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ऐसे धार्मिक और दीनदार आदमियों से तो वे ला-मज़हब और नास्तिक आदमी कहीं अधिक अच्छे और ऊँचे हैं, जिनका आचरण अच्छा है, जो दूसरों के सुख-दुःख का ख्याल रखते हैं और जो मूर्खों को किसी स्वार्थ सिद्धि के लिए उकसाना बहुत बुरा समझते हैं। ईश्वर इन नास्तिक और ला-मज़हब लोगों को अधिक प्यार करेगा और वह अपने पवित्र नाम पर अपवित्र काम करने वालों से यही कहना पसंद करेगा, मुझे मानो या ना मानो, तुम्हारे मानने से ही मेरा ईश्वरत्व कायम नहीं रहेगा, दया करके मनुष्यत्व को मानो, पशु बनना छोडो और आदमी बनो।(क) कौन लोग किससे अधिक अच्छे हैं? (ख) ईश्वर किन लोगों से प्यार करेगा? (ग) 'दया करके मनुष्यत्व को मानो, पशु बनना छोडो और आदमी बनो।' इस पंक्ति का क्या अर्थ है? |
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Answer» (क) ला-मज़हबी और नास्तिक लोग जिनका आचरण अच्छा है, धार्मिक और ईमानदार लोगों से अच्छे हैं। (ख) ईश्वर उनलोगो से अधिक प्यार करेगा जिनका आचरण अच्छा है, जो दूसरों लोगों के सुख-दुःख का ख्याल करते हैं और जो मूर्खों को किसी स्वार्थ सिद्धि के लिए उकसाना बहुत बुरा समझते हैं। (ग) इस पंक्ति का अर्थ है कि हमें ईश्वर को मानने या ना मानने से पहले मनुष्यता को मानना चाहिए। अपने स्वार्थ के लिए धर्म के नाम पर उत्पात नहीं मचाना चाहिए। हिंसा रूपी पशु को त्यागकर दूसरों की भलाई का काम करना चाहिए। |
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