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Answer» इसमें सन्देह नहीं है कि पुरस्कारों का शिक्षा में विशेष महत्त्व है, तथापि थॉमसन (Thomson) व अन्य मनोवैज्ञानिकों ने पुरस्कारों द्वारा होने वाली अनेक हानियों का भी उल्लेख किया है, जिनमें प्रमुख अलिखित हैं ⦁ पुरस्कार पाने के लालच में कभी-कभी बालक खेलकूद तथा पाठ्य सहगामी क्रियाओं में अधिक भाग लेने लगते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई-लिखाई चौपट हो जाती है तथा उनकाशैक्षिक स्तर काफी गिर जाता है। ⦁ पुरस्कार छात्रों में पारस्परिक ईर्ष्या-द्वेष की भावना उत्पन्न कर देते हैं। इस भावना के कारण छात्र कभी-कभी एक-दूसरे को भारी अहित कर बैठते हैं। ⦁ जब बालकों को ध्यान पुरस्कार पर केन्द्रित हो जाता है तो वे प्रत्येक कार्य पुरस्कार प्राप्त करने के लिए ही करते हैं। यदि किसी कार्य में पुरस्कार मिलने वाला नहीं होता तो वे उसकी ओर समुचित ध्यान नहीं देते हैं। ⦁ पुरस्कार बालकों का ध्यान कार्य या कर्तव्यं से हटाकर परिणाम पर केन्द्रित करते हैं। इससे कभी-कभी कर्तव्य की अवहेलना हो जाती है। ⦁ पुरस्कार छात्रों को प्रायः बाह्य रूप से प्रेरित करते हैं तथा कार्य में उनकी वास्तविक रुचि उत्पन्न नहीं करते। ⦁ पुरस्कार न पाने वाले छात्रों में हीनता की भावना उत्पन्न होती है और वे कुण्ठाग्रस्त हो जाते हैं। ⦁ प्रायः बालक धोखा देकर भी पुरस्कार पाने का प्रयास करते हैं।
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