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सिंचाई के साधनों का वर्णन कीजिए।

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किसान जल स्रोतों से अपने खेतों तक जल पहुँचाने हेतु अनेक साधनों का प्रयोग करता है जैसे बेड़ी, ढेकली, दोन, चरसा, रहट, चेन पम्प आदि। इसकी विस्तृत जानकारी निम्नवत है –

1. बेड़ी (दौरी या दोगला) – यह एक मीटर की गहराई से पानी उठाने के लिए प्रचलित साधन है। इसमें बाँस की दोहरी तथा घनी बुनाई द्वारा तैयारी टोकरी प्रयोग में लाई जाती है।

2. ढेकली – इसे 3 से 4 मीटर गहराई से पानी उठाने के लिए प्रयोग में लाया जाता है। ढेकली को चलाने के लिए एक व्यक्ति की आवश्यता होती है। इसमें लकड़ी की थूनी पर धुरी के सहारे 5-6 मीटर लम्बी बल्ली इस तरह लगाते हैं कि पानी के स्रोत की तरफ बल्ली का दो तिहाई से कुछ ज्यादा भाग रहे। बल्ली के दूसरे किनारे पर लोहे या पत्थर का 20-25 किग्रा का वजन बांध दिया जाता है।

3. दोन – इससे लगभग 60 से 90 सेमी की गइराई से पानी निकाला जाती है। यह लगभग 3 मीटर लम्बा टिन द्वारा निर्मित्त नाव के आकार का होता है। इसका एक सिरा थोड़ा चौड़ा तथा मुँह बन्द होता है। दूसरा सिरा सकरा तथा मुँह खुला होता है।

4. चरसा – आपने अपने गाँव या आस-पास देखा होगा कि कुँए से सिंचाई करने के लिए चरसा का प्रयोग होता है। कुँए के ऊपरी भाग पर बल्लियों के सहारे लकड़ी की बड़ी गड़ारी रखी जाती है। इस गड़ारी पर मोटी रस्सी के सहारे चमड़े का बड़ा थैला (मोट) बाँधते हैं जो कुँए से पानी भर कर ऊपर लाता है। एक जोड़ी बैल ऊँचाई से नीचे की ओर ढालू जमीन पर पानी भरा थैला खींचते हैं। ज्यों ही पानी भरा थैला कुँए पर आता है, एक व्यक्ति जो वहाँ खड़ा रहता है, इसे अपनी ओर खींच कर पानी गिराने के बाद चरसे को वापस कुँए में डाल देता है।

5. चेन पम्प – इसके द्वारा 1.5 मीटर से 3 मीटर की गहराई से पानी उठाया जाता है। इस यन्त्र में लोहे की एक जंजीर में छोटे छोटे गट्टों की माला लोहे के बड़े पहिए पर चढ़ी रहती है। गट्टेदार माला को घुमाने पर लोहे के पाइप के सहारे पानी ऊपर आता है।

6. बल्देव बाल्टी – यह यन्त्र एक मीटर तक की गहराई से पानी निकालने के लिए सर्वोत्तम पाया गया है। इसमें दोन की भाँति दो बल्टॅिया होती है जो गड़ारी पर पड़ी हुई रस्सियों के सहारे बारी-बारी से पानी में जाती है। और पानी भर कर ऊपर आती हैं। इसे चलाने के लिए एक जोडी बैल की आवश्यकता पड़ती है।

7. पेंच (इजिप्शियन स्कू) – इस यन्त्र को पेंच भी कहा जाता है। यह लकड़ी के ढोल के समान होता है। और भीतर से स्क्रू (पेंच) के समान बनावट होती है। इसका एक सिरा पानी के अनदर लकड़ी के कुन्दे पर रखा होता है। यन्त्र को घुमाने पर पानी पेंच के सहारे ऊपरी सिरे से बाहर आता है।

8. यन्त्र चालिक पम्प – अधिक गहराई से भूमिगत जल को उठाने के लिए इस प्रकार के पम्पों का प्रयोग किया जाता है जिन्हें बिजली की मोटर या डीजल इंजन द्वारा चलाते हैं।



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