1.

विद्यालयों में दण्ड की व्यवस्था होने की क्या हानियाँ हो सकती हैं?यादण्ड की दो हानियाँ लिखिए। 

Answer»

प्राय: यह देखा गया है कि दण्ड देने वालों की असावधानी से दण्डों का दुरुपयोग हो जाता है। ऐसी दशा में दण्ड से अनेक हानियाँ होती हैं। इन हानियों का विवेचन निम्नलिखित है

1.प्रतिशोध की भावना :
दण्डिस होने पर दण्ड देने वाले के प्रति छात्रों में बदला या प्रतिशोध लेने की भावना प्रबल हो जाती है और अवसर पाने पर वे अपने दण्ड का प्रतिशोध लेने की कोशिश करते हैं।
2. अपराधों पर अधिक बल :
प्रायः देखा गया है कि अध्यापक दण्ड देते समय छात्र के अपराध या गलती का बार-बार लेख करता है और बताता है कि उसी गलती के लिए उसे दण्ड दिया जा रहा है। इस प्रकार छात्र के मन पर अपराध या गलती की गहरी छाप पड़ जाती है, जो हानिकारक होती है।
3. मानसिक विकास में अवरोध :
अधिक कठोर दण्ड देने से छात्रों में असन्तोष की भावना उत्पन्न होती है और उनका मानसिक विकास भी अवरुद्ध हो जाता है।
4. भावना-ग्रन्थियों का निर्माण :
कठोर दण्ड छात्रों की इच्छा या भावनाओं को दबा देते हैं, जिससे वे अचेतन मन में जाकर ग्रन्थियों का निर्माण करती हैं तथा उन्हें कुण्ठाग्रस्त बना देती हैं।
5. अस्थायी प्रभाव :
छात्र पर दण्ड का प्रभाव स्थायी नहीं हो पाता। दण्ड के भय से छात्र भले ही कोई कार्य करना छोड़ दे, किन्तु दण्ड से उसके हृदय का परिवर्तन नहीं होता है।
6. दण्ड का आदी होना :
बार-बार दण्डित होने पर छात्र दण्ड का आदी हो जाता है और दण्ड का उस पर क्षणिक प्रभाव ही पड़ता है।



Discussion

No Comment Found