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लेखक ने ऐसा क्यों कहा है कि जूता हमेशा टोपी से कीमती रहा है ?

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जूता धन समृद्धि का प्रतीक है और टोपी ज्ञान का । समाज में जो लोग धनवान हैं, रुपये पैसेवाले हैं, समाज उनका मान सम्मान करता है । ज्ञानी व्यक्तियों को धनयानों से कम आँका जाता है । कई बार धनवानों के सामने ज्ञानी व्यक्तियों को भी झुकना पड़ता है । इसलिए लेखक ने कहा है कि जूता हमेशा टोपी से कीमती रहा है ।



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