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भाषा में झारखंडीपन से क्या अभिप्राय है ? |
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Answer» इसका अभिप्राय है – झारखंड की भाषा की स्वाभाविक बोली, उनका विशिष्ट उच्चारण। भाषा में झारखण्डी-पन को बचाने की बात कवयित्री इसलिए करती हैं कि भाषा संस्कृति की वाहक होती है। भाषा बचेगी तो आदिवासी अस्मिता बचेगी। भाषा आदिवासियों के गौरव, स्वाभिमान और अस्मिता का प्रतीक है। |
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