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This section includes InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

32901.

किस मनोवैज्ञानिक ने विस्मरण को मुख्य रूप से एक निष्क्रिय मानसिक प्रक्रिया माना है?

Answer»

ऐबिंगहॉस ने मुख्य रूप से विस्मरण को एक निष्क्रिय मानसिक प्रक्रिया माना है।

32902.

पूर्व सीखे गये विषय को धारण न कर सकना कहलाता है(क) अल्प स्मरण(ख) कल्पना(ग) विस्मरण(घ) इनमें से कोई नहीं

Answer»

सही विकल्प है (ग) विस्मरण

32903.

दमन को विस्मरण का मुख्यतम कारण किसने माना है?(क) मफ(ख) वुडवर्थ(ग) फ्रॉयड(घ) इनमें से कोई नहीं

Answer»

सही विकल्प है (ग) फ्रॉयड

32904.

विस्मरण को रोकने का सर्वोत्तम उपाय क्या है?

Answer»

विस्मरण को रोकने का सर्वोत्तम उपाय है—याद किये गये विषय को । समय-समय पर दोहराते रहना।

32905.

सीखने की गति में होने वाली वृद्धि की दर रुक जाने की स्थिति कहलाती है(क) सीखने का पठार(ख) कुशलता की क्षति(ग) विस्मरण(घ) अयोग्यता

Answer»

(क) सीखने का पठार

32906.

कण्ठस्थीकरण (याद करने) की कौन-सी विधि को आप सर्वोत्तम मानते हैं? लम्बी कविता को किस विधि द्वारा याद करना चाहिए?

Answer»

हम जानते हैं कि कण्ठस्थीकरण अथवा याद करने की विभिन्न विधियाँ हैं। विभिन्न विधियों को ध्यान में रखते हुए स्मरण की क्रिया के सम्बन्ध में निष्कर्षतः हम कह सकते हैं-एक, स्मरण एक व्यक्तिगत प्रक्रिया है तथा दो, स्मरण पर विषय की प्रकृति का प्रभाव पड़ता है। मनोवैज्ञानिक दृष्टि से
व्यक्तिगत भिन्नताएँ देखने को मिलती हैं। प्रत्येक व्यक्ति की रुचि, अभिरुचि, बुद्धि, मनोवृत्ति, योग्यता एवं क्षमता अलग होती है। इसी प्रकार कुछ विषय सरल तो कुछ कठिन, ‘कुछ छोटे तो कुछ लम्बे, कुछ रुचिकर तो कुछ अरुचिकर हो सकते हैं। किस व्यक्ति के लिए स्मरण की कौन-सी विधि सर्वोत्तम होगी, यह निश्चयपूर्वक नहीं कहा जा सकता। वस्तुतः स्मरण की सभी विधियों का सापेक्षिक (ग्नि) महत्त्व दृष्टिगोचर होता है। याद करने वाला व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत विशेषताओं तथा विषय की प्रकृति के अनुसार किसी भी एक उपयुक्त विधि या दो को मिलाकर मिश्रित विधि का उपयोग कर सकता है।

एक लम्बी कविता को कण्ठस्थ करने के लिए सबसे पहले समूची कविता को एक साथ याद किया जाना चाहिए। कुछ अन्तर से थोड़े समय बाद, कविता को इसके पदों में खण्डित करके अलग-अलग कण्ठस्थ किया जाएगा, किन्तु विभिन्न खण्डों या अंशों को परस्पर एक-दूसरे से अवश्य जोड़ते जाना चाहिए। इसकी स्मृति सर्वोत्तम समझी जाती है। स्पष्टत: इसके लिए पूर्ण एवं आंशिक खण्ड विधि को मिलाकर मिश्रित विधि का उपयोग किया जाएगा।

32907.

विस्मरण को रोकने के उपायों का उल्लेख कीजिए।

Answer»

विस्मरण की जीवन में विशिष्ट एवं महत्त्वपूर्ण भूमिका है, किन्तु सीमा से अधिक भूल/विस्मृति का होना हानिकारक है और उस समय इसे रोकना अपरिहार्य हो जाता है। विस्मरण को रोकने के उपाय निम्नलिखित से हैं

(1) दोहरांना— याद की जाने वाली किसी विषय-सामग्री को स्थायी करने की दृष्टि से, उसे याद करने के एक घण्टे के भीतर अवश्य दोहरा लेना चाहिए।

(2) स्वास्थ्य– विस्मरण से बचने के लिए शरीर और मन के स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना आवश्यक है। जिन लोगों का मस्तिष्क दुर्बल हो जाता है, उन्हें मानसिक दुर्बलता दूर करने के लिए पौष्टिक भोजन ग्रहण करना चाहिए।

(3) विश्राम- विषय को याद करने के उपरान्त कुछ देर विश्राम करना अच्छा है, इससे स्मृति दृढ़ हो जाती है तथा विस्मरण नहीं होगा।

(4) अर्तिशिक्षण– विषय को आवश्यकता से अधिक याद कर लेने तथा पुन: उसे बार-बार दोहराने से भूलने पर नियन्त्रण रहता है। इसे अतिशिक्षण कहते हैं।

(5) इच्छा-शक्ति– विषय को इच्छा-शक्ति के साथ याद करना चाहिए। इससे वह मस्तिष्क में स्थायी होगा तथा विस्मृति कम होगी।

(6) साहचर्य स्थापना- विचार साहचर्य के नियम का पालन करने से स्मरण को स्थायित्व मिलता है। इस नियम के अनुसार याद करते समय नवीन ज्ञान को पुराने ज्ञान से जोड़ते हुए चलना चाहिए।

(7) सस्वर पाठन- बोल-बोलकर (सस्वर) पाठ याद करने से विस्मरण की प्रवृत्ति कम। होती है।

(8) निद्रा— याद करने के उपरान्त थोड़ी देर तक सो लेने से विषय का संस्कार मस्तिष्क में * गहरा हो जाता है तथा भूलना कम हो जाता है।

(9) नशे से बचाव- नशाखोर लोगों को नशीले पदार्थों का सेवन छोड़ देना चाहिए। इससे विस्मरण की मात्रा कम होगी।

(10) लम्बी छुट्टियों में अध्ययन– बहुत-से विद्यार्थी लम्बी छुट्टियों में अध्ययन कार्य बन्द कर देते हैं। परिणामतः वे सीखा गया ज्ञान भूल जाते हैं। अत: लम्बी छुट्टियों (जैसे—ग्रीष्मावकाश) में भी अध्ययन की प्रवृत्ति बनाये रखनी चाहिए।विस्मरण के उपर्युक्त उपाय अपनाने पर भूलने की अस्वाभाविक प्रवृत्ति पर अंकुश लगता है।

32908.

विस्मरण को रोकने का उपाय है–(क) विषय को बार-बार दोहराना।(ख) विषय को याद करने के बाद आराम करना अथवा सो जाना(ग) विभिन्न प्रकार के नशों से बचना(घ) उपर्युक्त सभी उपाय।

Answer»

(घ) उपर्युक्त सभी उपाय।

32909.

हिमालय की उत्पत्ति की विवेचना कीजिए। |याहिमालय का निर्माण किस प्रकार हुआ ?

Answer»

उच्चावच से तात्पर्य किसी भू-भाग के ऊँचे व नीचे धरातल से है। सभी प्रकार के पहाड़ी, पठारी वे मैदानी तथा मरुस्थलीय क्षेत्र मिलकर किसी क्षेत्र के उच्चावच का निर्माण करते हैं। उच्चावच की दृष्टि से भारत में अनेक विभिन्नताएँ मिलती हैं। इनका मूल कारण अनेक शक्तियों और संचलनों का परिणाम है, जो लाखों वर्ष पूर्व घटित हुई थीं। इसकी उत्पत्ति भूवैज्ञानिक अतीत के अध्ययन से स्पष्ट की जा सकती है। आज से 25 करोड़ वर्ष पूर्व भारतीय उपमहाद्वीप विषुवत रेखा के दक्षिण में स्थित प्राचीन गोण्डवानालैण्ड का एक भाग था। अंगारालैण्ड नामक एक अन्य प्राचीन भूखण्ड विषुवत रेखा के उत्तर में स्थित था। दोनों प्राचीन भूखण्डों के मध्य टेथिस नामक एक सँकरा, लम्बा, उथला सागर था। इन भूखण्डों की नदियाँ टेथिस में अवसाद जमा करती रहीं, जिससे कालान्तर में टेथिस सागर पट गया। पृथ्वी की आन्तरिक हलचलों के कारण दोनों भूखण्ड टूटे। गोण्डवानालैण्ड से भारत का प्रायद्वीप अलग हो गया तथा भूखण्डों के टूटे हुए भाग विस्थापित होने लगे। आन्तरिक हलचलों से टेथिस सागर के अवसादों की परतों में भिंचाव हुआ और उसमें विशाल मोड़ पड़ गये। इस प्रकार हिमालय पर्वत-श्रृंखला की रचना हुई। इसी कारण हिमालय को वलित पर्वत कहा जाता है।
हिमालय की उत्पत्ति के बाद भारतीय प्रायद्वीप और हिमालय के मध्य एक खाई या गर्त शेष रह गया। हिमालय से उतरने वाली नदियों ने स्थल को अपरदन करके अवसादों के उस गर्त को क्रमश: भरना शुरू किया जिससे विशाल उत्तरी मैदान की रचना हुई। इस प्रकार भारतीय उपमहाद्वीप की भू-आकृतिक इकाइयाँ अस्तित्व में आयीं।

32910.

व्यापार सन्तुलन का अर्थ लिखिए।

Answer»

किसी देश का व्यापार सन्तुलन’ उस देश के आयातों तथा निर्यातों के सम्बन्ध को बताता है। व्यापार सन्तुलन एक ऐसा विवरण होता है जिसमें वस्तुओं के आयात तथा निर्यातों का विस्तृत ब्यौरा दिया जाता है। व्यापार सन्तुलन में केवल दृष्ट निर्यातों तथा आयातों को ही सम्मिलित किया जाता है, अदृष्ट निर्यातों तथा आयातों का उसमें कोई हिसाब नहीं रखा जाता, किसी देश का व्यापार सन्तुलन उसके अनुकूल अथवा प्रतिकूल दोनों हो सकता है। जब दो देशों के बीच आयात-निर्यात बराबर होते हैं, तो व्यापार सन्तुलन की स्थिति होती है। यदि देश ने निर्यात अधिक किया है तथा आयात कम तो व्यापार सन्तुलन अनुकूल कहा जाएगा। इसके विपरीत, यदि आयात अधिक तथा निर्यात कम किया गया है तो प्रतिकूल व्यापार सन्तुलन की स्थिति होगी।

32911.

भाषा से क्या आशय है?

Answer»

पारस्परिक संचार के शाब्दिक रूप को भाषा कहा जाता है।

32912.

भाषागत विकास पर परिवार के सामाजिक-आर्थिक स्तर का क्या प्रभाव पड़ता है?

Answer»

कुछ मनोवैज्ञानिकों का विचार है कि जिन परिवारों का सामाजिक तथा आर्थिक स्तर निम्न होता है, उनमें पले बालक देर से बोलना सीखते हैं। जर्सील्ड, गेसेल, डेविस, यंग तथा मैकार्थी के अनुसार, उच्च वर्गों के बालक जल्दी बोलना सीखते हैं तथा अधिक बोलते हैं। इस प्रकार के वातावरण में पले बालकों का उच्चारण भी शुद्ध होता है तथा शब्द-भण्डार बड़ा होता है। इन बच्चों की भाषा अधिक सुसंस्कृत, शिष्ट तथा परिष्कृत होती है।

32913.

बालक के भाषागत विकास पर पारिवारिक सम्बन्धों का क्या प्रभाव पड़ता है?

Answer»

पारिवारिक सम्बन्ध भाषा-विकास में विशेष योग देते हैं। मैकार्थी और थॉमसन के अनुसार, अनाथालय में रहने वाले बालक बहुत अधिक रोते हैं और कम बलबलाते हैं। ये बालक प्राय: देर से बोलना प्रारम्भ करते हैं। अतः यह सिद्ध होता है कि बालक का भाषा-विकास परिवार में ही समुचित ढंग से होता है। माता-पिता के सम्पर्क और दुलार में बालक शीघ्र बोलना सीख जाता है। डेविस तथा मैकार्थी के अनुसार, बड़े लड़के की भाषा अन्य बच्चों की अपेक्षा अधिक शुद्ध होती है, क्योंकि प्रौढ़ लोगों के साथ उसका सम्पर्क अधिक रहता है।

32914.

भाषागत विकास पर सीखने के अवसरों तथा अनुकरण का क्या प्रभाव पड़ता है?

Answer»

वातावरण में अनेक ऐसे तत्त्व होते हैं, जो बालक के भाषा-विकास में सहायक होते हैं। इन तत्त्वों में सीखने के अवसर और अनुकरण प्रमुख हैं। जिन बालकों को भाषा सीखने के पर्याप्त अवसर प्रदान किये जाते हैं, वे शीघ्र ही सीख जाते हैं। बालक का शब्द-भण्डार पड़ोसी बालकों के साथ खेलने से भी पर्याप्त विकसित होता है। माता-पिता के बोलने-चालने का अनुकरण करके भी बालक बहुत-कुछ सीखते हैं। अत: माता-पिता का कर्तव्य है कि वे अपने बच्चे के सम्मुख शुद्ध और प्रभावमयी भाषा का ही प्रयोग करें। जिन परिवारों के सदस्य आपस में गाली-गलौज और असभ्य शब्दों का प्रयोग करते हैं, वहाँ बालक भी गाली-गलौज करने लग जाते हैं।

32915.

मानव-समाज के लिए भाषा का क्या महत्त्व है?

Answer»

मानव-समाज के लिए भाषा का महत्त्व
(Importance of Language for Human Society)

समस्त प्राणी-जगत् में केवल मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी है, जिसके पास अत्यधिक विकसित भाषा है। विकसित भाषा के ही कारण मनुष्य एक विकसित एवं बहुक्षमतायुक्त प्राणी है। भाषा के ही आधार पर मानव-समाज अत्यधिक संगठित एवं व्यवस्थित है। मानवीय संस्कृति के भरपूर विकास में भी सर्वाधिक योगदान भाषा का ही है। भाषा के अभाव के ही कारण अन्य कोई भी पशु संस्कृति का विकास नहीं कर पाया है। मानव-समाज में सम्पन्न होने वाली समस्त सामाजिक अन्त:क्रियाएँ मुख्य रूप से भाषा के ही माध्यम से परिचालित होती हैं। इस तथ्य को शैरिफ तथा शैरिफ ने इन शब्दों में स्पष्ट किया है, “शब्दों के द्वारा व्यक्ति एक-दूसरे के निकट सम्बन्ध में आते हैं। भाषा के माध्यम से व्यक्ति ऐसी योजनाएँ बनाता है जो मनुष्य को भविष्य में उन्नति की ओर ले जाती हैं। भाषा के माध्यम से व्यक्ति संचित ज्ञान को अन्य व्यक्तियों तक पहुँचाता है। मानव-समाज में व्यक्ति के समाजीकरण की प्रक्रिया में भी सर्वाधिक योगदान भाषा का ही होता है। भाषा के माध्यम से ही व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास होता है तथा व्यक्ति पर समाज का नियन्त्रण लागू किया जाता है। यहाँ यह स्पष्ट कर देना भी आवश्यक है कि समाज में बालकों की शिक्षा की प्रक्रिया भी मुख्य रूप से भाषा के ही माध्यम से सम्पन्न होती है।

32916.

भारत के समुद्रतटीय मैदानों के आर्थिक महत्त्व का वर्णन कीजिए।

Answer»

प्रायद्वीपीय पठार के दोनों ओर पूर्वी तथा पश्चिमी तटीय क्षेत्रों पर पतली सँकरी पट्टी के रूप में जो मैदान फैले हैं, उन्हें समुद्रतटीय मैदान कहते हैं। ये क्रमश: पश्चिमी तथा पूर्वी समुद्रतटीय मैदान कहलाते हैं। इनका आर्थिक महत्त्व अग्रवत् है

1. पश्चिमी तटीय मैदान–प्रायद्वीप के पश्चिम में खम्भात की खाड़ी से लेकर कुमारी अन्तरीप तक इस मैदान का विस्तार है। नर्मदा तथा ताप्ती यहाँ की प्रमुख नदियाँ हैं। नदियों के मुहानों पर बालू जम जाने से यहाँ लैगून निर्मित होते हैं। इनमें मछलियाँ पकड़ी जाती हैं। उपयुक्त जलवायु तथा उत्तम मिट्टी के कारण यहाँ चावल, आम, केला, सुपारी, काजू, इलायची, गरम मसाले, नारियल आदि की फसलें उगायी जाती हैं। सागर तट पर नमक बनाने तथा मछलियाँ पकड़ने का व्यवसाय भी पर्याप्त रूप में विकसित हुआ है। भारत के प्रमुख पत्तन इन्हीं मैदानों में स्थित हैं। काण्दला, मुम्बई (न्हावाशेवा) व कोचीन इस तट के प्रमुख बन्दरगाह हैं।

2. पूर्वी तटीय मैदान–प्रायद्वीपीय पठारों के पूर्वी किनारों पर बंगाल की खाड़ी के तट तक तथा पूर्वी घाट के मध्य प० बंगाल से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक पूर्वी तटीय मैदानों का विस्तार है। इस मैदान में महानदी, गोदावरी, कृष्णा एवं कावेरी नदियों के डेल्टा विकसित हुए हैं। डेल्टाओं में नदियों से अनेक नहरें निकाली गयी हैं, जो सिंचाई का महत्त्वपूर्ण साधन हैं। यह तटीय मैदान उपजाऊ है तथा कहीं-कहीं पर काँप मिट्टी से ढका है। यह मैदान कृषि की दृष्टि से बड़ा अनुकूल है। चावल, गन्ना, तम्बाकू व जूट इस मैदान की मुख्य उपज हैं।

32917.

वे कौन-से कारक हैं, जो बालकों के भाषा-विकास को प्रभावित करते हैं? विवेचना कीजिए।

Answer»

भाषा-विकास को प्रभावित करने वाले कारक
(Factors Influencing the Language Development)

बालकों के भाषा-विकास को प्रभावित करने वाले कारक इस प्रकार हैं|
1. स्वास्थ्य स्वास्थ्य का प्रभाव भाषा- विकास पर भी पड़ता है। जीवन के पहले दो वर्षों में गम्भीर या लम्बी बीमारी होने से बालक का भाषा-विकास ठीक से नहीं हो पाता। रोगी बालक को अन्य बालकों का सम्पर्क नहीं मिलता। बिना बोले ही उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति हो जाती है। उसे बोलने की कोई प्रेरणा नहीं मिलती, जिससे उसका भाषा-विकास पिछड़ जाता है। जिन बालकों में श्रवण दोष पाया जाता है उनका भाषा-विकास अवरोधित हो जाता है। दोषयुक्त तालु, कण्ठ, दाँत तथा जबड़ों के कारण भी बालक शुद्ध भाषा की योग्यता प्राप्त नहीं कर पाता।
2. बुद्धि परीक्षणों के द्वारा यह देखा गया है कि बालक की बुद्धि व उसकी भाषा- योग्यता में गहरा सम्बन्ध है। तीव्रबुद्धि बालक सामान्य बालक की अपेक्षा कम-से-कम चार माह पूर्व बोलना प्रारम्भ कर देता है और मन्दबुद्धि बालक सामान्य बुद्धि वाले बालक से बोलने में तीन वर्ष पिछड़ जाता है। परन्तु सभी मन्दबुद्धि बालकों के सम्बन्ध में यह बात नहीं कही जा सकती। ऐसा भी देखा गया है कि जो बालक अपनी प्रारम्भिक कक्षाओं में भाषा में पिछड़े रहते हैं, ऊँची कक्षाओं में काफी आगे बढ़ जाते हैं।
3. सामाजिक-आर्थिक स्थिति बालक के भाषा- विकास पर परिवार की सामाजिक व आर्थिक स्थिति का प्रभाव भी पड़ता है। शिक्षित परिवार के बालकों का भाषा-विकास अशिक्षित परिवार के बालकों की तुलना में अधिक द्रुतगति से होता है। उच्च सामाजिक स्तर के परिवारों के बालकों का शब्द-भण्डार निर्धन परिवारों के बालकों की अपेक्षा अधिक होता है। मेकार्थी के अनुसार, “उच्च व्यवसाय वाले परिवारों के बालकों पारिवारिक सम्बन्ध की वाक्य-रचना निम्नकोटि के व्यवसाय वाले परिवारों के बालकों की वाक्य-रचना की अपेक्षा कहीं अधिक सुन्दर होती है। इन सबका कारण यही है कि शिक्षित और उच्च सामाजिक व आर्थिक स्तर के परिवारों के बालकों को सीखने और समझने के अधिक अवसर उपलब्ध होते हैं।”
4. पारिवारिक सम्बन्ध- बालक के माता-पिता के साथ क्या सम्बन्ध हैं, माता-पिता बालक के साथ कितना समय व्यतीत करते हैं, माता-पिता बालक से अत्यधिक प्रेम करते हैं या उसे हर समय झिड़कते हैं, इन सब बातों का प्रभाव बालक के भाषा-विकास पर पड़ता है। जिन परिवारों में बालकों की संख्या अधिक होती है, वहाँ माता-पिता बालकों की ओर उचित ध्यान नहीं दे पाते, जिसके परिणामस्वरूप बालकों का भाषा-विकास पिछड़ जाता है। अकेले बालक का विकास जुड़वाँ बालक की तुलना में अधिक अच्छा होता है। क्योंकि जुड़वाँ बालकों को अनुकरण के अवसर नहीं मिलते। सामान्य परिवार में पले बालक का भाषा-विकास अनाथालय में पले बालक की अपेक्षा अच्छा होता है।
5. लिंग-भेद- जीवन के प्रथम वर्ष में शिशु के भाषा-विकास में किसी प्रकार का लिंग-भेद नहीं पाया जाता लेकिन दूसरे वर्ष के आरम्भ से ही यह अन्तर स्पष्ट होने लगता है। लड़कियाँ लड़कों की अपेक्षा शीघ्र बोलना शुरू करती हैं। शब्द-भण्डार, वाक्यों की लम्बाई और उनकी शुद्धता, भाषा की समझ और उच्चारण आदि में लड़कियाँ लड़कों से आगे होती हैं और यह श्रेष्ठता लड़कियों में काफी बड़ी अवस्था तक बनी रहती है लेकिन अन्त में पूर्ण विकास की स्थिति में बहुधा लड़के लड़कियों से आगे हो जाते हैं।}
6. दो भाषाएँ- जहाँ बालक को एक साथ दो भाषाएँ सिखाई जाती हैं वहाँ बालक का भाषा-विकास अवरुद्ध हो जाता है। क्योंकि बालक का ध्यान दोनों ओर रहता है, उसके मस्तिष्क में सन्देह पैदा हो जाता है, उसे एक ही बात के लिए दो-दो शब्द याद करने पड़ते हैं। इससे बालक का शब्द-भण्डार नहीं बढ़ पाता। वह सही उच्चारण नहीं कर पाता। उसमें तनाव पैदा हो जाता है। उसके मस्तिष्क पर व्यर्थ का बोझा लदा रहता है, जिससे उसे समायोजन करने में कठिनाई पैदा होती है। दो भाषाएँ सीखने से केवल भाषा-विकास पर ही नहीं उसके चिन्तन पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। वह यह निश्चय नहीं कर पाता कि किस समय कौन-सा शब्द बोलना उचित है। अतः शैशवावस्था में बालक को केवल उसकी मातृभाषा ही सिखाई जानी चाहिए।

32918.

भाषा-विकास के मुख्य सिद्धान्तों का उल्लेख कीजिए।याभाषा का विकास बालक में किस प्रकार सम्भव है? इस सम्बन्ध में अपने विचार व्यक्त कीजिए।

Answer»

भाषा-विकास के मुख्य सिद्धान्त
(Main Theories of Language Development)

बालक में भाषा का विकास कुछ सिद्धान्तों के अनुसार होता है। इन सिद्धान्तों का विवरण निम्नलिखित है-
1. बोलने के लिए प्रेरणा- बालक को प्रारम्भ में बोलने के लिए किसी-न-किसी प्रकार की प्रेरणा या प्रोत्साहन की आवश्यकता रहती है। वह प्रारम्भ में अपनी मूल आवश्यकताओं के अनुसार ही बोलना सीखता है। दूसरे शब्दों में, बालक भाषा का प्रयोग करके अपने माता-पिता को अपनी विभिन्न आवश्यकताओं से अवगत कराने का प्रयास करता है। संक्षेप में, बालकों में भाषा का विकास प्रेरणाओं पर आधारित होता है।
2. अनुकरण- बालक का भाषा का विकास उसकी अनुकरण-क्षमता पर भी निर्भर करता है। वह अपने परिवारजनों द्वारा बोले गये शब्दों का भी अनुकरण बड़े चाव से करता है। अत: यह आवश्यक है कि बालकों के सम्मुख जिन शब्दों का प्रयोग किया जाए उनको शुद्ध और स्पष्ट उच्चारण किया जाए।
3. स्वर यन्त्र की परिपक्वता- गले, फेफड़ों और स्वर यन्त्र के द्वारा शब्द उच्चारण का कार्य होता है। इनके अतिरिक्त तालू, होंठ, नाक और दाँत भी शब्दोच्चारण में सहायक होते हैं। ज्यों-ज्यों इन अंगों में परिपक्वता आती है, त्यों-त्यों भाषा विकसित होती है।
4. सम्बद्धता- बालक के भाषा-विकास में सम्बद्धता का अपना विशेष योग रहता है। वह अपने विकास-क्रम में शब्दों और उसके अर्थों का सम्बन्ध तथा साहचर्य समझने लगता है। उदाहरण के लिएबालक के सम्मुख जब ‘कुत्ता’ शब्द बोला जाता है, तो उसके सम्मुख कुत्ता उपस्थित किया जाता है। इस प्रकार कुत्ता शब्द के अर्थ से वह ‘कुत्ते’ नामक जानवर से परिचित हो जाता है। भविष्य में जब कभी ‘कुत्ता’ शब्द बोला जाता है तो बिना कुत्ता देखे ही बालक के मानस पटल पर उसकी प्रतिभा अंकित हो जाती है।

32919.

भाषागत विकास पर लिंग-भेद का क्या प्रभाव पड़ता है?

Answer»

एक वर्ष तक बालक तथा बालिका में भाषा-विकास प्राय: एक-सा होता है, परन्तु दूसरे वर्ष से ही दोनों में अन्तर प्रारम्भ हो जाता है। बालिकाएँ बालकों की अपेक्षा पहले बोलना प्रारम्भ कर देती हैं। बालिकाएँ लम्बे वाक्य सरलता से बोल सकती हैं, परन्तु बालक छोटे-छोटे वाक्य ही बोल पाते हैं। इसी प्रकार बालिकाओं को शब्दोच्चारण बालकों की तुलना में अधिक शुद्ध होता है। मैकार्थी के अनुसार, इस भिन्नता का कारण है, बाल्यावस्था में बालिकाओं का अपनी माँ के साथ अधिक रहना। बालक अपने पिता से अधिक लगाव का अनुभव करते हैं, परन्तु पिता प्रायः जीविका हेतु बाहर जाकर कार्य करते हैं। अत: बालकों का भाषा-विकास उचित ढंग से नहीं हो पाता।

32920.

बालक के सन्दर्भ में भाषा के विकास पर परिपक्वता तथा शारीरिक स्वास्थ्य का क्या प्रभाव पड़ता है?

Answer»

बालक के भाषागत विकास पर उसकी परिपक्वता तथा शारीरिक स्वास्थ्य को अनिवार्य रूप से प्रभाव पड़ता है। बोलना अनेक अंगों पर निर्भर करता है; जैसे–फेफड़े, गला, जीभ, होंठ, दाँत, स्वर यन्त्र तथा मस्तिष्क के बाकी केन्द्र आदि। बालक के ये अंग जब परिपक्व हो जाते हैं, तब ही बालक ठीक से बोल पाता है। इसके अतिरिक्त यदि कोई बालक दीर्घकाले तक बीमार रहता है तो भी उसके बोलने की क्रिया कुछ बिगड़ सकती है। यदि बालक के सुनने की क्षमता कम हो या उसके कानों में कुछ दोष हो तो भी बालक की भाषा का विकास सामान्य नहीं रह पाता। यही कारण है कि बधिर बच्चे मूक या गूंगे भी होते हैं।

32921.

मानवीय भाषा के मुख्य प्रकारों या रूपों का उल्लेख कीजिए।

Answer»

मानवीय भाषा के मुख्य प्रकार यो रूप हैं-

⦁    वाचिक अथवा मौखिक भाषा
⦁    अंकित अथवा लिखित भाषा तथा
⦁    सांकेतिक भाषा।

32922.

भाषागत विकास का बालक की बौद्धिक क्षमता से क्या सम्बन्ध है?

Answer»

टरमन, शर्ली, मैकार्थी आदि मनोवैज्ञानिकों का मत है कि बालक की बौद्धिक क्षमता और उसके भाषा-विकास में विशेष सम्बन्ध है। बालक की बोली सुनकर उसकी बौद्धिक योग्यता का ज्ञान हो जाता है, परन्तु जरसील्ड का कहना है कि बोलने की क्षमता को बौद्धिक योग्यता से कोई सम्बन्ध नहीं है। उनके अनुसार जो बालक शीघ्र बोलना सीख जाता है, वह प्राय: सामान्य बुद्धि का होता है और यह भी आवश्यक नहीं है कि जो बालक देर से बोलना सीखता है, वह मन्दबुद्धि वाला ही हो।

32923.

भारत के आयात की किन्हीं चार वस्तुओं के नामों का उल्लेख कीजिए।

Answer»

भारत के आयात की चार वस्तुओं के नाम हैं –

  1. खनिज तेल
  2. उर्वरक एवं रसायन
  3. मशीनें तथा
  4. धातुएँ; जैसे-टिन, पीतल, ताँबा।
32924.

संस्कृति के विकास में भाषा के योगदान या महत्त्व को स्पष्ट करने वाला कोई कथन लिखिए।

Answer»

“निश्चित रूप से भाषा मानव-संस्कृति की अत्यन्त महत्त्वपूर्ण वस्तु है तथा भाषा के बिना संस्कृति का अस्तित्व और कार्य नहीं हो सकता।”

32925.

नवजात शिशु की भाषा किस रूप में होती है?

Answer»

नवजात शिशु का क्रन्दन या जन्म-रोदन ही उसकी प्रारम्भिक भाषा होती है।

32926.

भाषा की एक संक्षिप्त परिभाषा लिखिए।

Answer»

‘‘भाषा की परिभाषा व्यक्तियों के बीच परम्परागत प्रतीकों के पाध्यम से विचार-विनिमय की प्रणाली के रूप में की जा सकती है।”

32927.

भाषागत विकास के लिए अनिवार्य शर्त है(क) नियमित रूप से विद्यालय में जाना(ख) लिखना-पढ़ना सीखना(ग) सामाजिक सम्पर्क(घ) इनमें से कोई नहीं

Answer»

सही विकल्प है (ग) सामाजिक सम्पर्क

32928.

भाषा के विकास के लिए सर्वाधिक अनिवार्य कारक क्या है?

Answer»

भाषा के विकास के लिए सर्वाधिक अनिवार्य कारक है-सामाजिक सम्पर्क।

32929.

भाषा तथा शिक्षा का सम्बन्ध है(क) भाषा तथा शिक्षा में कोई सम्बन्ध नहीं है(ख) भाषा तथा शिक्षा का सम्बन्ध स्पष्ट नहीं है(ग) भाषा सीखने के लिए शिक्षा आवश्यक है(घ) सामान्य रूप से भाषा के माध्यम से ही शिक्षा का आदान-प्रदान होता है

Answer»

(घ) सामान्य रूप से भाषा के माध्यम से ही शिक्षा का आदान-प्रदान होता है

32930.

शिशु की भाषा का प्रारम्भ होता है(क) बुब्बू शब्द से(ख) माँ शब्द से(ग) जन्म-रोदन से(घ) इनमें से कोई नहीं

Answer»

सही विकल्प है (ग) जन्म रोदन से

32931.

भाषा के विकास को प्रभावित करने वाले कारक हैं(क) परिपक्वता(ख) सामाजिक सम्पर्क(ग) परिवार का सामाजिक एवं आर्थिक स्तर(घ) उपर्युक्त सभी

Answer»

सही विकल्प है  (घ) उपर्युक्त सभी

32932.

व्यापार सन्तुलन का क्या अर्थ है?

Answer»

यदि निर्यात आयातों से अधिक होते हैं तो देश का व्यापार-शेष ‘अनुकूल’ होता है। यदि आयात निर्यातों से अधिक होते हैं तो व्यापार-शेष प्रतिकूल’ होता है। यदि निर्यात और आयात बराबर होते हैं तो व्यापार-शेष सन्तुलित होता है। इसी को व्यापार सन्तुलन भी कहते हैं।

32933.

विचारों के आदान-प्रदान का प्रमुख साधन है(क) भाषा(ख) संकेत(ग) प्रतीक(घ) इनमें से कोई नहीं

Answer»

सही विकल्प है  (क) भाषा

32934.

भारतीय अर्थव्यवस्था में विदेशी व्यापार का क्या महत्त्व या लाभ है?

Answer»

भारत के लिए विदेशी व्यापार के महत्त्व या लाभ निम्नलिखित हैं –

1. प्राकृतिक संसाधनों का पूर्ण उपयोग – एक देश ऐसे उद्योगों की स्थापना एवं संचालन करता है, जिनसे उसे अधिकतम तुलनात्मक लाभ प्राप्त होता है और उस बाजार (देश) में वह अपनी उत्पादित वस्तुओं को बेचता है, जहाँ उसे वस्तुओं का सबसे अधिक मूल्य मिलता है। फलस्वरूप वह उपलब्ध प्राकृतिक संसाधानों को सर्वोत्तम उपयोग करता है।

2. औद्योगीकरण को प्रोत्साहन – विदेशी व्यापार के माध्यम से देश में उद्योग-धन्धों को विकसित करने के लिए आवश्यक उपकरण, कच्चा माल व तकनीकी ज्ञान सरलता से उपलब्ध हो जाते हैं। फलतः देश में औद्योगिक विकास को प्रोत्साहन मिलता है।

3. अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग एवं सदभावना में वृद्धि – विदेश व्यापार के फलस्वरूप विभिन्न देशों के नागरिक एक-दूसरे के निकट सम्पर्क में आते हैं और एक-दूसरे के विचारों एवं दृष्टिकोणों से परिचित होते हैं। फलस्वरूप सांस्कृतिक सहयोग एवं परस्पर विश्वास में वृद्धि होती है।

32935.

विदेशी व्यापार का क्या अर्थ है ?याविदेशी व्यापार से आप क्या समझते हैं ?याविदेशी व्यापार को स्पष्ट कीजिए।

Answer»

जब दो या दो से अधिक देश परस्पर एक-दूसरे की वस्तुओं या सेवाओं का क्रय-विक्रय करते हैं तब इसे विदेशी व्यापार कहते हैं।

32936.

बाड़ लगाना किसे कहते हैं? बाड़ लगाने की सभी विधियों का वर्णन कीजिए।

Answer»

फसलों की जानवरों से सुरक्षा हेतु जो भी उपाय किए जाते हैं, उन्हें बाड़ लगाना कहते है। फसलों की सुरक्षा निम्न प्रकार से की जाती है –

  1. पौधों की बाड़ लगाना
  2. कँटीली झाड़ी की बाड़ लगाना
  3. खाई बनाकर सुरक्षा
  4. कॅटीले तार की बाड़ बनाना।
  5. जालीदार तार की बाड़
  6. खखड़ी बाड़ बनाना।
  7. पक्की बाड़ बनाना।
32937.

फसलों में बाड़ का क्या महत्त्व है?

Answer»

फसलों में बाड़ का बहुत महत्त्व है। बाड़ लगाने से जंगली एवं पालतू जानवरों से फसल की सुरक्षा होती है।

32938.

सरकार की वर्तमान आयात-नीति के प्रमुख तत्त्वों को बताइए।

Answer»

सरकार की वर्तमान आयात-नीति के प्रमुख तत्त्व इस प्रकार हैं

वित्तीय वर्ष 2001-02 के लिए नयी आयात नीति की घोषणा तत्कालीन केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मन्त्री मुरासोली मारन ने 31 मार्च, 2001 ई० को की। भारतीय विदेशी व्यापार के इतिहास में यह नीति ऐतिहासिक है, क्योंकि इस नीति से शेष बचे सभी 715 उत्पादों के आयात पर से परिमाणात्मक प्रतिबन्ध हटा लिये गये हैं। अब सुरक्षा की दृष्टि से अति संवेदनशील उत्पादों को छोड़कर सभी उत्पादों का आयात देश में किया जा सकेगा। विश्व-व्यापार संगठन के नियमों के प्रति प्रतिबद्धता के चलते 714 उत्पादों के आयात पर से यह प्रतिबन्ध 1 अप्रैल, 2000 ई० से ही हटा लिये गये थे; परन्तु आयातों पर नियन्त्रण रखने के लिए निम्नलिखित उपाय किये गये हैं

⦁    आयात आवश्यक पूँजीगत साधनों के अभाव की पूर्ति के लिए हो।
⦁    विकास आवश्यकताओं की प्राथमिकता के अनुसार, कच्चा माल तथा खनिज तेल का आयात किया जाए।
⦁    कम आवश्यक आयातों को या तो प्रतिबन्धित किया जाए या अनुज्ञापन प्रणाली के द्वारा न्यूनतम आयात किया जाए।
⦁    ऊँचे सीमा शुल्क द्वारा आयातों को हतोत्साहित भी किया जाए।
⦁    आवश्यक वस्तुओं के आयातों को ध्यान में रखकर अनावश्यक या विलासिता की वस्तुओं के आयात पर नियन्त्रण लगाया जाए।

32939.

भारत के चार धामों के नाम और वह कहाँ स्थित हैं, लिखो।

Answer»

(१) बद्रीनाथ (उत्तराखण्ड)
(२) द्वारिका (गुजरात)
(३) जगन्नाथपुरी (उड़ीसा)
(४) रामेश्वरम (तमिलनाडु)

32940.

पत्थर के टुकड़ों की बिना मिट्टी या सीमेन्ट द्वारा चुनाई कर बाड़ लगाने की विधि को क्या कहते हैं?

Answer»

खखड़ी बाड़ बनाना।

32941.

कैंटीले तार द्वारा बाड़ में क्या-क्या प्रयोग किया जाता है?

Answer»

कॅटीले तार की बाड़ में बड़े क्षेत्रों में खम्भों के सहारे कॅटीले तार लगाए जाते हैं।

32942.

खखड़ी द्वारा बाड़ कैसे बनायी जाती है?

Answer»

इस विधि में पहाड़ी क्षेत्रों में पत्थर के छोटे-छोटे टुकड़ों को दीवार की तरह खेत के चारों तरफ रखकर बाड़ बनाते हैं। इसमें सीमेन्ट या मिट्टी का प्रयोग दीवार बनाने हेतु नहीं किया जाता है।

32943.

बाड़ कितने प्रकार की होती है? पहाड़ी क्षेत्र के लिए बाड़ लगाने की कौन-सी विधि उपयुक्त है?

Answer»

बाड़ निम्न प्रकार की होती है-

  1. पौधों की बाड़ लगाना
  2. कँटीली झाड़ी की बाड़ लगाना
  3. खाई बनाकर सुरक्षा
  4. कॅटीले तार की बाड़ बनाना।
  5. जालीदार तार की बाड़

पहाड़ी क्षेत्र में खखड़ी बाड़ बनाना उपयुक्त होता है। यह पत्थर से दीवार की तरह लगाकर बनाई जाती है।

32944.

पौधों की बाड़ लगाने से क्या लाभ होता है?

Answer»

इस विधि में जानवरों से फसलों की सुरक्षा मेड़ों के किनारे झाड़दार पौधे लगाकर की जाती है। बाड़ लगाने हेतु सरपत, मेंहदी आदि पौधों का चुनाव किया जाता है।

32945.

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –(क) पौधों की बाड़ में ____ के पौधों का प्रयोग होता है।(ख) पशुओं से फसल सुरक्षा ____ लगाकर की जाती है।(ग) खखड़ी को प्रयोग ____ क्षेत्रों में होता है।(घ) कँटीली झाड़ी की बाड़ में ___ तथा ____ पौधों का प्रयोग होता है।(ङ) कॅटीले तार की बाड़ में ____ का प्रयोग होता है।

Answer»

(क) पौधों की बाड़ में सरपत तथा मेहंदी के पौधों का प्रयोग होता है।
(ख) पशुओं से फसल सुरक्षा बाड लगाकर की जाती है।
(ग) खखड़ी को प्रयोग पहाड़ी क्षेत्रों में होता है।
(घ) कँटीली झाड़ी की बाड़ में बबूल तथा जंगली जलेबी पौधों का प्रयोग होता है।
(ङ) कॅटीले तार की बाड़ में खम्भों का प्रयोग होता है।

32946.

कुछ खनिज पदार्थों के नाम बताओ/लिखो

Answer»

लोहा, कोयला, सोना, पेट्रोलियम पदार्थ आदि।

32947.

जालीदार तार की बाड़ लगायी जाती है –(क) छोटे भूखण्ड के किनारे(ख) मध्यम भूखण्ड के किनारे(ग) नदी किनारे(घ) बड़े भूखण्ड के किनारे

Answer»

सही विकल्प है (क) छोटे भूखण्ड के किनारे

32948.

कैंटीली झाड़ी विधि में प्रयोग किया जाता है –(क) बबूल, जंगल, जलेबी(ख) ज्वार(ग) बाजरा(घ) अरहर

Answer»

सही विकल्प है (क) बबूल, जंगल, जलेबी

32949.

खखड़ी की बाड़ में प्रयोग किया जाता है –(क) ईंट(ख) पत्थर(ग) लकड़ी(घ) तार

Answer»

सही विकल्प है (ख) पत्थर

32950.

कँटीली झाड़ी द्वारा बाड़ लगाने में किन-किन पौधों का प्रयोग किया जाता है?

Answer»

कँटीली झाड़ी द्वारा बाड़ लगाने हेतु झरबेरी, करौंदा, बबूल, जंगली जलेबी इत्यादि पौधों का प्रयोग किया जाता है।