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‘सभी नदियाँ पहाड़ थोड़े ही फोड़ती हैं, कोई रास्ता बदलकर घूमकर भी तो चली जाती हैं।’ |
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Answer» प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से लेखक कहना चाहते हैं कि सभी नदियाँ पहाड़ को फोड़कर रास्ता बनाते हुए आगे बढ़ जाती हैं, किन्तु कुछ नदियाँ पहाड़ को न फोड़ते हुए बगल से निकल जाती हैं अर्थात् समाज में कुछ लोग रास्ते में आनेवाली बाधाओं से डटकर मुकाबला करते हैं । किन्तु कुछ लोग सरल मार्ग अर्थात् बाधाओं को छोड़ दूसरे रास्ते से आगे बढ़ जाते हैं । |
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