1.

‘शब्दों से तो प्रार्थना हुआ नहीं करती’ फिर प्रार्थना किस प्रकार होती है? लेखक के मत से सहमति अथवा असहमति व्यक्त करके उत्तर दीजिए।

Answer»

लेखक को मानना है कि सच्ची प्रार्थना हृदय से निकलती है। उसके लिए शब्दों की जरूरत नहीं होती। वह मूक होती है। श्रमिक के सुख-दु:ख, उसका प्रेम, उसकी पवित्रता आदि समस्त बातें उसके श्रम से जुड़ जाती हैं। सच्ची प्रार्थना ऐसा ही श्रम करने से होती है। वह मूक होती है। ईश्वर ऐसी प्रार्थना को अवश्य सुनता है तथा तत्काल सुनता है। लेखक का कथन सही है। सभी के प्रति प्रेम-भाव रखते हुए परिश्रम करके उनकी सेवा करने से ही सच्ची प्रार्थना होती है।



Discussion

No Comment Found