This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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वित्तीय प्रवृत्तियों में से उद्भव हुआ रोकड़ प्रवाह के व्यवहार समझाइए । |
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Answer» वित्तीय प्रवृत्तियाँ इक्विटी अंश पूँजी, डिबेंचर, लोन आदि में वृद्धि/कमी के साथ संबंधित होती है । दीर्घकाल की मालिकी की पूँजी और उधार ली पूँजी में वृद्धि वित्तीय आवक वित्तीय प्रवृत्तियों का रोकड़ प्रवाह दर्शाता है । वित्तीय प्रवृत्तियों की रोकड़ आवक प्रवाह की प्रवृत्तियाँ – इक्विटी अंश प्रकाशित करना वित्तीय प्रवृत्तियों की रोकड़ जावक प्रवाह की प्रवृत्तियाँ – स्वयं के इक्विटी अंश पुनः खरीदना |
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अन्तरिम डिविडन्ड चुकाया जाये, तब ………………………..(अ) परिचालन के पत्रक में घटाते है और वित्तीय प्रवृत्तियों में जोड़ते है ।(ब) परिचालन के पत्रक में घटाते है, और विनियोग की प्रवृत्ति में जोड़ते है।(क) परिचालन के पत्रक में जोड़ते है और वित्तीय प्रवृत्तियों में से घटाते है ।(ड) उपर्युक्त एक भी नहीं । |
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Answer» (क) परिचालन के पत्रक में जोड़ते है और वित्तीय प्रवृत्तियों में से घटाते है । |
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नीचे दिये व्यवहारों में से विनियोग की प्रवृत्तियों के व्यवहार बताइए :(i) वेतन चुकाया(ii) भाड़ा चुकाया(iii) विनियोग खरीदी(iv) जमीन का विक्रय(v) मकान का क्रय(vi) विनियोग पर ब्याज मिला(vii) फर्नीचर बेचा(viii) देनदार के पास से वसूली(ix) लेनदारों को चुकाया(x) इक्विटी अंश प्रकाशित किया(xi) डिबेंचर का शोधन(xii) विनियोगों पर डिविडन्ड मिला |
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Answer» निम्न व्यवहार विनियोग प्रवृत्तियों के व्यवहार है : – विनियोग खरीदी |
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नीचे की कौन-सी बाबत का समावेश चालु गुणोत्तर गिनने के लिये नहीं होता ?(अ) देनदार(ब) स्टोक(क) लेनी हुंड़ी(ड) फर्नीचर |
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Answer» सही विकल्प है (ड) फर्नीचर |
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रोकड़ समकक्ष की …………………………….(अ) उच्च प्रवाहिता होती है ।(ब) उच्च सम्पन्नता होती है ।(क) उच्च लाभप्रदता होती है ।(ड) उपर्युक्त सभी |
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Answer» सही विकल्प है (अ) उच्च प्रवाहिता होती है । |
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साझेदारी पेढी में कम से कम कितने और अधिक से अधिक कितने साझेदार होते है ? |
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Answer» कंपनी कानून अधिनियम 2014 के नियम के अनुसार साझेदारी पेढी में कम से कम दो और अधिक से अधिक साजेदारों की महत्तम संख्या 50 तय की गई है। |
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आयकर का भुगतान और आयकर का रिफंड कौन-सी प्रवृत्ति गिनी जाती है ? क्यों ? |
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Answer» आयकर का भुगतान परिचालन प्रवृत्ति गिनी जाती है, यह जावक रोकड़ प्रवाह है । आयकर का रिफंड परिचालन प्रवृत्ति गिनी जाती है, यह आवक रोकड़ प्रवाह है । |
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चुकाया अभिगोपन कमीशन कौन-सी प्रवृत्ति में लिखा जाता है ? |
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Answer» चुकाया अभिगोपन कमीशन वित्तीय प्रवृत्ति में लिखा जाता है । |
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बैंक ओवरड्राफ्ट में वृद्धि/कमी कौन-सी प्रवृत्ति में लिखी जाती है ? |
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Answer» बैंक ओवरड्राफ्ट में वृद्धि/कमी वित्तीय प्रवृत्तियों में लिखी जाती है । |
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अगर साझेदारो करारनामा में पूँजी पर ब्याज का प्रावधान न किया गया हो, तब कितने प्रतिशत ब्याज दिया जायेगा ?(अ) 6%(ब) 9%(क) 12%(ड) कुछ भी नहीं |
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Answer» सही विकल्प है (ड) कुछ भी नहीं |
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साझेदारी करारनामा यह पेढी का क्या गिना जायेगा ? |
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Answer» साझेदारी करारनामा यह साझेदारी पेढी का प्रबंधकीय संविधान गिना जायेगा, जिसमें पेढी के प्रबंध संबंधी प्रावधानों का उल्लेख किया जाता है। |
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‘रोकड़ व्यवहार है परंतु रोकड़ प्रवाह नहीं है’ उसका उदाहरण दीजिए । |
Answer»
रोकड़ शेष और बैंक शेष दोनों रोकड़ प्रवाह पत्रक में एक ही स्थान पर ध्यान में लिये जाते है । यह व्यवहार रोकड़ के साथ संबंध रखता है परंतु रोकड़ प्रवाह नहीं गिना जाता । |
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नीचे के व्यवहारों में रोकड़ व्यवहार बढ़ेगा या घटेगा, बताइए ।(i) चालु संपत्तियाँ बढ़ती है ।(ii) चालु संपत्तियाँ घटती है ।(iii) चालु दायित्व बढ़ते है ।(iv) चालु दायित्व घटते है । |
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Answer» (i) चालु संपत्तियाँ बढ़ती है – रोकड़ घटती है । (ii) चालु संपत्तियाँ घटती है – रोकड़ बढ़ती है । (iii) चालु दायित्व बढ़ते है – रोकड़ बढ़ता है । (iv) चालु दायित्व घटते है – रोकड़ घटता है । |
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रोकड़ प्रवाह पत्रक किसे कहते हैं ? |
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Answer» जिस पत्रक में परिचालन/संचालन प्रवृत्तियाँ, विनियोग की प्रवृत्तियाँ एवं वित्तीय प्रवृत्तियों का समावेश होता हो एवं प्रत्येक प्रवृत्ति में रोकड़ आवक प्रवाह और रोकड़ जावक प्रवाह दर्शाया जाता हो उसे रोकड़ प्रवाह पत्रक कहते हैं । |
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साझेदारी करारनामा तैयार करने का उद्देश्य बताइए । |
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Answer» साझेदारी करारनामा तैयार करने का मुख्य उद्देश्य यह है कि भविष्य में साझेदारों के बीच अगर कोई मतभेद उपस्थित हो या कोई आपसी मतमतांतर उपस्थित हो तब साझेदारी करारनामा के प्रावधानों के द्वारा उसे हल किया जा सके। |
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गुणोत्तर किसे कहते हैं ? |
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Answer» गुणोत्तर संबंधी परिभाषा M. Pandey ने निम्न दी है : ‘दो हिसाबी आंकड़ों के बीच का संबंध जो गाणितिक रीति से दर्शाया हो उसे गुणोत्तर के रूप में जाना जाता है ।’ |
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गैर संचालन उपज समझाइए । |
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Answer» संचालन / परिचालन लागत ज्ञात करते समय गैर संचालन उपज जैसे : प्राप्त ब्याज, डिविडन्ड, संपत्ति, बिक्री से लाभ वगैरह को ध्यान में नहीं लिया जाता । यह तमाम उपज धंधे में होती है, परंतु संचालन लागत में इन उपजों को ध्यान में नहीं लिया जाता । |
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गुणोत्तर कब उपयोगी बनता है ? |
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Answer» जब गुणोत्तरों की किसी मानक के साथ तुलना की जाये तब उसकी उपयोगिता सिद्ध होती है । यह मानक निम्न अनुसार है :
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किन गुणोत्तरों द्वारा कार्यक्षमता मापी जाती है ? |
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Answer» निम्न दर्शाये गये गुणोत्तरों के द्वारा कार्यक्षमता मापी जाती है :
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नीचे में से किसका समावेश संचालन खर्च में नहीं होता ?(अ) संपत्ति बिक्री से नुकसान(ब) आग से नुकसान(क) चुकाया ब्याज(ड) उपर्युक्त सभी |
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Answer» सही विकल्प है (ड) उपर्युक्त सभी |
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गिने गये गुणोत्तर कब उपयोगी बनते है ? |
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Answer» व्यक्तिगत गुणोत्तर मार्गदर्शन और निर्णय लेने की आधारभूत जानकारी नहीं दे सकते । वित्तीय पत्रकों का विश्लेषण उपयोगी सिद्ध हो इस उद्देश्य से उसमें तुलना का समावेश किया जाता है । व्यक्तिगत गुणोत्तर सिर्फ परिणाम दर्शाते है, जबकि गुणोत्तरों की किसी आधार के साथ तुलना करने पर सही उपयोगी जानकारी प्राप्त होती है । इसलिये ही कहा गया है कि गिने हुए गुणोत्तरों की किसी से तुलना की जाये तब ही वह उपयोगी बनते है । |
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गुणोत्तर किस-किस स्वरूप में प्रस्तुत किया जा सकता है ? |
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Answer» गुणोत्तर निम्न स्वरूप में प्रस्तुत किया जा सकता है :
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गुणोत्तरों का कार्यानुसार वर्गीकरण समझाइए । |
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Answer» गुणोत्तरों के वर्गीकरण के दो भागों में से एक भाग कार्यानुसार वर्गीकरण का रहा हुआ है । किसी भी धंधाकीय इकाई की वित्तीय क्षमता (तंदुरस्ती) का मापन करने के लिये अथवा जानने के लिये हिसाबी पद्धति के विविध पहलुओं की जानकारी गुणोत्तर विश्लेषण के द्वारा प्राप्त की जाती है । इसमें निम्न बातों का समावेश होता है :
उपरोक्त सभी पहलू अपने नाम के अनुसार धंधाकीय इकाई की कार्य करने की कुशलता को मापते है, इसलिये इस वर्गीकरण को कार्यानुसार वर्गीकरण कहा जाता है । इस वर्गीकरण में लाभदायकता, तरलता, सम्पन्नता और कार्यक्षमता के गुणोत्तरों का समावेश होता है । ये सभी प्रकार विशिष्ट कार्यवाही के परिणाम को प्रस्तुत करते है । |
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गुणोत्तरों की प्रस्तुति किस स्वरूप में होती है ?(अ) प्रमाण के स्वरूप में(ब) प्रतिशत के स्वरूप में(क) समय के स्वरूप में(ड) उपरोक्त सभी |
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Answer» सही विकल्प है (ड) उपरोक्त सभी |
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गणोत्तरों का परम्परागत वर्गीकरण समझाइए । |
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Answer» गुणोत्तरों के वर्गीकरण के दो भागों में से एक भाग परम्परागत वर्गीकरण का है । परम्परागत वर्गीकरण में हिसाबी गुणोत्तरों की गणना वित्तीय पत्रकों के आधार पर होती है । यह वित्तीय पत्रक –
उपरोक्त दर्शाये गये व्यापार खाता और लाभ-हानि खाते के गुणोत्तरों में से अंश और हर की रकम इन खातों में से लेकर गुणोत्तरों की गणना की जाती है । इसी प्रकार पक्की तलपट के गुणोत्तरों में से दोनों रकम अंश और हर की रकम लेकर गुणोत्तरों की गणना की जाती है । मिश्र गुणोत्तर में एक रकम व्यापार खाता या लाभ-हानि खाता में से ली जाती है और एक रकम पक्की तलपट में से ली जाती है । |
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निम्नलिखित में से कौन-सा हिसाबी गुणोत्तरों के लिये सत्य है ?(अ) पेढ़ी द्वारा विकसित किये गुणोत्तरों के साथ तुलना(ब) उद्योग के गुणोत्तरों के साथ तुलना(क) प्रतिस्पर्धियों के गुणोत्तरों के साथ तुलना(ड) उपरोक्त सभी |
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Answer» सही विकल्प है (ड) उपरोक्त सभी |
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गुणोत्तर विश्लेषण की तीन मर्यादाएँ बताइए । |
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Answer» गुणोत्तर विश्लेषण की तीन मर्यादाएँ निम्न है : (i) वित्तीय पत्रकों पर आधारित : गुणोत्तर विश्लेषण यह वित्तीय पत्रकों की जानकारी पर आधारित विश्लेषण है । अगर वित्तीय पत्रक सही और योग्य जानकारी प्रस्तुत नहीं करते तो विश्लेषण सही स्थिति नहीं बताता । (ii) आधारभूत गुणोत्तरों की कमी : किसी भी गुणोत्तर की उपयोगिता तभी प्राप्त होगी जब संबंधित गणोत्तर की उसके प्रमाणित गुणोत्तर के साथ तुलना की जाये । गुणोत्तर स्वयं कोई भी विश्लेषण या अर्थघटन नहीं दर्शाते । यदि प्रमाणित गुणोत्तर तय न किया गया हो, तो गिने गये गुणोत्तर बिन-उपयोगी सिद्ध होते है । इसलिये आधारभूत गुणोत्तरों की कमी गुणोत्तर विश्लेषण की बिनउपयोगिता को दर्शाता है । (iii) भाव में परिवर्तन की असर : गुणोत्तर विश्लेषण वित्तीय पत्रक पर आधारित है । सभी वित्तीय पत्रकों को ऐतिहासिक जानकारी के आधार पर तैयार किया जाता है । इस ऐतिहासिक जानकारी में मुद्रास्थिति के प्रभाव को ध्यान में नहीं लिया जाता है । इसलिये गुणोत्तर विश्लेषण में भी भाव में परिवर्तन की असर को ध्यान में नहीं लिया जाता, यह भी इसकी एक मर्यादा है । |
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नीचे में से कौन-सी बाबत के संबंध में गुणोत्तर दिनों में ज्ञात किया जाता है ?(अ) कुल खरीदी के संबंध में(ब) उधार बिक्री के संबंध में(क) उधार खरीदी के संबंध में(ड) (ब) और (क) दोनों |
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Answer» सही विकल्प है (ड) (ब) और (क) दोनों |
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संचालन खर्चों में किस-किस का समावेश होता है ? |
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Answer» धंधा के संचालन की प्रवृत्तियों के लिये किये जानेवाले खर्च संचालन खर्च कहलाते है । |
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गुणोत्तर विश्लेषण के तीन उद्देश्य समझाइए । |
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Answer» गुणोत्तर विश्लेषण के उद्देश्य में उसका महत्त्व शामिल है । गुणोत्तर विश्लेषण की मदद से वित्तीय पत्रकों की जानकारी अधिक सरलता से, संक्षिप्तता से और वैज्ञानिक पद्धति से समझी जा सकती है । गुणोत्तर विश्लेषण के उद्देश्य निम्न है : (i) वित्तीय पत्रकों के विश्लेषण के लिये (i) वित्तीय पत्रकों के विश्लेषण के लिये : विविध वित्तीय पत्रकों में दर्शायी गयी हिसाबी जानकारी के आधार पर हिसाबी आंकड़ाकीय जानकारी मिलती है । ये तमाम आंकड़े किसी भी प्रकार का विश्लेषण नहीं दर्शाते । गुणोत्तर विश्लेषण वित्तीय पत्रकों का उपयोग करनेवालों के लिये मार्गदर्शक के रूप में काम करता है । विविध पक्षकारों के द्वारा लाभ-हानि के पत्रक और पक्की तलपट का विश्लेषण किया जाता है । यह विश्लेषण अधिक से अधिक उपयोगी बने इसके लिये गुणोत्तर विश्लेषण का उपयोग किया जाता है । (ii) हिसाबी जानकारी की असरदायक प्रस्तुती : गुणोत्तर विश्लेषण के द्वारा हिसाबी आंकड़ों को अधिक सरलता, संक्षिप्तता वैज्ञानिग ढंग से प्रस्तुत की जाती है । वित्तीय पत्रकों के तमाम अंगों के एक-दूसरे के साथ के विशिष्ट संबंधों के अर्थ को करने का कार्य भी गुणोत्तर विश्लेषण द्वारा किया जाता है । गुणोत्तर विश्लेषण के द्वारा दो एकसमान मदों या अंगों के तथा उनसे प्राप्त परिणाम की जानकारी आसानी से उपयोगकर्ता की समझ में आये उस प्रकार प्रस्तुत करता है । (iii) इकाई की लाभदायकता की स्थिति जानने के लिये : प्रत्येक इकाई लाभ कमाने का उद्देश्य रखती है । गुणोत्तर विश्लेषण मदद से इकाई की लाभदायकता का मापन विविध रीति से किया जाता है । लाभदायकता का मापन सकल लाभ का गुणोत्तर, शुद्ध लाभ का गुणोत्तर, लगाई गई (विनियोजित) पूँजी पर मुआवजा का दर, इक्विटी पूँजी पर मुआवजे का दर के द्वारा किया जाता है । |
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निम्नलिखित में से किन गुणोत्तरों का समावेश परम्परागत वर्गीकरण में होता है ?(अ) मिश्र गुणोत्तरों का(ब) तरलता के गुणोत्तरों का(क) लाभदायकता के गुणोत्तरों का(ड) सम्पन्नता के गुणोत्तरों का |
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Answer» सही विकल्प है (अ) मिश्र गुणोत्तरों का |
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संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए:लवाजम (शुल्क) (Subscription or Membership Fees) |
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Answer» लवाजम (शुल्क) (Subscription or Membership Fees) : गैरव्यापारिक संस्थाओं के मुख्य आय के साधन के रूप में सदस्यों से प्राप्त फीस को गिना जाता है, जिसे शुल्क के रूप में जाना जाता है । संस्था के सदस्य अपना सदस्य पद चालू रखने के बदले प्रति वर्ष संस्था को नियमित रूप से, निश्चित की गई सभ्य फीस देते है । यह आय राजस्व आय के रूप में गिनकर उसे उपज-खर्च खाते के जमा पक्ष में दर्शाया जाता है । |
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व्यापारी लेना की गणना करते समय देनदारों में से डूबत ऋण अनामत घटायी जाती है ? |
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Answer» व्यापारी लेना की गणना करते समय देनदारों में से डूबत ऋण अनामत घटायी नहीं जाती है । |
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निम्नलिखित में से कौन-सा गुणोत्तर नफाकारकता का उपज आधारित गुणोत्तर है ?(अ) सकल लाभ का गुणोत्तर(ब) शुद्ध लाभ का गुणोत्तर(क) परिचालन गुणोत्तर(ड) (अ) और (ब) दोनों |
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Answer» सही विकल्प है (ड) (अ) और (ब) दोनों |
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धंधे में अनामत क्यों रखा जाता है ? |
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Answer» अनामत के द्वारा भविष्य में उपस्थित होनेवाले आकस्मिक नुकसान या खर्च को चुकाने का उद्देश्य रहता है । इसके अलावा भविष्य में कोई प्रोविडन्ट फंड़ जैसी चुकाने योग्य जिम्मेदारी हो तब अनामत के द्वारा उसे पूरा किया जा सकता है । धंधे की आर्थिक स्थिति को समृद्ध बनाने के लिये भी अनामत रखना आवश्यक है । |
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प्रावधान का महत्त्व स्पष्ट कीजिए । |
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Answer» प्रावधान का महत्त्व निम्न है :
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गुप्त अनामत अर्थात् क्या ? |
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Answer» व्यवसाय की आर्थिक स्थिति को समृद्ध बनाने के लिये लाभ-हानि वितरण खाते में दर्शाये बिना तैयार किये जानेवाले अनामत को गुप्त अनामत कहते हैं । अधिनियमानुसार कंपनी गुप्त अनामत नहीं रख्न सकती है । |
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प्रावधान के चार उदाहरण दीजिए । |
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Answer» प्रावधान के उदाहरण निम्न है :
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…………………………. शेष का उपयोग कंपनी सामान्य रूप से डिविडेन्ड बाँटने में नहीं कर सकती ।(अ) सामान्य अनामत(ब) प्रावधान(क) अनामत फंड़ या कोष(ड) पूँजी अनामत |
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Answer» सही विकल्प है (ड) पूँजी अनामत |
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निम्न दर्शायी गई रकम लाभ में से वितरित की गई है, यह अनामत है या प्रावधान बताइए :(i) संदिग्ध ऋण अनामत(ii) डिबेंचर वापसी निधि(iii) घिसाई फंड़(iv) कर्मचारी दुर्घटना मुआवजा फंड़(v) देनदार बट्टा अनामत(vi) डिविडेन्ड समतुला कोष(vii) पूँजी अनामत(viii) कर्मचारी लाभ भाग फंड़(ix) सामान्य अनामत(x) पूँजी वापसी अनामत |
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Answer» (1) संदिग्ध ऋण अनामत यह प्रावधान है, कारण कि भविष्य में उपस्थित होनेवाले संभवित नुकसान के सामने की एक व्यवस्था है । इसे लाभ-हानि खाते से तैयार किया जाता है । (2) डिबेन्चर वापसी निधि यह अनामत है, कारण कि इसकी राशि तय होती है, एवं यह एक दायित्व है । इसे वितरण के रूप में गिनकर लाभ-हानि वितरण खाते वितरित किया जाता है । (3) घिसाई फंड़ यह निश्चित उद्देश्य से तैयार किया जाता है, इसलिये यह प्रावधान है । इसे लाभ-हानि खाते में तैयार किया जाता है । (4) कर्मचारी दुर्घटना मुआवजा फंड़ यह निश्चित उद्देश्य के लिये उपस्थित किया गया अनामत है, इसलिये यह प्रावधान है । यह भविष्य में आनेवाली अनिश्चित खर्च के सामने की व्यवस्था है । इसे लाभ-हानि खाते से उपस्थित किया जाता है । (5) देनदार बट्टा अनामत यह प्रावधान है, कारण कि भविष्य में उपस्थित होनेवाले संभवित खर्च के सामने की व्यवस्था है । देनदार पर बट्टा अनामत यह लाभ-हानि खाते से उपस्थित किया जाता है । (6) डिविडेन्ड समतुला कोष यह लाभ में से अलग रखा हुआ भाग है, यह अनामत है । इसे लाभ-हानि वितरण खाते से उपस्थित किया जाता है । (7) पूँजी अनामत यह अनामत है । इसे पूँजी लाभ में से उपस्थित किया जाता है । आवश्यकता पड़ने पर लाभ-हानि वितरण खाते से अधिक रकम दी जाती है । (8) कर्मचारी लाभ भाग फंड़ यह प्रावधान है । यह एक विशेष उद्देश्य से उपस्थित किया जाता है । (9) सामान्य अनामत यह लाभ में से अलग रखा हुआ भाग है, यह अनामत है । इसे लाभ-हानि वितरण खाते से उपस्थित किया जाता है । (10) पूँजी वापसी अनामत यह अनामत है । प्रेफरन्स शेयर वापस करने के लिये उपस्थित किया गया अनामत है । इसे लाभ-हानि वितरण खाते से उपस्थित किया जाता है । |
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पूँजी लाभ के चार उदाहरण दीजिए । |
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Answer» पूँजी लाभ के उदाहरण निम्न है :
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प्रावधान …………………………. खाता में से तैयार किया जाता है ।(अ) लाभ-हानि खाता(ब) लाभ-हानि वितरण खाता(क) व्यापार खाता(ड) पूँजी खाता |
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Answer» सही विकल्प है (अ) लाभ-हानि खाता |
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………………………. खाता अनामत का विनियोग व्यवसाय के बाहर किया गया है, यह दर्शाता है ।(अ) सामान्य अनामत(ब) प्रावधान(क) अनामत फंड़ या कोष(ड) पूँजी अनामत |
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Answer» सही विकल्प है (क) अनामत फंड़ या कोष |
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स्थिर संपत्ति के विक्रय की हानि अपलिखित करने के लिये किस अनामत का उपयोग किया जाता है ? |
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Answer» स्थिर संपत्ति के विक्रय की हानि अपलिखित करने के लिये पूँजी अनामत का उपयोग किया जाता है । |
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अनामत का अर्थ दीजिए । |
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Answer» भविष्य में निश्चित और अनिश्चित खर्च, जिम्मेदारी या नुकसान को पूरा करने के लिये, व्यवसाय की समृद्धता बढ़ाने के लिये लाभ में से अलग रखी गयी राशि अनामत कहलाती है । अनामत यह लाभ में से या एकत्रित लाभ के वितरण में से रखी हुई होने से इसे लाभ-हानि वितरण खाते से बनाया जाता है । इस प्रकार से बनाई गई अनामत निश्चित उद्देश्य के लिये और व्यवसाय की आर्थिक मजबूती को बनाये रखने के लिये होती है । जैसे : डिविडन्ड समतुला फंड, कर्मचारी अकस्मात मुआवजा फंड़, सामान्य अनामत, डिबेन्चर वापसी निधि, विनियोग वधघट अनामत, पूँजी वापसी अनामत वगैरह । |
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प्रावधान के लक्षण बताइए । |
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Answer» प्रावधान के लक्षण निम्न है :
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अनामत फंड़ (कोष) अर्थात् क्या ? |
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Answer» अनामत फंड़ (Reserve Fund) : सामान्य अनामत की राशि का उपयोग व्यवसाय के बाहरी विनियोग में किया जाये उसे अनामत फंड के रूप में जाना जाता है । ऐसे विनियोग आसानी से रोकड़ में रूपांतरित हो जाये ऐसी प्रतिभूतियों में किया जाता है । |
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धंधा में अनामत का क्या महत्त्व है ? |
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Answer» धंधा में अनामत का महत्त्व निम्न है :
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प्रावधान का महत्त्व क्या है ? |
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Answer» व्यवसाय में प्रावधान का अपना ही महत्त्व रहा हुआ है । प्रावधान यह व्यवसाय के संभवित नुकसान या खर्च को पूरा करने की पूर्वतैयारीके रूप में होता है, जिससे व्यवसाय सरलता से चल सके । उसके महत्त्व निम्नानुसार बताये जा सकते हैं :
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प्रावधान अर्थात् क्या ? |
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Answer» संपत्ति की किंमत में संभवित कमी जैसे खर्च या नुकसान के लिये अलग से रखी गयी रकम प्रावधान कहलाती है । इसके अलावा जिसकी राशि निश्चित न हो सके ऐसी निश्चित जिम्मेदारी का भुगतान करने के लिये पहले से लाभ में से अलग रखी गयी रकम प्रावधान के रूप में जानी जाती है । जैसे : घिसाई के लिये प्रावधान या घिसाई फंड़, संदिग्ध ऋण प्रावधान या डूबत ऋण अनामत, दावे के लिये प्रावधान, डिबेंचर वापसी अनामत, आयकर के लिये प्रावधान वगैरह । ऐसा प्रावधान व्यवसाय के लाभ-हानि खाते से तैयार किया जाता है । यहाँ एक बात यह भी ध्यान में रखनी चाहिए कि जब अनामत जिस उद्देश्य के लिये बनाया गया हो वह उद्देश्य पूरा होने पर अनामत का शेष सामान्य अनामत खाते ले जाया जाता है । |
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