय युद्ध का पूरा इतिहास ही इस कर्दम लेख में लिखा हो ऐसा भास होता है। |
|
Answer» इस वाक्य का आशय यह है कि नदी के किनारे जब दो मदमस्त पाड़े अपने सींगों से कीचड़ को रौंदकर आपस में लड़ते हैं तो उनके पैरों तथा सींगों के चिह्न अंकित हो जाते हैं जिसे देखने से ऐसा लगता है मानो महिषकुल के भारतीय युद्ध का इतिहास का वर्णन हो। |
|
| 22472. |
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए - हम आकाश का वर्णन करते हैं, पृथ्वी का वर्णन करते हैं, जलाशयों का वर्णन करते हैं, पर कीचड़ का वर्णन कभी किसी ने किया है? कीचड़ में पैर डालना कोई पसंद नहीं करता है, कीचड़ से शरीर गन्दा होता है, कपडे मैले हो जाते हैं। अपने शरीर पर कीचड़ उड़े यह किसी को अच्छा नहीं लगता और इसलिए कीचड़ किसी को सहानुभूति नहीं होती। यह सब यथार्थ है किन्तु तटस्थ्ता से सोचें तो हम देखेंगे कि कीचड़ में कुछ कम सौंदर्य नहीं है। पहले तो यह की कीचड़ का रंग बहुत सुन्दर है। पुस्तकों के गत्तों पर, घरों की दीवालों पर अथवा शरीर के कीमती कपड़ों के लिए हम सब कीचड़ के जैसे रंग पसंद करते हैं। कलाभिज्ञ लोगों की भट्टी में पकाये हुए मिट्टी के बर्तनों के लिए यही रंग बहुत पसंद है। फोटो लेते समय भी यदि उसमें कीचड़ का, एकाध ठीकरे का रंग आ जाए तो उसे वार्मटोन कहकर विज्ञ लोग खुश हो जाते हैं। पर लो, कीचड़ का नाम लेते ही सब बिगड़ जाता है। (क) हम प्रकृति के किन रूपों का प्रायः वर्णन करते हैं? (ख) लोग कीचड़ को पसंद क्यों नहीं करते? (ग) कीचड़ का रंग कहाँ-कहाँ पसंद किया जाता है? |
|
Answer» (क) हम प्रकृति के सुंदर रूपों आकाश, पृथ्वी, जालशयों आदि का प्रायः वर्णन करते हैं। (ख) लोग कीचड़ को पसंद इसलिए नहीं करते क्योंकि इससे शरीर गन्दा होता है, कपडे मैले हो जाते हैं। (ग) कीचड़ का रंग पुस्तकों के गत्तों पर, घरों की दीवालों पर और शरीर के कीमती कपड़ों के लिए पसंद किया जाता है। कलाभिज्ञ लोगों की भट्टी में पकाये हुए मिट्टी के बर्तनों के लिए कीचड़ का रंग बहुत पसंद है। |
|
| 22473. |
कवि ईश्वर के सामने कैसे खड़े हैं? |
|
Answer» कवि ईश्वर के सामने अपना सिर झुकाकर खड़े हैं। |
|
| 22474. |
खुदा चाहे तो, हर ………… को टाल सकता है।A. किस्मतB. आफतC. मन्नतD. दावत |
|
Answer» खुदा चाहे तो, हर आफत को टाल सकता है। |
|
| 22475. |
कवि कीचड़ का वर्णन क्यों नहीं करते? |
|
Answer» कवि बाहरी सौंदर्य को ज्यादा महत्व देते हैं, उनकी उपयोगिता को महत्व नहीं देते इसलिए कवि कीचड़ का वर्णन नहीं करते। |
|
| 22476. |
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए -कीचड़ देखना है तो गंगा किनारे या सिंधु के किनारे और इतने से तृप्ति ना हो तो सीधे खंभात पहुँचना चाहिए। वहाँ मही नदी के मुख से आगे जहाँ तक नज़र पहुँचे वहाँ तक सर्वत्र सनातन कीचड़ ही देखने को मिलेगा। इस कीचड़ में हाथी डूब जाएँगे ऐसा कहना, न शोभा दे ऐसी अलोपक्ति करने जैसा है। पहाड़ के पहाड़ उसमें लुप्त हो जाएँगे, ऐसा कहना चाहिए। हमारा अन्न कीचड़ में से ही पैदा होता है इसका जाग्रत भान हर एक मनुष्य को होता तो वह कभी कीचड़ का तिरस्कार न करता। (क) इस कीचड़ में हाथी भी डूब जाएँ -का क्या आशय है? इस कीचड़ में क्या-क्या डूब सकते हैं? (ख) मही नदी के मुख के आगे स्थित कीचड़ की क्या विशेषता है? (ग) मनुष्य कीचड़ का तिरस्कार करना कब छोड़ेगा? |
|
Answer» (क) इस कथन का आशय है कि कीचड़ बहुत जयादा तथा गहरा होता है। इस कीचड़ में पहाड़ के पहाड़ डूब सकते हैं। (ख) मही नदी के मुख के आगे से जहाँ तक नजर पहुँचे वहाँ तक सर्वत्र सनातन कीचड़ ही देखने को मिलता है। (ग) मनुष्य को जब यह जाग्रत भान हो जाएगा कि उसका अन्न कीचड़ से ही पैदा होता है तब वह इसका तिरस्कार करना छोड़ेगा। |
|
| 22477. |
आशय सपष्ट कीजिये "नदी के किनारे अंकित पद चिह्न और सींगों के चिह्नों से मानो महिषकुल के भारतीय युद्ध का पूरा इतिहास ही इस कर्दम लेख में लिखा हो भास होता है।" |
|
Answer» इस कथन का आशय है कि नदी के किनारे कीचड़ सूखी कीचड़ में जब दो भैंस के बच्चे मस्त होकर अपने सींगों को उस कीचड़ में धँसाकर रौंदते और लड़ते हैं तो उनके लड़ने से कीचड़ में उनके पद चिह्न और सींगों के चिह्न अंकित हो जाते हैं जिसे देखकर ऐसा लगता है मानो महिषकुल के सभी भारतीय युद्ध का पूरा इतिहास कीचड़ में लेख के रूप लिख दिया गया हो। |
|
| 22478. |
खानसामे ने सब मित्रों को खुशकिस्मत क्यों कहा? |
|
Answer» खानसामे ने उन सब मित्रों को खुशकिस्मत कहा क्योंकि उन्हें वहाँ आते ही पहले ही दिन बर्फ दिखाई दे गई थी। उनसे पहले 14 टूरिस्ट वहाँ आकर पूरा हफ्ता भर रहे पर उन्हें बादलों के कारण बर्फ दिखाई नहीं दी थी। |
|
| 22479. |
कीचड़ का काव्य पाठ का सार लिखे| |
|
Answer» प्रस्तुत लेख 'कीचड़ का काव्य' में लेखक ने कीचड़ का महिमामंडन किया है। उन्होंने बताया है की कोई भी कवि या लेखक अपने कृतियों में कीचड़ का वर्णन नही करते हैं, जबकि लेखक को कीचड़ में कम सौंदर्य नजर नही आता। कीचड़ का रंग बहुत व्यक्तियों को पसंद आता है जैसे पुस्तक के गत्तों पर, घरों की दीवालों पर, मिटटी के बर्तनो के लिए तथा फोटो लेते समय। कीचड के सौंदर्य का वर्णन करते हुए लेखक ने कहा है की जब ये नदी के किनारे सुख कर टूट जाते हैं, उनमे दरारे पड़ जाती हैं तब वे सुखाये खोपड़े जैसे दिखाई पड़ते हैं। जब उसपर छोटे-बड़े पक्षी के पदचिन्ह अंकित हो जाते हैं तो हमें उस रास्ते कारवां ले जाने की इच्छा होती है। फिर जब कीचड़ ज्यादा सुखकर जमीन ठोस हो जाती है तथा गाय, भैंस, बैल, बकरे आदि के पदचिन्ह अंकित हो जाते हैं है जिसकी शोभा कुछ और ही है। जब दो पांडे अपने सींगो द्वारा कीचड़ को रौंदकर आपस में लड़ते हैं तो उनके अंकित चिन्ह महिषकुल के युद्ध का वर्णन करते हैं। अगर हमें कीचड़ के विशाल रूप को देखना है तो गंगा किनारे या सिंधु के किनारे जाना चाहये या फिर सीधे खम्भात पहुंचना चाहिए जहाँ हमारी नजर जहाँ तक जायेगी वहां सर्वत्र कीचड़ ही मिलेगा। लेखक के अनुसार अगर मनुष्य को ये याद रहे की उनका अन्न कीचड़ की ही दें है तो वह इसका तिरस्कार न करे। हमारे कवि मल के द्वारा उत्पन्न शब्द का उपयोग शान से करते हैं परन्तु मल को स्थान नही देते। इस विषय पर चर्चा कवियों से चर्चा न करना ही उत्तम है। |
|
| 22480. |
लेखक के अनुसार हमें कीचड़ देखने के लिए कहाँ जाना चाहिए? |
|
Answer» लेखक के अनुसार हमें कीचड़ देखने के लिए गंगा के किनारे या सिंधु के किनारे जाना चाहिए। अगर इतने से भी संतुष्टि ना मिले तो खंभात जाना चाहिए। |
|
| 22481. |
कीचड़ कब सुन्दर दिखते हैं? |
|
Answer» नदी के किनारे जब कीचड़ सुखकर उसके टुकड़े हो जाते हैं तब कीचड़ सुन्दर दिखते हैं। |
|
| 22482. |
‘क्या हुआ जो खिला फूल रस वसंत जाने पर ?’ कवि के कथन से अपनी सहमति या असहमति को तर्कसहित लिखिए। |
|
Answer» यह सत्य है कि समय से प्राप्त उपलब्धि का महत्त्व विशेष होता है और उससे प्रसन्नता भी ज्यादा प्राप्त होती है। उपलब्धियों का मानव मन पर समय के अनुसार अलग-अलग प्रभाव दिखलाई पड़ता है। कभी-कभी देर से मिलनेवाली उपलब्धि एकदम अर्थहीन लगती है – का बरखा जब कृषि सुखाने । कोई निर्दोष व्यक्ति एक बार दोषी ठहरा दिया जाए और बाद में न्यायालय द्वारा वह भले ही दोषमुक्त घोषित करने पर छूट जाए किंतु तब तक उसे जो हानि उठानी पड़ चुकी होती है, उसकी भरपाई कभी नहीं होती पर कुछ सांत्वना अवश्य मिलती है। |
|
| 22483. |
धर्म के व्यापार को रोकने के लिए क्या उद्योग होना चाहिए? |
|
Answer» धर्म के व्यापार को रोकने के लिए साहस और दृढ़ता के साथ उद्योग होना चाहिए। |
|
| 22484. |
कौन सा कार्य देश की स्वाधीनता के विरूद्ध समझा जायेगा? |
|
Answer» आपका जो मंन चाहे वो माने और दूसरे का जो मन चाहे वो माने। यदि किसी धर्म के मानने वाले कहीं दुसरो के धर्म में जबरदस्ती टांग अड़ाते हैं तो यह कार्य देश की स्वाधीनता के विरूद्ध समझा जायेगा। |
|
| 22485. |
धर्म के स्पष्ट चिह्न क्या हैं? |
|
Answer» शुद्ध आचरण और सदाचार धर्म के स्पष्ट चिह्न हैं। |
|
| 22486. |
लेखक के अनुसार स्वाधीनता आंदोलन का कौन सा दिन बुरा था? |
|
Answer» लेखक के अनुसार स्वाधीनता आंदोलन का वह दिन सबसे बुरा था जिस दिन स्वाधीनता के क्षेत्र में खिलाफत, मुल्ला मौलवियों और धर्माचार्यों को स्थान दिया जाना आवश्यक समझा गया। |
|
| 22487. |
‘आई हूँ संदेश लेकर चन्नमल्लिकार्जुन का’ का आशय स्पष्ट कीजिए। |
|
Answer» चन्नमल्लिकार्जुन अर्थात् शिव । अक्कमहादेवी शिव की अनन्य भक्त हैं । वह वीर शैव संप्रदाय से जुड़ी हुई है । वह दुनियाभर में शिव के संदेश प्रचारित-प्रसारित करना चाहती हैं । शिव संसार का कल्याण करनेवाले हैं | मनुष्यरूपी जीवन को व्यर्थ न गँवाकर ईशवंदना में चित्त लगाने के अवसर को भूल न जाना चाहिए। इस संदर्भ में एक विशेष बात यह भी है कि प्रत्येक वचन के अंत में रचयिता का कोई न कोई संकेत नाम रहता है । जैसे कि बसवेश्वर के वचन के अंत में ‘कूडलसंगम देव’ अल्लम के वचन के अंत में ‘गहेश्वरा’ और अक्कमहादेवी के वचन के अंत में ‘चन्नमल्लिकार्जन’ । ये संकेत नाम शिवशरणों के उपास्य देव शिव के प्रति लक्ष्य करके कहे गए हैं । इन वचनों में अभिव्यक्त विचार मानवजीवन को बेहतर बनाने की उमदा भावना से ओतप्रोत है। |
|
| 22488. |
क्या अक्कमहादेवी को ‘कन्नड़ की मीरा’ कहा जा सकता है ? चर्चा करें। |
|
Answer» हाँ, कहा जा सकता है । जिस तरह से महादेवी वर्मा को हिन्दी की आधुनिक मीरा कहा जाता है, वैसे ही अक्कमहादेवी को कन्नड़ की मीरा कहा जा सकता है । मीरा और अक्कमहादेवी दोनों विवाह से पूर्व अपने-अपने आराध्य के प्रति दीवानी थीं। मीरा श्रीकृष्ण के प्रति तो अक्कमहादेवी चन्नमल्लिकार्जुन (शिव) के प्रति। दोनों विवाह करना नहीं चाहती थीं । दोनों ने वैवाहिक जीवन अपनी इच्छा से तोड़ा । मीरा का जन्म राजघराने में हुआ, विवाह भी राजघराने में हुआ । वहीं अक्कमहादेवी का जन्म साधारण घर में हुआ मगर विवाह राजघराने में। दोनों ने अपने-अपने समय में सामाजिक बंधनों को तोड़ा। दोनों ने लोकलाज की परवाह नहीं की। |
|
| 22489. |
अपना घर से क्या तात्पर्य है ? इसे भूलने की बात क्यों कही गई है ? |
|
Answer» अपना घर से तात्पर्य है – सांसारिक जीवन । अपने घर को पूरी तरह से भूल जाने का आशय है – सारे रिश्ते-नातें, भौतिक सुख-सुविधाएँ, सांसारिक मोहमाया से विरक्त हो जाना । ‘घर की माया’ अपने अराध्य तक पहुँचने के मार्ग का रोड़ा है, अवरोधक बल है । कबीर ने इसलिए तो कहा था – “जो घर जारे आपना, चले हमारे साथ” । कवयित्री के ‘कि भूल जाऊँ अपना घर पूरी तरह और कबीर के ‘जो घर जारे आपना, चले हमारे साथ’ में भाव के स्तर पर कितनी साम्यता है । बुद्ध, कबीर, महावीर और गोरखनाथ आदि महापुरुषों ने इसीलिए ‘घर की माया’ को त्याग दिया था। |
|
| 22490. |
सबके कल्याण हेतु अपने आचरण को सुधारना क्यों आवश्यक है? |
|
Answer» सबके कल्याण हेतु अपने आचरण को सुधारना इसलिए आवश्यक है क्योंकि जब हम खुद को ही नहीं सुधारेंगे, दूसरों के साथ अपना व्यवहार सही नहीं रख सकेंगे। दिन भर के नमाज़, रोजे और गायत्री किसी व्यक्ति को अन्य व्यक्ति की स्वाधीनता रौंदने और उत्पात फैलाने के लिए आजाद नही छोड़ सकेगा। |
|
| 22491. |
'बुद्धि पर मार' के संबंध में लेखक के क्या विचार हैं? |
|
Answer» 'बुद्धि पर मार' का आशय है की बुद्धि पर पर्दा डालकर पहले आत्मा और ईश्वर का स्थान अपने लिए लेना और फ़िर धर्म, ईमान ईश्वर और आत्मा के नाम पर अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए लोगों को लड़ना भिड़ाना। यह साधारण लोगो नही समझ पाते हैं और धर्म के नाम पर जान लेने और देने को भी वाजिब मानते हैं। |
|
| 22492. |
आनेवाल समय किस प्रकार के धर्म को नही टिकने देगा? |
|
Answer» दो घंटे तक बैठकर पूजा कीजिये और पंच-वक्ता नमाज़ भी अदा कीजिए, परन्तु ईश्वर को इस प्रकार के रिश्वत दे चुकने के पश्चात, यदि आप दिन-भर बेईमानी करने और दूसरों को तकलीफ पहुंचाने के लिए आजाद हैं तो इस धर्म को आनेवाल समय नही टिकने देगा। |
|
| 22493. |
ईश्वर हर आफत को क्यों टाल सकता है? |
|
Answer» ईश्वर हर आफत को टाल सकता है, क्योंकि वह सबसे बड़ी ताकतवाला (सर्वशक्तिमान) है। |
|
| 22494. |
कवि ने ‘मालिक’ किसे कहा है? क्यों? |
|
Answer» कवि ने ईश्वर को ‘मालिक’ कहा है, क्योंकि यह धरती और आकाश उसी के हैं। उसी ने यह सारी दुनिया बनाई है। |
|
| 22495. |
महात्मा गांधी के धर्म सम्बन्धी विचारो पर प्रकाश डालिये। |
|
Answer» महात्मा गाँधी अपने जीवन में धर्म को महत्वपूर्ण स्थान देते थे। वे सर्वत्र धर्म का पालन करते थे। धर्म के बिना एक पग भी चलने को तैयार नहीं होते थे। उनके धर्म के स्वरूप को समझना आवश्यक है। धर्म से महात्मा गांधी का मतलब, धर्म ऊँचे और उदार तत्वों का ही हुआ करता है। वे धर्म की कट्टरता के विरोधी थे। प्रत्येक व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि वह धर्म के स्वरूप को भलि-भाँति समझ ले। |
|
| 22496. |
कवि किसे सबसे ताकतवाला मानते हैं? क्यों? |
|
Answer» कवि ईश्वर को सबसे ताकतवाला मानते हैं। ईश्वर सर्वशक्तिमान है। वह सब कुछ कर सकता है। वह जिसे चाहे उसे जीवन |
|
| 22497. |
‘तू अपनी नजर हम पर रखना’ ऐसा कवि क्यों कहते हैं? |
|
Answer» ईश्वर की इच्छा से ही दुनिया में हमारा जन्म हुआ है। उसीकी कृपा से हमें यह शरीर और ये प्राण मिले हैं। हमारा जीवन उसीके भरोसे है, क्योंकि वही हमारा रखवाला है। इसलिए कवि ईश्वर से हम पर अपनी नजर रखने के लिए कहते हैं। |
|
| 22498. |
लेखक की दृष्टि में धर्म की भावना कैसी होनी चाहिए? |
|
Answer» लेखक की दृष्टि में धर्म किसी दूसरे व्यक्ति की स्वाधीनता को छीनने का साधन ना बने। जिसका मन जो धर्म चाहे वो माने और दूसरे को जो चाहे वो माने। दो भिन्न धर्मों मानने वालो के लिए टकरा जाने का कोई स्थान ना रहे। अगर कोई व्यक्ति दूसरे के धर्म में दखल दे तो इस कार्य को स्वाधीनता के विरुद्ध समझा जाये। |
|
| 22499. |
नीचे दी गई संयुक्त क्रियाओं का प्रयोग करते हुए कोई अन्य वाक्य बनाइए − (क) देखते-देखते वहाँ के बादल श्वेत पूनी जैसे हो गए। .................................................................... (ख) कीचड़ देखना हो तो सीधे खंभात पहुँचना चाहिए। ..................................................................... |
|
Answer» (ग) हमारा अन्न कीचड़ में से ही पैदा होता है। (क) मेरे देखते-देखते ही वहाँ भीड़ जमा हो गई। (ख) थोड़ी भी तबीयत खराब हो तो सीधे डाक्टर के पास पहुँचना चाहिए। (ग) कमल कीचड़ में ही पैदा होता है। |
|
| 22500. |
आप ईश्वर से प्रार्थना किस समय करते हैं? क्यों? |
|
Answer» मैं सुबह उठता हूँ तब और रात को सोने के समय ईश्वर की प्रार्थना करता हूँ। यह समय ही मुझे प्रार्थना के लिए अनुकूल लगता है। |
|