This section includes InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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पौधों की बाड़ लगाने में प्रयोग किए जाते हैं –(क) सरपत, करौंदा आदि(ख) गेहूँ(ग) बाजरा(घ) खखड़ी |
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Answer» सही विकल्प है (क) सरपत, करौंदा आदि |
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सूक्ष्म पोषक तत्त्व क्या हैं? उनके नाम लिखिए। |
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Answer» जिन तत्त्वों की पौधों को बहुत कम जरूरत होती है, उन्हें सूक्ष्म पोषक तत्त्व कहते हैं। सूक्ष्म पोषक तत्वों में आयरन, मैग्नीज, कॉपर, जिंक, बोरॉन आदि हैं। |
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फसलों में सिंचाई की जरूरत क्यों पड़ती है? वर्णन कीजिए। |
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Answer» उपयुक्त समय पर वर्षा न होने से पौधों के उपयुक्त विकास और वृद्धि के लिए कृत्रिम रूप से जल देने की प्रक्रिया की जरूरत होती है, जिसे सिंचाई कहते हैं। |
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संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए-‘भूकम्प की भविष्यवाणी’। |
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Answer» भूकम्प की भविष्यवाणी करने में निम्नलिखित बिन्दुओं का विशेष महत्त्व है ⦁ किसी क्षेत्र में हो रही भूगर्भीय गतियों का उस क्षेत्र में हो रहे भू-आकृति परिवर्तनों से अनुमान लगाया जा सकता है। ऐसे क्षेत्र जहाँ भूमि ऊपर-नीचे होती रहती है, अत्यधिक भूस्खलन होते हैं, नदियों का असामान्य मार्ग परिवर्तन होता है, प्रायः भूकम्प की दृष्टि से संवेदनशील होते हैं। |
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गर्मी में मृदा जल का वाष्पीकरण अधिक होता है। |
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Answer» गर्मी में पानी भाप बनकर उड़ता है। |
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पक्की बाड़ बनाई जाती है –(क) ईंटों एवं पत्थरों को चुनकर(ख) कँटीली झाड़ी लगाकर(ग) तार लगाकर(घ) खाई बनाकर |
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Answer» सही विकल्प है (क) ईंटों एवं पत्थरों को चुनकर |
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बलुई व बलुई दोमट मृदा में पानी शीघ्रता से रिसता है। |
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Answer» बलुई व बलुई दोमट में जल धारण क्षमता नहीं के बराबर या कम होने के कारण पानी शीघ्रता से रिसता है। |
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मुख्य पोषक तत्त्व है –(क) आयरन(ख) मैग्नीज(ग) कॉपर(घ) नाइट्रोजन |
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Answer» सही विकल्प है (घ) नाइट्रोजन |
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फसलों के लिए जल की आवश्यकता को प्रभावित करने वाले कौन-कौन से कारक हैं? वर्णन कीजिए। |
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Answer» जल की आवश्यकता को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं –
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भूकम्प आपदा के समय आवश्यक सावधानियों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» यह सत्य है कि भूकम्प आकस्मिक रूप से आता है। भूकम्प के आने पर मानसिक सन्तुलन बनाये रखें तथा अधिक घबराएँ नहीं। इस समय कुछ सावधानियाँ नितान्त आवश्यक होती हैं। सामान्य रूप से आप जहाँ हों, वहीं टिके रहें। यदि हो सके तो दीवारों, छतों और दरवाजों से दूर रहें। इसके साथ-ही-साथ दीवारों के टूटने तथा मलबा गिरने पर ध्यान रखें तथा बचाव के उपाय करें। |
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किसी फसल में सिंचाई की आवश्यकता को कम करने में निम्नांकित में से कौन-सा कारक महत्त्वपूर्ण है?(क) मृदा में उपलब्ध जैव पदार्थ की प्रचुर मात्रा(ख) बलुई मृदा(ग) फसल में खरपतवार की अधिकता(घ) रासायनिक उर्वरकों का अधिक प्रयोग |
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Answer» सही विकल्प है (क) मृदा में उपलब्ध जैव पदार्थ की प्रचुर मात्रा |
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सिंचाई के साधनों का वर्णन कीजिए। |
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Answer» किसान जल स्रोतों से अपने खेतों तक जल पहुँचाने हेतु अनेक साधनों का प्रयोग करता है जैसे बेड़ी, ढेकली, दोन, चरसा, रहट, चेन पम्प आदि। इसकी विस्तृत जानकारी निम्नवत है – 1. बेड़ी (दौरी या दोगला) – यह एक मीटर की गहराई से पानी उठाने के लिए प्रचलित साधन है। इसमें बाँस की दोहरी तथा घनी बुनाई द्वारा तैयारी टोकरी प्रयोग में लाई जाती है। 2. ढेकली – इसे 3 से 4 मीटर गहराई से पानी उठाने के लिए प्रयोग में लाया जाता है। ढेकली को चलाने के लिए एक व्यक्ति की आवश्यता होती है। इसमें लकड़ी की थूनी पर धुरी के सहारे 5-6 मीटर लम्बी बल्ली इस तरह लगाते हैं कि पानी के स्रोत की तरफ बल्ली का दो तिहाई से कुछ ज्यादा भाग रहे। बल्ली के दूसरे किनारे पर लोहे या पत्थर का 20-25 किग्रा का वजन बांध दिया जाता है। 3. दोन – इससे लगभग 60 से 90 सेमी की गइराई से पानी निकाला जाती है। यह लगभग 3 मीटर लम्बा टिन द्वारा निर्मित्त नाव के आकार का होता है। इसका एक सिरा थोड़ा चौड़ा तथा मुँह बन्द होता है। दूसरा सिरा सकरा तथा मुँह खुला होता है। 4. चरसा – आपने अपने गाँव या आस-पास देखा होगा कि कुँए से सिंचाई करने के लिए चरसा का प्रयोग होता है। कुँए के ऊपरी भाग पर बल्लियों के सहारे लकड़ी की बड़ी गड़ारी रखी जाती है। इस गड़ारी पर मोटी रस्सी के सहारे चमड़े का बड़ा थैला (मोट) बाँधते हैं जो कुँए से पानी भर कर ऊपर लाता है। एक जोड़ी बैल ऊँचाई से नीचे की ओर ढालू जमीन पर पानी भरा थैला खींचते हैं। ज्यों ही पानी भरा थैला कुँए पर आता है, एक व्यक्ति जो वहाँ खड़ा रहता है, इसे अपनी ओर खींच कर पानी गिराने के बाद चरसे को वापस कुँए में डाल देता है। 5. चेन पम्प – इसके द्वारा 1.5 मीटर से 3 मीटर की गहराई से पानी उठाया जाता है। इस यन्त्र में लोहे की एक जंजीर में छोटे छोटे गट्टों की माला लोहे के बड़े पहिए पर चढ़ी रहती है। गट्टेदार माला को घुमाने पर लोहे के पाइप के सहारे पानी ऊपर आता है। 6. बल्देव बाल्टी – यह यन्त्र एक मीटर तक की गहराई से पानी निकालने के लिए सर्वोत्तम पाया गया है। इसमें दोन की भाँति दो बल्टॅिया होती है जो गड़ारी पर पड़ी हुई रस्सियों के सहारे बारी-बारी से पानी में जाती है। और पानी भर कर ऊपर आती हैं। इसे चलाने के लिए एक जोडी बैल की आवश्यकता पड़ती है। 7. पेंच (इजिप्शियन स्कू) – इस यन्त्र को पेंच भी कहा जाता है। यह लकड़ी के ढोल के समान होता है। और भीतर से स्क्रू (पेंच) के समान बनावट होती है। इसका एक सिरा पानी के अनदर लकड़ी के कुन्दे पर रखा होता है। यन्त्र को घुमाने पर पानी पेंच के सहारे ऊपरी सिरे से बाहर आता है। 8. यन्त्र चालिक पम्प – अधिक गहराई से भूमिगत जल को उठाने के लिए इस प्रकार के पम्पों का प्रयोग किया जाता है जिन्हें बिजली की मोटर या डीजल इंजन द्वारा चलाते हैं। |
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सिंचाई की दोन और पेच (इजिप्शियन स्कू) साधनों का तुलनात्मक वर्णन कीजिए। |
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Answer» दोन – 1 मीटर से कम गहराई से पानी निकालते हैं। दोन 3 मी0 लम्बे टिन से निर्मित नाव जैसी । होती है। एक सिरा चौड़ा तथा मुँह बन्द होता है जबकि दूसरा सिरा सकरा और मुँह खुला होता है। इससे पानी उठाने का काम एक आदमी करता है। पानी स्रोत के समीप दो बल्लियों के बीच लगी घूरी के सहारे 4 मीटर लम्बी बल्ली के एक किनारे पर दोन को बाँधा जाता है दूसरे किनारे पर पत्थर या बोरे में मिट्टी बाँध दी जाती है। पेच (इजिप्शियन स्क्रू) – यह लकड़ी के ढोल के समान होता है। लम्बाई लगभग 1.5 मीटर तथा व्यास लगभग 40 सेमी० होता है। यह यंत्र 40° से 45° का कोण बनाते हुए लगाया जाता है। एक सिरा पानी में लकड़ी के कुंदे पर रखा जाता है। यंत्र को घुमाने पर पानी पेच के सहारे ऊपरी सिरे से बाहर आता है। इसे चलाने के लिए दो व्यक्तियों की आवश्यकता होती है। |
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फसलों को सिंचाई की आवश्यकता क्यों पड़ती है?(क) पौधों की बढ़वार के लिए(ख) पौधे की पत्तियों की बढ़वार रोकने के लिए(ग) मृदा में वायु के संचार को बढ़ाने के लिए।(घ) मृदा की जल धारण क्षमता की वृद्धि के लिए |
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Answer» सही विकल्प है (क) पौधों की बढ़वार के लिए |
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ऊसर भूमि को सिंचाई द्वारा फसल उगाने योग्य बनाया जा सकता है। |
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Answer» ऊसर में पानी खड़ा करने (सिंचाई) से उसकी ऊपरी पर्त का खारापन नीचे चला जाता है और धान, वरषम बरसी बोते रहने से जैविक खाद के प्रयोग से वह धीरे-धीरे उपजाऊ होने लगती है। |
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भूकम्प आपदा के पश्चात किए जाने वाले कार्यों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» सामान्य रूप से भूकम्प की प्रबलता अल्प समय के लिए ही होती है, परन्तु अल्प समय में ही अनेक गम्भीर प्रतिकूल प्रभाव हो जाते हैं। भूकम्प के पश्चात् भी बहुत सजग रहना आवश्यक होता है। इस समय परिवार के बच्चों तथा वृद्ध सदस्यों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है। इस समय घर में गैस के सिलेण्डर को बन्द रखें तथा आग न जलाएँ। रेडियो तथा दूरदर्शन को चलाए रखें, सभी आवश्यक घोषणाओं को ध्यानपूर्वक सुने तथा आवश्यक कार्य करें। |
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सूक्ष्म पोषक तत्त्व है –(क) नाइट्रोजन(ख) फॉस्फोरस(ग) पोटाश।(घ) जिंक |
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Answer» सही विकल्प है (घ) जिंक |
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बाढ़ के समय मुख्य रूप से क्या सावधानियाँ आवश्यक होती हैं? |
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Answer» बाढ़ के समयं सबसे अधिक आवश्यक कार्य है : |
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खाद के रूप में प्रयोग की जाने वाली तीन खलियों के नाम लिखिए। |
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Answer» खाद के रूप में प्रयुक्त होने वाली तीन खलियों के नाम हैं – नीम, महुआ और अलसी। |
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सिंचाई कब करनी चाहिए?(क) जब पौधे हरे भरे दिखाई पड़े।(ख) जब फसल को कीड़ों से बचानी हो।(ग) जब पौधों की पत्तियाँ तेज धूप में मुरझाने लगे।(घ) जब पानी बरसने की सम्भावना हो। |
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Answer» सही विकल्प है (ग) जब पौधों की पत्तियाँ तेज धूप में मुरझाने लगे। |
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आवश्यक पोषक तत्वों का वर्गीकरण कीजिए। |
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Answer» पोषक तत्वों को आवश्यकता के आधार पर तीन वर्गों में बाँटा गया है –
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मुख्य पोषक तत्वों को पौधों की वृद्धि में क्या महत्त्व है? |
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Answer» मुख्य पोषक तत्वों का पौधों की वृद्धि में महत्त्वपूर्ण स्थान हैं क्योंकि कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन पौधों के लगभग 95% भाग का निर्माण करते हैं। पौधों के शुष्क भाग का लगभग 44% कार्बन, 40% ऑक्सीजन एवं 8% हाइड्रोजन होता है। प्रकाश संश्लेषण क्रिया द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड व जल के संयोग से पौधों में शर्करा और स्टार्च का निर्माण होता है। हरे पौधों में यही जीवन का आधार है। |
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हरी खाद को परिभाषित कीजिए। |
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Answer» सनई, ढेचा, लोबिया आदि के हरे पौधों को मृदा उर्वरता बढ़ाने के लिए भूमि में दबाने से जो खाद प्राप्त होती है, उसे हरी खाद कहते हैं। |
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आपदाओं के मुख्य वर्गों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» आपदाओं के मुख्य रूप से चार वर्ग निर्धारित किये गये हैं ⦁ आकस्मिक रूप से घंटित होने वाली आपदाएँ |
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गम्भीर आपदाओं से क्या आशय है? |
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Answer» उन समस्त प्राकृतिक घटनाओं को गम्भीर आपदाओं के रूप में जाना जाता है, जिनसे जनजीवन एवं सम्पत्ति आदि पर गम्भीर प्रतिकूल या विनाशकारी प्रभाव पड़ता है। |
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भूचाल और बाढ़ जैसी आपदाओं से होने वाले बोझ को कम करने के लिए आप क्या सुझाव देंगे? |
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Answer» भूचाल तथा बाढ़ दोनों ही एकाएक आने वाली गम्भीर प्राकृतिक आपदाएँ हैं। भूचाल से सर्वाधिक हानि मकानों के गिरने से होती है। बाढ़ से मुख्य हानि सम्बन्धित क्षेत्र में जल व्याप्त हो जाने के कारण होती है। इससे जान-माल, पालतू पशुओं तथा खड़ी फसलों को हानि पहुँचती है। इन दोनों ही आपदाओं के बोझ को कम करने के लिए बाहरी सहायता की आवश्यकता होती है। |
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कार्बनिक पदार्थ का मृदा पर क्या प्रभाव पड़ता है? |
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Answer» कार्बनिक पदार्थ का मृदा पर बहुत प्रभाव पड़ता है। इससे मृदा का उपजाऊपन बढ़ जाता है। |
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पौधों में नाइट्रोजन के महत्त्व को लिखिए। |
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Answer» नाइट्रोजन को पोषक तत्त्वों का राजा कहते हैं। यह एक संरचनात्मक तत्त्वं है। नाइट्रोजन पौधों में हरा रंग क्लारोफिल उत्पन्न करता है। यह पौधों की तीव्र वृद्धि में सहायक होता है। |
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पौधों में नत्रजन की कमी के लक्षण लिखिए। |
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Answer» पौधों में नत्रजन की कमी के लक्षण निम्नलिखित हैं-
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मुख्य प्राकृतिक आपदाएँ कौन-कौन सी हैं? |
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Answer» भूकम्प, बाढ़, सूखा, भूस्खलन, ज्वालामुखी का फटना, तूफान, समुद्री तूफान,ओलावृष्टि बादल फटना तथा सूनामी या समुद्री लहरें आदि मुख्य प्राकृतिक आपदाएँ हैं। |
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आकस्मिक रूप से घटित होने वाली मुख्य प्राकृतिक आपदाओं का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» भूकम्प, ज्वालामुखी का विस्फोट, सूनामी, बादल का फटना, चक्रवातीय तूफान, भू-स्खलन तथा हिम की आँधी आकस्मिक रूप से घटित होने वाली मुख्य प्राकृतिक आपदाएँ हैं। |
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हमारे जीवन में आग का क्या स्थान है? |
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Answer» हमारे जीवन में आग का महत्त्वपूर्ण स्थान है। आग एक अति महत्त्वपूर्ण एवं प्रबल कारक है, जो मानव-जीवन के लिए उपयोगी एवं सहायक है। |
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उर्वरक है –(क) गोबर की खाद(ख) कम्पोस्ट(ग) हरी खाद(घ) रासायनिक खाद |
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Answer» सही विकल्प है (घ) रासायनिक खाद |
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गोबर गैस संयंत्र से होने वाले लाभों का वर्णन कीजिए। |
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Answer» गोबर गैस संयंत्र से लाभ –
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खाद किसे कहते हैं? समझाकर लिखिए। |
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Answer» जीव-जन्तुओं एवं पेड़-पौधों के अवशेषों के विघटित अंश को ‘खाद’ कहते हैं। गोबर और घर का कचरा सड़ने के बाद खाद बन जाता है। |
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उर्वरक तैयार किया जाता है –(क) गड्ढे में(ख) जमीन में(ग) कारखाने में(घ) गाँव में |
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Answer» सही विकल्प है (ग) कारखाने में |
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रिक्त स्थानों की पूर्ति कोष्ठक में दिए गए शब्दों से कीजिए।(क) कार्बनिक पदार्थ की मात्रा ____ में अधिक पाई जाती है। (खाद, उर्वरक)(ख) जैविक खाद को ____ में तैयार किया जाता है। (गड्ढे, कारखाने)(ग) जैविक खाद का प्रयोग बुआई ___ किया जाता है। (से पूर्व, बाद में)(घ) पशुओं के नीचे बिछायी जाने वाली वनस्पतिक सामग्री को ____ कहते हैं। (कूड़ा कचरा, बिछाली)(ङ) तिलहनी फसलों के बीजों से तेल निकालने के बाद शेष भाग को ____ कहते हैं। (छिलका, खली) |
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Answer» (क) कार्बनिक पदार्थ की मात्रा खाद में अधिक पाई जाती है। |
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धीरे-धीरे अथवा क्रमशः आने वाली मुख्य प्राकृतिक आपदाएँ कौन-कौन सी हैं? |
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Answer» सूखा, अकाल, किसी क्षेत्र का मरुस्थलीकरण तथा मौसम एवं जलवायु सम्बन्धी परिवर्तन धीरे-धीरे अथवा क्रमशः आने वाली मुख्य प्राकृतिक आपदाएँ हैं। |
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जैविक खाद है –(क) नाइट्रोजनी उर्वरक(ख) फास्फेटी उर्वरक(ग) पोटाश उर्वरक(घ) गोबर की खाद |
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Answer» सही विकल्प है (घ) गोबर की खाद |
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अंग्रेजों ने अपनी फौजी ताकत को काफी मजबूत किया। |
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Answer» जिससे वे भारतीय राजाओं को हराकर भारत पर राज कर सकें। |
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वे वस्तुएँ जिन्हें विदेशी भारत से अपने देश ले जाते थे। |
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Answer» वे भारत से कपास, रेशम, नीम, कच्चा माल, लौह अयस्क अपने देश ले जाते थे। |
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भारत से व्यापार करनेवाले देशों के नाम। |
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Answer» पुर्तगाल, हॉलैंड, फ्रांस और इंग्लैंड। |
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देश के किसानों, बुनकरों तथा राजाओं-महाराजाओं ने अंग्रेजों का विरोध किया। |
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Answer» क्योंकि अंग्रेजों ने अपने फायदे के लिए इन लोगों का अधिकार छीन लिया था। |
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भारतीय बुनकर अंग्रेजी शासन में गरीब हो गए। |
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Answer» क्योंकि अंग्रेजी शासन काल में बुनकरों को कपास मिलना बन्द हो गया और वे बेरोजगार हो गए। |
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बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला ने अंग्रेजों को कोलकाता किले से तोपें हटा देने का आदेश दिया। |
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Answer» क्योंकि नवाब सिराजुद्दौला को अंग्रेजों का तोप व सिपाही रखना पसन्द नहीं था। |
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अंग्रेजों ने भारतीय किसानों को नील की खेती करने के लिए मजबूर किया। |
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Answer» क्योंकि अंग्रेजों को नील की जरूरत पड़ती थी। |
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उड़नपट्टी तथा नियंत्रण केंद्र से तुम क्या समझते हो? |
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Answer» हवाई जहाज के उड़ान भरने व उतरने के लिए उड़नपट्टी प्रयोग की जाती है तथा उसके नियंत्रण आदि के लिए नियंत्रण केंद्र बनाए गए हैं। |
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रेलगाड़ी विषय पर दस-पंद्रह पंक्तियाँ लिखो। |
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Answer» रेलगाड़ी यातायात के साधनों में सबसे महत्त्वपूर्ण है। यह भारत में पहली बार १८५३ ई० में मुंबई से थाने के बीच चली थी। पहले रेलगाड़ी भाप इंजन से चलती थी अब ये डीजल और बिजली से चलती है। करीब-करीब भारत के सभी क्षेत्रों में इनकी पहुँच है। लम्बी दूरी तय करने के लिए यातायात का यह साधन सस्ता और सुलभ है। इनसे लाखों लोग प्रतिदिन एक स्थान से दूसरे स्थान आते-जाते हैं। ये माल (सामान) भी ढोकर एक स्थान से दूसरे स्थान पहुंचाते हैं। माल ढोने वाली रेल को मालगाड़ी कहते हैं। रेलगाड़ी के इंजनों का निर्माण चितरंजन और कोच (डिब्बों) का निर्माण कपूरथला और जमालपुर में होता है। शताब्दी एक्सप्रेस भारत की सबसे तेज रफ्तार से चलने वाली ट्रेन है। |
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| 32999. |
भारत में निर्यात-वृद्धि के लिए दो सुझाव दीजिए। |
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Answer» भारत में निर्यात वृद्धि के लिए दो सुझाव निम्नवत् हैं –
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| 33000. |
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में क्या काम होता है? |
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Answer» अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में गम्भीर रोगों का इलाज व उनसे संबंधित वैज्ञानिक खोज होती है। |
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