1.

भाषा में झारखंडीपन से क्या अभिप्राय है ?

Answer»

इसका अभिप्राय है – झारखंड की भाषा की स्वाभाविक बोली, उनका विशिष्ट उच्चारण। भाषा में झारखण्डी-पन को बचाने की बात कवयित्री इसलिए करती हैं कि भाषा संस्कृति की वाहक होती है। भाषा बचेगी तो आदिवासी अस्मिता बचेगी। भाषा आदिवासियों के गौरव, स्वाभिमान और अस्मिता का प्रतीक है।



Discussion

No Comment Found