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गुणोत्तर विश्लेषण के तीन उद्देश्य समझाइए ।

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गुणोत्तर विश्लेषण के उद्देश्य में उसका महत्त्व शामिल है । गुणोत्तर विश्लेषण की मदद से वित्तीय पत्रकों की जानकारी अधिक सरलता से, संक्षिप्तता से और वैज्ञानिक पद्धति से समझी जा सकती है ।

गुणोत्तर विश्लेषण के उद्देश्य निम्न है :

(i) वित्तीय पत्रकों के विश्लेषण के लिये
(ii) हिसाबी माहिती की सरल प्रस्तुती के लिये
(iii) इकाई की लाभदायकता की स्थिति जानने के लिये
(iv) इकाई की तरलता की स्थिति जानने के लिये
(v) इकाई की दीर्घकाल की संपन्नता जानने के लिये
(vi) इकाई की कार्यशैली की कार्यक्षमता की स्थिति जानने के लिये
(vii) अनुमान करने के लिये
(viii) कमजोर पहलू की जानकारी के लिये।
(ix) आंतरपेढ़ी और आंतरविभागों की तुलना के लिये

(i) वित्तीय पत्रकों के विश्लेषण के लिये : विविध वित्तीय पत्रकों में दर्शायी गयी हिसाबी जानकारी के आधार पर हिसाबी आंकड़ाकीय जानकारी मिलती है । ये तमाम आंकड़े किसी भी प्रकार का विश्लेषण नहीं दर्शाते । गुणोत्तर विश्लेषण वित्तीय पत्रकों का उपयोग करनेवालों के लिये मार्गदर्शक के रूप में काम करता है । विविध पक्षकारों के द्वारा लाभ-हानि के पत्रक और पक्की तलपट का विश्लेषण किया जाता है । यह विश्लेषण अधिक से अधिक उपयोगी बने इसके लिये गुणोत्तर विश्लेषण का उपयोग किया जाता है ।

(ii) हिसाबी जानकारी की असरदायक प्रस्तुती : गुणोत्तर विश्लेषण के द्वारा हिसाबी आंकड़ों को अधिक सरलता, संक्षिप्तता वैज्ञानिग ढंग से प्रस्तुत की जाती है । वित्तीय पत्रकों के तमाम अंगों के एक-दूसरे के साथ के विशिष्ट संबंधों के अर्थ को करने का कार्य भी गुणोत्तर विश्लेषण द्वारा किया जाता है । गुणोत्तर विश्लेषण के द्वारा दो एकसमान मदों या अंगों के तथा उनसे प्राप्त परिणाम की जानकारी आसानी से उपयोगकर्ता की समझ में आये उस प्रकार प्रस्तुत करता है ।

(iii) इकाई की लाभदायकता की स्थिति जानने के लिये : प्रत्येक इकाई लाभ कमाने का उद्देश्य रखती है । गुणोत्तर विश्लेषण मदद से इकाई की लाभदायकता का मापन विविध रीति से किया जाता है । लाभदायकता का मापन सकल लाभ का गुणोत्तर, शुद्ध लाभ का गुणोत्तर, लगाई गई (विनियोजित) पूँजी पर मुआवजा का दर, इक्विटी पूँजी पर मुआवजे का दर के द्वारा किया जाता है ।



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