This section includes InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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स्मृति के प्रमुख तत्त्व कौन-कौन से हैं? |
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Answer» स्मृति के प्रमुख तत्त्व हैं-सीखना, धारणा, पुन:स्मरण या प्रत्यास्मरण तथा प्रत्यभिज्ञा या पहचान। |
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| 32802. |
शाब्दिक सीखना का अर्थ स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» सुन कर तथा बोलकर भाषा के माध्यम से सीखने की सम्पन्न होने वाली प्रक्रिया को ‘शाब्दिक सीखना’ कहते हैं। मनुष्यों में अधिकांश सीखना ‘शाब्दिक सीखना ही होता है। |
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| 32803. |
प्राचीन अनुबन्धन के चार अवयवों के नाम लिखिए। |
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Answer» प्राचीन अनुबन्धन के चार अवयव इस प्रकार हैं- ⦁ प्रबल ‘प्रेरक का विद्यमान होना ⦁ विभिन्न उद्दीपनों में समय का सम्बन्ध ⦁ उद्दीपन अनुक्रिया का बार-बार दोहराना तथा ⦁ ध्यान बँटाने वाले उद्दीपनों का अभाव। |
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| 32804. |
परिपक्वता तथा सीखने में क्या सम्बन्ध |
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Answer» हमें ज्ञात है कि सीखना, व्यवहार परिवर्तन या व्यवहार अर्जन की एक प्रक्रिया है। किसी व्यक्ति का व्यवहार परिवर्तन या तो परिपक्वता के कारण होता है या किसी नयी बात को ग्रहण करने के कारण। परिवर्तन की प्रक्रिया में नयी-नयी क्रियाएँ और व्यवहार प्रदर्शित तथा विकसित होते रहते हैं। परिपक्वता शारीरिक विकास की प्रक्रिया है, जिसके अन्तर्गत बढ़ती हुई आयु के साथ, शरीर व स्नायुमण्डल का विकास सीखने की सामर्थ्य को जन्म देता है। स्पष्टतः सीखने के परिणामस्वरूप व्यक्ति के व्यवहार में परिवर्तन आता है। परिपक्वता की प्रक्रिया सीखने से पूर्व की स्थिति है तथा यह सीखने का आधार है। परिपक्वता के अभाव में किसी क्रिया का सीखना न केवल दुष्कर पेतु असम्भव है। वस्तुत: परिपक्वता किसी व्यवहार को अर्जित करने (सीखने) की एक पूर्व आवश्यकता है। मनोवैज्ञानिक अध्ययनों से ज्ञात होता है कि मानव के विकास की प्रक्रिया में परिपक्वता और सीखना दोनों की सशक्त भूमिका है। यदि परिपक्वता के अभाव में सीखना सम्भव नहीं है तो सीखने के अभाव में व्यक्ति की परिपक्वता भी निरर्थक है। समुचित परिपक्वता ग्रहण कर यदि कोई मनुष्य व्यक्तिगत या सामाजिक जीवन के लिए उपयोगी व्यवहार या क्रियाएँ सीखता है तो इसे अत्यन्त महत्त्वपूर्ण समझा जाएगा। इस भाँति परिपक्वता और सीखने में गहरी सम्बन्ध है। |
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| 32805. |
सीखने की सक्रिय तथा निष्क्रिय विधि की तुलना कीजिए। |
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Answer» सीखने के लिए अपनायी जाने वाली दो विधियाँ हैं क्रमशः सीखने की सक्रिय विधि तथा सीखने की निष्क्रिय विधि। इन दोनों विधियों का सापेक्ष महत्त्व है। सक्रिय तथा निष्क्रिय विधि द्वारा सीखने के तुलनात्मक अध्ययन के दौरान गेट्स (Gates) नामक मनोवैज्ञानिक ने निष्कर्ष निकाला कि सक्रिय विधि, निष्क्रिय विधि से तीन बातों में अधिक अच्छी है- ⦁ सक्रिय विधि द्वारा सीखने में व्यक्ति की अभिप्रेरणा तथा अभिरुचि अधिक होती है। ⦁ व्यक्ति को सीखे गये कार्य के परिणाम का ज्ञान होता रहता है जिससे उसे यह बोध होता है। कि अगले प्रयास में पाठ के किस अंश पर ज्यादा बल दिया जाना चाहिए। ⦁ सक्रिय सीखने की शुरुआत कार्य को सीखने के प्रारम्भ से ही होनी चाहिए, क्योंकि इससे अधिगम अधिक प्रबल तथा दक्ष होता है। अध्ययन से पता चलता है कि सक्रिय विधि उस समय अधिक उपयोगी है जबकि बाह्य वातावरण में ध्यान को विचलित करने वाले कारक उपस्थित होते हैं। निष्क्रिय विधि तब अधिक उपयोगी है जबकि अधिगम सामग्री कठिन हो और उसके लिए अधिक ध्यान की आवश्यकता हो। |
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| 32806. |
अच्छी स्मृति की मुख्य विशेषताओं या लक्षणों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» अच्छी स्मृति की मुख्य विशेषताएँ या लक्षण निम्नवत्: हैं– ⦁ तीव्र गति से सीखना ⦁ स्थायी धारण शक्ति ⦁ व्यर्थ बातों का विस्मरण ⦁ यथार्थ पुन:स्मरण ⦁ स्पष्ट एवं शीघ्र पहचान तथा ⦁ उपादेयता |
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| 32807. |
अनुकरण द्वारा सीखने का उदाहरण है(क) परीक्षा में नकल करना ।(ख) किसी नेता के चलने व बोलने के ढंग को अपनाना(ग) भीड़ में जाकर क्रुद्ध होना(घ) परिवार के सदस्यों को अच्छी-अच्छी बातें सिखाना |
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Answer» (ख) किसी नेता के चलने व बोलने के ढंग को अपनाना |
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| 32808. |
अनुकरण के मुख्य प्रकारों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» सीखने की एक मुख्य विधि अनुकरण है। अनुकरण के विभिन्न प्रकार हैं जिनका सामान्य परिचय निम्नलिखित है| (1) सप्रयास अनुकरण- जब हम किसी व्यक्ति-विशेष के क्रियाकलापों की यत्नपूर्वक तथा जानबूझकर नकल करते हैं तो इसे सप्रयास अनुकरण कहते हैं। (2) सहज अनुकरण- इस प्रकार के अनुकरण में कोई विशेष प्रयास नहीं करना पड़ता; बल्कि यह स्वतः ही हो जाता है। विद्वानों का मत है कि अधिक संवेदनशील व्यक्ति ही सहज अनुकरण करने में समर्थ होते हैं। आमतौर पर, हँसी के माहौल में एक व्यक्ति दूसरों के साथ सम्मिलित होकर स्वत: ही हँसने लगता है और शोकाकुल लोगों के मध्य व्यक्ति स्वतः ही शोकमग्न भी हो जाता है। (3) विचारात्मक अनुकरण- विचारात्मक अनुकरण का सम्बन्ध व्यक्ति-विशेष के विचारों की नकल से है। | (4) विचाररहित अनुकरण- जिसे अनुकरण की प्रक्रिया में किसी विचार का अनुगमन न किया जाता हो और यह विचारविहीन अवस्था से उत्पन्न होता हो, उसे विचाररहित अनुकरण का नाम दिया जाएगा (5) निरर्थक अनुकरण- निरर्थक क्रियाओं, जिनका कुछ भी अभिप्राय न हो, की नकल निरर्थक अनुकरण है। इसे प्रायः बच्चों द्वारा अपनाया जाता है। |
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| 32809. |
किसी कार्य को करने के लिए सर्वाधिक अनिवार्य कारक को क्या कहते हैं |
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Answer» किसी कार्य को करने के लिए सर्वाधिक अनिवार्य कारक को प्रेरणा कहते हैं। |
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विस्मरण से क्या आशय है? |
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Answer» किसी याद किये गये या सीखे गये विषय के चेतना के स्तर पर न आ पाने की दशा को विस्मरण कहते हैं। |
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साहचर्य के गौण नियम कौन-कौन से हैं? |
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Answer» साहचर्य के गौण नियम हैं- ⦁ प्राथमिकता का नियम ⦁ नवीनता का नियम ⦁ पुनरावृत्ति का नियम ⦁ स्पष्टता का नियम तथा ⦁ प्रबलता का नियम। |
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| 32812. |
प्रेरणाओं का हमारे जीवन में महत्त्व बताइए।यामानव जीवन में अभिप्रेरणा का क्या महत्त्व होता है? |
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Answer» प्रेरणा (प्रेरक) का महत्व(Importance of Motivation) मानव-व्यवहार तथा अनुभवों में प्रेरकों की भूमिका(Role of Motives in the Human Behaviour and Experiences) (1) व्यवहार-प्रदर्शन एवं प्रेरक – मनुष्य के प्रत्येक व्यवहार के पीछे प्रेरणा का प्रत्यय निहित रहता है। कोई मनुष्य एक विशेष व्यवहार क्यों प्रदर्शित करता है-यह विषय प्रारम्भ से ही जिज्ञासा, चिन्तन तथा विवाद का रहा है उदाहरण के लिए कोई व्यक्ति अपना क्या जीवन लक्ष्य निर्धारित करता है। वह अन्य व्यक्ति या वस्तुओं में रुचि क्यों लेता है, वह किन वस्तुओं का संग्रह करना पसन्द करता है और क्यों, वह उपलब्धि के लिए क्यों प्रयासशील रहता है, उसकी आकांक्षा का स्तर क्या है, उसकी विशिष्ट आदतें क्या हैं और ये किस भाँति निर्मित हुईं?–ये सभी प्रश्न ‘मनोवैज्ञानिकों के लिए महत्त्वपूर्ण रहे हैं, जिनका अध्ययन प्रेरणा के अन्तर्गत किया जाता है। निष्कर्षत: प्रेरक मानव-जीवन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनका व्यवहार एवं अनुभवों में विशिष्ट स्थान है। |
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| 32813. |
प्रत्यभिज्ञा को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक कौन-कौन से हैं? |
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Answer» प्रत्यभिज्ञा को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक निम्नवत् हैं ⦁ मानसिक तत्परता तथा |
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पुरस्कार प्रदान करने के चार मुख्य उद्देश्यों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» पुरस्कार प्रदान करने के मुख्य उद्देश्य हैं ⦁ अनुशासन के प्रति आस्था |
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प्रबल प्रेरणा की दशा में सीखने की प्रक्रिया पर क्या प्रभाव पड़ता है? |
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Answer» प्रबले प्रेरणा की दशा में सीखने की प्रक्रिया शीघ्रता से तथा सुचारु ढंग से सम्पन्न होती है। |
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| 32816. |
सीखने एवं शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरणा के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» सीखने में प्रेरणा का महत्त्व(Importance of Motivation in Learning) (1) लक्ष्यों की स्पष्टता – प्रेरणाओं के लक्ष्य एवं आदर्श स्पष्ट होने चाहिए। लक्ष्यों की स्पष्टता से प्रेरणाओं की तीव्रता में वृद्धि होती है जिसके परिणामस्वरूप प्रेरित विद्यार्थी जल्दी सीख लेता है। यदि समय-समय पर विद्यार्थियों को लक्ष्य प्राप्ति हेतु उनके प्रयासों की प्रगति बतायी जाये तो वे उत्साहित होकर शीघ्र और अधिक सीखते हैं। |
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| 32817. |
प्रेरकों का वर्गीकरण प्रस्तुत कीजिए। |
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Answer» विभिन्न विद्वानों ने प्रेरकों का वर्गीकरण निम्नवत् किया है 1. थॉमसन (Thomson) के अनुसार 2. गैरेट के अनुसार 3. मैस्लो (Maslow) के अनुसार प्रेरकों के मुख्य प्रकारों का संक्षिप्त परिचय निम्नलिखित हैं |
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प्रेरणा की अवधारणा के स्पष्टीकरण के लिए विभिन्न दृष्टिकोणों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» प्रेरणा के सम्बन्ध में कुछ दृष्टिकोण (1) मूलप्रवृत्तियाँ – प्रेरणा के विषय में वैज्ञानिक अध्ययन प्रसिद्ध विद्वान मैक्डूगल से शुरू हुए। मैक्डूगल ने प्रेरित व्यवहार का कारण मूलप्रवृत्तियाँ बताया है। बाद में, मूलप्रवृत्तियों के दृष्टिकोण की कूओ, लारमैन तथा लैथ्ले आदि मनोवैज्ञानिकों ने प्रयोगों द्वारा जंच की और पाया कि प्रेरित व्यवहार मूलप्रवृत्तियों द्वारा उत्पन्न नहीं होता। (2) वातावरण के अनुभव – कुओ ने अभिप्रेरित व्यवहार के सम्बन्ध में एक प्रयोग किया। उसने कुछ बिल्लियों को चूहों के बच्चों के साथ पाला और चार महीने बाद पाया कि बिल्लियों ने चूहों के साथ न तो लगाव ही दिखाया और न ही उन पर हमला किया। इन्हीं बिल्ल्यिों को फिर से ऐसी बिल्लियों के साथ रखा गया जो चूहों का शिकार करती थीं। इनमें से 6 बिल्लियाँ साथ में पले हुए 17 चूहों को मारकर खा गयीं। कूओ के इस प्रयोग को निष्कर्ष था कि प्राणी का व्यवहार मूलप्रवृत्तियों से नहीं, प्रारम्भिक वातावरण के अनुभवों से प्रेरित होता है। (3) आवश्यकता – प्रत्येक प्राणी की कुछ-न-कुछ आवश्यकताएँ होती हैं जिनकी सन्तुष्टि या असन्तुष्टि से व्यक्ति का व्यवहार प्रभावित होता है। बोरिंग के अनुसार, “आवश्यकता प्राणी के शरीर की कोई जरूरत या अभाव है।” जब प्राणी के शरीर में किसी चीज की कमी या अति की अवस्था पैदा हो जाती है तो उसे ‘आवश्यकता (Need) की संज्ञा दी जाती है। आवश्यकता की वजह से शारीरिक तनाव या असन्तुलन पैदा होता है जिसके फलस्वरूप ऐसा व्यवहार उत्पन्न करने की प्रवृत्ति होती है, जिससे तनाव असन्तुलन समाप्त हो जाता है। उदाहरणार्थ–‘प्यास’ शरीर की कोशिकाओं में पानी की कमी है, जबकि मलमूत्र त्याग’ शरीर में अनावश्यक पदार्थों का ‘अति में जमा हो जाना है। इस भाति, दोनों ही दशाओं में ‘कमी’ तथा ‘अति’ का बोध तनाव/असन्तुलन को जन्म देता है। प्रेरणा से सम्बन्धित इस दृष्टिकोण में मनोवैज्ञानिकों ने आवश्यकताओं के दो प्रकार बताये हैं – (4) अन्तर्वोद-साटेंन के अनुसार-“अन्तर्नाद ऐसे तनाव या क्रियाशीलता की अवस्था को कहा जाता है जो किसी आवश्यकता द्वारा उत्पन्न होती है। मनोवैज्ञानिक अध्ययनों से पता चलता है। कि अभिप्रेरित व्यवहार का कारण अन्तर्नाद (Drive) है। अन्तर्नाद की उत्पत्ति किसी-न-किसी शारीरिक आवश्यकता से होती है। आवश्यकताओं की तरह से अन्तर्नाद भी शारीरिक व मनोवैज्ञानिक है। शारीरिक आवश्यकताओं से उत्पन्नअन्तर्वोद शारीरिक अन्तर्नाद कहलाते हैं, जबकि मानसिक आवश्यकताओं से उत्पन्न अन्तर्नाद मनोवैज्ञानिक अन्तनोंद कहे जाते हैं। भूख की अवस्था में भूख अन्तर्नाद, प्यास लगने पर प्यास अन्तर्नाद तथा काम (Sex) की इच्छा होने पर काम अन्तनोंद पैदा होता है। हल के मतानुसार, “अन्तर्नाद व्यवहार को ऊर्जा प्रदान करता है, किन्तु दिशा नहीं।” बोरिंग के अनुसार, अन्तर्वोद शरीर की एक आन्तरिक क्रिया या दशा है जो एक विशेष प्रकार के व्यवहार दे लिए प्रेरणा प्रदान करती है। (5) प्रलोभन या प्रोत्साहन – प्रलोभन या प्रोत्साहन (Incentive) उस लक्ष्य को कहा जाता है। जिसकी ओर अभिप्रेरित व्यवहार अग्रसर होता है। यह वातावरण की वह वस्तु है जो व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित करती है तथा जिसकी प्राप्ति से उसकी आवश्यकता की पूर्ति तथा अन्तनोंद में कमी होती है। उदाहरणार्थ-भूखे व्यक्ति के लिए भोजन एक प्रलोभन या प्रोत्साहन है, क्योंकि यह भूखे व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित करता है। भोजन के उपरान्त व्यक्ति की भूख की आवश्यकता कुछ देर के लिए समाप्त हो जाती है और भूख का अन्तर्वोद भी कम हो जाता है। (6) प्रेरणा के मुख्य अंग: आवश्यकता, अन्तर्वोद तथा प्रलोभन – आवश्यकता, अन्तर्वोद तथा प्रलोभन (या प्रोत्साहन) ये तीनों ही प्रेरणा के मुख्य अंग हैं जो आपस में गहन सम्बन्ध रखते हैं। प्रेरणा का प्रारम्भ आवश्यकता से होता है और यह प्रलोभन की प्राप्ति तक चलता है। वस्तुत: आवश्यकता एवं अन्तनोंद प्राणी की आन्तरिक अवस्थाएँ या तत्परताएँ हैं, जबकि प्रलोभन बाह्य वातावरण में उपस्थित कोई चीज या उद्दीपक है। प्रेरणा उत्पन्न होने की प्रक्रिया में पहले आवश्यकता जन्म लेती है, उसके बाद अन्तर्नाद उत्पन्न होता है। ये दोनों ही व्यक्ति के भीतर की दशाएँ हैं। अन्तर्नाद की अवस्था में व्यक्ति में तनाव तथा क्रियाशीलता दृष्टिगोचर होती है जिसके परिणामतः वह एक निश्चित दिशा में प्रलोभन की प्राप्ति के लिए कुछ व्यवहार प्रदर्शित करता है। यदि ‘भूख’ प्रेरणा का उदाहरण है तो इसकी प्रक्रिया में भूख की आवश्यकता, भूख का अन्तनोंद तथा भोजन की प्राप्ति तीनों ही सम्मिलित हैं। इस भाँति, प्रेरणा के सम्बन्ध में उपर्युक्त वर्णित दृष्टिकोण प्रस्तुत हुए हैं। मैक्डूगल के मूल प्रवृत्तियों से सम्बन्धुित दृष्टिकोण को महत्त्वपूर्ण नहीं माना जाता। इसके विरुद्ध प्रारम्भिक वातावरण के अनुभवों का दृष्टिकोण अभिव्यक्त हुआ है। प्रेरणा के सम्बन्ध में आधुनिक दृष्टिकोण; आवश्यकता, अन्तर्नाद तथा प्रलोभन के पारस्परिक सम्बन्ध तथा अन्त:क्रिया पर आधारित है और यही प्रेरणा के प्रत्यय की सन्तोषजनक व्याख्या प्रस्तुत करता है। |
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प्रेरणायुक्त व्यवहार के मुख्य लक्षणों अथवा विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» ⦁ शक्ति का अतिरिक्त संचालन |
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व्यक्ति (प्राणी) के जीवन में प्रेरणा का महत्त्व है(क) व्यक्ति के व्यवहार का परिचालन होता है(ख) सम्बन्धित कार्य शीघ्र तथा अच्छे रूप में सम्पन्न होता है।(ग) विषय को शीघ्र सीख लिया जाता है।(घ) उपर्युक्त सभी महत्त्व |
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Answer» सही विकल्प है (घ) उपर्युक्त सभी महत्त्व |
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| 32821. |
प्रेरणा (Motivation) से आप क्या समझते हैं? प्रेरणायुक्त व्यवहार के मुख्य लक्षणों को भी स्पष्ट कीजिए।याअभिप्रेरित व्यवहार के कोई दो लक्षण बताइए। |
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Answer» मनोविज्ञान मनुष्य के व्यवहार का वैज्ञानिक अध्ययन है और मनुष्य का व्यवहार प्राय: दो प्रकार की शक्तियों द्वारा संचालित होता है—बाह्य शक्तियाँ तथा आन्तरिक शक्तियाँ। मनुष्य के अधिकांश व्यवहार तो बाह्य वातावरण से प्राप्त उत्तेजनाओं के कारण उत्पन्न होते हैं, जब कि कुछ अन्य व्यवहार आन्तरिक शक्तियों द्वारा संचालित होते हैं। व्यवहारों को संचालित करने वाली ये आन्तरिक शक्तियाँ तब तक निरन्तर क्रियाशील रहती हैं जब तक कि व्यवहार से सम्बन्धित लक्ष्य सिद्ध नहीं हो जाता। इसके अतिरिक्त ये शक्तियाँ उस समय तक समाप्त नहीं होतीं, जिस समय तक प्राणी क्षीण अवस्था को प्राप्त होकर असहाय नहीं हो जाता अथवा मर ही नहीं जाता है। स्पष्टतः किसी प्राणी द्वारा विशेष प्रकार की क्रिया या व्यवहार करने को बाध्य करने वाली ये आन्तरिक शक्तियाँ ही प्रेरणा (Motivation) कहलाती हैं। प्रेरणा का अर्थ एवं परिभाषा(Meaning and Definition of Motivation) उपर्युक्त परिभाषाओं से स्पष्ट हो जाता है कि प्रेरणा (या प्रेरक) एक आन्तरिक अवस्था है जो प्राणी में व्यवहार या क्रिया को जन्म देती है। प्राणी में यह व्यवहार या क्रियाशीलता किसी लक्ष्य की पूर्ति तक बनी रहती है, किन्तु लक्ष्यपूर्ति के साथ-साथ प्रेरक शक्तियाँ क्षीण पड़ने लगती हैं। प्रेरणायुक्त व्यवहार के लक्षण(Characteristics of Motivated Behaviour) (1) अधिक शक्ति का संचालन – प्रेरणायुक्त व्यवहार का प्रथम मुख्य लक्षण व्यक्ति में कार्य करने की अधिक शक्ति का संचालन है। आन्तरिक गत्यात्मक शक्ति प्रेरणात्मक व्यवहार का आधार है। जिसके अभाव में व्यक्ति प्रायः निष्क्रिय हो जाता है। यह माना जाता है कि व्यक्ति के व्यवहार की तीव्रता जितनी अधिक होगी उसकी पृष्ठभूमि में प्रेरणा भी उतनी ही शक्तिशाली होगी। उदाहरण के लिए परीक्षा के दिनों में विद्यार्थी बिना थके घण्टों तक पढ़ते रहते हैं, जबकि सामान्य दिनों में वे उतना परिश्रम नहीं करते तथा क्रोध की अवस्था में एक दुबला-पतला-सा व्यक्ति कई लोगों के काबू में नहीं आता। प्रेरणा की दशा में इस प्रकार के अतिरिक्त शक्ति के संचालन का स्पष्टीकरण प्रस्तुत करते हुए कहा गया है कि शक्ति के इस अतिरिक्त संचालन का मुख्य कारण प्रबल प्रेरणा की दशा में उत्पन्न होने वाले शारीरिक एवं रासायनिक परिवर्तन होते हैं। |
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| 32822. |
सकारात्मक प्रेरणा तथा नकारात्मक प्रेरणा से क्या आशय है ? |
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Answer» प्रेरणा मुख्यतः दो प्रकार की होती है सकारात्मक प्रेरणा तथा नकारात्मक प्रेरणा, इन दोनों प्रकार की प्रेरणाओं का सामान्य परिचय निम्नवर्णित है 1. सकारात्मक प्रेरणा : 2. नकारात्मक प्रेरणा : |
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| 32823. |
निम्नलिखित में कौन सीखने का प्राथमिक नियम नहीं है?(क) प्रभाव का नियम(ख) तत्परता का नियम(ग) आंशिक क्रिया का नियम(घ) अभ्यास का नियम |
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Answer» (ग) आंशिक क्रिया का नियम |
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| 32824. |
पुरस्कार देने के मुख्य लाभों का उल्लेख कीजिए। यासीखने में पुरस्कार की आवश्यकता एवं महत्त्व पर प्रकाश डालिए। |
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Answer» पुरस्कार देने से निम्नांकित लाभ होते हैं ⦁ पुरस्कार बालकों को प्रेरित करते हैं तथा आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। |
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| 32825. |
व्यक्ति द्वारा किये जाने वाले कार्यों के पीछे निहित महत्त्वपूर्ण कारक को कहते हैं(क) संवेग(ख) प्रलोभन(ग) चिन्तन एवं कल्पना(घ) प्रेरणा |
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Answer» सही विकल्प है (घ) प्रेरणा |
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| 32826. |
प्रेरणायुक्त व्यवहार के मुख्य लक्षण क्या हैं ? |
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Answer» प्रेरणायुक्त व्यवहार के मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं 1. अधिक शक्ति का संचालन : |
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| 32827. |
प्रेरणायुक्त व्यवहार का एक मुख्य लक्षण है(क) सामान्य से अधिक बोलना।(ख) व्यक्ति का आक्रामक होना(ग) अतिरिक्त शक्ति का संचालन(घ) इनमें से कोई नहीं |
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Answer» सही विकल्प है (ग) अतिरिक्त शक्ति का संचालन |
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| 32828. |
पुरस्कार वितरण से होने वाली हानियों का सामान्य परिचय दीजिए। |
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Answer» इसमें सन्देह नहीं है कि पुरस्कारों का शिक्षा में विशेष महत्त्व है, तथापि थॉमसन (Thomson) व अन्य मनोवैज्ञानिकों ने पुरस्कारों द्वारा होने वाली अनेक हानियों का भी उल्लेख किया है, जिनमें प्रमुख अलिखित हैं ⦁ पुरस्कार पाने के लालच में कभी-कभी बालक खेलकूद तथा पाठ्य सहगामी क्रियाओं में अधिक भाग लेने लगते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई-लिखाई चौपट हो जाती है तथा उनकाशैक्षिक स्तर काफी गिर जाता है। |
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| 32829. |
प्रेरणा के नितान्त अभाव का व्यक्ति के कार्यों पर क्या प्रभाव पड़ता है ? |
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Answer» प्रेरणा के नितान्त अभाव में व्यक्ति द्वारा कोई कार्य सम्पन्न हो ही नहीं सकता। |
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‘पुरस्कार’ की एक परिभाषा दीजिए। |
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Answer» “पुरस्कर वांछित कार्य के साथ सुखद साहचर्य स्थापित करने का साधन है।” [ हेरलॉक ] |
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किसी भी व्यवहार के सम्पन्न होने के लिए अनिवार्य कारक है(क) चिन्तन(ख) लाभ प्राप्ति की आशा(ग) प्रेरणा(घ) संवेग |
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Answer» सही विकल्प है (ग) प्रेरणा |
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| 32832. |
प्रेरणा परिणामों के तत्कालिक ज्ञान से प्राप्त होती है।” यह कथन किसका है?(क) वुडवर्थ का(ख) मैक्डूगल को(ग) हिलगार्ड का(घ) कोहलर का |
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Answer» सही विकल्प है (क) वुडवर्थ को |
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| 32833. |
प्रेरणा छात्र में रुचि उत्पन्न करने की कला है।” यह किसका मत है ?(क) गेट्स का(ख) वुडवर्थ का(ग) थॉमसने का(घ) जे० एस० रॉस का |
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Answer» सही विकल्प है (ग) थॉमसन का । |
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| 32834. |
निम्नलिखित कथन सत्य हैं या असत्य⦁ व्यक्ति के समस्त व्यवहार के पीछे निहित मुख्य कारक प्रेरणा ही है।⦁ प्रेरणाओं के नितान्त अभाव में व्यक्ति पूर्ण रूप से निष्क्रिय हो जाता है।⦁ भूख एवं प्यास मुख्य अर्जित प्रेरक हैं।⦁ शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरणा का विशेष महत्त्व है।⦁ जीवन में सूफलता प्राप्ति के लिए प्रेरणाओं का विशेष योगदान होता है। |
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Answer» ⦁ सत्य |
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| 32835. |
भूख कैसा प्रेरक है? |
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Answer» भूख एक प्रमुख जन्मजात प्रेरक है। |
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प्रेरणायुक्त व्यवहार का मुख्य लक्षण क्या होता है? |
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Answer» प्रेरणायुक्त व्यवहार का मुख्य लक्षण है अतिरिक्त शक्ति का संचालन। |
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प्रेरणा की एक स्पष्ट परिभाषा लिखिए। |
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Answer» “प्रेरणा वे शारीरिक तथा मानसिक दशाएँ हैं, जो किसी कार्य को करने के लिए प्रेरित करती हैं।” [ मैक्डूगल ] |
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दण्ड क्या है? शिक्षा में इसकी क्या उपयोगिता है? याशिक्षा के क्षेत्र में दण्ड का क्या स्थान है? |
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Answer» जब किसी व्यक्ति को किसी कार्य के परिणामस्वरूप कष्टदायक अनुभव प्राप्त होता है, चाहे वहु प्रकृति-प्रदत्त हो या अर्जित, तब उसे दण्ड किसी व्यक्ति को अनुचित कार्य करने पर दिया जाता हैं। शिक्षा में दण्ड की उपयोगिता |
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पुरस्कार से क्या आशय है ? |
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Answer» पुरस्कार का आशय बालक को अच्छे कार्यों को करने के फलस्वरूप सुखद अनुभूति कराने से है। |
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दण्ड के प्रतिरोधात्मक उद्देश्य को स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» प्रतिरोधात्मक शब्द प्रतिरोध से बना है। इसका अर्थ है-रोकना या रास्ते पर रोक लगा देना तांकि चलने वाला उस रास्ते पर न जा सके। दूसरे शब्दों में, समाज के द्वारा उन व्यक्तियों पर रोक लगाना जो गलत रास्तों पर चलकर समाज को हानि या चोट पहुँचाते हैं। यह उद्देश्य कठोर दण्ड पर आधारित है। दण्ड की कठोरता के कारण बालक भविष्य में कभी भी अपराध की ओर उन्मुख होने का साहस नहीं करेगा। दण्ड कठोर होने के कारण विद्यालय के अन्य छात्र भी अपराध की ओर अग्रसर नहीं होंगे। आजकल विद्यालयों में दण्ड के इस उद्देश्य को अधिक महत्त्व नहीं दिया जाता। |
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| 32841. |
विद्यालयों में दण्ड की व्यवस्था के मुख्य लाभ क्या हैं?यादण्ड के दो लाभ बताइए। |
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Answer» शिक्षा के क्षेत्र में दण्ड से निम्नांकित लाभ हैं 1. गलतियों पर रोक : |
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| 32842. |
दण्ड के सुधारात्मक उद्देश्य को स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» यह उद्देश्य इस तथ्य पर आधारित है कि बालक की शारीरिक विशेषताएँ और वंशानुक्रम अपराध के कारण नहीं हैं, बल्कि विद्यालय, परिवार तथा समाज का वातावरण अपराध के लिए जिम्मेदार है, न कि बालक। इस उद्देश्य के अनुसार अपराधियों को सुधार किया जाए और उन्हें योग्य नागरिक के समान जीना और जीने देने का पाठ सिखाया जाए। विद्यालय व समाज के वातावरण का सुधार किया जाए, क्योंकि इससे ही अपराधियों का जन्म होता है। इस उद्देश्य के अन्तर्गत कारावास के महत्त्व को स्वीकार किया गया है। इन कारागारों को सुधार गृह भी कहा जाता है। |
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| 32843. |
शिक्षा के प्रति प्रेरित बालक के लक्षण हैं(क) अनुशासन के प्रति ईमानदार(ख) अध्ययन में एकाग्रता(ग) सद्गुणों तथा अच्छी आदतों से युक्त(घ) ये सभी लक्षण |
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Answer» सही विकल्प है (घ) ये सभी लक्षणे |
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| 32844. |
प्रेरणा की उत्पत्ति को अर्जित कारण है(क) आत्मरक्षा की भावना(ख) मूल-प्रवृत्तियाँ(ग) अचेतन मन(घ) रुचि |
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Answer» सही विकल्प है (घ) रुचि |
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प्रेरणा का स्वाभाविक कारण है(क) आदत(ख) संस्कार(ग) रुचि(घ) संवेग |
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Answer» सही विकल्प है (घ) संवेग |
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| 32846. |
विद्यालयों में दण्ड की व्यवस्था होने की क्या हानियाँ हो सकती हैं?यादण्ड की दो हानियाँ लिखिए। |
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Answer» प्राय: यह देखा गया है कि दण्ड देने वालों की असावधानी से दण्डों का दुरुपयोग हो जाता है। ऐसी दशा में दण्ड से अनेक हानियाँ होती हैं। इन हानियों का विवेचन निम्नलिखित है 1.प्रतिशोध की भावना : |
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| 32847. |
दण्ड के प्रतिशोधात्मक उद्देश्य का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» प्रतिशोध को उचित दण्ड कहा जाता है। इसके अनुसार जिस व्यक्ति ने जैसा किया है, उसे उसी प्रकार का दण्ड दिया जाना चाहिए। प्राचीनकाल में दण्ड का यह उद्देश्य सर्वमान्य था और जैसे को तैसा (Tit for Tat) का सिद्धान्त प्रचलित था। उस समय प्रतिशोध या बदला लेने के उद्देश्य से दण्ड दिया जाता था। आज भी अप्रत्यक्ष रूप से इस उद्देश्य से दण्ड दिया जाता है। |
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| 32848. |
“प्रेरक कोई एक विशेष आन्तरिक कारक यो दशा है, जिसमें किसी क्रिया को आरम्भ करने और बनाये रखने की प्रवृत्ति होती है।” यह परिभाषा किसने दी है ?(क) मैक्डूगल ने(ख) वुडवर्थ ने(ग) गिलफोर्ड ने।(घ) हिलगार्ड ने |
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Answer» सही विकल्प है (ग) गिलफोर्ड ने |
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प्रेरणा की उत्पत्ति का स्वाभाविक कारण क्या है ? |
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Answer» प्रेरणा की उत्पत्ति का स्वाभाविक कारण है-आवश्यकताओं को अनुभव करना एवं आदत। |
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अन्तर्दृष्टि द्वारा सीखने के सिद्धान्त से सम्बन्धित प्रयोग किसने किया है?(क) गुंग ने(ख) वुण्ट ने(ग) कोहलर ने(घ) वाटसन ने |
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Answer» (ग) कोहलर ने |
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