1.

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए -कीचड़ देखना है तो गंगा किनारे या सिंधु के किनारे और इतने से तृप्ति ना हो तो सीधे खंभात पहुँचना चाहिए। वहाँ मही नदी के मुख से आगे जहाँ तक नज़र पहुँचे वहाँ तक सर्वत्र सनातन कीचड़ ही देखने को मिलेगा। इस कीचड़ में हाथी डूब जाएँगे ऐसा कहना, न शोभा दे ऐसी अलोपक्ति करने जैसा है। पहाड़ के पहाड़ उसमें लुप्त हो जाएँगे, ऐसा कहना चाहिए। हमारा अन्न  कीचड़ में से ही पैदा होता है इसका जाग्रत भान हर एक मनुष्य को होता तो वह कभी कीचड़ का तिरस्कार न करता। (क) इस कीचड़ में हाथी भी डूब जाएँ -का क्या आशय है? इस कीचड़ में क्या-क्या डूब सकते हैं?         (ख) मही नदी के मुख के आगे स्थित कीचड़ की क्या विशेषता है?                                                  (ग) मनुष्य कीचड़ का तिरस्कार करना कब छोड़ेगा?

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(क) इस कथन का आशय है कि कीचड़ बहुत जयादा तथा गहरा होता है। इस कीचड़ में पहाड़ के पहाड़ डूब सकते हैं। 

(ख) मही नदी के मुख के आगे से जहाँ तक नजर पहुँचे वहाँ तक सर्वत्र सनातन कीचड़ ही देखने को मिलता है। 

(ग) मनुष्य को जब यह जाग्रत भान हो जाएगा कि उसका अन्न कीचड़ से ही पैदा होता है तब वह इसका तिरस्कार करना छोड़ेगा।



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