This section includes InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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निम्नलिखित विधान ‘सही’ हैं या ‘गनत’ यह बताइए :कर्ण त्यागी और दानी पुरुष था।कर्ण सर्प के समान है।परोपकारी मनुष्य धन का संग्रह करते हैं।धन-संपत्ति परोपकार के लिए नहीं होती। |
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Answer» 1. सही 2. गलत 3. गलत 4. गलत |
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कर्ण दुर्योधन का साथ क्यों नहीं छोड़ सकता? |
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Answer» दुर्योधन के सामने युद्ध का घोर संकट है। इसलिए सच्या मित्र होने के कारण कर्ण आपत्ति के समय उसका साथ नहीं छोड़ सकता। |
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दानी पुरुषों का स्वभाव कैसा होता है? |
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Answer» दानी पुरुष धन-दौलत को संग्रह करने की वस्तु नहीं मानते। वे अपना धन दूसरों को बांटने में ही रुचि रखते हैं। वे अपनी बहुमूल्य वस्तुएँ दूसरों को देने में संकोच नहीं करते। वे किसी से कुछ लेते नहीं। वे दूसरों को देने में सुख का अनभुव करते हैं। इस प्रकार दानी पुरुषों का स्वभाव दयालु और उदार होता है। |
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मैं गरुड़, कृष्ण ! मैं पक्षिराज, सिर पर न चाहिए मुझे ताज,दुर्योधन पर है. विपद धोर, सकता न किसी विध उसे छोड,रणखेत पाटना है. मुझको,अहि.पाश काटना है. मुझको। |
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Answer» कर्ण श्रीकृष्ण से कहता है कि इस समय मेरी स्थिति गरुड़ पक्षी के समान है। मुझे राजमुकुट नहीं पहनना है। इस समय दुर्योधन भारी संकट में है। युद्धरूपी नागपाश ने उसे जकड़ रखा है। मुझे दुर्योधन के इस नागपाश को काटना है-दुर्योधन को बुद्ध में विजय दिलाना है। मुझे गरुड़ की तरह अपना दायित्व निभाना है। |
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गरुड कहाँ रहता है? |
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Answer» गरुड़ पहाड़ों में निवास करता है। चट्टानों की फटी दरारें ही उसका घर होती हैं। |
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Give reason: The iron and steel industry has developed very well in Europe. |
Answer»
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Which animals are found in Alaska? |
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Answer» Reindeer, seal, walrus, white bear, white wolf, whale, cod, etc. |
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कैसा व्यक्ति पुरुष नहीं कहला सकता? |
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Answer» चाँदनी रात का आनंद लेनेवाला और फूलों की छाया में पलनेवाला व्यक्ति सांसारिक दृष्टि से भाग्यवान होता है, ऐश-आराम का जीवन उसे सुंदर-कोमल बना देता है, परंतु ऐसे व्यक्ति में साहस और पौरुष नहीं होता। पौरुष पाने के लिए कष्टों का अमृत पीना पड़ता है, आंधी और धूप सहन करनी पड़ती है। संघर्षों में जी कर विघ्नों पर विजय पानेवाला व्यक्ति हो पुरुष कहलाता है। |
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The Alfalfa grass of ………… is well known.(A) Patagonia(B) Savanna(C) Pampas(D) Parana-Paraguay |
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Answer» Correct option is (C) Pampas |
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Which are the chief minerals of South America? |
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Answer» Manganese, copper, mineral oil, tin and coal. |
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तिलहन क्या हैं? |
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Answer» वे बीज जिन से हमें तेल प्राप्त होते हैं, तिलहन कहलाते हैं। |
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खरीफ़ के मौसम में बोई जाने वाली फसलों के नाम बताइए। |
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Answer» खरीफ़ के मौसम में बोई जाने वाली फसलें हैं-चावल, ज्वार, बाजरा, मक्का, मूंगफली, पटसन तथा कपास। |
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तिलहन फसलों के नाम बताओ। |
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Answer» तिलहन फसलें हैं-मूंगफली, सरसों, तोरिया, सूरजमुखी के बीज, बिनौला, नारियल आदि। |
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भारत के विदेशी व्यापार में किस देश का अंश सर्वाधिक है? |
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Answer» भारत के विदेशी व्यापार में संयुक्त राज्य अमेरिका का अंश सर्वाधिक है। |
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……… का अधिकार किसी भी धर्म के पालन की स्वतंत्रता देता है। |
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Answer» सही उत्तर है धार्मिक स्वतंत्रता |
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ब्रिटिश शासन के पूर्व जातियों की आर्थिक स्थिति खराब और विकास रूक गया था । |
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Answer» भारत में ब्रिटिशकाल से पूर्व के समय में किसी भी जाति को अन्य समूहों से दूर, सरलता से पहुँचा न जा सके ऐसे दुर्गम जंगलों और पहाड़ी विस्तारों में अलग रखा जाता था । ये जातियाँ अन्य जातिओं से अलग सामूहिक जीवन जीती थी । उनका सामाजिक जीवन और संस्कृति अन्य सामाजिक समूहों से अलग था । वे लिपिबद्ध भाषा नहीं जानते थे। उनकी स्वयं विशिष्ट बोली थी। इस जाति के लोग भी पीढ़ी दर पीढ़ी अलग बस्तियाँ, एकाकी जीवन आदि के कारण विकास नहीं हो सका । परिणामस्वरूप उनकी आर्थिक स्थिति बहुत ही खराब रही थी और उनका विकास रूक गया था । |
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लघुमति किसे कहते हैं ? |
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Answer» लघुमति ऐसे लोकसमूह को कहा जाता है जो धर्म या भाषा के आधार पर किसी निश्चित प्रदेश या प्रदेशों में बहुमति में न हो । |
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……. व्यक्ति समाज और राष्ट्र के विकास में अवरोधक है। |
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Answer» सही उत्तर है सांप्रदायिकता |
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डॉ. आम्बेडकर राष्ट्रीय पुरस्कार किसे दिया जाता है ? |
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Answer» डॉ. आम्बेडकर राष्ट्रीय पुरस्कार ऐसे व्यक्ति, संस्था को दिया जाता है जो कमजोर वर्गों को सामाजिक समज, उद्धार, परिवर्तन, क्षमता, न्याय और मानव गरिमा के लिए कार्य करता हो । |
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निम्न में से कौन-सा जोड़ा असत्य है ?(A) नक्सलवाद – पं. बंगाल(B) NSCN – मणिपुर(C) NLFT – त्रिपुरा(D) UMF – असम |
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Answer» सही विकल्प है (B) NSCN – मणिपुर |
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निम्नलिखित कथन सत्य हैं या असत्य⦁ भाषा पारस्परिक संचार का सर्वोत्तम माध्यम है⦁ शिशु की प्रारम्भिक भाषा क्रन्दन के रूप में होती है⦁ भाषा के विकास के अभाव में शिक्षा की प्रक्रिया सुचारु रूप से चलती है⦁ संस्कृति के विकास, संरक्षण एवं हस्तान्तरण में सर्वाधिक योगदान भाषा का ही होता है⦁ सामाजिक सम्पर्क के नितान्त अभाव में भी भाषा को सुचारु रूप से विकास हो सकता है |
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Answer» ⦁ सत्य |
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……… समाज को विघटन की ओर ले जाता है। |
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Answer» सही उत्तर है आतंकवाद |
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विस्मरण के बाधा सिद्धान्त का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» विस्मरण के कारणों के स्पष्टीकरण के लिए प्रस्तुत किया गया एक सिद्धान्त बाधा को सिद्धान्त है। बाधा के सिद्धान्त के अनुसार विस्मरण एक ‘सक्रिय मानसिक क्रिया है। यह सिद्धान्त बताता है कि मस्तिष्क में लगातार एवं क्रमशः बनने वाले नये स्मृति-चिह्नों की तह पुराने स्मृति-चिह्नों की तरह को ढकती जाती है जिससे नये स्मृति-चिह्न पुराने स्मृति-चिह्न के पुन:स्मरण में बाधा उत्पन्न करते हैं। परिणामस्वरूप वे अपनी मूल और वास्तविक स्थिति में नहीं रह पाते। उदाहरण के लिए-नींद की अवस्था में नये संस्कारों का जन्म न होने से बहुत कम बाधा उत्पन्न होती है; अतः सोने से पूर्व याद किया गया पाठ जागने पर तत्काल ही याद आ जाता है। |
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स्मृति में प्रत्याह्वान (Recall) का क्या स्थान है? |
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Answer» प्रत्याह्वान स्मृति की प्रक्रिया का एक महत्त्वपूर्ण तत्त्व है। गत सीखे गये विषय या अनुभवों को चेतना के स्तर पर लाने की क्रिया को प्रत्याह्वान या पुन:स्मरण कहा जाता है। प्रत्याह्वान के अभाव में या त्रुटिपूर्ण होने पर स्मृति सम्भव ही नहीं है। व्यवहार में देखा जाता है कि अधिकांश विषयों का प्रत्यास्मरण प्रायः अधूरा या आंशिक ही होता है। जितना अधिक एवं शुद्ध प्रत्याह्वान होगा उतनी ही अच्छी स्मृति होगी। इस प्रकार स्पष्ट है कि स्मृति की प्रक्रिया में प्रत्याह्वान का महत्त्वपूर्ण स्थान है। |
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विस्मरण के दो अनुप्रयोग सिद्धान्त का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» विस्मरण के कारणों के स्पष्टीकरण के लिए एक सिद्धान्त प्रस्तुत किया जाता है जिसे अनुप्रयोग का सिद्धान्त कहते हैं। यह एक जीवशास्त्रीय सिद्धान्त है। इस जीवशास्त्रीय सिद्धान्त के अनुसार विस्मरण का अनुपयोगिता (Disuse) से गहरा सम्बन्ध है और इसी कारण विस्मृति, मस्तिष्क की एक निष्क्रिय मानसिक क्रिया’ कही जाती है। यदि याद किये गये अनुभवों, तथ्यों या पाठ को समय-समय पर दोहराया नहीं जाएगा तो मस्तिष्क में उनके स्मृति-चिह्न धीरे-धीरे विलुप्त हो जाते हैं। और हम उन्हें भूल सकते हैं। अतः सीखी गयी वस्तुओं को बार-बार दोहराकर उन्हें प्रयोग में लाना आवश्यक है, अन्यथा अनुप्रप्रयोग के कारण उनकी स्मृति दुर्बल या नष्ट हो सकती है। |
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स्मरण करने की व्यवधान सहित तथा व्यवधान रहित विधियों में से कौन-सी विधि अच्छी मानी जाती है? |
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Answer» किसी विषय को स्मरण करने के लिए व्यवधान सहित तथा व्यवधान रहित विधियों को प्रायः अपनाया जाता है। इन दोनों विधियों को लेकर मनोवैज्ञानिकों ने अनेक प्रयोग किये हैं। एबिंगहास के प्रयोगों के निष्कर्ष बताते हैं कि व्यवधान सहित विधि निरर्थक पदों को याद करने की एक अच्छी विधि है। बेलवार्नर तथा विलियम ने इसे पद्य एवं गद्य याद करने की मितव्ययी विधि कहा है। इसके विपरीत कुक नामक विद्वान् ने व्यवधान रहित विधि का समर्थन किया है। सच्चाई यह है कि स्थायी स्मृति के लिए व्यवधान सहित विधि तथा सरल एवं छोटी सामग्री, जिसे तात्कालिक स्मृति के लिए धारण करना हो, के लिए व्यवधान रहित विधि उपयुक्त होती है। वैसे व्यवधान सहित विधि को आमतौर पर इस कारण मान्यता दी जाती है क्योकि व्यवधान या अन्तर से थकान तथा अरुचि समाप्त हो जाती है एवं मानसिक चिन्तन तथा ताजगी के अवसर प्राप्त हो जाते हैं। अन्तर के कारण त्रुटिपूर्ण प्रयासों से अवधान हट जाता है और उन्हें दोहराया नहीं जाता।। |
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अल्पकालीन स्मृति की मुख्य विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» स्मृति के एक मुख्य प्रकार के रूप में अल्पकालीन स्मृति की मुख्य विशेषताओं को संक्षिप्त विवरण अग्रलिखित है (1) धारणा के ह्रास की दर अधिक— अल्पकालीन स्मृति की धारणा को ह्रास तीव्र गति से होता है अर्थात् धारणा के पास की दर अधिक होती है। हम यह भी कह सकते हैं कि अल्पकालीन स्मृति के सन्दर्भ में सम्बन्धित विषय का विस्मरण तीव्र गति से होता है। इस विषय में पीटरसन एवं पीटरसन ने कुछ परीक्षण किये तथा निष्कर्ष स्वरूप बताया कि अल्पकालीन स्मृति के सन्दर्भ में विषय को याद करने के उपरान्त 12 सेकण्ड में प्रायः याद किये गये विषय का 75% विस्मरण हो जाता है। तथा 18 सेकण्ड के उपरान्त लगभग 90% विस्मरण हो जाती है। (2) अधिगम की मात्रा कम होती है— अल्पकालीन स्मृति के सन्दर्भ में अधिगम कम मात्रा में होता है। अधिगम की मात्रा कम होने का मुख्य कारण यह होता है कि इस विधि में अनुभव की मात्रा भी कम होती है। (3) अग्रोन्मुखी तथा पृष्ठोन्मुखी व्यतिकरण- अल्पकालीन स्मृति पर सामान्य रूप से अग्रोन्मुखी तथा पृष्ठोन्मुखी दोनों प्रकार के व्यतिकरणों का प्रभाव अवश्य पड़ता है। |
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विस्मरण के प्रकारों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» विस्मरण के दो प्रकार हैं-सक्रिय विस्मरण तथा निष्क्रिय विस्मरण। सक्रिय विस्मरण में व्यक्ति स्मरण की गयी सामग्री को भूलने के लिए प्रयास करता है, जबकि निष्क्रिय विस्मरण में यह बिना प्रयास के ही भूल जाता है। |
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विस्मरण के दमन सिद्धान्त का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» विस्मरण की प्रक्रिया की समुचित व्याख्या प्रस्तुत करने के लिए एक सिद्धान्त प्रस्तुत किया गया है, जिसे दर्मन का सिद्धान्त कहा जाता है। इस सिद्धान्त के मुख्य प्रतिपादक फ्रॉयड हैं। फ्रॉयड के अनुसार, “विस्मरिण एक सक्रिय मानसिक प्रक्रिया है। हम भूलते हैं, क्योंकि हम भूलना चाहते हैं।” विस्मरण की प्रक्रिया को इस रूप में स्वीकार करते हुए विस्मरण के दमन सिद्धान्त के अन्तर्गत स्पष्ट किया गया है कि हम अपने अप्रिय तथा दु:खद अनुभवों को चेतन मन से दमित कर देते हैं तथा उन्हें अचेतन मन में पहुँचा देते हैं। इसी प्रकार मानसिक संघर्ष के कारण भी पुराने अनुभवों को भुला दिया जाता है। फ्रॉयड के द्वारा प्रतिपादित इस सिद्धान्त की अनेक मनोवैज्ञानिकों ने आलोचना की है। उनका कहना है कि व्यवहार में व्यक्ति प्रायः उन विषयों को भी भूल जाता है जो उसके लिए अप्रिय तथा दु:खद नहीं होते तथा जिन्हें वह भूलना चाहता भी नहीं।। |
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विस्मरण के महत्त्व का उल्लेख कीजिए। या मानव-जीवन में विस्मृति की क्या उपयोगिता है? |
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Answer» विस्मरण एक जटिल मानसिक क्रिया है, जिसका मानव-जीवन में विशेष महत्त्व है। विस्मरण के कारण ही मनुष्य दु:खद घटनाओं को समय बीतने के साथ-ही-साथ विस्मृत ( भूलता) करता जाता है। यदि यह क्रिया न होती तो मनुष्य का जीवन अशान्त तथा विक्षिप्त बना रहता और वह अनेक प्रकार के मानसिक रोगों का शिकार हो जाता है। लेकिन अतिशय विस्मरण भी घातक होता है, क्योंकि ऐसी स्थिति में मनुष्य की स्मृति लुप्त हो जाती है और उसे अपने विगत जीवन का कोई ज्ञान नहीं रहता। इस प्रकार विस्मरण और स्मरण दोनों ही क्रियाएँ मानव-जीवन के लिए आवश्यक हैं। व्यावहारिक दृष्टिकोण से भी विस्मरण का विशेष महत्त्व है। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में कुछ शत्रुतापूर्ण, अप्रिय तथा जघन्य घटनाएँ घटित होती रहती हैं। व्यक्ति इन्हें समय के साथ भुला देता है। तथा सामान्य जीवन व्यतीत करता रहता है। |
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| 32781. |
कण्ठस्थीकरण अथवा स्मरण करने की विभिन्न विधियों का वर्णन कीजिए। |
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Answer» कण्ठस्थीकरण अथवा स्मरण कण्ठस्थीकरण अथवा स्मरण करना एक मानसिक प्रवृत्ति है। मानव की स्मरण शक्ति यद्यपि प्रकृति की उसे एक अनुपम देन है, किन्तु यदि इसे समुचित रूप से प्रयोग में लाया जाए तो समय एवं शक्ति, दोनों की ही पर्याप्त रूप से बचत की जा सकती है। किसी विषय-सामग्री को स्मरण करने में लाघव तथा मितव्ययिता लाने के उद्देश्य से मनोवैज्ञानिकों ने सतत प्रयास किये हैं। इसके परिणामस्वरूप स्मरण करने की कुछ मितव्ययी विधियों की खोज सम्भव हुई, जिनकी सहायता से कम समय में अधिक-से-अधिक सामग्री याद की जा सकती है। कण्ठस्थीकरण या स्मरण की मितव्ययी विधियाँ स्मरण या कण्ठस्थीकरण की मितव्ययी विधियाँ निम्नलिखित हैं। (1) पुनरावृत्ति अथवा दोहराना (Repetition)- स्मरण करने की यह एक पुरानी तथा प्रचलित विधि है। सरल होने के कारण यह लोकप्रिय भी है। इस विधि में याद की जाने वाली सामग्री या पाठ को अनेक बार दोहराया जाता है। बार-बार दोहराने से वह पाठ स्मृति में गहराता जाता है। जितनी ही अधिक बार उसे दोहराया जायेगा, उतने ही गहरे स्मृति-चिह्न या संस्कार मस्तिष्क पर बन जाते हैं। आवृत्ति अर्थात् विषय-सामग्री को मन-ही-मन दोहराने से उसे स्थायित्व प्राप्त होता है; अतः कण्ठस्थीकरण करने वाले को चाहिए कि वह पाठ को कई बार पढ़े तथा अनेक बार मन-ही-मन दोहराए। इस विधि से कोई भी विषय-सामग्री कम-से-कम समय में दीर्घकाल के लिए याद हो जाती है। पुनरावृत्ति विधि का प्रयोग करते समय ध्यान रहे कि सामग्री सार्थक हो, तभी उसके वांछित परिणाम सामने आएँगे। छोटे बालकों को कविताएँ, दोहे तथा पहाड़े याद करने में यह विधि बहुत लाभप्रद है। (2) पूर्ण विधि (Whole Method)- पूर्ण विधि में सम्पूर्ण विषय या पाठ को एक ही बार में एक साथ याद किया जाता है। यदि बालक किसी कविता या कहानी को कण्ठस्थ करना चाहता है तो पूर्ण विधि के अनुसार वह समूची सामग्री को एक ही बार में याद करेगा। समय-समय पर होने वाले प्रयोगों से सिद्ध हुआ है कि कठिन एवं लम्बे पाठों की तुलना में सरल एवं छोटे पाठ पूर्ण विधि से सुगमतापूर्वक याद किये जा सकते हैं। इसके अलावा यह विधि मन्द-बुद्धि के बालकों की अपेक्षा तीव्र-बुद्धि के बालकों के लिए अधिक लाभप्रद मानी जाती है। यहाँ यह बात भी उल्लेखनीय है कि सीखने की अल्पकालीन अवधि में इस विधि के परिणाम अधिक अच्छे नहीं आते, इसके लिए लम्बा समय उपयुक्त है। पूर्ण विधि के अन्तर्गत याद की जाने वाली सामग्री के अधिक लम्बा होने पर उसे खण्डों में बाँटेकर याद किया जा सकता है, किन्तु इससे पहले समूची सामग्री को आदि से अन्त तक भली-भाँति पढ़ लेना आवश्यक है। (3) आंशिक या खण्ड विधि (Part Method)- स्मरण की आंशिक या खण्ड विधि के अन्तर्गत पहले पाठ अथवा सामग्री को पृथक्-पृथक् अंशों/खंडों में विभाजित कर लिया जाता है, फिर एक-एक खण्ड को याद करके समूची विषय-सामग्री को कण्ठस्थ कर लिया जाता है। इस प्रकार यह विधि पूर्ण विधि के एकदम विपरीत है। मान लीजिए, बालक को एक लम्बी कविता याद करनी है तो वह पहले उसके एक पद को याद करेगा तब बारी-बारी से कविता के दूसरे तीसरे :: :: चौथे पदों पर ध्यान केन्द्रित करता जायेगा। (4) मिश्रित विधि (Mixed Method)– मिश्रित विधि में विशेषकर जब विषय-सामग्री काफी लम्बी हो, पूर्ण एवं आंशिक दोनों विधियों को एक साथ लागू किया जाता है। इस प्रक्रिया के अन्तर्गत एक बार समूची याद की जाने वाली सामग्री को पूर्ण विधि की सहायता से याद करने का प्रयास किया जाता है, फिर उसे छोटे-छोटे खण्डों में करके याद किया जाता है। स्मरण के दौरान विभिन्न खण्डों का सम्बन्ध एक-दूसरे से जोड़ना श्रेयस्कर है। बहुधा देखने में आया है कि पूर्ण एवं आंशिक विधि की अपेक्षा मिश्रित विधि अधिक उपयोगी सिद्ध हुई है। (5) व्यवधान सहित या सान्तर विधि (Spaced Method)- व्यवधान सहित या सान्तर जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, स्मरण करने की इस विधि में विषय-सामग्री को कई बैठकों में याद किया जाता है। दिन में थोड़े-थोड़े समय का व्यवधान (अन्तर) देकर पाठ को दोहराकर कंठस्थ किया जाता है। यह विधि स्थायी स्मृति के लिए काफी उपयोगी है।। (6) व्यवधान रहित या निरन्तर विधि (Unspaced Method)– सान्तर विधि के विपरीत निरन्तर या व्यवधान रहित विधि में विषय-सामग्री को एक ही बैठक में कंठस्थ करने का प्रयास किया जाता है। इसमें पाठों को बिना किसी व्यवधान के दोहराकर याद किया जाता है। (7) सक्रिय विधि (Active Method)– सक्रिय विधि का दूसरा नाम उच्चारण विधि है। इसमें किसी विषय-सामग्री को बोलकर, आवाज के साथ पढ़कर याद किया जाता है। एबिंगहास तथा गेट्स आदि मनोवैज्ञानिकों ने विभिन्न प्रयोगों के माध्यम से यह निष्कर्ष निकाला कि कण्ठस्थीकरण की सक्रिय विधि अत्यधिक उपयोगी एवं महत्त्वपूर्ण विधि है। इस विधि द्वारा स्मरण करने से व्यक्ति के मस्तिष्क में याद की जाने वाली सामग्री का ढाँचा तैयार हो जाता है, विषय का अर्थ अधिक स्पष्ट होता है, सामग्री के विविध खण्डों का लयबद्ध समूहीकरण होता है, उनके बीच सार्थक सम्बन्ध स्थापित होते हैं तथा याद की गई सामग्री का आभास होता रहता है। उच्चारण के साथ याद करने में व्यक्ति रुचि लेकर प्रयास करता है तथा उसकी सक्रियता में वृद्धि होती है। बहुधा सक्रिय विधि के दौरान शरीर के अंगों में गति (हिलना-डुलना) देखा जाता है। (8) निष्क्रिय विधि (Passive Method)- निष्क्रिय विधि में किसी विषय-सामग्री को बिना बोले मन-ही-मन याद किया जाता है। सक्रिय विधि के लाभों को जानकर यह निष्कर्ष नहीं निकाल लेना चाहिए कि निष्क्रिय विधि अनुपयोगी या कुछ कम उपयोगी है। उच्च कक्षाओं में जहाँ शिक्षार्थियों को अधिक पढ़ना पड़ता है, सिर्फ सक्रिय विधि से काम नहीं चल सकता-वहाँ तो निष्क्रिय विधि ही उपयोगी सिद्ध होती है। निष्क्रिय विधि में शरीर के अंगों में गति नहीं होती और विषय को शान्तिपूर्वक गहन अवधान के साथ पढ़ा जाता है। इस विधि की न केवल गति तीव्र होती है अपितु इसमें थकान भी अपेक्षाकृत काफी कम महसूस होती है। (9) बोधपूर्ण विधि (Intelligence Method)- बोधपूर्ण विधि में विषय-सामग्री या पाठ को सप्रयास समझ-बूझकर याद किया जाता है। इस विधि से याद की हुई सामग्री के स्मृति-चिह्न या संस्कार मस्तिष्क पर स्थायी होते हैं। सामग्री पुष्ट होकर स्मृति में लम्बे समय तक बनी रहती है। (10) यान्त्रिक या बोधरहित विधि (Rote Method)– यान्त्रिक या बोधरहित विधि के माध्यम से बिना समझे विषय-सामग्री को कंठस्थ किया जाता है। विषय को समझे बिना तोते की तरह रटने के कारण याद की हुई सामग्री अधिक समय तक मस्तिष्क में नहीं टिक पाती है। इसका कारण स्पष्ट है। कि प्रस्तुत सामग्री की मन के विचारों से साहचर्य स्थापित नहीं हो पाता है। शिक्षार्थी यन्त्र के समान पाठ को रटकर याद कर लेता है। (11) समूहीकरण तथा लय (Grouping and Rhythm)- समूहीकरण तथा लय के माध्यम से भी कण्ठस्थीकरण में सहायता मिलती है। याद की जाने वाली सामग्री को समूहों में बाँट देने से स्मरण की क्रिया आसान हो जाती है। इसी प्रकार पद्यात्मक सामग्री को लयबद्ध करके तीव्र गति एवं सुगमतापूर्वक याद किया जाता है। प्राथमिक स्तर पर शिक्षा की सामग्री को कविता के रूप में बच्चों को सुविधापूर्वक याद कराया जाता है। (12) साहचर्य (Association)- कण्ठस्थीकरण की क्रिया में साहचर्य का बड़ा योगदान है। साहचर्य बनाकर स्मरण करने से धारणा स्थायी होती है। साहचर्य बनाने के लिए व्यक्ति स्वतन्त्र है, स्वयं के बनाये हुए साहचर्य अधिक लाभकारी व सहायक होते हैं। इसके लिए याद करते समय सामग्री से सम्बन्धित विभिन्न बातों का अन्य बातों से सम्बन्ध स्थापित करके उसे याद कर लिया जाता है। |
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स्मरण करने की पूर्ण तथा आंशिक विधियों में से कौन-सी विधि अच्छी मानी जाती है? |
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Answer» पूर्ण और आंशिक दोनों विधियों में से कौन-सी विधि अधिक अच्छी है, इस समस्या को सुलझाने के लिए मनोवैज्ञानिकों ने समय-समय पर विभिन्न प्रयोग किये हैं। पेखस्टाइन (Pechstein) नामक विद्वान् ने अपने प्रयोग से निष्कर्ष निकाला कि आंशिक विधि, पूर्ण विधि से बेहतर है, किन्तु एल० स्टीफेन्स (L. Steffens) के प्रयोगों से सिद्ध होता है कि स्मरण की क्रिया में आंशिक विधि की तुलना में पूर्ण विधि में 12% समय की बचत होती है। पिनर एवं साइण्डर (Pyner and Synder) के प्रयोगों से ज्ञात होता है कि सम्पूर्ण रूप से याद करने वाली विधि 240 लाइनों वाली कविता के लिए अत्यन्त प्रभावकारी है लेकिन इससे लम्बी कविता को खण्डों या उप-समग्रों में बाँटकर याद किया जा सकता है। वस्तुतः याद की जाने वाली सामग्री के लिए विधि का चयन; विषय की मात्र, प्रकार तथा याद करने वाले की बुद्धि व क्षमता पर आधारित है। जहाँ पूर्ण विधि सरल, छोटी सामग्री तथा तीव्र बुद्धि के बालकों के लिए उपयुक्त है; वहीं दूसरी ओर, आंशिक विधि कठिन, लम्बी सामग्री तथा मन्द बुद्धि के बालकों के लिए बेहतर समझी जाती है। |
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थॉर्नडाइक के अनुसार सीखने के लिए आवश्यक नहीं है|(क) अभ्यास ।(ख) प्रभाव या परिणाम(ग) तैयारी ।(घ) सूझ |
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Answer» सही विकल्प है (घ) सूझ |
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सीखने के पठार में सीखने का स्तर(क) कुछ कम हो जाता है।(ख) उसी स्तर पर रुक जाता है।(ग) लगातार कम होता जाता है।(घ) तेजी से बढ़ता है। |
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Answer» (ख) उसी स्तर पर रुक जाता है। |
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अधिगम के स्थानान्तरण में सहायक कारक है(क) सीखने के लिए अपनायी गयी उत्तम विधि(ख) पहले सीखे गये विषय की शिक्षण-मात्री(ग) अधिगम के स्थानान्तरण के लिए किये जाने वाले प्रयास(घ) उपर्युक्त सभी |
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Answer» (घ) उपर्युक्त सभी |
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स्मृति का तत्त्व नहीं है(क) सीखना(ख) पुन:स्मरण(ग) प्रत्यभिज्ञा(घ) चिन्तन |
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Answer» सही विकल्प है (घ) चिन्तन |
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अधिगम के स्थानान्तरण से आप क्या समझते हैं? अधिगम के स्थानान्तरणमें सहायक कारकों का उल्लेख कीजिए।यासीखने के स्थानान्तरण को स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» अधिगम का स्थानान्तरण अधिगम-स्थानान्तरण का अर्थ एवं परिभाषा अर्थ- अधिगम की प्रक्रिया में जब किसी पाठ्य-सामग्री को सीखा जाता है तो उस पर उससे पहले सीखी गयी सामग्री या पाठ का प्रभाव पड़ता है। हो सकता है कि पहले सीखा गया पाठ, तत्काल सीखे जा रहे पाठ में सहायता करे और यह भी सम्भव है कि वह इसमें कठिनाई पैदा करे। इस भाँति, वर्तमान में सीखने पर पहले सीखी गयी सामग्री के प्रभाव को अधिगम-स्थानान्तरण या शिक्षण-अन्तरण का नाम दिया जाता है। मनोवैज्ञानिकों ने अधिगम- स्थानान्तरण से सम्बन्धित अध्ययनों के दौरान अनुभव किया कि एक कार्य का प्रभाव दूसरे कार्य पर अवश्य पड़ता है और अधिगम की प्रक्रिया में पूर्व ज्ञान (Previous Knowledge), वर्तमान समय में ग्रहण किये जा रहे ज्ञान को प्रभावित करता है। यदि किसी व्यक्ति को सीखने के लिए कुछ स्मरण करता है। उदाहरण के लिए-यदि दो व्यक्तियों जिनमें से पहले व्यक्ति को कई भाषाओं का ज्ञान है और दूसरे व्यक्ति को केवल एक ही भाषा का ज्ञान है, को कोई नयी भाषा सीखने के लिए दी जाए तो अध्ययनों से ज्ञात हुआ है कि पहला व्यक्ति नयी भाषा को दूसरे व्यक्ति से जल्दी सीख जाता है। परिभाषा- अधिगम-स्थानान्तरण को विभिन्न विद्वानों द्वारा निम्नलिखित रूप में परिभाषित किया गया है| ⦁ हिलगार्ड एवं एटकिन्सन के मतानुसार, “अधिगम-स्थानान्तरण में एक क्रिया का प्रभाव दूसरी क्रिया पर पड़ता है। ⦁ अण्डरवुड के अनुसार, “अधिगम-स्थानान्तरण का अर्थ वर्तमान क्रिया पर पूर्व-अनुभवों का प्रभाव होता है। ⦁ कैण्डलैण्ड की राय में, “स्थानान्तरण का अर्थ वर्तमान में सीखे गये व्यवहार पर पूर्व में सीखे गये व्यवहार के प्रभाव से है।” ⦁ क्रो तथा क्रो के अनुसार, “जब शिक्षण के एक क्षेत्र में प्राप्त विचार, अनुभव या कार्य की आदत, ज्ञान या निपुणता की दूसरी परिस्थिति में प्रयोग किया जाता है तो वह शिक्षण का स्थानान्तरण कहलाता है।” उपर्युक्त विवरण द्वारा अधिगम के स्थानान्तरण की अवधारणा स्पष्ट हो जाती है। संक्षेप में हम कह सकते हैं कि किसी व्यक्ति द्वारा किसी एक परिस्थिति में सीखे गये कार्य को किसी अन्य परिस्थिति में उपयोग में लाना ही अधिगम का स्थानान्तरण है। उदाहरण के लिए-गणित का ज्ञान अर्जित करने | के उपरान्त जब कोई बालक बाजार में सामान खरीदकर रुपये-पैसे का लेन-देन सफलतापूर्वक कर लेता है तो यह अधिगम का स्थानान्तरण ही होता है। अधिगम के स्थानान्तरण में सहायक कारक अधिगम का स्थानान्तरण व्यक्ति के जीवन का एक स्वाभाविक पक्ष है। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में अधिगम का स्थानान्तरण कम या अधिक मात्रा में अवश्य होता है। यह सत्य है कि अधिगम का स्थानान्तरण जितना अधिक तथा प्रबल होगा, व्यक्ति को उतना ही अधिक लाभ होगा। वास्तव में, कुछ कारक ऐसे भी हैं जो अधिगम के स्थानान्तरण को प्रबल बनाते हैं। इन कारकों को अधिगम के स्थानान्तरण में सहायक कारक माना जाता है। अधिगम के स्थानान्तरण में सहायक कारकों का सामान्य परिचय निम्नलिखित है (1) सीखने के लिए अपनायी गयी उत्तम विधि- यदि कोई व्यक्ति किसी कार्य को सीखने के लिए किसी उत्तम विधि को अपनाता है तो उस स्थिति में व्यक्ति के मस्तिष्क में सम्बन्धित कार्य को स्पष्ट एवं स्थायी संस्कार अंकित हो जाते हैं। इस प्रकार के स्पष्ट एवं स्थायी संस्कार बन जाने के उपरान्त अन्य सम्बन्धित कार्य को सरलता से सीखा जा सकता है अर्थात् अधिगम का स्थानान्तरण सुगम हो जाता है। इस प्रकार स्पष्ट है कि सीखने की उत्तम विधि अधिगम के स्थानान्तरण में एक सहायक कारक है। (2) पहले सीखे गये विषय की शिक्षण-मात्रा- यह एक सत्यापित तथ्य है कि यदि किसी विषय को पर्याप्त मात्रा में तथा भली-भाँति सीख लिया जाता है तो उस विषय के स्पष्ट एवं गहरे संस्कार व्यक्ति के मस्तिष्क पर अंकित हो जाते हैं। इस दशा में अधिगम का स्थानान्तरण सुगम भी होता है तथा प्रबलं भी। (3) सम्बन्धित विषय के प्रति अनुकूल मनोवृत्ति- यदि कोई व्यक्ति किसी विषय को सीखने के लिए पूरी तरह से तत्पर हो तो उस स्थिति में उसके गत अनुभव भी सहायक कारक के रूप में कार्य करते हैं अर्थात् व्यक्ति की मनोवृत्ति का भी अधिगम के स्थानान्तरण पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि सीखे जाने वाले कार्य या विषय के प्रति व्यक्ति की अनुकूल मनोवृत्ति भी अधिगम के स्थानान्तरण में एक सहायक कारक है। (4) सामान्यीकरण की क्रिया- अधिगम के स्थानान्तरण में सहायक एक अन्य कारक है-‘सामान्यीकरण की क्रिया’। सामान्यीकरण की क्रिया से आशय है-अधिगम की प्रक्रिया के आधार पर क्रिया सम्बन्धी कुछ सामान्य सिद्धान्तों को निगमित कर लेना। यदि व्यक्ति द्वारा किसी कार्य या विषय के अधिगम के समय सामान्यीकरण कर लिया जाए तो सम्बन्धित विषय या कार्य का अधिगम-स्थानान्तरण उत्तम एवं प्रबल होता है। (5) व्यक्ति की अन्तर्दृष्टि एवं समझ- अधिगम के स्थानान्तरण में सहायक कारकों में व्यक्ति की कुछ अपनी विशेषताएँ एवं क्षमताएँ भी सहायक सिद्ध होती हैं। यदि किसी व्यक्ति की अन्तर्दृष्टि एवं समझे पर्याप्त विकसित हो तो वह व्यक्ति अधिगम के स्थानान्तरण में अधिक सफल होता है। गहन अन्तर्दृष्टि वाला व्यक्ति अपने गत अनुभवों को नये विषयों को सीखने में सरलता से उपयोग में ला सकता है। (6) अधिगम के स्थानान्तरण के लिए किये जाने वाले प्रयास- यदि कोई व्यक्ति किसी कार्य को सीखने के उपरान्त अर्जित ज्ञान को अन्य परिस्थितियों में उपयोग में लाने का भरपूर प्रयास करता है। तो निश्चित रूप से अधिगम का स्थानान्तरण सुगम एवं प्रबल होता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि व्यक्ति के अभीष्ट प्रयास भी अधिगम के स्थानान्तरण में सहायक कारक होते हैं। |
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स्मृति प्रक्रिया का सही क्रम है (क) सीखना, पहचान, धारणा, स्मरण(ख) सीखना, प्रत्यास्मरण, धारणा, पहचान(ग) सीखना, धारणा, प्रत्यास्मरण, पहचान(घ) सीखना, धारणा, पहचान, प्रत्यास्मरण |
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Answer» (ग) सीखना, धारणा, प्रत्यास्मरण, पहचान |
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व्यवहारवाद के अनुसार सीखना क्या है? |
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Answer» व्यवहारवाद के अनुसार, सीखना मानव-व्यवहार में परिवर्तन की एक प्रक्रिया है। |
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सीखने की विभिन्न विधियाँ क्या हैं? सोदाहरण समझाइए।याप्रमुख अधिगम विधियों की उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए। |
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Answer» सीखने की विधि का अर्थ सीखने की विधि या अधिगम विधि से अभिप्राय उस प्रविधि से है जो किसी भी पाठ्य-सामग्री को सीखने के लिए अपनायी जाती है। सीखने की विधि तथा इससे सम्बन्धित कारक अधिगम (सीखना) को पर्याप्त रूप से प्रभावित करते हैं; क्योंकि सीखने की विधियाँ सिर्फ मानवीय अधिगम क्षेत्र में ही प्रयोग की जाती हैं; अतः इनकी प्रधान एवं विशिष्ट भूमिका मानवीय अधिगम के सम्बन्ध में ही है। मनोवैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर पता चलता है कि अलग-अलग तरह से सीखने के कार्यों में अलग-अलग प्रकार की अधिगम/सीखने की विधियाँ प्रयुक्त होती हैं। प्रमुख चार विधियों को अधिक उपयोगी माना है। ये विधियाँ इस प्रकार हैं- ⦁ अविराम तथा विराम विधि ⦁ पूर्ण तथा अंश विधि ⦁ साभिप्राय तथा प्रासंगिक विधि और ⦁ सक्रिय सीखना तथा निष्क्रिय सीखना। इन विधियों की व्याख्या निम्नलिखित हैं- (1) अविराम तथा विराम विधि (Massed Method and Spaced Method)– अविराम विधि, सीखने की एक ऐसी विधि है जिसमें किसी पाठ्य-सामग्री/पाठ को सीखते समय किसी तरह का विश्राम नहीं दिया जाता और सीखने के लिए जो समय तय होता है, व्यक्ति उसमें एक ही सत्र में अविराम (लगातार) कार्य करके सीखता रहता है। इसे संकलित विधि भी कहा जाता है। विराम विधि, जिसे वितरित विधि भी कहते हैं, किसी पाठ्य-सामग्री को विश्राम सहित तथा वितरित प्रयासों के द्वारा अलग-अलग सत्रों में सीखा जाता है। यदि कोई व्यक्ति लगातार दो घण्टे तक बैठकर एक ही सत्र में अपना पाठ याद करता है और इस बीच विश्राम नहीं करता, तो यह अविराम या संकलित विधि कही जाएगी; किन्तु यदि उसे बिना विश्राम किये पढ़ने में थकान या ऊब महसूस हो तो वह विराम या वितरित विधि का सहारा ले सकता है। वह पहले एक घण्टा पढ़ सकता है और पन्द्रह मिनट विश्राम के बाद फिर एक घण्टा पढ़ सकता है। इस भाँति, विश्राम के साथ एक से ज्यादा सत्रों में सीखने की विधि विराम विधि है।। (2) पूर्ण तथा अंश विधि (Whole Method and Part Method)- अधिगम अर्थात् सीखने को संगठित तथा सुगम बनाने वाली दूसरी विधि पूर्ण तथा अंश विधि है। जब व्यक्ति पूरे कार्य को एक साथ करके सीखता है तो उसे पूर्ण विधि कहते हैं और जब वह पूरे कार्य को कई खण्डों/अंशों में बाँटकर प्रत्येक अंश को एक-दूसरे के बाद सीखता है तो उसे अंश विधि कहा जाता है। पूर्ण विधि में पाठ्य-सामग्री को आरम्भ से अन्त तक एक बार दोहरा लेने के बाद उसे फिर से दोहराकर अधिगम किया जाता है, किन्तु अंश विधि में पहले सम्पूर्ण पाठ्य-सामग्री को कुछ अंशों में बाँट लिया जाता है। (3) साभिप्राय तथा प्रासंगिक विधि (Intentional Learning Method and Incidental Learning Method)- साभिप्राय विधि के अन्तर्गत व्यक्ति अपनी इच्छा तथा निश्चित उद्देश्य के साथ किसी कार्य या पाठ को सीखता है, जबकि प्रासंगिक विधि में व्यक्ति किसी कार्य या पाठ को स्वयं ही सीख जाता है-उसमें कार्य को सीखने की कोई इच्छा या उद्देश्य नहीं होता। यदि बालक अभिरुचि एवं निश्चित उद्देश्य के साथ पाठ याद करे; जैसे कि उस पाठ की परीक्षा में आने की अत्यधिक सम्भावना है तो इस प्रकार सीख जाना साभिप्राय सीखने की विधि का उदाहरण है; किन्तु निरुद्देश्य एवं बिना अभिरुचि के स्वत: ही सीख जाना प्रासंगिक विधि में आता है; जैसे किसी कैलेण्डर में दिन व दिनांक देखते-देखते व्यक्ति को उसे पर छपा विज्ञापन याद हो जाता है। (4) सक्रिय सीखना तथा निष्क्रिय सीखना (Active Learning and Passive Learning)- अधिगम की एक विधि सक्रिय एवं निष्क्रिय विधि भी है। जब व्यक्ति किसी कार्य या पाठ को काफी तत्परता तथा सक्रियता के साथ सीखता है, सामग्री को बोल-बोलकर कण्ठस्थ करता है या उसे लिखता है तो इस तरह के सीखने को सक्रिय सीखना कहते हैं। | इस विधि का एक नाम मौखिक आवृत्ति विधि (Recitation Method) भी है। ह्विटेकर (Whittaker) नामक मनोवैज्ञानिक ने सक्रिय सीखने को परिभाषित किया है कि इसमें व्यक्ति परीक्षा के दिनों में बच्चे प्रश्न के उत्तरों को सिर्फ पढ़ते ही नहीं हैं, बल्कि बीच-बीच में पढ़ना बन्द करके सामग्री को बोलने की कोशिश करते हैं या उसे लिखकर जाँच करते हैं कि वे कार्य या पाठ को अच्छी तरह सीख गये हैं या नहीं-यह सक्रिय विधि द्वारा सीखना है। किन्तु आमतौर पर जब बच्चे बिस्तर पर लेटकर या आरामकुर्सी पर बैठकर किसी प्रश्न का उत्तर पढ़कर सीखने का प्रयास करते हैं। तो यह निष्क्रिय विधि द्वारा सीखने का उदाहरण होगा। |
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1. अतीत काल के किसी विगत अनुभव के अर्द्ध-चेतन मन से चेतन मन में आने की प्रक्रिया को……………. कहते हैं।2. स्मृति अपने आप में एक जटिल……. है।3. पूर्व अनुभवों को याद करना, दोहराना या चेतना के स्तर पर लाने की मानसिक क्रिया: …….कहलाती है।4. स्मृति-चिह्नों या संस्कारों के संगृहीत होने की क्रिया को हैं……………।5. स्मृति में क्रमशः चार मानसिक प्रक्रियाएँ अधिगम, …………….पुनः स्मरण एवं ……………..सम्मिलित हैं।6. स्मृति की प्रक्रिया में अधिगम …………….और ……………धारणा के पश्चात् और की प्रक्रियाएँ होती हैं।7. स्मरण करने के लिए किसी विषय को सीखने के बाद बार-बार दोहराने की प्रक्रिया को…………कहते हैं ।8. अच्छी स्मृति की मुख्यतम विशेषता है………… ।9. सदैव साथ रहने वाली सहेलियों में से किसी एक को देखकर दूसरी की याद आ जाना ………के नियम का परिणाम है।10. ज्ञानेन्द्रियों के स्तर पर पंजीकृत सूचनाओं को कुछ क्षणों के लिए ज्यों-का-त्यों भण्डारित कर लेना …………कहलाता है।11. किसी विषय को सीखने के कुछ सेकण्ड उपरान्त पायी जाने वाली धारणा को …….के रूप में जाना जाता है।12. किसी विषय को सीखने के कुछ माह उपरान्त पायी जाने वाली धारणा को ………कहते हैं।13. किसी सीखे गये या स्मरण किये गये विषय का प्रत्यास्मरण न हो पाना ………. कहलाता है।14. धारण की गई विषय-वस्तु का प्रत्याह्वान और पहचान नहीं कर पाना ………..कहलाता है।15. स्मरण किये गये विषय का अभ्यास न होने पर विस्मरण की गति…जाती है।16. फ्रॉयड के अनुसार विस्मरण का मुख्य कारण ………है।17. दोषपूर्ण पद्धति से सीखे गये विषय का विस्मरण…………हो जाता है।18. याद किये गये विषय को बार-बार दोहराने से ………को रोका जा सकता है।19. विस्मरण के नितान्त अभाव में व्यक्ति का मानसिक स्वास्थ्य …….सकता है।20………….. का सबसे बड़ा महत्त्व यह है कि इसके फलस्वरूप व्यक्ति अपनी दु:खद स्मृतियों से मुक्त होता है तथा नई बातों को सीखकर याद कर सकता है। |
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Answer» 1. स्मृति, 2. मानसिक प्रक्रिया, 3. स्मृति, 4. धारणा, 5. धारणा, प्रत्यभिज्ञा, 6. प्रत्यास्मरण, प्रत्यभिज्ञा, 7. अभ्यास, 8. यथार्थ पुन:स्मरण, 9. साहचर्य, 10. संवेदी स्मृति, 11. अल्पकालीन स्मृति, 12. दीर्घकालीन स्मृति, 13. विस्मरण, 14. विस्मरण, 15. बढ़, 16. दमन, 17. शीघ्र, 18. विस्मरण, 19. बिगड़, 20. विस्मरण |
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वुडवर्थ द्वारा प्रतिपादित सीखने की परिभाषा लिखिए। |
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Answer» वुडवर्थ के अनुसार, “सीखना वह कोई भी क्रिया है जो बाद की क्रिया पर अपेक्षाकृत स्थायी प्रभाव डालती है।” |
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‘सीखने’ या ‘अधिगम की मुख्य विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» सीखने या अधिगम की विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं ⦁ किसी भी नवीन परिस्थिति के उत्पन्न होने पर आवश्यकता पूर्ति के लिए क्रियाशील होना अधिगम की एक अनिवार्य विशेषता है। ⦁ अधिगम में समायोजन के लिए नये मार्ग को खोजा जाता है। ⦁ सफल खोज के फलस्वरूप समायोजन होता है। ⦁ समायोजन से पूर्व व्यवहार में परिवर्तन होता है। ⦁ सफल अनुभव को समान परिस्थिति में दोहराया जाता है। ⦁ सफल अनुभव के परिणामस्वरूप नवीन व्यवहार में स्थायित्व आना ही सीखना है। |
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परिपक्वता की एक सरल परिभाषा लिखिए। |
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Answer» बोरिंग के अनुसार, हम परिपक्वता शब्द का प्रयोग उस वृद्धि और विकास के लिए करते हैं जो किसी बिना सीखे हुए व्यवहार से या किसी विशिष्ट व्यवहार के सीखने से पहले आवश्यक होता है।” |
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प्रयोजनवाद के अनुसार सीखना क्या है? |
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Answer» प्रयोजनवाद के अनुसार, सीखना मानव-जीवन के लक्ष्य अथवा प्रयोजन से। सम्बन्धित है तथा यह लक्ष्योन्मुख उद्देश्यपूर्ण प्रक्रिया है। |
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स्मृति (Memory) से आप क्या समझते हैं? परिभाषा दीजिए तथा स्मृति की प्रक्रिया के मुख्य तत्त्वों का उल्लेख कीजिए।यास्मृति को परिभाषित कीजिए। यास्मृति से आप क्या समझते हैं? स्मृति के अंशों (तत्त्वों) को स्पष्ट कीजिए।यास्मृति की प्रक्रिया को विस्तार से समझाइए। |
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Answer» ‘स्मृति’ मनुष्य में निहित एक विशिष्ट शक्ति का नाम है। यह ऐसी योग्यता है जिसमें व्यक्ति सीखी गयी विषय-सामग्री को धारण करता है तथा धारणा से सूचना को एकत्रित कर सूचना को उत्तेजनाओं के प्रत्युत्तर में पुनः उत्पादित कर अधिगम सामग्री को पहचानता है। स्मृति का मानव-जीवन में अत्यधिक महत्त्व है। प्राचीन भारत में वेदों को स्मृति के माध्यम से संचित तथा हस्तान्तरित किया गया था। ‘स्मृति का अर्थ सामान्यतः स्मृति का अर्थ है किसी ज्ञान या अनुभव को याद करना। स्मृति के सम्बन्ध में प्रचलित ‘अनोखी शक्ति विषयक धारणा धीरे-धीरे मानसिक प्रक्रिया में परिवर्तित हो गयी; अतः स्मृति का अर्थ समझने के लिए इस प्रक्रिया का सार तत्त्व समझना आवश्यक है। स्मृति की परिभाषा अनेक मनोवैज्ञानिकों ने स्मृति को परिभाषित करने का प्रयास किया है। उनमें से कुछ प्रमुख परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं- ⦁ स्टाउद के अनुसार, “स्मृति एक आदर्श पुनरावृत्ति है जिसमें अनुभव की वस्तुएँ यथासम्भव मौलिक घटना के क्रम तथा ढंग से पुनस्र्थापित हैं।” स्मृति के तत्त्व स्मृति के चार प्रमुख तत्त्व हैं-सीखना, धारणा, पुन:स्मरण या प्रत्यास्मरण तथा प्रत्यभिज्ञा या पहचान। इनका संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है (1) सीखना (Learming)-‘सीखना या अधिगम’ स्मृति का आधारभूत तत्त्व है। स्मृति की क्रियाएँ सीखने से उत्पन्न होती हैं। वुडवर्थ ने स्मृति को सामान्य रूप से सीखने का एक अंग माना है ,तथा स्मरण को सीखे गये तथ्यों का सीधा, उपयोग बताया है। जब तक कोई ज्ञान, अनुभव यर तथ्य मस्तिष्क में पहुँचकर अपना संस्कार नहीं बनायेगा तब तक स्मरण की प्रक्रिया प्रारम्भ हो ही नहीं सकती। सीखी हुई बातें पहले अवचेतन मन में एकत्र होती हैं और बाद में याद की जाती हैं; अतः। सीखना स्मरण के लिए सबसे पहली शर्त है। (2) धारणा (Retention)- सीखने के उपरान्त किसी ज्ञान या अनुभव को मस्तिष्क में धारण कर लिया जाता है। किसी समय-विशेष में जो कुछ सीखा जाता है, मनुष्य के मस्तिष्क में वह स्मृति चिह्नों या संस्कारों के रूप में स्थित हो जाता है। जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से आये सभी संस्कार एक संगठित अवस्था में अवचेतन मन में संगृहीत होते हैं। वस्तुतः स्मृति-चिह्नों या संस्कारों के संगृहीत होने की क्रिया ही धारणा है। आवश्यकतानुसार इन संगृहीत संस्कारों को पुनः दोहराया जा सकता है। (3) पुनःस्मरण या प्रत्यास्मरण (Recall)- सीखे गये अनुभवों को पुनः दोहराने या चेतना में लाने की क्रिया पुन:स्मरण या प्रत्यास्मरण कहलाती है। यह क्रिया निम्नलिखित चार प्रकार की होती है- ⦁ प्रत्यक्ष पुनःस्मरण- प्रत्यक्ष पुन:स्मरण में विगत की कोई सामग्री, बिना किसी दूसरे साधन अथवा अनुभव का सहारा लिये, हमारे चेतन मन में आ जाती है। ⦁ अप्रत्यक्ष पुनःस्मरण- अप्रत्यक्ष पुन:स्मरण में विगत की कोई सामग्री, किसी अन्य वस्तु या अनुभव के माध्यम से, हमारे चेतन मन में उपस्थित हो जाती है; जैसे-मित्र के पुत्र को देखकर हमें अपने मित्र की याद आ जाती है। ⦁ स्वतः पुनःस्मरण- स्वतः पुन:स्मरण में व्यक्ति को बिना किसी प्रयास के अनायास ही किसी सम्बन्धित वस्तु, घटना या व्यक्ति का स्मरण हो आता है; जैसे-बैठे-ही-बैठे स्मृति पटल पर मित्र-मंण्डली के साथ नैनीताल की झील में नौकाविहार का दृश्य उभर आना। ⦁ प्रयासमय पुनःस्मरण- जब भूतकाल के अनुभवों को विशेष प्रयास करके चेतन मन में लाया जाता है तो वह प्रयासमय पुन:स्मरण कहलाएगा। (4) प्रत्यभिज्ञा या पहचान (Recognition)- प्रत्यभिज्ञा या पहचान, स्मृति का चतुर्थ एवं अन्तिम तत्त्व है जिसका शाब्दिक अर्थ है-‘किसी पहले से जाने हुए विषय को पुनः जानना या पहचानना। जब कोई भूतकालीन अनुभव, चेतन मन में पुन:स्मरण या प्रत्याह्वान के बाद, सही अथवा गलत होने के लिए पहचान लिया जाता है तो स्मृति का यह तत्त्व प्रत्यभिज्ञा या पहचान कहलाएगा। उदाहरणार्थ–राम और श्याम कभी लड़कपन में सहपाठी थे। बहुत सालों बाद वे एक उत्सव में मिले। राम ने श्याम को पहचान लिया और अतीतकाल के अनुभवों की याद दिलायी जिनका प्रत्यास्मरण करके श्याम ने भी राम को पहचान लिया। |
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स्मृति से क्या आशय है? |
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Answer» पूर्व अनुभवों को याद करने, दोहराने या चेतना के स्तर पर लाने की मानसिक क्रिया ‘स्मृति’ कहलाती है। |
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परिपक्वता तथा अधिगम में अन्तर है(क) परिपक्वता एक जन्मजात प्रक्रिया है जब कि अधिगम एक अर्जित प्रक्रिया(ख) परिपक्वता पर अभ्यास का कोई प्रभाव नहीं पड़ता, जबकि अधिगम पर अभ्यास का प्रभाव पड़ता है।(ग) परिपक्वता एक आन्तरिक एवं अचेतन प्रक्रिया है, जबकि अधिगम एक सचेतन प्रक्रिया है, जिसे मनुष्य जानबूझकर चलाता है।(घ) उपर्युक्त सभी अन्तर |
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Answer» (घ) उपर्युक्त सभी अन्तर |
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परिपक्वता तथा सीखने में क्या सम्बन्ध है? एक वाक्य में लिखिए। |
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Answer» परिपक्वता की प्रक्रिया सीखने से पूर्व की स्थिति है तथा यह सीखने का आधार है, परिपक्वता के अभाव में सम्बन्धित कार्य को सीखना सम्भव नहीं है। |
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परिपक्वता से क्या आशय है? |
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Answer» सीख़ने की प्रक्रिया के सन्दर्भ में परिपक्वता (Maturation) का उल्लेख करना अनिवार्य है। परिपक्वता सीखने की प्रक्रिया का एक अनिवार्य कारक है। |
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