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नीचे दी गई पंक्तियों में निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिएक. जूता हमेशा टोपी से कीमती रहा है । अब तो जूते की कीमत और बढ़ गई है और एक जूते पर पचीसों टोपियाँ न्योछावर होती हैं ।ख. तुम परदे का महत्त्व ही नहीं जानते, हम परदे पर कुर्बान हो रहे हैं ।ग. जिसे तुम घृणित समझते हो, उसकी तरफ हाथ की नहीं, पाँव की अंगुली से इशारा करते हो ? |
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Answer» क. जूता हमेशा टोपी से कीमती रहा है । अब तो जूते की कीमत और बढ़ गई है और एक जूते पर पचीसों टोपियाँ न्योछावर होती हैं । यहाँ जूते का स्थान नीचे पाँव में तथा टोपी का सिर पर (सम्माननीय) है, पर है इसके विपरीत । समाज में जिनके पास रुपया पैसा है उनका महत्त्व अधिक है । ज्ञानवान और गुणी लोगों को अमीरों के सामने कई बार झुकना पड़ता है । तभी लेखक ने कहा है कि एक जूते पर पचीसों टोपिया न्योछावर होती हैं । ख. तुम परदे का महत्त्व ही नहीं जानते, हम परदे पर कुर्बान हो रहे हैं । वास्तव में परदे के भीतर लोग अपनी कमियों को छिपा सकते हैं । प्रेमचंद आडंबर एवं दिखाये से दूर रहनेवाले व्यक्ति थे । वे जैसे बाहर से थे, वैसे ही भीतर से थे अतः उन्हें परदे की कोई आवश्यकता नहीं थी । दूसरी तरफ समाज में कुछ ऐसे भी लोग हैं जो बाह्य दिखावा करने के लिए परदे पर कुर्बान होते हैं । अर्थात् अपनी कमियों को छिपाने का प्रयास करते हैं । ग. जिसे तुम घृणित समझते हो, उसकी तरफ हाथ की नहीं, पाँव की अंगुली से इशारा करते हो ? प्रेमचंद जिस व्यक्ति या सामाजिक बुराई से घृणा करते हैं उसकी तरफ हाथ की अंगुली से इशारा नहीं करते । ऐसा करके वे अपने महत्त्व को कम नहीं करना चाहते । वैसे भी घृणित वस्तु का स्थान पैरों तले ही होता है । इसलिए वे उस ओर अपनी पैर की अंगुली से इशारा करते हैं । |
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