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अपना घर से क्या तात्पर्य है ? इसे भूलने की बात क्यों कही गई है ?

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अपना घर से तात्पर्य है – सांसारिक जीवन । अपने घर को पूरी तरह से भूल जाने का आशय है – सारे रिश्ते-नातें, भौतिक सुख-सुविधाएँ, सांसारिक मोहमाया से विरक्त हो जाना । ‘घर की माया’ अपने अराध्य तक पहुँचने के मार्ग का रोड़ा है, अवरोधक बल है । कबीर ने इसलिए तो कहा था – “जो घर जारे आपना, चले हमारे साथ” । कवयित्री के ‘कि भूल जाऊँ अपना घर पूरी तरह और कबीर के ‘जो घर जारे आपना, चले हमारे साथ’ में भाव के स्तर पर कितनी साम्यता है । बुद्ध, कबीर, महावीर और गोरखनाथ आदि महापुरुषों ने इसीलिए ‘घर की माया’ को त्याग दिया था।



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